श्री राम स्तुति (Shri Ram Stuti): संपूर्ण पाठ हिंदी में, अर्थ, महत्व, लाभ और पाठ विधि
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श्री राम स्तुति भगवान श्रीराम की महिमा का गुणगान करने वाली एक अत्यंत लोकप्रिय भक्तिपूर्ण स्तुति है। इसका प्रसिद्ध आरंभिक पद है—“श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।” यह स्तुति भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप, करुणा, मर्यादा, शौर्य और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का सुंदर वर्णन करती है।
भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनका जीवन सत्य, धर्म, त्याग, प्रेम, कर्तव्य और आदर्श आचरण का प्रतीक है। श्री राम स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ भक्तों को प्रभु श्रीराम के स्मरण और भक्ति से जोड़ता है।
यदि आप Shri Ram Stuti in Hindi पढ़ना चाहते हैं, तो इस लेख में आपको संपूर्ण श्री राम स्तुति, इसके रचयिता, सरल हिंदी अर्थ, धार्मिक महत्व, पाठ करने के लाभ, पूजा विधि और इससे जुड़े सामान्य प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे।
श्री राम स्तुति क्या है? (What is Shri Ram Stuti?)
श्री राम स्तुति भगवान श्रीराम को समर्पित एक भक्तिपूर्ण रचना है, जिसमें उनके सुंदर स्वरूप, दिव्य गुणों, करुणा और महानता का वर्णन किया गया है।
श्री राम स्तुति का सबसे प्रसिद्ध पाठ गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित माना जाता है। इसकी शुरुआत इन पंक्तियों से होती है:
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
इसका भाव है कि हे मन! कृपालु भगवान श्रीराम का भजन करो, जो संसार के भय और दुखों को दूर करने वाले हैं।
यह स्तुति भक्त के मन में श्रद्धा, प्रेम, विश्वास और समर्पण का भाव उत्पन्न करती है।
श्री राम स्तुति के रचयिता कौन हैं? (Who Wrote Shri Ram Stuti?)
प्रसिद्ध श्री राम स्तुति के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी माने जाते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य और रामभक्ति परंपरा के महान संत-कवि थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के राजापुर में माना जाता है। उन्होंने भगवान श्रीराम की भक्ति को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में रामचरितमानस, हनुमान चालीसा, विनय पत्रिका और कवितावली शामिल हैं।
श्री राम स्तुति में तुलसीदास जी ने भगवान श्रीराम के दिव्य स्वरूप और उनकी करुणा का अत्यंत सुंदर वर्णन किया है।
यह स्तुति केवल भगवान की प्रशंसा नहीं, बल्कि भक्त के मन को प्रभु के चरणों में समर्पित करने की एक भावपूर्ण प्रार्थना भी है।
भगवान श्रीराम कौन हैं?
भगवान श्रीराम हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। वे अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र थे।
भगवान श्रीराम का जीवन धर्म, सत्य, मर्यादा और कर्तव्य पालन का आदर्श प्रस्तुत करता है। इसी कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।
उनके जीवन से हमें कई महत्वपूर्ण शिक्षाएं मिलती हैं:
- सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना।
- माता-पिता का सम्मान करना।
- अपने कर्तव्यों का पालन करना।
- कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना।
- सभी के प्रति प्रेम और करुणा रखना।
- अहंकार और अधर्म का त्याग करना।
भगवान श्रीराम का स्मरण भक्तों को जीवन में सदाचार और सकारात्मकता अपनाने की प्रेरणा देता है।
श्री राम स्तुति का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
श्री राम स्तुति का हिंदू भक्ति परंपरा में विशेष स्थान है। इसके पाठ में भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त होता है।
1. भगवान श्रीराम की कृपा का स्मरण
स्तुति में भगवान श्रीराम को करुणा और दया का सागर बताया गया है। भक्त उनसे अपने जीवन में सद्बुद्धि, शांति और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा मांगता है।
2. मर्यादा और धर्म का संदेश
भगवान श्रीराम का जीवन धर्म और मर्यादा का आदर्श है। उनकी स्तुति हमें अपने जीवन में सत्य, ईमानदारी और कर्तव्य को महत्व देने की प्रेरणा देती है।
3. राम नाम की महिमा
राम नाम का स्मरण भारतीय भक्ति परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। श्री राम स्तुति का पाठ भक्त को प्रभु के नाम और स्वरूप से जोड़ता है।
4. भक्ति और समर्पण
इस स्तुति में भक्त अपने मन को भगवान श्रीराम की भक्ति में लगाने की प्रार्थना करता है। यह अहंकार त्यागकर प्रभु की शरण में जाने का संदेश देती है।
5. आदर्श जीवन की प्रेरणा
श्रीराम के गुणों का स्मरण व्यक्ति को प्रेम, दया, धैर्य, त्याग और न्याय जैसे मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
श्री राम स्तुति पढ़ने के लाभ (Benefits of Shri Ram Stuti)
भक्तों की धार्मिक मान्यता है कि श्री राम स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मन में शांति, विश्वास और सकारात्मकता का भाव विकसित होता है।
इसके प्रमुख आध्यात्मिक लाभ निम्नलिखित हैं:
1. मानसिक शांति
भगवान श्रीराम की स्तुति और नाम स्मरण मन को शांत करने तथा दैनिक चिंताओं से कुछ समय के लिए ध्यान हटाने में सहायक हो सकता है।
2. भय और चिंता में धैर्य
स्तुति में भगवान श्रीराम को भवभय हरने वाला बताया गया है। भक्त उनके स्मरण से कठिन परिस्थितियों में साहस और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।
3. सकारात्मक विचारों का विकास
नियमित प्रार्थना और आत्मचिंतन व्यक्ति को अच्छे विचारों तथा सकारात्मक व्यवहार की ओर प्रेरित कर सकते हैं।
4. भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि
श्री राम स्तुति का पाठ भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम और समर्पण का भाव मजबूत करने का एक माध्यम है।
5. परिवार में सुख और सद्भाव
भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाकर परिवार में प्रेम, सम्मान, धैर्य और सहयोग की भावना विकसित की जा सकती है।
6. आध्यात्मिक उन्नति
स्तुति का नियमित पाठ व्यक्ति को धर्म, सेवा, सत्य और सदाचार के महत्व को समझने में सहायता करता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम की कृपा से भक्त के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो सकती हैं। यह आस्था का विषय है, किसी निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं।
श्री राम स्तुति कब पढ़नी चाहिए?
श्री राम स्तुति का पाठ किसी भी दिन श्रद्धा के साथ किया जा सकता है। भक्त विशेष रूप से निम्न अवसरों पर इसका पाठ करना शुभ मानते हैं।
| दिन या समय | धार्मिक महत्व |
|---|---|
| प्रतिदिन सुबह | दिन की शुरुआत प्रभु के स्मरण से |
| मंगलवार | हनुमान जी और श्रीराम की भक्ति |
| गुरुवार | पूजा और आध्यात्मिक साधना |
| रविवार | प्रातःकालीन पूजा |
| राम नवमी | भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर |
| राम विवाह पंचमी | श्रीराम और माता सीता के विवाह उत्सव पर |
| संध्याकाल | दिन के अंत में प्रभु का स्मरण |
सुबह स्नान के बाद या शाम को दीपक जलाकर शांत मन से श्री राम स्तुति का पाठ किया जा सकता है।
श्री राम स्तुति पाठ की सरल पूजा विधि
श्री राम स्तुति पढ़ने के लिए किसी कठिन पूजा विधि की आवश्यकता नहीं है। आप निम्नलिखित सरल विधि अपना सकते हैं:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की तस्वीर स्थापित करें।
- दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
- भगवान को पुष्प अर्पित करें।
- कुछ क्षण शांत बैठकर प्रभु श्रीराम का ध्यान करें।
- श्रद्धापूर्वक श्री राम स्तुति का पाठ करें।
- अंत में परिवार की सुख-शांति और सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना करें।
- संभव हो तो “श्री राम जय राम जय जय राम” मंत्र का स्मरण करें।
यदि किसी दिन पूजा की पूरी व्यवस्था न हो पाए, तब भी आप श्रद्धा और शांत मन से स्तुति पढ़ सकते हैं।
श्री राम स्तुति संपूर्ण पाठ (Shri Ram Stuti Lyrics in Hindi)
॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन ॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥ १॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नवनील नीरद सुन्दरम्।
पटपीत मानहु तड़ित रुचि शुचि, नौमि जनकसुतावरम्॥ २॥
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव, दैत्यवंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनन्दकन्द, कौशलचन्द दशरथनन्दनम्॥ ३॥
सिर मुकुट कुंडल तिलक, चारु उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चापधर, संग्रामजित खरदूषणम्॥ ४॥
इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खलदल गंजनम्॥ ५॥
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो वरु, सहज सुंदर साँवरो।
करुणा निधान सुजान सीलु, सनेहु जानत रावरो॥
एहि भाँति गौरी असीस सुनि, सिय सहित हियँ हरषीं अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि-पुनि, मुदित मन मंदिर चली॥
॥ सियावर रामचन्द्र की जय ॥
॥ पवनसुत हनुमान की जय ॥
॥ जय श्री राम ॥
श्री राम स्तुति का सरल हिंदी अर्थ (Meaning of Shri Ram Stuti)
श्री राम स्तुति में गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान श्रीराम के सौंदर्य, करुणा, पराक्रम और दिव्य गुणों का वर्णन किया है।
आइए इसकी प्रत्येक चौपाई का सरल अर्थ समझते हैं।
1. श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
हे मन! कृपालु भगवान श्रीराम का भजन करो। वे संसार के दुखों और भय को दूर करने वाले हैं।
नवकंज लोचन कंज मुख, कर कंज पद कंजारुणम्॥
भगवान श्रीराम के नेत्र कमल के समान सुंदर हैं। उनका मुख कमल जैसा मनोहर है। उनके हाथ और चरण भी कमल के समान सुंदर तथा लालिमा लिए हुए हैं।
2. कन्दर्प अगणित अमित छवि
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नवनील नीरद सुन्दरम्।
भगवान श्रीराम की सुंदरता करोड़ों कामदेवों से भी अधिक मनोहर है। उनका श्याम वर्ण नए वर्षा के बादलों के समान सुंदर है।
पटपीत मानहु तड़ित रुचि शुचि, नौमि जनकसुतावरम्॥
वे पीले वस्त्र धारण किए हुए हैं, जो बादलों के बीच बिजली की चमक के समान प्रतीत होते हैं। मैं माता सीता के प्रिय भगवान श्रीराम को प्रणाम करता हूं।
3. भजु दीनबन्धु दिनेश
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव, दैत्यवंश निकन्दनम्।
हे मन! दीन-दुखियों के सहायक, सूर्य के समान तेजस्वी और दानवों का नाश करने वाले भगवान श्रीराम का भजन करो।
रघुनन्द आनन्दकन्द, कौशलचन्द दशरथनन्दनम्॥
वे रघुकुल के आनंद, सुख के मूल स्रोत, माता कौशल्या के प्रिय और राजा दशरथ के पुत्र हैं।
4. सिर मुकुट कुंडल तिलक
सिर मुकुट कुंडल तिलक, चारु उदारु अंग विभूषणम्।
भगवान श्रीराम के सिर पर सुंदर मुकुट, कानों में कुंडल और मस्तक पर मनोहर तिलक सुशोभित है। उनके सभी अंग दिव्य आभूषणों से सुसज्जित हैं।
आजानुभुज शर चापधर, संग्रामजित खरदूषणम्॥
उनकी भुजाएं घुटनों तक लंबी हैं। वे धनुष-बाण धारण करते हैं और खर-दूषण जैसे राक्षसों पर विजय प्राप्त करने वाले हैं।
5. इति वदति तुलसीदास
इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान श्रीराम भगवान शिव, शेषनाग और मुनियों के मन को आनंद प्रदान करने वाले हैं।
मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खलदल गंजनम्॥
हे प्रभु! मेरे हृदय रूपी कमल में निवास करें और काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा अहंकार जैसे विकारों का नाश करें।
6. मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो वरु
यह पद रामचरितमानस के बालकाण्ड में माता सीता के स्वयंवर प्रसंग से संबंधित है।
इसमें माता गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद माता सीता के मन में भगवान श्रीराम के प्रति विश्वास और आनंद का भाव प्रकट होता है।
इस पद का मुख्य संदेश है कि सच्ची श्रद्धा और पवित्र प्रेम से भक्त अपने आराध्य के प्रति समर्पित होता है।
श्री राम स्तुति का मुख्य संदेश
श्री राम स्तुति हमें केवल भगवान श्रीराम की सुंदरता और महिमा का वर्णन नहीं सिखाती, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा भी देती है।
इस स्तुति से हमें निम्नलिखित संदेश मिलते हैं:
- प्रभु का स्मरण जीवन में आशा और विश्वास बनाए रखने में सहायक है।
- दीन-दुखियों के प्रति करुणा रखनी चाहिए।
- सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए।
- अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।
- अपने मन को भक्ति और सदाचार में लगाना चाहिए।
श्री राम स्तुति से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. श्री राम स्तुति किसने लिखी थी?
प्रसिद्ध श्री राम स्तुति, जिसकी शुरुआत “श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन” से होती है, गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित मानी जाती है।
2. श्री राम स्तुति का पाठ कब करना चाहिए?
इसका पाठ सुबह, शाम, मंगलवार, गुरुवार, रविवार या किसी भी दिन श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।
3. क्या श्री राम स्तुति रोज पढ़ सकते हैं?
हां। भक्त प्रतिदिन श्री राम स्तुति का पाठ कर सकते हैं। नियमित पाठ भक्ति और आत्मचिंतन की साधना बन सकता है।
4. श्री राम स्तुति में कितने पद हैं?
प्रसिद्ध “श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन” स्तुति के मुख्य पांच पद हैं। इसके साथ प्रचलित पाठ में माता सीता और गौरी पूजन से संबंधित दो पद भी पढ़े जाते हैं।
5. क्या महिलाएं श्री राम स्तुति पढ़ सकती हैं?
हां। भगवान श्रीराम की स्तुति का पाठ महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धा के साथ कर सकते हैं।
6. श्री राम स्तुति पढ़ने के क्या लाभ हैं?
भक्तों की मान्यता है कि इसके पाठ से मन में शांति, श्रद्धा, सकारात्मकता और प्रभु के प्रति समर्पण का भाव बढ़ता है।
7. क्या श्री राम स्तुति और राम रक्षा स्तोत्र एक ही हैं?
नहीं। श्री राम स्तुति और राम रक्षा स्तोत्र दो अलग-अलग भक्तिपूर्ण रचनाएं हैं। श्री राम स्तुति भगवान श्रीराम की महिमा का गुणगान करती है, जबकि राम रक्षा स्तोत्र एक प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र है।
8. श्री राम स्तुति का सबसे प्रसिद्ध मंत्र कौन सा है?
“श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्” श्री राम स्तुति की सबसे प्रसिद्ध पंक्ति है।
9. क्या श्री राम स्तुति का पाठ बिना पूजा सामग्री के कर सकते हैं?
हां। श्रद्धा और भक्ति के साथ बिना किसी विशेष पूजा सामग्री के भी श्री राम स्तुति का पाठ किया जा सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
श्री राम स्तुति भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का एक सुंदर माध्यम है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित यह प्रसिद्ध स्तुति प्रभु के दिव्य स्वरूप, करुणा, पराक्रम और भक्तों के प्रति उनकी कृपा का गुणगान करती है।
जब मन अशांत हो, जीवन में कठिनाइयां हों या आध्यात्मिक शांति की इच्छा हो, तब भगवान श्रीराम का स्मरण भक्त को धैर्य, विश्वास और सकारात्मकता की प्रेरणा दे सकता है।
भगवान श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य, धर्म, मर्यादा, प्रेम और कर्तव्य का पालन ही एक आदर्श जीवन का आधार है।
आइए, हम सभी प्रभु श्रीराम से प्रार्थना करें कि वे हमारे जीवन में सद्बुद्धि, शांति, प्रेम और धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।
सियावर रामचन्द्र की जय! 🙏
पवनसुत हनुमान की जय! 🚩
जय श्री राम! ❤️
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Transliteration
॥ Shriramachandra Kripalu॥
Śrīrāmacandra kr̥pālu bhajamana haraṇabhavabhayadāruṇaṁ.
Navakañjalocana kañjamukha karakañja padakañjāruṇaṁ. ।।1।।
Kandarpa agaṇita amita chavi navanīlanīradasundaraṁ.
Paṭapītamānahu taḍita ruciśuci naumijanakasutāvaraṁ. ।।2।।
Bhajadīnabandhu dinēśa dānavadaityavaṁśanikandanaṁ.
Raghunanda ānandakanda kośalachandra daśarathanandanaṁ. ।।3।।
Śiramukuṭakuṇḍala tilakacāru udāru’aṅgavibhūṣaṇaṁ.
Ājānubhuja śaracāpadhara saṅgrāmajitakharadūṣaṇaṁ. ।।4।।
Iti vadati tulasīdāsa śaṅkaraśeṣamunimanarañjanaṁ.
Mamahru
dayakañjanivāsakuru kāmādikhaladalagañajanaṁ. ।।5।।
Hindi Translation
हे मन कृपालु श्रीरामचन्द्रजी का भजन कर । वे संसार के जन्म-मरण रूपी दारुण भय को दूर करने वाले हैं ।
उनके नेत्र नव-विकसित कमल के समान हैं । मुख-हाथ और चरण भी लालकमल के सदृश हैं ॥१॥
उनके सौन्दर्य की छ्टा अगणित कामदेवों से बढ़कर है । उनके शरीर का नवीन नील-सजल मेघ के जैसा सुन्दर वर्ण है ।
पीताम्बर मेघरूप शरीर मानो बिजली के समान चमक रहा है । ऐसे पावनरूप जानकीपति श्रीरामजी को मैं नमस्कार करता हूँ ॥२॥
हे मन दीनों के बन्धु, सूर्य के समान तेजस्वी, दानव और दैत्यों के वंश का समूल नाश करने वाले,
आनन्दकन्द कोशल-देशरूपी आकाश में निर्मल चन्द्रमा के समान दशरथनन्दन श्रीराम का भजन कर ॥३॥
जिनके मस्तक पर रत्नजड़ित मुकुट, कानों में कुण्डल भाल पर तिलक, और प्रत्येक अंग मे सुन्दर आभूषण सुशोभित हो रहे हैं ।
जिनकी भुजाएँ घुटनों तक लम्बी हैं । जो धनुष-बाण लिये हुए हैं, जिन्होनें संग्राम में खर-दूषण को जीत लिया है ॥४॥
जो शिव, शेष और मुनियों के मन को प्रसन्न करने वाले और काम, क्रोध, लोभादि शत्रुओं का नाश करने वाले हैं,
तुलसीदास प्रार्थना करते हैं कि वे श्रीरघुनाथजी मेरे हृदय कमल में सदा निवास करें ॥५॥
जिसमें तुम्हारा मन अनुरक्त हो गया है, वही स्वभाव से सुन्दर साँवला वर (श्रीरामचन्द्रजी) तुमको मिलेगा।
वह जो दया का खजाना और सुजान (सर्वज्ञ) है, तुम्हारे शील और स्नेह को जानता है ॥६॥
इस प्रकार श्रीगौरीजी का आशीर्वाद सुनकर जानकीजी समेत सभी सखियाँ हृदय मे हर्षित हुईं।
तुलसीदासजी कहते हैं, भवानीजी को बार-बार पूजकर सीताजी प्रसन्न मन से राजमहल को लौट चलीं ॥७॥
॥सोरठा॥
गौरीजी को अनुकूल जानकर सीताजी के हृदय में जो हर्ष हुआ वह कहा नही जा सकता। सुन्दर मंगलों के मूल उनके बाँये अंग फड़कने लगे ॥
English Translation
O mind! Revere the benign Shri Ramachandra, who removes ‘Bhava’ the worldly sorrow or pain, ‘Bhaya’ the fear, and ‘Daruna’ the scarcity or poverty.
Who has fresh lotus eyes, lotus face and lotus hands, feet like lotus and like the rising sun. ॥1॥
His beauty exceeds innumerable Kaamdevs (Cupids). He is like a newly formed beautiful blue cloud. The yellow robe on his body appears like delightful lighting.
He is the consort of the daughter of Sri Janak (Sri Sita), the embodiment of sacredness.॥2॥
O mind, sing praises of Sri Ram, a friend of the poor. He is the lord of the solar dynasty. He is the destroyer of demons and devils.
The descendant of Sri Raghu is the source of joy, a moon of his mother Kaushalya and he is the son of Sri Dashrath.॥3॥
He wears a crown on his head, pendants on his ear, and tilak (crimson mark) on his forehead. All his organs are beautiful and well decorated with ornaments.
His arms reach his knees. He holds a bow and an arrow. He emerged victorious in the battle with demons Khar and Dushan.॥4॥
Thus says Sri Tulsidas – O Sri Ram, the charmer of Lord Shiv, Sri Shesh and saints,
reside in the lotus of my heart and destroy all the evils and their associates like desires.॥5॥
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