Narsingh Bhagwan Ki Aarti (नरसिंह भगवान की आरती) “ॐ जय नरसिंह हरे” भगवान विष्णु के चौथे अवतार नृसिंह (नरसिंह) की आरती है, जो भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए खंभा फाड़कर प्रकट हुए और हिरण्यकशिपु का वध किया। वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को नृसिंह जयंती पर, और भय, शत्रु या संकट से रक्षा के लिए यह आरती गाई जाती है। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, अर्थ और कथा दी गई है।

इस लेख में
Narsingh Bhagwan Ki Aarti Lyrics in Hindi — ॐ जय नरसिंह हरे
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे।
स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे,
जन का ताप हरे॥
तुम हो दीन दयाला, भक्तन हितकारी,
प्रभु भक्तन हितकारी।
अद्भुत रूप बनाकर, अद्भुत रूप बनाकर,
प्रकटे भय हारी॥
॥ ॐ जय नरसिंह हरे…॥
सबके हृदय विदारण, दस्यु जियो मारी,
प्रभु दस्यु जियो मारी।
दास जान अपनायो, दास जान अपनायो,
जन पर कृपा करी॥
॥ ॐ जय नरसिंह हरे…॥
ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे,
प्रभु माला पहिनावे।
शिवजी जय जय कहकर, पुष्पन बरसावे॥
॥ ॐ जय नरसिंह हरे…॥
Narsingh Bhagwan Ki Aarti Lyrics in English
Om Jai Narsingh Hare, Prabhu Jai Narsingh Hare,
Stambh Phaad Prabhu Prakate, Stambh Phaad Prabhu Prakate,
Jan Ka Taap Hare.
Tum Ho Deen Dayala, Bhaktan Hitkari,
Prabhu Bhaktan Hitkari,
Adbhut Roop Banakar, Adbhut Roop Banakar,
Prakate Bhay Hari.
॥ Om Jai Narsingh Hare… ॥
Sabke Hriday Vidaran, Dasyu Jiyo Mari,
Prabhu Dasyu Jiyo Mari,
Daas Jaan Apnayo, Daas Jaan Apnayo,
Jan Par Kripa Kari.
॥ Om Jai Narsingh Hare… ॥
Brahma Karat Aarti, Mala Pahinave,
Prabhu Mala Pahinave,
Shivji Jai Jai Kahkar, Pushpan Barsave.
॥ Om Jai Narsingh Hare… ॥
Narsingh Bhagwan Ki Aarti का अर्थ
- टेक: हे नरसिंह हरि, आपकी जय हो — आप खंभा फाड़कर प्रकट हुए और भक्त का दुख हर लिया।
- दीनदयाल: आप दीनों पर दया करने वाले और भक्तों के हितकारी हैं; आधा नर, आधा सिंह — अद्भुत रूप बनाकर भय हरने के लिए प्रकट हुए।
- प्रह्लाद की रक्षा: सबका हृदय चीरने वाले (अत्याचारी) दैत्य हिरण्यकशिपु को आपने मार डाला; प्रह्लाद को अपना दास जानकर अपनाया और भक्तों पर कृपा की।
- देवताओं की स्तुति: ब्रह्मा जी आपकी आरती करते हैं और माला पहनाते हैं; शिव जी जय-जयकार करते हुए फूल बरसाते हैं।
प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु की कथा
दैत्यराज हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मा जी से वरदान लिया था कि उसे न कोई मनुष्य मार सके न पशु, न दिन में न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न धरती पर न आकाश में, न किसी अस्त्र से न शस्त्र से। उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु भक्त था। जब हिरण्यकशिपु ने पूछा “कहाँ है तेरा विष्णु? क्या इस खंभे में है?” और खंभे पर प्रहार किया, तो खंभा फाड़कर भगवान नृसिंह प्रकट हुए — न मनुष्य न पशु, संध्या के समय, दरवाज़े की चौखट पर, अपनी जाँघों पर रखकर, नाखूनों से उसका वध किया। इस तरह वरदान भी सच रहा और भक्त की रक्षा भी हुई।
Narsingh Bhagwan Ki Aarti की विधि
- नृसिंह जयंती या किसी शनिवार की शाम भगवान नृसिंह या लक्ष्मी-नृसिंह के चित्र पर पीले फूल, तुलसी और चंदन चढ़ाएँ।
- पानक (गुड़-पानी), फल और मिश्री का भोग लगाएँ।
- “ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥” मंत्र 11 बार जपें।
- घी का दीपक जलाकर यह आरती और फिर ओम जय जगदीश हरे गाएँ।
Narsingh Bhagwan Ki Aarti के 7 नियम
- आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
- पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
- आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
- आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
- आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
- आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
- उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।
नरसिंह भगवान की आरती के लाभ
- मान्यता है कि भय, शत्रु और बुरी शक्तियों से रक्षा होती है।
- कर्ज़ और कोर्ट-कचहरी के संकट दूर होने की मान्यता है (ऋणमोचन नृसिंह स्तोत्र के साथ)।
- भक्ति और साहस बढ़ता है — जैसे प्रह्लाद का।
- घर-परिवार की रक्षा होती है।
ओम जय जगदीश हरे, हनुमान चालीसा और भैरव जी की आरती भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
नृसिंह जयंती कब होती है?
वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को, संध्या के समय — क्योंकि भगवान नृसिंह संध्या काल में प्रकट हुए थे।
भगवान नृसिंह किसके अवतार हैं?
भगवान विष्णु के दस अवतारों में चौथे — आधा मनुष्य, आधा सिंह रूप।
“स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे” का क्या अर्थ है?
हिरण्यकशिपु ने पूछा था कि क्या विष्णु इस खंभे में हैं; भगवान ने उसी खंभे को फाड़कर प्रकट होकर दिखाया कि वे सब जगह हैं।
नृसिंह आरती कब गाएँ?
नृसिंह जयंती, शनिवार की संध्या, और जब भी भय या संकट हो।