सीधे सामग्री पर जाएँ
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 · कार्तिक कृष्ण चतुर्थी · आज करवा चौथ, संकष्टी चतुर्थी · वि.सं. 2083 आज का पंचांग → हिंदीEnglish
पसंदीदा
Festival

तुलसी विवाह 2026 (Tulsi Vivah): 21 नवंबर, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री और कथा

अंतिम अपडेट: 9 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Tulsi Vivah 2026 – तुलसी विवाह पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Tulsi Vivah (तुलसी विवाह) कार्तिक मास का वह पावन पर्व है जिसमें माता तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम (भगवान विष्णु) के साथ पूरे विधि-विधान से कराया जाता है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और उसके बाद तुलसी विवाह के साथ ही विवाह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। वर्ष 2026 में तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर को कार्तिक शुक्ल द्वादशी पर है। नीचे Tulsi Vivah का शुभ मुहूर्त, सामग्री, घर पर करने की आसान पूजा विधि, मंत्र, तुलसी जी की आरती और वृंदा की कथा दी गई है।

Tulsi Vivah 2026 – तुलसी विवाह पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Tulsi Vivah 2026: तारीख और शुभ मुहूर्त

विवरणसमय (2026)
तुलसी विवाहशनिवार, 21 नवंबर 2026
द्वादशी तिथि आरंभ21 नवंबर, सुबह लगभग 6:31
द्वादशी तिथि समाप्त22 नवंबर, सुबह लगभग 4:56
गोधूलि और प्रदोष काल – दिल्लीशाम 5:25 से 7:49
प्रदोष काल – मुंबईशाम 5:59 से 8:23
प्रदोष काल – लखनऊशाम 5:13 से 7:37
प्रदोष काल – कोलकाताशाम 4:51 से 7:15
प्रदोष काल – जयपुरशाम 5:34 से 7:58

तुलसी विवाह सूर्यास्त के बाद गोधूलि बेला और प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है। ये समय हमारे पंचांग से निकाले गए हैं; आपके स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। अपने शहर का सूर्यास्त आज का पंचांग में देखें।

तुलसी विवाह किस दिन करें — एकादशी, द्वादशी या पूर्णिमा?

परंपराएँ अलग-अलग हैं। अधिकांश घरों में तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल द्वादशी को होता है, जो इस बार 21 नवंबर है। कई परिवार देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) की शाम को ही भगवान को जगाने के बाद तुलसी विवाह कर लेते हैं। कुछ क्षेत्रों में एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा (24 नवंबर) तक किसी भी शुभ दिन यह विवाह होता है। इसलिए अपने कुल की परंपरा के अनुसार दिन चुनें — भाव सबसे महत्वपूर्ण है।

Tulsi Vivah का महत्व

शास्त्रों में तुलसी को विष्णुप्रिया कहा गया है। तुलसी के बिना भगवान विष्णु का भोग पूरा नहीं माना जाता। मान्यता है कि तुलसी विवाह कराने वाले को कन्यादान के बराबर पुण्य मिलता है — इसलिए जिन दंपतियों की बेटी नहीं है, वे भी तुलसी जी का कन्यादान करके यह पुण्य कमाते हैं। जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही हो, उनके लिए भी तुलसी विवाह कराना शुभ माना जाता है।

चातुर्मास में विवाह नहीं होते। देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह के बाद ही शादियों का शुभ मौसम शुरू होता है। इसी कारण कई जगह तुलसी विवाह को “देवों का विवाह” कहकर पूरे उत्सव की तरह मनाया जाता है — मंगल गीत गाए जाते हैं, बारात निकलती है और प्रसाद बाँटा जाता है।

Tulsi Vivah पूजा सामग्री लिस्ट

  • तुलसी का पौधा (गमले में) और भगवान शालिग्राम — शालिग्राम न हो तो विष्णु जी या श्रीकृष्ण की मूर्ति / चित्र
  • मंडप के लिए 4 गन्ने, केले के पत्ते और आम के पत्ते
  • चौकी, लाल और पीला कपड़ा, कलश, नारियल
  • तुलसी जी के लिए लाल चुनरी और सुहाग का सामान — चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, काजल, बिछिया, आलता
  • शालिग्राम जी के लिए पीला वस्त्र या धोती, जनेऊ
  • हल्दी, रोली, चंदन, अक्षत, कुमकुम, मौली (कलावा)
  • फूल, फूलों की माला (दोनों के लिए), दीपक, घी, धूप, कपूर
  • पंचामृत, फल, मिठाई, सिंघाड़ा, शकरकंद, बेर, आँवला
  • पान, सुपारी, लौंग, इलायची और दक्षिणा

घर पर तुलसी विवाह पूजा विधि — स्टेप बाय स्टेप

  1. सुबह स्नान करके व्रत या सात्विक दिन का संकल्प लें। जो लोग कन्यादान करते हैं, वे परंपरा अनुसार दिन भर उपवास रखते हैं।
  2. शाम को आँगन, छत या पूजा स्थान पर तुलसी के गमले को साफ़ करें, गेरू से रंगें और चारों ओर रंगोली बनाएँ।
  3. गमले के चारों ओर 4 गन्नों से मंडप बनाएँ और ऊपर लाल चुनरी या केले के पत्ते लगाएँ।
  4. तुलसी जी के दाहिनी ओर चौकी पर शालिग्राम जी को स्थापित करें। पास में जल से भरा कलश रखें और गणेश जी का स्मरण करें।
  5. शालिग्राम जी को पंचामृत से स्नान कराकर चंदन लगाएँ और पीला वस्त्र पहनाएँ। तुलसी जी पर हल्दी-चंदन लगाकर लाल चुनरी ओढ़ाएँ और सुहाग का सामान चढ़ाएँ — यह तुलसी जी का श्रृंगार है।
  6. दोनों को फूलों की माला पहनाएँ और दीपक जलाएँ। ध्यान रखें कि शालिग्राम जी पर अक्षत (चावल) न चढ़ाएँ — उन्हें तिल या सफ़ेद चंदन चढ़ाया जाता है।
  7. अब घर के सदस्य — परंपरा में दंपति — कन्यादान का संकल्प लें और तुलसी जी का हाथ शालिग्राम जी को सौंपें।
  8. शालिग्राम जी को हाथ में (या चौकी सहित) लेकर तुलसी जी की 7 परिक्रमा करें। इस समय मंगल गीत और मंगलाष्टक गाए जाते हैं।
  9. नीचे दिए गए तुलसी मंत्र बोलें, फिर तुलसी जी की आरती और ॐ जय जगदीश हरे आरती करें।
  10. भगवान को फल, सिंघाड़ा, शकरकंद और मिठाई का भोग लगाएँ और सबमें प्रसाद बाँटें। सुहाग का सामान किसी सुहागिन महिला या ब्राह्मण को दान करें।

तुलसी विवाह के मंत्र

महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी। आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोऽस्तुते॥

अर्थ: हे तुलसी, आप महाप्रसाद को जन्म देने वाली और सौभाग्य बढ़ाने वाली हैं; आप मन और शरीर के सभी रोग दूर करती हैं, आपको नमस्कार है।

तुलसी नामाष्टक:
वृन्दा वृन्दावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नन्दिनी च तुलसी कृष्णजीवनी॥
एतन्नामाष्टकं चैव स्तोत्रं नामार्थसंयुतम्। यः पठेत् तां च सम्पूज्य सोऽश्वमेधफलं लभेत्॥

इसके साथ “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। शालिग्राम जी के लिए “ॐ श्री शालिग्रामाय नमः” बोला जाता है।

तुलसी माता की आरती

जय जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता।
सब जग की सुख दाता, वर दाता॥ जय जय तुलसी माता॥

सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर।
रुज से रक्षा करके भव त्राता॥ जय जय तुलसी माता॥

बटु पुत्री हे श्यामा, सुर बल्ली हे ग्राम्या।
विष्णु प्रिये जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता॥ जय जय तुलसी माता॥

हरि के शीश विराजत, त्रिभुवन से हो वन्दित।
पतित जनों की तारिणी विख्याता॥ जय जय तुलसी माता॥

लेकर जन्म विजन में, आई दिव्य भवन में।
मानवलोक तुम्हीं से सुख सम्पति पाता॥ जय जय तुलसी माता॥

हरि को तुम अति प्यारी, श्यामवरण तुम्हारी।
प्रेम अजब है उनका तुमसे कैसा नाता॥ जय जय तुलसी माता॥

तुलसी विवाह की कथा — वृंदा और जालंधर

पौराणिक कथा के अनुसार, राक्षस कुल में जन्मी वृंदा भगवान विष्णु की परम भक्त थीं। उनका विवाह दैत्यराज जालंधर से हुआ। वृंदा के पतिव्रत धर्म की शक्ति से जालंधर अजेय हो गया। उसने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और तीनों लोकों में आतंक फैल गया।

देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने जालंधर का रूप धारण किया और वृंदा के पास पहुँचे। इससे वृंदा का पतिव्रत भंग हुआ और भगवान शिव ने युद्ध में जालंधर का वध कर दिया। जब वृंदा को सच का पता चला, तो उन्होंने भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दिया। भगवान ने श्राप स्वीकार किया और शालिग्राम शिला बन गए।

इसके बाद वृंदा अपने पति के साथ सती हो गईं। जहाँ उनकी राख गिरी, वहाँ एक पौधा उगा, जिसे भगवान विष्णु ने तुलसी नाम दिया। भगवान ने वरदान दिया कि शालिग्राम रूप में वे सदा तुलसी के साथ रहेंगे, तुलसी के बिना उनकी पूजा अधूरी रहेगी, और हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष में तुलसी के साथ उनका विवाह होगा। तभी से तुलसी विवाह की परंपरा चली आ रही है।

Tulsi Vivah के नियम और सावधानियाँ

  • तुलसी के पत्ते एकादशी, रविवार और सूर्यास्त के बाद न तोड़ें। पूजा के पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रख लें।
  • शालिग्राम जी पर अक्षत (चावल) न चढ़ाएँ; तिल या चंदन चढ़ाएँ।
  • तुलसी जी को सुहाग का सामान और चुनरी अवश्य चढ़ाएँ; विवाह के बाद ये किसी सुहागिन को दान करें।
  • इस दिन घर में सात्विक भोजन बनाएँ और लहसुन-प्याज़ से परहेज़ करें।
  • तुलसी विवाह के बाद तुलसी के पौधे को रोज़ जल चढ़ाएँ और शाम को घी का दीपक जलाएँ — पूरा कार्तिक मास इसका विशेष महत्व है।

Tulsi Vivah 2026 — in English

Tulsi Vivah, the wedding of the holy Tulsi plant with Lord Shaligram (Vishnu), is on Saturday, 21 November 2026 (Kartik Shukla Dwadashi). Dwadashi tithi runs from about 6:31 AM on 21 November to about 4:56 AM on 22 November. The ceremony is done in the evening Godhuli and Pradosh Kaal — about 5:25 to 7:49 PM in Delhi. Many families perform it on Dev Uthani Ekadashi evening (20 November) or on any day up to Kartik Purnima (24 November).

Read more about the festival on Wikipedia, see the देवउठनी एकादशी पूजा विधि and कार्तिक पूर्णिमा pages, and our व्रत-त्योहार कैलेंडर.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

तुलसी विवाह 2026 कब है?

तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर 2026 को कार्तिक शुक्ल द्वादशी पर है। द्वादशी तिथि 21 नवंबर सुबह लगभग 6:31 से 22 नवंबर सुबह लगभग 4:56 तक रहेगी।

तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त क्या है?

तुलसी विवाह शाम को गोधूलि और प्रदोष काल में किया जाता है। 21 नवंबर को दिल्ली में यह लगभग शाम 5:25 से 7:49 तक है; मुंबई में लगभग 5:59 से 8:23 तक।

क्या तुलसी विवाह देवउठनी एकादशी को भी कर सकते हैं?

हाँ। कई परिवार देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) की शाम को ही तुलसी विवाह करते हैं, और कई कार्तिक पूर्णिमा (24 नवंबर) तक किसी भी दिन। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार दिन चुनें।

तुलसी विवाह में तुलसी जी का विवाह किससे होता है?

तुलसी जी (वृंदा) का विवाह भगवान शालिग्राम से होता है, जो भगवान विष्णु का स्वरूप हैं। शालिग्राम न हो तो भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र रखा जा सकता है।

तुलसी विवाह कराने से क्या फल मिलता है?

मान्यता है कि तुलसी विवाह कराने से कन्यादान के बराबर पुण्य मिलता है, घर में सुख-समृद्धि आती है और विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।

What is Tulsi Vivah in short?

Tulsi Vivah is the ceremonial wedding of the holy Tulsi plant (Goddess Vrinda) with Lord Shaligram, a form of Vishnu. In 2026 it falls on Saturday, 21 November (Kartik Shukla Dwadashi) and marks the start of the Hindu wedding season.

अपनी टिप्पणी लिखें

आपका ईमेल प्रकाशित नहीं किया जाएगा। टिप्पणी समीक्षा के बाद दिखाई देगी।