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पार्वती माता की आरती (Parvati Mata Ki Aarti) — जय पार्वती माता, लिरिक्स हिंदी और English में, अर्थ और तीज-गणगौर पूजा विधि

अंतिम अपडेट: 5 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Parvati Mata Ki Aarti – जय पार्वती माता

Parvati Mata Ki Aarti (पार्वती माता की आरती) “जय पार्वती माता” भगवान शिव की अर्धांगिनी, हिमालय की पुत्री माँ पार्वती (गौरी) की आरती है। अच्छे वर, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य के लिए हरतालिका तीज, हरियाली तीज, गणगौर, मंगला गौरी व्रत और सोमवार की पूजा में यह आरती गाई जाती है। आरती में माँ के सती रूप, हिमाचल के घर जन्म और शुंभ-निशुंभ वध का वर्णन है। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, अर्थ और पूजा विधि दी गई है।

Parvati Mata Ki Aarti – जय पार्वती माता

Parvati Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi — जय पार्वती माता

जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

अरिकुल कंटक नासनि, निज सेवक त्राता।
जगजननी जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥
॥ जय पार्वती माता…॥

सिंह को वाहन साजे, कुंडल है साथा।
देव वधू जस गावत, नृत्य करत ता था॥
॥ जय पार्वती माता…॥

सतयुग रूप शील अतिसुंदर, नाम सती कहलाता।
हेमाचल घर जन्मी, सखियाँ संग राता॥
॥ जय पार्वती माता…॥

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमाचल स्थाता।
सहस्त्र भुजा तनु धरिके, चक्र लियो हाथा॥
॥ जय पार्वती माता…॥

सृष्टि रूप तुही है जननी, शिव संग रंगराता।
नन्दी भृंगी बीन लही, सारा जग मदमाता॥
॥ जय पार्वती माता…॥

देवन अरज करत हम, चरण ध्यान लाता।
तेरी कृपा रहे तो, मन नहीं भरमाता॥
॥ जय पार्वती माता…॥

मैया जी की आरती, भक्ति भाव से जो नर गाता।
नित्य सुखी रह करके, सुख संपत्ति पाता॥
॥ जय पार्वती माता…॥

Parvati Mata Ki Aarti Lyrics in English

Jai Parvati Mata, Jai Parvati Mata,
Brahma Sanatan Devi, Shubh Phal Ki Data.

Arikul Kantak Nasani, Nij Sevak Trata,
Jagjanani Jagdamba, Harihar Gun Gata.
॥ Jai Parvati Mata… ॥

Singh Ko Vahan Saje, Kundal Hai Satha,
Dev Vadhu Jas Gavat, Nritya Karat Ta Tha.
॥ Jai Parvati Mata… ॥

Satyug Roop Sheel Atisundar, Naam Sati Kahlata,
Hemachal Ghar Janmi, Sakhiyan Sang Rata.
॥ Jai Parvati Mata… ॥

Shumbh Nishumbh Vidare, Hemachal Sthata,
Sahastra Bhuja Tanu Dharike, Chakra Liyo Hatha.
॥ Jai Parvati Mata… ॥

Srishti Roop Tuhi Hai Janani, Shiv Sang Rangrata,
Nandi Bhringi Been Lahi, Sara Jag Madmata.
॥ Jai Parvati Mata… ॥

Devan Araj Karat Hum, Charan Dhyan Lata,
Teri Kripa Rahe To, Man Nahin Bharmata.
॥ Jai Parvati Mata… ॥

Maiya Ji Ki Aarti, Bhakti Bhav Se Jo Nar Gata,
Nitya Sukhi Rah Karke, Sukh Sampatti Pata.
॥ Jai Parvati Mata… ॥

Parvati Mata Ki Aarti का अर्थ

  1. टेक: हे पार्वती माता, आपकी जय हो — आप सनातन देवी हैं, जिनकी ब्रह्मा भी स्तुति करते हैं, और शुभ फल देने वाली हैं।
  2. रक्षक: आप शत्रुओं के कुल रूपी काँटों का नाश करती हैं और अपने सेवकों की रक्षा करती हैं; आप जगत की जननी जगदंबा हैं, विष्णु और शिव भी आपके गुण गाते हैं।
  3. रूप: सिंह आपका वाहन है, कानों में कुंडल हैं; देवताओं की पत्नियाँ आपका यश गाती हैं और “ता था” की ताल पर नृत्य करती हैं।
  4. सती से पार्वती: सतयुग में अति सुंदर रूप और शील वाली आप “सती” कहलाईं; फिर हिमाचल (हिमालय) के घर जन्म लिया और सखियों के साथ खेलीं।
  5. शक्ति रूप: हिमाचल में रहते हुए आपने शुंभ-निशुंभ का संहार किया; हज़ार भुजाओं वाला शरीर धारण कर हाथ में चक्र लिया।
  6. शिव संग: आप ही सृष्टि रूप जननी हैं और शिव के प्रेम में रंगी हैं; नंदी और भृंगी ने वीणा उठाई और सारा जग आनंद में मग्न हो गया।
  7. प्रार्थना: हम देवता अर्ज़ करते हैं और आपके चरणों का ध्यान करते हैं; आपकी कृपा बनी रहे तो मन भटकता नहीं।
  8. फलश्रुति: जो भक्ति भाव से मैया की आरती गाता है, वह हमेशा सुखी रहता है और सुख-संपत्ति पाता है।

Parvati Mata Ki Aarti की विधि

  1. चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर शिव-पार्वती का चित्र रखें; माँ को लाल चुनरी, सिंदूर, चूड़ियाँ, मेहंदी और सुहाग का सामान चढ़ाएँ।
  2. बेलपत्र और जल शिव जी को, फूल और अक्षत माँ पार्वती को अर्पित करें।
  3. तीज पर हरतालिका कथा और गणगौर पर गणगौर की कथा सुनें।
  4. घी का दीपक जलाकर पहले ॐ जय शिव ओंकारा, फिर यह पार्वती माता की आरती गाएँ।

Parvati Mata Ki Aarti के 7 नियम

  • आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
  • पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
  • आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
  • आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
  • उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।

पार्वती माता की आरती के लाभ

  • मान्यता है कि कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है।
  • सुहागिनों को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
  • दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
  • माँ की कृपा से मन स्थिर रहता है, जैसा आरती में कहा गया है।

ॐ जय शिव ओंकारा, जय अम्बे गौरी और अन्नपूर्णा माता की आरती भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

पार्वती माता की आरती कब गाई जाती है?

हरतालिका तीज, हरियाली तीज, कजरी तीज, गणगौर, मंगला गौरी व्रत (सावन के मंगलवार), सोमवार और महाशिवरात्रि पर।

आरती में “नाम सती कहलाता” का क्या अर्थ है?

सतयुग में माँ दक्ष प्रजापति की पुत्री सती थीं। सती के देह त्याग के बाद उन्होंने हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया — आरती में यही कहा गया है।

पार्वती माता को क्या चढ़ाएँ?

लाल चुनरी, सिंदूर, चूड़ियाँ, बिंदी, मेहंदी और सुहाग का सामान; भोग में खीर, मालपुआ या मिठाई।

शिव-पार्वती की आरती साथ में कैसे करें?

पहले ॐ जय शिव ओंकारा, फिर जय पार्वती माता गाएँ — तीज और सोमवार व्रत में दोनों आरतियाँ साथ गाने की परंपरा है।

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