अक्टूबर 2026
नवंबर 2026
- 01नवंअहोई अष्टमीरविवार3 दिन
- 02नवंकालाष्टमीसोमवार4 दिन
- 05नवंरमा एकादशीगुरुवार7 दिन
- 06नवंधनतेरसशुक्रवार8 दिन
- 06नवंप्रदोष व्रतशुक्रवार8 दिन
- 07नवंमासिक शिवरात्रिशनिवार9 दिन
- 08नवंनरक चतुर्दशी · छोटी दीपावलीरविवार10 दिन
- 08नवंदीपावली · लक्ष्मी पूजनरविवार10 दिन
- 09नवंकार्तिक अमावस्यासोमवार11 दिन
- 10नवंगोवर्धन पूजा · अन्नकूटमंगलवार12 दिन
- 11नवंभाई दूजबुधवार13 दिन
- 13नवंविनायक चतुर्थीशुक्रवार15 दिन
- 15नवंछठ पूजारविवार17 दिन
- 18नवंअक्षय नवमी · आंवला नवमीबुधवार20 दिन
- 21नवंतुलसी विवाहशनिवार23 दिन
- 21नवंदेवउठनी एकादशीशनिवार23 दिन
- 22नवंप्रदोष व्रतरविवार24 दिन
- 24नवंकार्तिक पूर्णिमा · देव दीपावली · गुरु नानक जयंतीमंगलवार26 दिन
- 27नवंसंकष्टी चतुर्थीशुक्रवार29 दिन
दिसंबर 2026
- 01दिसंकाल भैरव जयंतीमंगलवार33 दिन
- 01दिसंकालाष्टमीमंगलवार33 दिन
- 04दिसंउत्पन्ना एकादशीशुक्रवार36 दिन
- 06दिसंप्रदोष व्रतरविवार38 दिन
- 07दिसंमासिक शिवरात्रिसोमवार39 दिन
- 08दिसंमार्गशीर्ष अमावस्यामंगलवार40 दिन
- 13दिसंविनायक चतुर्थीरविवार45 दिन
- 14दिसंविवाह पंचमीसोमवार46 दिन
- 20दिसंगीता जयंतीरविवार52 दिन
- 20दिसंमोक्षदा एकादशीरविवार52 दिन
- 21दिसंप्रदोष व्रतसोमवार53 दिन
- 24दिसंदत्तात्रेय जयंतीगुरुवार56 दिन
- 24दिसंमार्गशीर्ष पूर्णिमागुरुवार56 दिन
- 27दिसंसंकष्टी चतुर्थीरविवार59 दिन
- 31दिसंकालाष्टमीगुरुवार63 दिन
जनवरी 2027
- 03जनसफला एकादशीरविवार66 दिन
- 05जनप्रदोष व्रतमंगलवार68 दिन
- 05जनमासिक शिवरात्रिमंगलवार68 दिन
- 07जनपौष अमावस्यागुरुवार70 दिन
- 11जनविनायक चतुर्थीसोमवार74 दिन
- 14जनमकर संक्रांतिगुरुवार77 दिन
- 19जनपौष पुत्रदा एकादशीमंगलवार82 दिन
- 20जनप्रदोष व्रतबुधवार83 दिन
- 22जनपौष पूर्णिमाशुक्रवार85 दिन
- 25जनसंकष्टी चतुर्थीसोमवार88 दिन
एकादशी, पूर्णिमा और अमावस्या की तिथियाँ सूर्योदय के समय की तिथि से अपने-आप निकाली जाती हैं। व्रत के नियम (जैसे स्मार्त/वैष्णव एकादशी) अलग हो सकते हैं — अपने पुरोहित या स्थानीय पंचांग से मिलान करें।
इस कैलेंडर में अगले 90 दिनों के सभी प्रमुख व्रत और त्योहार तारीख और वार के साथ दिए गए हैं — एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, प्रदोष व्रत, संकष्टी और विनायक चतुर्थी, मासिक शिवरात्रि, और दीपावली, होली, नवरात्रि, जन्माष्टमी जैसे बड़े पर्व। ऊपर अपना शहर चुनें — तिथियाँ आपके शहर के सूर्योदय और समय के अनुसार निकाली जाती हैं।
तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
हिंदू त्योहार तिथि पर आधारित होते हैं, और एक तिथि अक्सर दो दिनों में बँट जाती है। इसलिए हर पर्व के लिए परंपरा से तय समय देखा जाता है:
- सूर्योदय (उदया तिथि): एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या और अधिकांश व्रत।
- प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद): दीपावली लक्ष्मी पूजन, धनतेरस, प्रदोष व्रत, होलिका दहन।
- चंद्रोदय: करवा चौथ और संकष्टी चतुर्थी।
- मध्याह्न: राम नवमी, गणेश चतुर्थी।
- निशीथ काल (मध्यरात्रि): जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि।
इसी कारण कभी-कभी कोई पर्व कैलेंडर की तारीख से एक दिन पहले या बाद में मनाया जाता है। हमारा कैलेंडर इन नियमों को ध्यान में रखकर तिथि बताता है।
वर्ष की 24 एकादशियाँ
| मास | शुक्ल पक्ष | कृष्ण पक्ष |
|---|---|---|
| चैत्र | कामदा | पापमोचनी |
| वैशाख | मोहिनी | वरूथिनी |
| ज्येष्ठ | निर्जला | अपरा |
| आषाढ़ | देवशयनी | योगिनी |
| श्रावण | पुत्रदा | कामिका |
| भाद्रपद | परिवर्तिनी | अजा |
| आश्विन | पापांकुशा | इंदिरा |
| कार्तिक | देवउठनी (प्रबोधिनी) | रमा |
| मार्गशीर्ष | मोक्षदा | उत्पन्ना |
| पौष | पुत्रदा | सफला |
| माघ | जया | षटतिला |
| फाल्गुन | आमलकी | विजया |
तालिका में कृष्ण पक्ष के नाम उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत मास के अनुसार हैं। अधिक मास वाले वर्ष में पद्मिनी और परमा एकादशी भी आती हैं।
हर महीने आने वाले व्रत
- प्रदोष व्रत: दोनों पक्षों की त्रयोदशी को, भगवान शिव के लिए।
- संकष्टी चतुर्थी: कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, चंद्रोदय पर गणेश पूजा।
- विनायक चतुर्थी: शुक्ल पक्ष की चतुर्थी।
- मासिक शिवरात्रि: कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी।
- पूर्णिमा और अमावस्या: स्नान, दान और पूजा के लिए विशेष।
- कालाष्टमी: कृष्ण पक्ष की अष्टमी, भगवान भैरव के लिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एकादशी दो दिन क्यों दिखती है?
कभी-कभी गृहस्थों (स्मार्त) और वैष्णव संप्रदाय के नियम अलग होने से एकादशी दो दिन बताई जाती है। यह कैलेंडर सूर्योदय की तिथि के अनुसार दिन बताता है — अपनी परंपरा के अनुसार पुरोहित से पुष्टि कर लें।
विदेश में त्योहार की तारीख अलग क्यों होती है?
तिथि खगोलीय समय पर बदलती है, इसलिए भारत और अमेरिका या कनाडा में कभी-कभी व्रत की तारीख एक दिन अलग आती है। ऊपर अपना शहर चुनें — तारीख आपके शहर के अनुसार दिखेगी।
किसी त्योहार पर क्लिक करने से क्या होगा?
उस दिन का पूरा पंचांग खुलेगा, या अगर उस पर्व पर हमारा लेख है तो वह लेख।
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