Vivah Panchami (विवाह पंचमी) भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह की पावन वर्षगाँठ है। त्रेता युग में मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को जनकपुर में धनुष यज्ञ के बाद श्रीराम और जानकी का विवाह हुआ था। वर्ष 2026 में विवाह पंचमी सोमवार, 14 दिसंबर को है। मान्यता है कि इस दिन राम-सीता की पूजा से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सुख बढ़ता है और विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं। नीचे Vivah Panchami का मुहूर्त, पूजा सामग्री, पूजा विधि, मंत्र और कथा दी गई है।

इस लेख में
Vivah Panchami 2026: तारीख और मुहूर्त
| विवरण | समय (2026) |
|---|---|
| विवाह पंचमी | सोमवार, 14 दिसंबर 2026 |
| पंचमी तिथि आरंभ | 13 दिसंबर, शाम लगभग 4:48 |
| पंचमी तिथि समाप्त | 14 दिसंबर, शाम लगभग 7:16 |
| अभिजीत मुहूर्त – दिल्ली | सुबह 11:51 से दोपहर 12:39 |
| सूर्योदय / सूर्यास्त – दिल्ली | सुबह 7:05 / शाम 5:25 |
| नक्षत्र | श्रवण (सुबह लगभग 9:12 तक), फिर धनिष्ठा |
पंचमी तिथि 13 दिसंबर की शाम शुरू हो जाएगी, लेकिन उदया तिथि के नियम से पर्व 14 दिसंबर को मनाया जाएगा। ये समय हमारे पंचांग से निकाले गए हैं; अपने शहर का समय आज का पंचांग में देखें।
Vivah Panchami का महत्व
विवाह पंचमी को आदर्श दांपत्य का पर्व माना जाता है। श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और माता सीता त्याग और पवित्रता की प्रतीक — उनका विवाह धर्म, प्रेम और समर्पण का आदर्श है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी इसी दिन रामचरितमानस पूरी की थी, ऐसी मान्यता है। इसलिए कई जगह इस दिन मानस पाठ और राम कथा का विशेष आयोजन होता है।
नेपाल के जनकपुर (माता सीता का मायका) के जानकी मंदिर में और अयोध्या के मंदिरों में इस दिन भव्य विवाह महोत्सव होता है। अयोध्या से बारात निकलती है, मंगल गीत गाए जाते हैं और राम-सीता का पूरे विधि-विधान से विवाह कराया जाता है। अविवाहित युवक-युवतियाँ मनचाहे जीवनसाथी के लिए और विवाहित दंपति सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस दिन पूजा करते हैं।
Vivah Panchami पूजा सामग्री
- श्रीराम और माता सीता का चित्र या मूर्ति
- चौकी, लाल और पीला कपड़ा, कलश, आम के पत्ते, नारियल
- माता सीता के लिए लाल चुनरी और सुहाग का सामान
- श्रीराम के लिए पीला वस्त्र
- दो फूलों की माला (जयमाला के लिए), फूल, तुलसी दल, रोली, चंदन, अक्षत, हल्दी
- घी का दीपक, धूप, कपूर
- फल, मिठाई, पंचामृत, खीर या केसरिया भात का भोग
- रामचरितमानस या सुंदरकांड की पुस्तक
विवाह पंचमी पूजा विधि — स्टेप बाय स्टेप
- सुबह स्नान करके पीले या लाल वस्त्र पहनें और भगवान राम-सीता के सामने पूजा का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर चौकी रखें, उस पर लाल-पीला कपड़ा बिछाएँ और श्रीराम को दाईं ओर, माता सीता को बाईं ओर स्थापित करें। गणेश जी का स्मरण करें और कलश स्थापित करें।
- श्रीराम को पीला वस्त्र और माता सीता को लाल चुनरी व सुहाग का सामान अर्पित करें। दोनों को रोली, चंदन, अक्षत और फूल चढ़ाएँ।
- दोनों को एक-दूसरे को जयमाला पहनाने के भाव से माला अर्पित करें। कई घरों में मौली से दोनों का गठबंधन भी किया जाता है।
- रामचरितमानस के बालकांड से सीता-राम विवाह प्रसंग का पाठ करें या सुनें, और श्री राम स्तुति व श्री राम चालीसा पढ़ें।
- “ॐ जानकीवल्लभाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएँ, फिर आरती करें और मंगल गीत गाएँ। प्रसाद सबमें बाँटें और सुहाग का सामान किसी सुहागिन को दान करें।
विवाह पंचमी के मंत्र और चौपाई
- ॐ जानकीवल्लभाय नमः — सुखी वैवाहिक जीवन के लिए।
- ॐ श्री सीतारामाभ्यां नमः — राम-सीता की संयुक्त पूजा का मंत्र।
- श्री राम जय राम जय जय राम — तारक मंत्र, जितना हो सके जप करें।
रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई:
सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥
अर्थ: सारे संसार को सीता-राममय जानकर मैं दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ।
विवाह पंचमी की कथा — सीता स्वयंवर
मिथिला के राजा जनक को हल चलाते समय धरती से एक कन्या मिली, जिसका नाम सीता रखा गया। एक बार बालिका सीता ने खेल-खेल में भगवान शिव का भारी धनुष उठा लिया, जिसे बड़े-बड़े योद्धा हिला भी नहीं पाते थे। तब राजा जनक ने प्रण किया कि जो इस शिव धनुष (पिनाक) पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा।
स्वयंवर में देश-विदेश के राजा आए, पर कोई धनुष हिला तक नहीं सका। उस समय महर्षि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण भी जनकपुर आए थे। गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम ने सहज ही धनुष उठाया, और प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष टूट गया। माता सीता ने श्रीराम के गले में जयमाला डाल दी।
इसके बाद अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर आए और मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को पूरे वैदिक विधि-विधान से श्रीराम-सीता का विवाह हुआ। उसी दिन लक्ष्मण का उर्मिला से, भरत का मांडवी से और शत्रुघ्न का श्रुतकीर्ति से विवाह हुआ। यही दिन आज विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है।
Vivah Panchami के नियम
- इस दिन घर में सात्विक भोजन बनाएँ और लहसुन-प्याज़ से परहेज़ करें।
- पति-पत्नी साथ मिलकर पूजा करें — यह दांपत्य प्रेम बढ़ाने वाला माना जाता है।
- किसी से झगड़ा या कटु वचन न कहें; घर में मंगल वातावरण रखें।
- शादी की तारीख तय करने से पहले अपने क्षेत्र की परंपरा और पंडित जी की सलाह लें।
Vivah Panchami 2026 — in English
Vivah Panchami, the wedding anniversary of Lord Rama and Goddess Sita, falls on Monday, 14 December 2026 (Margashirsha Shukla Panchami). Panchami tithi runs from about 4:48 PM on 13 December to about 7:16 PM on 14 December. Abhijit Muhurat in Delhi is about 11:51 AM to 12:39 PM. Ayodhya and Janakpur hold grand wedding celebrations. Read more on Wikipedia and see our व्रत-त्योहार कैलेंडर.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
विवाह पंचमी 2026 कब है?
विवाह पंचमी सोमवार, 14 दिसंबर 2026 को मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी पर है। पंचमी तिथि 13 दिसंबर शाम लगभग 4:48 से 14 दिसंबर शाम लगभग 7:16 तक रहेगी; उदया तिथि के अनुसार पर्व 14 दिसंबर को है।
विवाह पंचमी पर क्या होता है?
इस दिन भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह की वर्षगाँठ मनाई जाती है। मंदिरों में राम-सीता का विवाह उत्सव होता है, बारात निकलती है और रामचरितमानस के बालकांड से विवाह प्रसंग का पाठ किया जाता है।
विवाह पंचमी पर पूजा का शुभ समय क्या है?
14 दिसंबर को सुबह स्नान के बाद पूरे दिन पूजा की जा सकती है। अभिजीत मुहूर्त (दिल्ली में लगभग 11:51 से 12:39) विशेष शुभ है। शाम की पूजा पंचमी समाप्त होने (लगभग 7:16) से पहले कर लें।
क्या विवाह पंचमी पर शादी करनी चाहिए?
उत्तर भारत में कई लोग इस दिन को विवाह के लिए बहुत शुभ मानते हैं। लेकिन मिथिला और नेपाल के कुछ हिस्सों में इस दिन बेटियों की शादी नहीं की जाती, क्योंकि माता सीता का वैवाहिक जीवन कष्टों से भरा रहा। अपने क्षेत्र की परंपरा और पंडित जी की सलाह मानें।
विवाह पंचमी पर कौन सा पाठ करें?
रामचरितमानस के बालकांड में धनुष यज्ञ और सीता-राम विवाह का प्रसंग, सुंदरकांड, श्री राम स्तुति और राम चालीसा का पाठ शुभ है। “ॐ जानकीवल्लभाय नमः” मंत्र का जाप भी करें।
What is Vivah Panchami in short?
Vivah Panchami celebrates the wedding anniversary of Lord Rama and Goddess Sita. In 2026 it falls on Monday, 14 December (Margashirsha Shukla Panchami). Temples in Ayodhya and Janakpur hold grand wedding celebrations.