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अन्नपूर्णा माता की आरती (Annapurna Mata Ki Aarti) — बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम, लिरिक्स और अर्थ

अंतिम अपडेट: 6 मिनट पढ़ें लेखक: admin
अन्नपूर्णा माता की आरती – Maa Annapurna with ladle and bowl of food, Kashi ghats

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Annapurna Mata Ki Aarti (अन्नपूर्णा माता की आरती) “बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम” अन्न और पोषण की देवी माँ अन्नपूर्णा की आरती है। माँ अन्नपूर्णा माँ पार्वती का रूप हैं, जो काशी में विराजती हैं — मान्यता है कि उनकी कृपा से कोई घर भूखा नहीं रहता। मार्गशीर्ष पूर्णिमा को अन्नपूर्णा जयंती (2026 में 23 दिसंबर) मनाई जाती है, और रसोई में अन्न भंडार की पूजा के समय भी यह आरती गाई जाती है। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, अर्थ और पूजा विधि दी गई है।

Annapurna Mata Ki Aarti – बारम्बार प्रणाम

Annapurna Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi — बारम्बार प्रणाम

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम॥

जो नहिं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहाँ उसे विश्राम।
अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम॥
बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम॥

प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम।
सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥
बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम॥

चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधर श्याम।
चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर, शोभा लखहि ललाम॥
बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम॥

देवि देव! दयनीय दशा में, दया-दया तब नाम।
त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल, शरण रूप तब धाम॥
बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम॥

श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐं विद्या, श्री क्लीं कमला काम।
कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी, वर दे तू निष्काम॥
बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम॥

॥ माता अन्नपूर्णा की जय ॥

Annapurna Mata Ki Aarti Lyrics in English

Barambar Pranam, Maiya Barambar Pranam.

Jo Nahin Dhyave Tumhen Ambike, Kahan Use Vishram,
Annapurna Devi Naam Tiharo, Let Hot Sab Kaam.
Barambar Pranam, Maiya Barambar Pranam.

Pralay Yugantar Aur Janmantar, Kalantar Tak Naam,
Sur Suron Ki Rachna Karti, Kahan Krishna Kahan Ram.
Barambar Pranam, Maiya Barambar Pranam.

Choomahi Charan Chatur Chaturanan, Charu Chakradhar Shyam,
Chandrachud Chandranan Chakar, Shobha Lakhahi Lalam.
Barambar Pranam, Maiya Barambar Pranam.

Devi Dev! Dayaniya Dasha Mein, Daya-Daya Tab Naam,
Trahi-Trahi Sharnagat Vatsal, Sharan Roop Tab Dham.
Barambar Pranam, Maiya Barambar Pranam.

Shreem, Hreem Shraddha Shri Aim Vidya, Shri Kleem Kamala Kaam,
Kanti, Bhrantimayi, Kanti Shantimayi, Var De Tu Nishkam.
Barambar Pranam, Maiya Barambar Pranam.

Mata Annapurna Ki Jai.

Annapurna Mata Ki Aarti PDF Download | अन्नपूर्णा माता की आरती PDF

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Annapurna Mata Ki Aarti का अर्थ

  1. टेक: हे माँ, आपको बार-बार प्रणाम है।
  2. नाम की महिमा: हे अम्बिके, जो आपका ध्यान नहीं करता, उसे कहाँ विश्राम मिलेगा? आपका नाम “अन्नपूर्णा देवी” है — इसे लेते ही सब काम बन जाते हैं।
  3. अनंत नाम: प्रलय, युगों के बदलने, जन्मों और कालों के बीत जाने तक आपका नाम रहता है; आप ही देवताओं की रचना करती हैं — कृष्ण और राम भी आपकी महिमा के आगे क्या हैं।
  4. देव सेवा: चतुर ब्रह्मा और सुंदर चक्रधारी श्याम (विष्णु) आपके चरण चूमते हैं; चंद्रमा को सिर पर धारण करने वाले शिव आपके सेवक हैं और आपकी सुंदर शोभा निहारते हैं।
  5. दया की पुकार: हे देवी, हम दयनीय दशा में हैं, आपका नाम ही दया है; हे शरणागतों पर स्नेह करने वाली, रक्षा कीजिए — आपका धाम ही शरण है।
  6. बीज मंत्र: श्रीं, ह्रीं, ऐं, क्लीं — आप ही श्रद्धा, विद्या, लक्ष्मी और काम हैं; कांति और शांति से भरी माँ, हमें निष्काम वर दीजिए।

काशी की माँ अन्नपूर्णा की कथा

कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव ने कहा कि संसार माया है और अन्न भी माया है। माँ पार्वती ने यह दिखाने के लिए कि अन्न का महत्व क्या है, संसार से अन्न अदृश्य कर दिया। चारों ओर अकाल पड़ गया, देवता और मनुष्य भूख से व्याकुल हो गए। तब माँ पार्वती काशी में अन्नपूर्णा रूप में प्रकट हुईं और रसोई खोली; स्वयं शिव भिक्षापात्र लेकर उनसे भिक्षा माँगने आए। तभी से काशी विश्वनाथ के पास माँ अन्नपूर्णा का मंदिर है और दीपावली के समय वहाँ अन्नकूट पर स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन होते हैं।

Annapurna Mata Ki Aarti की विधि

  1. अन्नपूर्णा जयंती या किसी शुक्रवार को रसोई साफ़ करके चूल्हे और अन्न भंडार (चावल, आटे के डिब्बे) की पूजा करें।
  2. माँ अन्नपूर्णा के चित्र पर लाल चुनरी, सिंदूर, फूल और अक्षत चढ़ाएँ।
  3. चावल की खीर, हलवा या घर का बना सात्विक भोजन भोग लगाएँ।
  4. घी का दीपक जलाकर यह आरती गाएँ और अंत में किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराएँ — यही अन्नपूर्णा पूजा का सार है।

Annapurna Mata Ki Aarti के 7 नियम

  • रसोई साफ़ रखें; जूठे हाथ अन्न भंडार न छुएँ।
  • अन्न का अनादर न करें — थाली में खाना न छोड़ें।
  • आरती खड़े होकर, घी के दीपक से करें।
  • भोग पहले माँ को, फिर परिवार को।
  • पूजा के दिन किसी भूखे को भोजन ज़रूर दें।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।

अन्नपूर्णा माता की आरती के लाभ

  • मान्यता है कि घर में अन्न-धन की कभी कमी नहीं होती।
  • रसोई में बरकत और परिवार में संतोष रहता है।
  • दान-पुण्य की भावना बढ़ती है।
  • माँ पार्वती और भगवान शिव दोनों की कृपा मिलती है।

जय अम्बे गौरी, ओम जय लक्ष्मी माता और ॐ जय शिव ओंकारा भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

अन्नपूर्णा जयंती 2026 कब है?

मार्गशीर्ष पूर्णिमा को — 2026 में बुधवार, 23 दिसंबर को।

माँ अन्नपूर्णा का मंदिर कहाँ है?

सबसे प्रसिद्ध मंदिर वाराणसी (काशी) में काशी विश्वनाथ मंदिर के पास है। दीपावली के समय अन्नकूट पर वहाँ स्वर्णमयी अन्नपूर्णा के दर्शन होते हैं।

आरती में “श्रीं, ह्रीं, ऐं, क्लीं” क्यों आते हैं?

ये बीज मंत्र हैं — श्रीं लक्ष्मी का, ह्रीं भुवनेश्वरी का, ऐं सरस्वती (विद्या) का और क्लीं काम/आकर्षण का। आरती कहती है कि ये सब शक्तियाँ माँ अन्नपूर्णा में हैं।

अन्नपूर्णा पूजा कहाँ करें?

रसोई में, चूल्हे और अन्न भंडार के पास — क्योंकि माँ अन्न की देवी हैं।

अन्नपूर्णा माता की आरती PDF कैसे डाउनलोड करें?

इसी पेज पर ऊपर “अन्नपूर्णा माता की आरती PDF Download” सेक्शन में “PDF डाउनलोड करें” बटन पर टैप करें — PDF नए टैब में खुलेगी, फिर उसे मोबाइल या कंप्यूटर में सेव कर लें। PDF बिल्कुल मुफ़्त है और प्रिंट भी की जा सकती है। English PDF भी उपलब्ध है, और सभी आरती की PDF “आरती संग्रह PDF” पेज पर एक साथ मिलेंगी।

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