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गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 · कार्तिक कृष्ण चतुर्थी · आज करवा चौथ, संकष्टी चतुर्थी · वि.सं. 2083 आज का पंचांग →
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आज का राहुकाल — आपके शहर के अनुसार

आज का राहुकाल — देहरादून 13:24 – 14:47 गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026

अगले 7 दिन

तारीखराहुकालयमगण्डगुलिक काल
29 अक्टूबर 2026गुरुवार13:24 – 14:4706:29 – 07:5209:15 – 10:38
30 अक्टूबर 2026शुक्रवार10:38 – 12:0114:46 – 16:0907:53 – 09:15
31 अक्टूबर 2026शनिवार09:16 – 10:3813:23 – 14:4606:31 – 07:53
1 नवंबर 2026रविवार16:08 – 17:3012:01 – 13:2314:45 – 16:08
2 नवंबर 2026सोमवार07:54 – 09:1610:39 – 12:0113:23 – 14:45
3 नवंबर 2026मंगलवार14:45 – 16:0709:17 – 10:3912:01 – 13:23
4 नवंबर 2026बुधवार12:01 – 13:2207:55 – 09:1710:39 – 12:01

राहुकाल सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 भागों में बाँटकर निकाला जाता है, इसलिए यह हर शहर में अलग होता है।

ऊपर अपना शहर चुनें — आज का राहुकाल, साथ में यमगण्ड और गुलिक काल, और अगले 7 दिनों का पूरा समय तुरंत दिखेगा। समय आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला जाता है, इसलिए दिल्ली, देहरादून, मुंबई से लेकर लंदन, न्यूयॉर्क और सिडनी तक हर जगह का समय अलग और सही मिलता है।

राहुकाल क्या है?

वैदिक ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह माना गया है। हर दिन का लगभग डेढ़ घंटे का एक भाग राहु से जुड़ा होता है, जिसे राहुकाल कहते हैं। परंपरा के अनुसार इस समय में नए और शुभ कार्य शुरू करना टाला जाता है, जैसे गृह प्रवेश, नया व्यापार, वाहन या संपत्ति की खरीद, या किसी महत्वपूर्ण यात्रा की शुरुआत।

राहुकाल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है। हर वार को इनमें से एक निश्चित भाग राहुकाल होता है:

वारदिन का कौन-सा भागसूर्योदय 6:00 बजे मानें तो लगभग
सोमवारदूसरा भाग7:30 – 9:00
मंगलवारसातवाँ भाग15:00 – 16:30
बुधवारपाँचवाँ भाग12:00 – 13:30
गुरुवारछठा भाग13:30 – 15:00
शुक्रवारचौथा भाग10:30 – 12:00
शनिवारतीसरा भाग9:00 – 10:30
रविवारआठवाँ भाग16:30 – 18:00

तालिका का समय केवल उदाहरण है। असली समय मौसम और शहर के साथ बदलता है — इसलिए ऊपर दिए टूल में अपने शहर का समय देखें।

हर शहर में राहुकाल अलग क्यों होता है?

राहुकाल घड़ी के किसी तय समय पर नहीं, बल्कि सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित है। सर्दियों में दिन छोटे होते हैं तो राहुकाल भी छोटा होता है, गर्मियों में लंबा। पूर्व के शहरों में सूर्योदय पहले होता है, इसलिए कोलकाता और मुंबई के राहुकाल में भी कुछ मिनट का अंतर रहता है। विदेश में रहने वाले भक्तों के लिए यह टूल उनके शहर के स्थानीय समय में सही राहुकाल दिखाता है।

राहुकाल में क्या करें और क्या न करें

  • टालने की परंपरा: नया काम, सौदा, गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह से जुड़ी रस्में, नई यात्रा की शुरुआत।
  • जारी रख सकते हैं: रोज़ का काम, पहले से चल रहे कार्य, नियमित पूजा-पाठ और जप।
  • राहुकाल में हनुमान चालीसा, दुर्गा सप्तशती या राहु मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है।

यमगण्ड और गुलिक काल

यमगण्ड भी दिन का एक अशुभ माना गया भाग है, जिसमें नए कार्य टाले जाते हैं। गुलिक काल के बारे में मान्यता है कि इसमें किया गया कार्य दोहराना पड़ता है — इसलिए शुभ कार्य के लिए इससे बचते हैं। तीनों का समय इस पेज पर एक साथ दिया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुकाल कितनी देर का होता है?

दिन की लंबाई का आठवाँ भाग — आमतौर पर लगभग 1 घंटा 20 मिनट से 1 घंटा 40 मिनट तक।

क्या रात में भी राहुकाल होता है?

कुछ परंपराओं में रात का राहुकाल भी माना जाता है, लेकिन सामान्य रूप से दिन का राहुकाल ही देखा जाता है। यह पेज दिन का राहुकाल दिखाता है।

क्या राहुकाल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ। नियमित पूजा, आरती और जप रोकने की ज़रूरत नहीं है। केवल नए शुभ कार्यों की शुरुआत टालने की परंपरा है।

राहुकाल और कुंडली का राहु दोष क्या एक ही हैं?

नहीं। राहुकाल रोज़ का एक समय है, जबकि राहु दोष जन्म कुंडली में राहु की स्थिति से जुड़ा विषय है।

पूरे दिन की तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त के लिए आज का पंचांग और आज का चौघड़िया भी देखें।