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कार्तिक पूर्णिमा 2026 (Kartik Purnima): 24 नवंबर, स्नान-दान मुहूर्त, पूजा विधि, देव दीपावली और कथा

अंतिम अपडेट: 8 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Kartik Purnima 2026 – कार्तिक पूर्णिमा स्नान, दीपदान और देव दीपावली

Kartik Purnima (कार्तिक पूर्णिमा) हिंदू धर्म की सबसे पवित्र पूर्णिमाओं में से एक है। यह पूरे कार्तिक मास के स्नान, व्रत और दीपदान का समापन है। इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था, इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं, और काशी में देवता देव दीपावली मनाते हैं। वर्ष 2026 में कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार, 24 नवंबर को है। इसी दिन गुरु नानक जयंती (प्रकाश पर्व) भी है। नीचे Kartik Purnima की तिथि, स्नान-दान मुहूर्त, पूजा विधि, दीपदान, चंद्र अर्घ्य और कथा दी गई है।

Kartik Purnima 2026 – कार्तिक पूर्णिमा स्नान, दीपदान और देव दीपावली

Kartik Purnima 2026: तारीख और शुभ मुहूर्त

विवरणसमय (2026)
कार्तिक पूर्णिमा (स्नान, दान, व्रत)मंगलवार, 24 नवंबर 2026
पूर्णिमा तिथि आरंभ23 नवंबर, रात लगभग 11:42
पूर्णिमा तिथि समाप्त24 नवंबर, रात लगभग 8:23
स्नान का ब्रह्म मुहूर्त – दिल्लीसुबह 5:14 से 6:02
स्नान का ब्रह्म मुहूर्त – वाराणसीसुबह 4:45 से 5:33
दीपदान / देव दीपावली प्रदोष – दिल्लीशाम 5:24 से 7:48
देव दीपावली प्रदोष – वाराणसीशाम 5:07 से 7:31
चंद्रोदय – दिल्लीशाम लगभग 4:56
नक्षत्रकृत्तिका (रात लगभग 11:25 तक)

ये समय हमारे पंचांग से निकाले गए हैं और आपके स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट अलग हो सकते हैं। अपने शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त आज का पंचांग में देखें।

इस बार कार्तिक पूर्णिमा क्यों खास है?

24 नवंबर को पूर्णिमा के दिन कृत्तिका नक्षत्र रहेगा। परंपरा में कृत्तिका नक्षत्र वाली कार्तिक पूर्णिमा को “महाकार्तिकी” कहा जाता है और इस दिन का स्नान-दान विशेष फलदायी माना जाता है। साथ ही यह दिन देवउठनी एकादशी से शुरू हुए भीष्म पंचक का अंतिम दिन है, और तुलसी विवाह का अंतिम शुभ दिन भी।

Kartik Purnima का महत्व

  • त्रिपुरारी पूर्णिमा: भगवान शिव ने इसी दिन तीनों लोकों को सताने वाले त्रिपुरासुर का वध किया था और “त्रिपुरारी” कहलाए।
  • देव दीपावली: मान्यता है कि त्रिपुरासुर के वध की खुशी में देवता काशी में उतरकर दीपावली मनाते हैं। इसीलिए वाराणसी के घाट लाखों दीयों से जगमगाते हैं।
  • मत्स्य अवतार: मान्यता है कि भगवान विष्णु ने कार्तिक पूर्णिमा पर ही अपना पहला, मत्स्य अवतार लिया था।
  • कार्तिक स्नान का समापन: शरद पूर्णिमा से शुरू हुआ महीने भर का कार्तिक स्नान इस दिन पूरा होता है।
  • गुरु नानक जयंती: सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है — 2026 में 24 नवंबर को।
  • पुष्कर मेला: राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा जी के मंदिर और पुष्कर सरोवर पर कार्तिक पूर्णिमा का प्रसिद्ध मेला और स्नान होता है।

Kartik Purnima पूजा सामग्री

  • गंगाजल (नदी स्नान न कर सकें तो नहाने के पानी में मिलाने के लिए)
  • भगवान विष्णु / सत्यनारायण जी और भगवान शिव का चित्र या मूर्ति
  • मिट्टी के दीपक, घी या तिल का तेल, रुई की बत्तियाँ
  • पीले फूल, तुलसी दल, बेलपत्र, चंदन, रोली, अक्षत
  • पंचामृत, केले, फल, पंजीरी या चूरमा (सत्यनारायण प्रसाद)
  • चंद्र अर्घ्य के लिए कच्चा दूध, जल, चावल और सफ़ेद फूल
  • दान के लिए अन्न, वस्त्र, कंबल, गुड़, तिल

कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि — स्टेप बाय स्टेप

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। घर पर हों तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  2. व्रत का संकल्प लें। कई लोग इस दिन फलाहार व्रत रखते हैं और शाम को चंद्र अर्घ्य के बाद व्रत खोलते हैं।
  3. पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें — विष्णु जी को पीले फूल और तुलसी, शिव जी को बेलपत्र और जल चढ़ाएँ।
  4. परिवार के साथ सत्यनारायण कथा सुनें या पढ़ें और केले, पंचामृत व पंजीरी का भोग लगाएँ।
  5. शाम को प्रदोष काल में घर, मंदिर, तुलसी, पीपल और जल के किनारे दीपदान करें। नदी में पत्तों के दोने में दीप प्रवाहित करना बहुत शुभ है।
  6. चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को कच्चा दूध मिला जल, चावल और सफ़ेद फूल से अर्घ्य दें और “ॐ सों सोमाय नमः” का जाप करें।
  7. ॐ जय जगदीश हरे और ॐ जय शिव ओंकारा आरती करें। फिर ज़रूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दीपक का दान करें।

दीपदान का मंत्र

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥

अर्थ: जो दीप ज्योति कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देती है और बुरे विचारों का नाश करती है, उसे नमस्कार है। दीप जलाते समय यह मंत्र बोलें। कई परिवार इस दिन 365 बत्तियों वाला दीपक जलाते हैं, जो पूरे वर्ष के दीपदान के बराबर माना जाता है।

Kartik Purnima पर दान

कार्तिक पूर्णिमा पर दान का फल कई गुना माना गया है। इस समय सर्दी शुरू हो जाती है, इसलिए कंबल, गर्म कपड़े, अन्न, घी, गुड़ और तिल का दान विशेष शुभ है। गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन और दीपदान भी इस दिन के प्रमुख दान हैं। दान हमेशा अपनी सामर्थ्य के अनुसार और श्रद्धा से करें।

कार्तिक पूर्णिमा की कथा — त्रिपुरासुर वध

तारकासुर के तीन पुत्रों — तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली — ने कठोर तप करके ब्रह्मा जी से वरदान माँगा। ब्रह्मा जी ने अमरता का वरदान नहीं दिया, तो उन्होंने माँगा कि उनके लिए तीन नगर बनें — सोने, चाँदी और लोहे के — जो आकाश में घूमते रहें, और हज़ार वर्ष में एक बार एक सीध में आएँ। जो इन्हें एक ही बाण से नष्ट कर सके, वही उनकी मृत्यु का कारण बने।

मय दानव ने ये तीन नगर बनाए, जिन्हें त्रिपुर कहा गया। वरदान के बल पर तीनों भाई देवताओं और ऋषियों को सताने लगे। तब सभी देवता भगवान शिव की शरण में गए। देवताओं ने पृथ्वी को रथ, सूर्य-चंद्र को पहिये, मेरु पर्वत को धनुष, वासुकि को प्रत्यंचा और भगवान विष्णु को बाण बनाया।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन जैसे ही तीनों नगर एक सीध में आए, भगवान शिव ने एक ही बाण से त्रिपुर को भस्म कर दिया। तभी से वे त्रिपुरारी कहलाए। इस विजय की खुशी में देवताओं ने काशी में दीप जलाकर उत्सव मनाया — यही परंपरा आज देव दीपावली के रूप में जीवित है।

कार्तिक पूर्णिमा के नियम

  • इस दिन तामसिक भोजन, मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज़ से परहेज़ करें।
  • क्रोध, झगड़ा और कटु वचन से बचें; मन शांत रखें।
  • तुलसी और पीपल के पास दीपक अवश्य जलाएँ।
  • दिन में सोने से बचें और शाम को भजन-कीर्तन करें।
  • बीमार, गर्भवती महिलाएँ और बुज़ुर्ग ठंडे पानी में नदी स्नान की जगह घर पर गंगाजल वाले पानी से स्नान करें।

Kartik Purnima 2026 — in English

Kartik Purnima falls on Tuesday, 24 November 2026. Purnima tithi runs from about 11:42 PM on 23 November to about 8:23 PM on 24 November. The holy bath is best in Brahma Muhurat — about 5:14 to 6:02 AM in Delhi — and deep daan in the evening Pradosh Kaal. It is also Dev Deepawali in Varanasi and Guru Nanak Jayanti. Moonrise in Delhi is at about 4:56 PM.

Read more on Wikipedia and about Dev Deepawali. See also the तुलसी विवाह and देवउठनी एकादशी pages and our व्रत-त्योहार कैलेंडर.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कार्तिक पूर्णिमा 2026 कब है?

कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को है। पूर्णिमा तिथि 23 नवंबर रात लगभग 11:42 से 24 नवंबर रात लगभग 8:23 तक रहेगी, इसलिए स्नान, दान और व्रत 24 नवंबर को होंगे।

कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का शुभ समय क्या है?

गंगा या पवित्र नदी में स्नान ब्रह्म मुहूर्त में सबसे शुभ है — 24 नवंबर को दिल्ली में लगभग सुबह 5:14 से 6:02 और वाराणसी में लगभग 4:45 से 5:33 तक। सूर्योदय के बाद भी पूरे दिन स्नान-दान किया जा सकता है।

देव दीपावली 2026 कब है?

देव दीपावली भी कार्तिक पूर्णिमा, मंगलवार 24 नवंबर 2026 को है। वाराणसी के घाटों पर दीपदान का प्रदोष काल लगभग शाम 5:07 से 7:31 तक है।

कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रोदय कब होगा?

24 नवंबर 2026 को दिल्ली में चंद्रोदय लगभग शाम 4:56, लखनऊ में 4:45, वाराणसी में 4:41 और मुंबई में 5:37 पर होगा। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें।

कार्तिक पूर्णिमा पर क्या दान करें?

अन्न, वस्त्र, कंबल, घी, गुड़, तिल, दीपक और गौ सेवा का दान शुभ माना जाता है। ज़रूरतमंदों को सर्दी के कपड़े और भोजन देना इस दिन विशेष पुण्य देता है।

What is Kartik Purnima in short?

Kartik Purnima is the full moon of the holy month of Kartik. In 2026 it is on Tuesday, 24 November. Devotees bathe in the Ganga, light lamps (deep daan), worship Vishnu and Shiva and give charity; it is also Dev Deepawali and Guru Nanak Jayanti.

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