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श्री चित्रगुप्त जी की आरती (Shri Chitragupt Ji Ki Aarti) — ॐ जय चित्रगुप्त हरे, लिरिक्स हिंदी और English में, अर्थ और कलम-दवात पूजा विधि

अंतिम अपडेट: 7 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Shri Chitragupt Ji Ki Aarti – ॐ जय चित्रगुप्त हरे

🪔 भाई दूज 11 नवंबर 2026: तिलक मुहूर्त और चित्रगुप्त पूजा विधि →

Chitragupt Ji Ki Aarti (श्री चित्रगुप्त जी की आरती) “ॐ जय चित्रगुप्त हरे” कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त की आरती है। चित्रगुप्त जी ब्रह्मा जी के शरीर (काया) से प्रकट हुए, यमराज के दरबार में हर जीव के पाप-पुण्य लिखते हैं और कायस्थ समाज के आराध्य हैं। भाई दूज (यम द्वितीया) के दिन — 2026 में 11 नवंबर — चित्रगुप्त पूजा और कलम-दवात पूजा होती है, और उसके अंत में यही आरती गाई जाती है। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, अर्थ और पूजा विधि दी गई है।

Shri Chitragupt Ji Ki Aarti – ॐ जय चित्रगुप्त हरे

Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi — ॐ जय चित्रगुप्त हरे

ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।
भक्तजनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥

विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी।
भक्तों के प्रतिपालक, त्रिभुवन यश छायी॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरत, पीताम्बर राजै।
मातु इरावती, दक्षिणा, वाम अंग साजै॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

कष्ट निवारक, दुष्ट संहारक, प्रभु अंतर्यामी।
सृष्टि सम्हारन, जन दु:ख हारन, प्रकट भये स्वामी॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

कलम, दवात, शंख, पत्रिका, कर में अति सोहै।
वैजयन्ती वनमाला, त्रिभुवन मन मोहै॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

विश्व न्याय का कार्य सम्भाला, ब्रह्मा हर्षाये।
कोटि कोटि देवता तुम्हारे, चरणन में धाये॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

नृप सुदास अरु भीष्म पितामह, याद तुम्हें कीन्हा।
वेग, विलम्ब न कीन्हौं, इच्छित फल दीन्हा॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

दारा, सुत, भगिनी, सब अपने स्वारथ के कर्ता।
जाऊँ कहाँ शरण में किसकी, तुम तज मैं भर्ता॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

बन्धु, पिता तुम स्वामी, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

जो जन चित्रगुप्त जी की आरती, प्रेम सहित गावैं।
चौरासी से निश्चित छूटैं, इच्छित फल पावैं॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

न्यायाधीश बैकुंठ निवासी, पाप पुण्य लिखते।
‘नानक’ शरण तिहारे, आस न दूजी करते॥
॥ ॐ जय चित्रगुप्त हरे…॥

Chitragupt Ji Ki Aarti Lyrics in English

Om Jai Chitragupt Hare, Swami Jai Chitragupt Hare,
Bhaktajanon Ke Ichchhit, Phal Ko Purna Kare.

Vighna Vinashak Mangalkarta, Santan Sukhdayi,
Bhakton Ke Pratipalak, Tribhuvan Yash Chhayi.
॥ Om Jai Chitragupt Hare… ॥

Roop Chaturbhuj, Shyamal Murat, Pitambar Rajai,
Matu Iravati, Dakshina, Vaam Ang Sajai.
॥ Om Jai Chitragupt Hare… ॥

Kasht Nivarak, Dusht Sanharak, Prabhu Antaryami,
Srishti Samharan, Jan Dukh Haran, Prakat Bhaye Swami.
॥ Om Jai Chitragupt Hare… ॥

Kalam, Dawat, Shankh, Patrika, Kar Mein Ati Sohai,
Vaijayanti Vanmala, Tribhuvan Man Mohai.
॥ Om Jai Chitragupt Hare… ॥

Vishva Nyay Ka Karya Sambhala, Brahma Harshaye,
Koti Koti Devta Tumhare, Charanan Mein Dhaye.
॥ Om Jai Chitragupt Hare… ॥

Nrip Sudas Aru Bhishma Pitamah, Yaad Tumhen Keenha,
Veg, Vilamb Na Keenhau, Ichchhit Phal Deenha.
॥ Om Jai Chitragupt Hare… ॥

Dara, Sut, Bhagini, Sab Apne Swarath Ke Karta,
Jaun Kahan Sharan Mein Kiski, Tum Taj Main Bharta.
॥ Om Jai Chitragupt Hare… ॥

Bandhu, Pita Tum Swami, Sharan Gahun Kiski,
Tum Bin Aur Na Dooja, Aas Karun Jiski.
॥ Om Jai Chitragupt Hare… ॥

Jo Jan Chitragupt Ji Ki Aarti, Prem Sahit Gavain,
Chaurasi Se Nishchit Chhootain, Ichchhit Phal Pavain.
॥ Om Jai Chitragupt Hare… ॥

Nyayadhish Baikunth Nivasi, Paap Punya Likhte,
‘Nanak’ Sharan Tihare, Aas Na Dooji Karte.
॥ Om Jai Chitragupt Hare… ॥

Chitragupt Ji Ki Aarti का अर्थ

  1. टेक: हे स्वामी चित्रगुप्त, आपकी जय हो — आप भक्तों के मनचाहे फल पूरे करते हैं।
  2. मंगलकर्ता: आप विघ्नों का नाश करने वाले, मंगल करने वाले और संतों को सुख देने वाले हैं; भक्तों का पालन करते हैं और तीनों लोकों में आपका यश फैला है।
  3. रूप: चार भुजाओं वाला श्यामल रूप, पीला पीतांबर; बाईं ओर माता इरावती और दक्षिणा (उनकी दोनों पत्नियाँ) शोभा देती हैं।
  4. स्वामी: आप कष्ट दूर करने वाले, दुष्टों का संहार करने वाले और अंतर्यामी हैं; सृष्टि को सँभालने और लोगों के दुख हरने के लिए प्रकट हुए।
  5. हाथों में: कलम, दवात, शंख और पत्रिका (लेखा पुस्तक) हाथों में शोभा देते हैं; वैजयंती वनमाला तीनों लोकों का मन मोह लेती है।
  6. न्याय का कार्य: आपने संसार के न्याय का काम सँभाला, जिससे ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए; करोड़ों देवता आपके चरणों में आए।
  7. भक्तों की कथा: राजा सुदास और भीष्म पितामह ने आपको याद किया, तो आपने बिना देर किए उन्हें मनचाहा फल दिया।
  8. सच्ची शरण: पत्नी, पुत्र, बहन — सब अपने स्वार्थ के हैं; आपको छोड़कर मैं किसकी शरण जाऊँ, आप ही मेरे पालनहार हैं। आप ही बंधु, पिता और स्वामी हैं; आपके सिवा दूसरा कोई नहीं जिससे आशा रखूँ।
  9. फलश्रुति: जो प्रेम से चित्रगुप्त जी की आरती गाते हैं, वे चौरासी लाख योनियों के चक्र से निश्चित छूटते हैं और मनचाहा फल पाते हैं। हे न्यायाधीश, वैकुंठवासी, पाप-पुण्य लिखने वाले — ‘नानक’ आपकी शरण में है, किसी और की आशा नहीं करता।

चित्रगुप्त जी कौन हैं

पुराणों के अनुसार सृष्टि के बाद ब्रह्मा जी ने 11,000 वर्ष ध्यान किया, तब उनकी काया (शरीर) से हाथ में कलम-दवात लिए एक दिव्य पुरुष प्रकट हुए। चित्त में गुप्त रूप से रहने के कारण उनका नाम चित्रगुप्त पड़ा, और काया से जन्म लेने के कारण उनके वंशज “कायस्थ” कहलाए। ब्रह्मा जी ने उन्हें यमराज के साथ हर जीव के कर्मों का लेखा रखने का काम दिया। भाई दूज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, इसलिए उसी दिन यम और चित्रगुप्त दोनों की पूजा होती है।

Chitragupt Ji Ki Aarti की विधि

  1. भाई दूज (यम द्वितीया) के दिन चौकी पर चित्रगुप्त जी का चित्र रखें; साथ में नई कलम, दवात (स्याही), बही-खाता और कागज़ रखें।
  2. रोली, अक्षत, फूल, चंदन चढ़ाएँ; कलम-दवात पर भी तिलक करें।
  3. कागज़ पर “श्री गणेशाय नमः”, “ॐ चित्रगुप्ताय नमः” और अपनी साल भर की आय-व्यय लिखकर चित्रगुप्त जी को अर्पित करने की परंपरा है।
  4. चित्रगुप्त कथा सुनें, फिर घी का दीपक जलाकर यह आरती गाएँ। उस दिन कलम से लिखने का काम पूजा के बाद ही शुरू करें। भाई दूज की पूरी विधि यहाँ पढ़ें।

Chitragupt Ji Ki Aarti के 7 नियम

  • आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
  • पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
  • आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
  • आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
  • उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।

श्री चित्रगुप्त जी की आरती के लाभ

  • मान्यता है कि बुद्धि, लेखन और हिसाब-किताब के काम में सफलता मिलती है।
  • कर्मों के प्रति सजगता आती है — हर कर्म का लेखा होता है, यह याद रहता है।
  • नौकरी, व्यापार और पढ़ाई में तरक्की की मान्यता है।
  • फलश्रुति के अनुसार जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग खुलता है।

भाई दूज पूजा विधि, जय गणेश देवा और व्रत कैलेंडर भी देखें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

चित्रगुप्त पूजा 2026 कब है?

भाई दूज (कार्तिक शुक्ल द्वितीया, यम द्वितीया) को — 2026 में बुधवार, 11 नवंबर को। कई जगह चैत्र शुक्ल द्वितीया को भी चित्रगुप्त जयंती मनाई जाती है।

कलम-दवात पूजा क्यों होती है?

चित्रगुप्त जी कलम-दवात से कर्मों का लेखा लिखते हैं, इसलिए उनकी पूजा में कलम, दवात और बही-खाते की पूजा होती है। कायस्थ परिवारों में उस दिन पूजा से पहले कलम नहीं उठाई जाती।

चित्रगुप्त जी की पत्नियाँ कौन हैं?

आरती के अनुसार माता इरावती और दक्षिणा (शोभावती/नंदिनी नाम भी मिलते हैं)। उनके 12 पुत्रों से कायस्थों की 12 उपजातियाँ मानी जाती हैं।

आरती में ‘नानक’ कौन हैं?

अंतिम पद में ‘नानक’ की छाप है, जिन्हें इस आरती का रचयिता माना जाता है; ये सिख गुरु नानक देव जी नहीं हैं।

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