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एकादशी माता की आरती (Ekadashi Mata Ki Aarti) — ॐ जय एकादशी, सभी 26 एकादशियों के नाम, लिरिक्स हिंदी और English में, अर्थ

अंतिम अपडेट: 7 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Ekadashi Mata Ki Aarti – ॐ जय एकादशी

🪔 रमा एकादशी 5 नवंबर 2026: व्रत कथा, पूजा विधि और पारण समय →

Ekadashi Mata Ki Aarti (एकादशी माता की आरती) “ॐ जय एकादशी, जय एकादशी माता” हर एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की पूजा के बाद गाई जाती है। इस आरती की खासियत यह है कि इसमें साल की सभी 26 एकादशियों के नाम महीने और पक्ष के साथ क्रम से आते हैं — मार्गशीर्ष की उत्पन्ना से लेकर अधिक मास की पद्मिनी तक। अगली एकादशियाँ: रमा एकादशी 5 नवंबर और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 (वैष्णव 21 नवंबर)। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, हर पद का अर्थ और व्रत विधि दी गई है।

Ekadashi Mata Ki Aarti – ॐ जय एकादशी

Ekadashi Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi — ॐ जय एकादशी

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्विन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥
॥ ॐ जय एकादशी…॥

Ekadashi Mata Ki Aarti Lyrics in English

Om Jai Ekadashi, Jai Ekadashi, Jai Ekadashi Mata,
Vishnu Puja Vrat Ko Dharan Kar, Shakti Mukti Pata.

Tere Naam Ginaun Devi, Bhakti Pradan Karni,
Gan Gaurav Ki Deni Mata, Shastron Mein Varni.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Margashirsh Ke Krishnapaksh Ki Utpanna, Vishvatarni Janmi,
Shukla Paksh Mein Hui Mokshada, Muktidata Ban Aai.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Paush Ke Krishnapaksh Ki, Saphala Namak Hai,
Shuklapaksh Mein Hoy Putrada, Anand Adhik Rahai.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Naam Shattila Magh Maas Mein, Krishnapaksh Aavai,
Shuklapaksh Mein Jaya, Kahavai, Vijay Sada Pavai.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Vijaya Phagun Krishnapaksh Mein Shukla Amalaki,
Papmochani Krishna Paksh Mein, Chaitra Mahabali Ki.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Chaitra Shukla Mein Naam Kamada, Dhan Dene Vali,
Naam Baruthini Krishnapaksh Mein, Vaisakh Mah Vali.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Shukla Paksh Mein Hoy Mohini Apara Jyeshtha Krishnapakshi,
Naam Nirjala Sab Sukh Karni, Shuklapaksh Rakhi.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Yogini Naam Ashadh Mein Jano, Krishnapaksh Karni,
Devshayani Naam Kahayo, Shuklapaksh Dharni.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Kamika Shravan Maas Mein Aavai, Krishnapaksh Kahiye,
Shravan Shukla Hoy Pavitra Anand Se Rahiye.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Aja Bhadrapad Krishnapaksh Ki, Parivartini Shukla,
Indra Ashvin Krishnapaksh Mein, Vrat Se Bhavsagar Nikla.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Papankusha Hai Shukla Paksh Mein, Aap Haranhari,
Rama Maas Kartik Mein Aavai, Sukhdayak Bhari.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Devotthani Shuklapaksh Ki, Dukhnashak Maiya,
Pavan Maas Mein Karun Vinati Paar Karo Naiya.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Parama Krishnapaksh Mein Hoti, Jan Mangal Karni,
Shukla Maas Mein Hoy Padmini Dukh Daridra Harni.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Jo Koi Aarti Ekadashi Ki, Bhakti Sahit Gavai,
Jan Gurdita Swarg Ka Vasa, Nishchay Vah Pavai.
॥ Om Jai Ekadashi… ॥

Ekadashi Mata Ki Aarti का अर्थ

  1. टेक: हे एकादशी माता, आपकी जय हो — जो विष्णु पूजा के साथ आपका व्रत रखता है, उसे शक्ति और मुक्ति मिलती है।
  2. पहला पद: हे देवी, मैं आपके नाम गिनाता हूँ — आप भक्ति देती हैं, गौरव देती हैं, और शास्त्रों में आपका वर्णन है।
  3. मार्गशीर्ष से माघ: मार्गशीर्ष कृष्ण में उत्पन्ना (जिस दिन एकादशी माता का जन्म हुआ) और शुक्ल में मोक्षदा; पौष कृष्ण में सफला और शुक्ल में पुत्रदा; माघ कृष्ण में षटतिला और शुक्ल में जया।
  4. फाल्गुन से वैशाख: फाल्गुन कृष्ण में विजया और शुक्ल में आमलकी; चैत्र कृष्ण में पापमोचनी और शुक्ल में कामदा; वैशाख कृष्ण में बरूथिनी और शुक्ल में मोहिनी।
  5. ज्येष्ठ से श्रावण: ज्येष्ठ कृष्ण में अपरा और शुक्ल में निर्जला; आषाढ़ कृष्ण में योगिनी और शुक्ल में देवशयनी; श्रावण कृष्ण में कामिका और शुक्ल में पवित्रा (पुत्रदा)।
  6. भाद्रपद से कार्तिक: भाद्रपद कृष्ण में अजा और शुक्ल में परिवर्तिनी; आश्विन कृष्ण में इंदिरा और शुक्ल में पापांकुशा; कार्तिक कृष्ण में रमा और शुक्ल में देवोत्थानी (देवउठनी) — “हे दुख नाश करने वाली माँ, इस पावन मास में विनती है, मेरी नैया पार करो।”
  7. अधिक मास: अधिक (मल) मास के कृष्ण पक्ष में परमा और शुक्ल पक्ष में पद्मिनी — जो दुख और दरिद्रता हरती हैं।
  8. फलश्रुति: जो कोई भक्ति से एकादशी की यह आरती गाता है — गुरदित्ता कहते हैं — वह निश्चय ही स्वर्ग में वास पाता है।

एकादशी माता कौन हैं

पद्म पुराण की कथा के अनुसार मुर नाम के दैत्य से युद्ध के बाद भगवान विष्णु बदरिकाश्रम की गुफा में विश्राम कर रहे थे। तभी मुर उन्हें मारने आया और विष्णु के शरीर से एक तेजस्वी कन्या प्रकट हुई, जिसने मुर का वध कर दिया। वह दिन मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी था, इसलिए विष्णु ने उस कन्या का नाम “एकादशी” रखा और वरदान दिया कि जो इस दिन व्रत करेगा, उसके पाप नष्ट होंगे। इसीलिए उस एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहते हैं — 2026 में यह 4 दिसंबर को है।

Ekadashi Mata Ki Aarti की विधि

  1. दशमी की शाम से सात्विक भोजन लें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  2. भगवान विष्णु के चित्र पर पीले फूल, तुलसी दल, चंदन और पंचामृत अर्पित करें — एकादशी को तुलसी न तोड़ें, एक दिन पहले तोड़कर रखें।
  3. उस एकादशी की व्रत कथा पढ़ें, फिर ओम जय जगदीश हरे और यह एकादशी माता की आरती गाएँ।
  4. अगले दिन द्वादशी में पारण समय के भीतर व्रत खोलें। हर एकादशी की तारीख और पारण समय एकादशी कब है पेज पर देखें।

Ekadashi Mata Ki Aarti के 7 नियम

  • एकादशी को चावल न खाएँ — यह सबसे बड़ा नियम माना जाता है।
  • एकादशी को तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
  • आरती खड़े होकर, घी के दीपक से करें और विष्णु जी को भोग लगाकर ही आरती करें।
  • व्रत में क्रोध, झूठ और निंदा से बचें; रात में भजन-कीर्तन करें।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • पारण द्वादशी के समय के भीतर ही करें — हरि वासर में नहीं।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।

एकादशी माता की आरती के लाभ

  • मान्यता है कि पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष का मार्ग खुलता है।
  • भगवान विष्णु की कृपा से घर में सुख-समृद्धि रहती है।
  • मन और शरीर दोनों का संयम बढ़ता है।
  • एक ही आरती में सभी एकादशियों के नाम याद हो जाते हैं।

एकादशी कब है — पूरी सूची, रमा एकादशी व्रत कथा और ओम जय जगदीश हरे भी देखें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

एकादशी माता की आरती में कितनी एकादशियों के नाम हैं?

सभी 26 — साल की 24 एकादशियाँ और अधिक मास की 2 (परमा और पद्मिनी), मार्गशीर्ष की उत्पन्ना से क्रम में।

अगली एकादशी कब है?

रमा एकादशी 5 नवंबर 2026 और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 (वैष्णव 21 नवंबर) को है। पूरी सूची और पारण समय एकादशी कब है पेज पर देखें।

एकादशी माता का जन्म कब हुआ?

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी को, जिसे उत्पन्ना एकादशी कहते हैं। पद्म पुराण के अनुसार वे भगवान विष्णु के शरीर से प्रकट हुईं और मुर दैत्य का वध किया।

आरती में “गुरदिता” कौन हैं?

अंतिम पद में “जन गुरदिता” की छाप है, जिन्हें इस आरती का रचयिता माना जाता है।

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