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जय अम्बे गौरी आरती (Jai Ambe Gauri Aarti) — लिरिक्स हिंदी और English में, अर्थ और विधि

अंतिम अपडेट: 8 मिनट पढ़ें लेखक: Mandir The Temple
जय अम्बे गौरी – Jai Ambe Gauri Aarti, Maa Durga on her lion with hill temple

Jai Ambe Gauri Aarti (जय अम्बे गौरी आरती) माँ दुर्गा की सबसे लोकप्रिय आरती है, जो नवरात्रि, दुर्गा पूजा, जगराते और हर शुक्रवार को घर-घर में गाई जाती है। इस आरती में माँ अम्बे के सुंदर स्वरूप, उनके सिंह वाहन और शुंभ-निशुंभ, महिषासुर, चंड-मुंड जैसे राक्षसों के वध का वर्णन है। नीचे जय अम्बे गौरी आरती के पूरे बोल हिंदी और English में, हर पंक्ति का सरल अर्थ, आरती करने की विधि और इसके लाभ दिए गए हैं।

Jai Ambe Gauri Aarti – जय अम्बे गौरी आरती लिरिक्स
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Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics in Hindi — जय अम्बे गौरी आरती

जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

मांग सिंदूर विराजत,
टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना,
चंद्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला,
कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरि वाहन राजत,
खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत,
तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर,
सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे,
महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना,
निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चण्ड-मुण्ड संहारे,
शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे,
सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी,
तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी,
तुम शिव पटरानी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
नृत्य करत भैरों ।
बाजत ताल मृदंगा,
अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

तुम ही जग की माता,
तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता ।
सुख संपति करता ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

भुजा चार अति शोभित,
वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]
मनवांछित फल पावत,
सेवत नर नारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कंचन थाल विराजत,
अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत,
कोटि रतन ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

श्री अंबेजी की आरति,
जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी,
सुख-संपति पावे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी ।

Jai Ambe Gauri Aarti Lyrics in English

Jai Ambe Gauri,
Maiya Jai Shyama Gauri
Nishdin Tumko Dhyaavat,
Hari Brahma Shivji ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Mang Sinduur Biraajat,
Tiko Mrigmadko,
Ujjvalse Dou Naina,
Chandravadan Niko ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Kanak Saman Kalevar,
Raktambar Raje,
Raktapushp Galmala,
Kanthhar Saje ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Kehari Vahan Rajat,
Khadg Khappar Dhari
Sur Nar Munijan Sevat,
Tinke Dukhahari ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Kanan Kundal Shobhit,
Nasagre Moti
Kotik Chandra Divakar,
Samrajat Jyoti ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Shumbh- Nishumbh Vidare,
Mahishasur Ghatia
Dhumra-Vilochan Naina,
Nishdin Madmati ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Chanda-Munda Sanhera,
Shonit Beed Hare,
Madhu-Katitabha Mare,
Sur Bhayahin Kare ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Brahmani, Rudrani,
Tum Kamala Rani,
Agam-Nigam Bakhani,
Turn Shiv Patrani ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Chaunsath Yogini Gavat,
Nritya Karat Bhairon,
Bajat Tab Mridanga,
Aur Bajat Damru ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Tum Ho Jag Ki Mata,
Tum Hi Ho Bharta,
Bhaktan Ki Dukh Harta,
Sukh Sampati Karta ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Bhuja Char Ati Shobhit,
Var Mudra Dhari,
Manvanchhit Phal Pavat,
Sevat Nar Nari॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Kanchan Thal Virajat,
Agaru Kapur Bati
Malketu Men Rajat,
Kotiratan Jyoti ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Jai Ambe Gauri,
Maiya Jai Shyama Gauri
Nishdin Tumko Dhyaavat,
Hari Brahma Shivji ॥

Om Jai Ambe Gauri, Maiya Jai Shyama Gauri………

Jai Ambe Gauri Aarti PDF Download | जय अम्बे गौरी आरती PDF

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Jai Ambe Gauri Aarti का अर्थ

पहला भाग — माँ का स्वरूप: हे अम्बे गौरी, हे श्यामा गौरी, आपकी जय हो। ब्रह्मा, विष्णु और शिव दिन-रात आपका ध्यान करते हैं। आपकी माँग में सिंदूर और माथे पर कस्तूरी का टीका है, आपकी आँखें उज्ज्वल हैं और मुख चंद्रमा जैसा सुंदर है। आपका शरीर सोने जैसा चमकता है, आप लाल वस्त्र और लाल फूलों की माला धारण करती हैं।

दूसरा भाग — शक्ति और रक्षा: आप सिंह पर सवार हैं और हाथों में खड्ग और खप्पर धारण करती हैं। देवता, मनुष्य और मुनि आपकी सेवा करते हैं और आप उनके दुख दूर करती हैं। आपके कानों में कुंडल और नाक में मोती शोभा देते हैं, और आपकी ज्योति करोड़ों सूर्य-चंद्र के समान है।

तीसरा भाग — असुरों का वध: आपने शुंभ-निशुंभ का संहार किया, महिषासुर को मारा और धूम्रलोचन को भस्म किया। चंड-मुंड और रक्तबीज का वध करके और मधु-कैटभ को मारकर आपने देवताओं को भय से मुक्त किया।

चौथा भाग — जगत की माता: आप ही ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला (लक्ष्मी) हैं, वेद आपका गुणगान करते हैं और आप शिव की अर्धांगिनी हैं। चौंसठ योगिनियाँ आपके गीत गाती हैं और भैरव नृत्य करते हैं। आप ही जगत की माता और पालनहार हैं, भक्तों के दुख हरती हैं और सुख-संपत्ति देती हैं। जो भी श्रद्धा से यह आरती गाता है, उसे मनचाहा फल मिलता है।

Jai Ambe Gauri Aarti करने की विधि

  1. स्नान के बाद साफ़ कपड़े पहनें और माँ दुर्गा के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. थाली में घी या कपूर के दीपक, कपूर, फूल, अक्षत, रोली और प्रसाद रखें। दीपक में एक या पाँच बत्तियाँ रखी जा सकती हैं।
  3. आरती से पहले भगवान को फूल, धूप और भोग अर्पित करें; बिना पूजा के सीधे आरती नहीं की जाती।
  4. आरती की थाली को घड़ी की दिशा में घुमाएँ — परंपरा में चरणों के सामने चार बार, नाभि के सामने दो बार, मुख के सामने एक बार और फिर पूरे स्वरूप के सामने सात बार।
  5. आरती के साथ घंटी और शंख बजाएँ, और परिवार के सभी लोग ताली बजाते हुए साथ में गाएँ।
  6. आरती के बाद दोनों हाथों से दीपक की लौ की ओर हथेलियाँ घुमाकर आँखों और सिर से लगाएँ, और जल छिड़ककर आरती शांत करें।
  7. अंत में प्रसाद बाँटें और भूल-चूक के लिए क्षमा माँगें।

जय अम्बे गौरी आरती कब गाएँ

  • नवरात्रि के नौ दिन — सुबह और शाम दोनों समय।
  • शुक्रवार और मंगलवार को माँ दुर्गा की पूजा के बाद।
  • दुर्गा अष्टमी, महानवमी और दशहरे पर।
  • जगराते और माता की चौकी में — भजन के बाद अंत में यही आरती होती है।
  • रोज़ शाम संध्या आरती के रूप में, खासकर किसी संकट या परेशानी के समय।

Jai Ambe Gauri Aarti के लाभ

  • मन से भय और चिंता दूर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति आती है।
  • माँ दुर्गा की कृपा से शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • परिवार के साथ आरती गाने से आपसी प्रेम और एकता बढ़ती है।

संबंधित आरती और चालीसा

माँ दुर्गा की पूजा में आरती के साथ श्री दुर्गा चालीसा का पाठ ज़रूर करें। दीपावली और शुक्रवार की पूजा में ॐ जय लक्ष्मी माता आरती और हर पूजा की शुरुआत में जय गणेश देवा आरती गाई जाती है। व्रत-त्योहार की तारीखें हमारे व्रत-त्योहार कैलेंडर में देखें। माँ दुर्गा के बारे में और पढ़ें Wikipedia पर।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

जय अम्बे गौरी आरती कब गानी चाहिए?

नवरात्रि के नौ दिन सुबह-शाम, हर शुक्रवार और मंगलवार को, दुर्गा अष्टमी, जगराते और माता की चौकी में यह आरती गाई जाती है। रोज़ शाम की संध्या आरती में भी इसे गा सकते हैं।

जय अम्बे गौरी आरती किस देवी की है?

यह माँ दुर्गा (अम्बे, गौरी, श्यामा) की आरती है। इसमें माँ के सिंह वाहन, शस्त्रों और शुंभ-निशुंभ, महिषासुर जैसे असुरों के वध का वर्णन है।

आरती में दीपक कितनी बार घुमाना चाहिए?

परंपरा में चरणों के सामने चार बार, नाभि के सामने दो बार, मुख के सामने एक बार और फिर पूरे स्वरूप के सामने सात बार दीपक घुमाया जाता है।

क्या जय अम्बे गौरी आरती रोज़ गा सकते हैं?

हाँ। रोज़ सुबह या शाम माँ दुर्गा की पूजा के बाद यह आरती गाई जा सकती है। श्रद्धा और साफ़-सफ़ाई सबसे ज़रूरी है।

What is Jai Ambe Gauri Aarti?

Jai Ambe Gauri is the most popular aarti of Goddess Durga, sung in Navratri, Durga Puja, jagrans and every Friday. It praises her beauty, her lion mount and her victory over demons like Mahishasura and Shumbha-Nishumbha.

जय अम्बे गौरी आरती PDF कैसे डाउनलोड करें?

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