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संत तुकाराम आरती (Tukaram Aarti) — आरती तुकाराम स्वामी सद्गुरु धाम, मराठी लिरिक्स, हिंदी-English अर्थ और इतिहास

अंतिम अपडेट: 4 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Tukaram Aarti – आरती तुकाराम स्वामी सद्गुरु धाम

Tukaram Aarti (संत तुकाराम आरती) “आरती तुकाराम, स्वामी सद्गुरु धाम” 17वीं सदी के महान वारकरी संत तुकाराम महाराज की मराठी आरती है। इसके रचयिता रामेश्वर भट्ट हैं — वही विद्वान ब्राह्मण जिनके कहने पर तुकाराम ने अपने अभंग इंद्रायणी नदी में डुबो दिए थे। तेरह दिन बाद अभंग नदी से सूखे निकल आए, तब रामेश्वर भट्ट तुकाराम के शिष्य बन गए और यह आरती लिखी। देहू, पंढरपुर और वारकरी कीर्तन में यह आरती गाई जाती है। नीचे संपूर्ण आरती और अर्थ दिया गया है।

Tukaram Aarti – आरती तुकाराम स्वामी सद्गुरु धाम

Tukaram Aarti Lyrics in Marathi (Hindi Devanagari) — संत तुकाराम आरती

आरती तुकाराम। स्वामी सद्गुरु धाम॥
सच्चिदानंद मूर्ती। पाय दाखवी आम्हां॥

राघवें सागरांत। पाषाण तारिले॥
तैसे हे तुकोबाचे। अभंग उदकीं रक्षिले॥
आरती तुकाराम। स्वामी सद्गुरु धाम॥
सच्चिदानंद मूर्ती। पाय दाखवी आम्हां॥

तुकितां तुलनेसी। ब्रह्म तुकासी आलें॥
म्हणोनि रामेश्वरें। चरणीं मस्तक ठेविलें॥
आरती तुकाराम। स्वामी सद्गुरु धाम॥
सच्चिदानंद मूर्ती। पाय दाखवी आम्हां॥

Tukaram Aarti Lyrics in English

Aarti Tukaram, Swami Sadguru Dham,
Sachchidanand Murti, Paay Dakhvi Aamha.

Raghave Sagarant, Pashan Tarile,
Taise He Tukobache, Abhang Udaki Rakshile.
Aarti Tukaram, Swami Sadguru Dham,
Sachchidanand Murti, Paay Dakhvi Aamha.

Tukita Tulanesi, Brahma Tukasi Aale,
Mhanoni Rameshware, Charani Mastak Thevile.
Aarti Tukaram, Swami Sadguru Dham,
Sachchidanand Murti, Paay Dakhvi Aamha.

Tukaram Aarti का अर्थ

  1. टेक: सद्गुरु के धाम, स्वामी तुकाराम की आरती — हे सच्चिदानंद की मूर्ति, हमें अपने चरणों के दर्शन कराइए।
  2. पहला पद: जैसे राघव (श्रीराम) ने समुद्र में पत्थरों को तैरा दिया था, वैसे ही तुकोबा के अभंग पानी (इंद्रायणी) में सुरक्षित रहे।
  3. दूसरा पद: तराज़ू पर तौलने पर तुकाराम ब्रह्म के बराबर निकले — इसीलिए रामेश्वर ने उनके चरणों में अपना मस्तक रख दिया।

इंद्रायणी और अभंगों की कथा

तुकाराम महाराज (1608–1650) पुणे के पास देहू गाँव के थे और विठ्ठल के भक्त थे। वे मराठी में अभंग लिखते और गाते थे। वाघोली के विद्वान रामेश्वर भट्ट ने आपत्ति की कि एक शूद्र (वाणी) को वेदांत का उपदेश देने का अधिकार नहीं है, और अभंग नदी में डुबोने का आदेश दिया।

तुकाराम ने अपनी पोथियाँ इंद्रायणी में डुबो दीं और तेरह दिन तक नदी किनारे उपवास करते रहे। तेरहवें दिन पोथियाँ पानी से सूखी ऊपर आ गईं। इस चमत्कार से रामेश्वर भट्ट का अहंकार टूटा, वे तुकाराम के शिष्य बने और यह आरती रची — इसीलिए आरती में राम के तैरते पत्थरों की तुलना की गई है।

फाल्गुन कृष्ण द्वितीया को “तुकाराम बीज” पर उनके वैकुंठ गमन का उत्सव मनाया जाता है।

Tukaram Aarti की विधि

  1. विठ्ठल-रुक्मिणी और संत तुकाराम के चित्र पर तुलसी माला, फूल और अबीर-बुक्का चढ़ाएँ।
  2. “राम कृष्ण हरि” या “ज्ञानोबा माऊली तुकाराम” का भजन करें।
  3. तुकाराम गाथा से कुछ अभंग पढ़ें या गाएँ।
  4. घी का दीपक जलाकर यह आरती गाएँ — वारकरी परंपरा में टाळ-मृदंग के साथ।

Tukaram Aarti के 7 नियम

  • आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
  • पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
  • आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
  • आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
  • उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।

संत तुकाराम महाराजांची आरती के लाभ

  • मान्यता है कि सद्गुरु की कृपा से मन शुद्ध और विनम्र होता है।
  • भक्ति में अहंकार छूटता है — रामेश्वर भट्ट की तरह।
  • विठ्ठल भक्ति और नाम-संकीर्तन में रुचि बढ़ती है।
  • मन को शांति और आनंद मिलता है।

सुखकर्ता दुःखहर्ता, दत्ताची आरती और जय जय त्र्यंबकराज जैसी मराठी आरतियाँ भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

तुकाराम आरती किसने लिखी?

रामेश्वर भट्ट ने — दूसरे पद में “म्हणोनि रामेश्वरें चरणीं मस्तक ठेविलें” में उनका नाम है। पहले वे तुकाराम के विरोधी थे, बाद में शिष्य बने।

आरती में “अभंग उदकीं रक्षिले” का क्या अर्थ है?

तुकाराम के अभंग पानी में सुरक्षित रहे — इंद्रायणी नदी में डुबोई गई पोथियाँ तेरह दिन बाद सूखी निकल आई थीं।

तुकाराम बीज कब होता है?

फाल्गुन कृष्ण द्वितीया को, जब संत तुकाराम सदेह वैकुंठ गए माने जाते हैं। देहू में उस दिन बड़ा उत्सव होता है।

यह आरती कहाँ गाई जाती है?

देहू के तुकाराम मंदिर, पंढरपुर, आळंदी, वारकरी कीर्तन और महाराष्ट्र के घरों में।

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