Ekadashi Kab Hai (एकादशी कब है?) — यह सवाल हर पंद्रह दिन में करोड़ों भक्त पूछते हैं। नीचे के बॉक्स में अगली एकादशी की तारीख, एकादशी तिथि का समय और पारण का समय आपके शहर के सूर्योदय के अनुसार अपने-आप दिखता है, और उसके नीचे इस साल और अगले साल की पूरी एकादशी लिस्ट है। जब एकादशी तिथि दो दिनों में बँटती है, तो स्मार्त (गृहस्थ) और वैष्णव — दोनों की तारीख अलग-अलग दिखाई जाती है।

अगली एकादशी · देहरादून
रमा एकादशी
5 नवंबर 2026, गुरुवार 7 दिन बाकी
- एकादशी तिथि
- 4 नवं 11:05 – 5 नवं 10:37
- पारण (व्रत खोलने का समय)
- 6 नवं, 06:35 – 08:45
इसके बाद: देवउठनी एकादशी — 20 नवंबर 2026, शुक्रवार
एकादशी 2026 सूची (देहरादून)
| तारीख | एकादशी | पारण |
|---|---|---|
| 14 जनवरी 2026, बुधवार | षटतिला एकादशी माघ कृष्ण | 15 जन, 07:15 – 09:20 |
| 29 जनवरी 2026, गुरुवार | जया एकादशी माघ शुक्ल | 30 जन, 07:09 – 09:18 |
| 13 फ़रवरी 2026, शुक्रवार | विजया एकादशी फाल्गुन कृष्ण | 14 फ़र, 06:59 – 09:12 |
| 27 फ़रवरी 2026, शुक्रवार | आमलकी एकादशी फाल्गुन शुक्ल | 28 फ़र, 06:45 – 09:03 |
| 15 मार्च 2026, रविवार | पापमोचनी एकादशी चैत्र कृष्ण | 16 मार्च, 06:26 – 08:50 |
| 29 मार्च 2026, रविवार | कामदा एकादशी चैत्र शुक्ल | 30 मार्च, 06:09 – 07:12 |
| 13 अप्रैल 2026, सोमवार | वरूथिनी एकादशी वैशाख कृष्ण | 14 अप्रै, 06:57 – 08:26 |
| 27 अप्रैल 2026, सोमवार | मोहिनी एकादशी वैशाख शुक्ल | 28 अप्रै, 05:37 – 08:16 |
| 13 मई 2026, बुधवार | अपरा एकादशी ज्येष्ठ कृष्ण | 14 मई, 05:24 – 08:08 |
| 26 मई 2026, मंगलवार वैष्णव: 27 मई | पद्मिनी एकादशी अधिक ज्येष्ठ शुक्ल | 27 मई, 13:38 – 16:25 |
| 11 जून 2026, गुरुवार | परमा एकादशी अधिक ज्येष्ठ कृष्ण | 12 जून, 05:15 – 08:04 |
| 25 जून 2026, गुरुवार | निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल | 26 जून, 05:17 – 08:06 |
| 11 जुलाई 2026, शनिवार | योगिनी एकादशी आषाढ़ कृष्ण | 12 जुला, 05:24 – 08:12 |
| 25 जुलाई 2026, शनिवार | देवशयनी एकादशी आषाढ़ शुक्ल | 26 जुला, 05:32 – 08:17 |
| 9 अगस्त 2026, रविवार | कामिका एकादशी श्रावण कृष्ण | 10 अग, 05:41 – 08:02 |
| 23 अगस्त 2026, रविवार वैष्णव: 24 अग | पुत्रदा एकादशी श्रावण शुक्ल | 24 अग, 13:38 – 16:14 |
| 7 सितंबर 2026, सोमवार | अजा एकादशी भाद्रपद कृष्ण | 8 सितं, 05:58 – 08:29 |
| 22 सितंबर 2026, मंगलवार | परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद शुक्ल | 23 सितं, 06:06 – 08:32 |
| 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार | इंदिरा एकादशी आश्विन कृष्ण | 7 अक्टू, 06:16 – 08:35 |
| 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार | पापांकुशा एकादशी आश्विन शुक्ल | 23 अक्टू, 06:25 – 08:39 |
| 5 नवंबर 2026, गुरुवार | रमा एकादशी कार्तिक कृष्ण | 6 नवं, 06:35 – 08:45 |
| 20 नवंबर 2026, शुक्रवार वैष्णव: 21 नवं | देवउठनी एकादशी कार्तिक शुक्ल | 21 नवं, 13:06 – 15:12 |
| 4 दिसंबर 2026, शुक्रवार | उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष कृष्ण | 5 दिसं, 06:59 – 09:03 |
| 20 दिसंबर 2026, रविवार | मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल | 21 दिसं, 07:10 – 09:12 |
एकादशी 2027 सूची (देहरादून)
| तारीख | एकादशी | पारण |
|---|---|---|
| 3 जनवरी 2027, रविवार | सफला एकादशी पौष कृष्ण | 4 जन, 07:15 – 09:18 |
| 19 जनवरी 2027, मंगलवार | पौष पुत्रदा एकादशी पौष शुक्ल | 20 जन, 07:14 – 09:20 |
| 2 फ़रवरी 2027, मंगलवार | षटतिला एकादशी माघ कृष्ण | 3 फ़र, 07:07 – 09:17 |
| 17 फ़रवरी 2027, बुधवार | जया एकादशी माघ शुक्ल | 18 फ़र, 06:55 – 09:10 |
| 3 मार्च 2027, बुधवार वैष्णव: 4 मार्च | विजया एकादशी फाल्गुन कृष्ण | 4 मार्च, 14:03 – 15:59 |
| 18 मार्च 2027, गुरुवार | आमलकी एकादशी फाल्गुन शुक्ल | 19 मार्च, 07:14 – 08:48 |
| 2 अप्रैल 2027, शुक्रवार | पापमोचनी एकादशी चैत्र कृष्ण | 3 अप्रै, 13:36 – 16:07 |
| 17 अप्रैल 2027, शनिवार | कामदा एकादशी चैत्र शुक्ल | 18 अप्रै, 05:48 – 07:43 |
| 2 मई 2027, रविवार | वरूथिनी एकादशी वैशाख कृष्ण | 3 मई, 05:33 – 08:14 |
| 16 मई 2027, रविवार | मोहिनी एकादशी वैशाख शुक्ल | 17 मई, 05:23 – 08:07 |
| 1 जून 2027, मंगलवार | अपरा एकादशी ज्येष्ठ कृष्ण | 2 जून, 05:16 – 08:04 |
| 14 जून 2027, सोमवार | निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल | 15 जून, 13:42 – 16:32 |
| 30 जून 2027, बुधवार | योगिनी एकादशी आषाढ़ कृष्ण | 1 जुला, 05:19 – 08:08 |
| 14 जुलाई 2027, बुधवार | देवशयनी एकादशी आषाढ़ शुक्ल | 15 जुला, 05:26 – 08:13 |
| 29 जुलाई 2027, गुरुवार वैष्णव: 30 जुला | कामिका एकादशी श्रावण कृष्ण | 30 जुला, 13:46 – 16:29 |
| 12 अगस्त 2027, गुरुवार | पुत्रदा एकादशी श्रावण शुक्ल | 13 अग, 13:42 – 16:22 |
| 28 अगस्त 2027, शनिवार | अजा एकादशी भाद्रपद कृष्ण | 29 अग, 05:52 – 08:27 |
| 11 सितंबर 2027, शनिवार | परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद शुक्ल | 12 सितं, 06:00 – 08:29 |
| 26 सितंबर 2027, रविवार | इंदिरा एकादशी आश्विन कृष्ण | 27 सितं, 06:08 – 08:32 |
| 11 अक्टूबर 2027, सोमवार | पापांकुशा एकादशी आश्विन शुक्ल | 12 अक्टू, 06:17 – 08:36 |
| 25 अक्टूबर 2027, सोमवार वैष्णव: 26 अक्टू | रमा एकादशी कार्तिक कृष्ण | 26 अक्टू, 13:08 – 15:22 |
| 10 नवंबर 2027, बुधवार | देवउठनी एकादशी कार्तिक शुक्ल | 11 नवं, 06:39 – 08:48 |
| 24 नवंबर 2027, बुधवार | उत्पन्ना एकादशी मार्गशीर्ष कृष्ण | 25 नवं, 06:51 – 08:56 |
| 9 दिसंबर 2027, गुरुवार | मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष शुक्ल | 10 दिसं, 13:11 – 15:14 |
| 23 दिसंबर 2027, गुरुवार | सफला एकादशी पौष कृष्ण | 24 दिसं, 07:11 – 09:13 |
तारीखें देहरादून के सूर्योदय के अनुसार स्मार्त परंपरा की हैं। समय लगभग हैं, अपने स्थानीय पंचांग से मिलान कर लें।
इस लेख में
Ekadashi Kab Hai: एकादशी की तारीख कैसे तय होती है?
हिंदू पंचांग में हर महीने दो एकादशी आती हैं — शुक्ल पक्ष की एकादशी (अमावस्या के ग्यारहवें दिन) और कृष्ण पक्ष की एकादशी (पूर्णिमा के ग्यारहवें दिन)। तिथि चंद्रमा और सूर्य की दूरी से बनती है, इसलिए वह आधी रात या दोपहर में भी शुरू हो सकती है। व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि हो — इसे उदया तिथि कहते हैं।
यही कारण है कि कैलेंडर में “एकादशी 4 नवंबर सुबह 11 बजे से” लिखा हो, तब भी व्रत 5 नवंबर को रखा जाता है, क्योंकि 5 नवंबर के सूर्योदय पर एकादशी तिथि रहती है।
Ekadashi Kab Hai — तारीख में भ्रम क्यों होता है?
- तिथि और तारीख अलग हैं: तिथि लगभग 19 से 26 घंटे की होती है और किसी भी समय शुरू हो सकती है, जबकि तारीख आधी रात को बदलती है।
- स्मार्त और वैष्णव नियम: कभी एकादशी तिथि किसी भी सूर्योदय को नहीं छूती, या दो सूर्योदयों को छूती है। ऐसे में गृहस्थ (स्मार्त) पहले दिन और वैष्णव/इस्कॉन दूसरे दिन व्रत रखते हैं।
- शहर का अंतर: सूर्योदय हर शहर में अलग होता है। इसलिए दिल्ली और देहरादून या भारत और अमेरिका में एकादशी की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
- अलग-अलग पंचांग: कुछ वेबसाइट और कैलेंडर केवल एक परंपरा की तारीख लिखते हैं, बिना कारण बताए — इसी से लोग उलझ जाते हैं।
स्मार्त और वैष्णव एकादशी में अंतर
| बिंदु | स्मार्त (गृहस्थ) | वैष्णव / इस्कॉन |
|---|---|---|
| कौन मानता है | अधिकतर गृहस्थ परिवार | वैष्णव संप्रदाय, इस्कॉन, संन्यासी |
| नियम | सूर्योदय के समय एकादशी तिथि | अरुणोदय (सूर्योदय से 96 मिनट पहले) पर दशमी न हो |
| तिथि दो दिन में बँटे तो | पहले दिन व्रत | दूसरे दिन व्रत |
| पारण | अगले दिन द्वादशी में | अगले दिन द्वादशी में |
उदाहरण: देवउठनी एकादशी 2026 कब है?
2026 में देवउठनी एकादशी की तिथि 20 नवंबर सुबह लगभग 7:15 से 21 नवंबर सुबह लगभग 6:31 तक है (दिल्ली)। 20 नवंबर के सूर्योदय पर अभी दशमी थी और 21 नवंबर के सूर्योदय से पहले एकादशी खत्म हो गई — यानी तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती। इसलिए स्मार्त व्रत 20 नवंबर को और वैष्णव व्रत 21 नवंबर को है। दोनों तारीखें सही हैं — बस परंपरा अलग है।
साल में 24 या 26 एकादशी?
सामान्य वर्ष में 12 महीनों में 24 एकादशी आती हैं। जिस वर्ष अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) होता है, उसमें दो एकादशी और जुड़ जाती हैं — पद्मिनी (शुक्ल) और परमा (कृष्ण) — इसलिए उस साल 26 एकादशी होती हैं। 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास था, इसलिए इस साल पद्मिनी और परमा एकादशी भी आईं।
सभी एकादशियों के नाम और महत्व
अगली एकादशी कौन-सी है, यह जानने के लिए नीचे की तालिका देखें। इसमें उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार हर महीने की दोनों एकादशियाँ दी गई हैं — पहले कृष्ण पक्ष, फिर शुक्ल पक्ष।
| मास | कृष्ण पक्ष एकादशी | शुक्ल पक्ष एकादशी |
|---|---|---|
| चैत्र | पापमोचनी — पापों से मुक्ति | कामदा — मनोकामना पूरी करने वाली |
| वैशाख | वरूथिनी — सौभाग्य और रक्षा | मोहिनी — विष्णु के मोहिनी रूप से जुड़ी |
| ज्येष्ठ | अपरा — अपार पुण्य देने वाली | निर्जला — बिना जल का सबसे कठिन व्रत |
| आषाढ़ | योगिनी — रोगों से मुक्ति की मान्यता | देवशयनी — विष्णु योगनिद्रा में, चातुर्मास आरंभ |
| श्रावण | कामिका — तुलसी पूजा का विशेष फल | पुत्रदा — संतान सुख के लिए |
| भाद्रपद | अजा — राजा हरिश्चंद्र की कथा | परिवर्तिनी (पार्श्व) — योगनिद्रा में विष्णु करवट बदलते हैं |
| आश्विन | इंदिरा — पितरों की मुक्ति के लिए (पितृ पक्ष) | पापांकुशा — पापों पर अंकुश |
| कार्तिक | रमा — माता लक्ष्मी (रमा) को समर्पित | देवउठनी (प्रबोधिनी) — विष्णु जागते हैं, तुलसी विवाह |
| मार्गशीर्ष | उत्पन्ना — एकादशी देवी का प्राकट्य, व्रत आरंभ के लिए शुभ | मोक्षदा — मोक्ष देने वाली, गीता जयंती |
| पौष | सफला — कार्यों में सफलता | पौष पुत्रदा — संतान सुख के लिए |
| माघ | षटतिला — तिल के छह प्रयोग | जया — पिशाच योनि से मुक्ति की कथा |
| फाल्गुन | विजया — विजय देने वाली, श्रीराम से जुड़ी | आमलकी — आँवले के वृक्ष की पूजा |
| अधिक मास | परमा — पुरुषोत्तम मास की एकादशी | पद्मिनी — पुरुषोत्तम मास की एकादशी |
एकादशी व्रत विधि
- दशमी की शाम: सूर्यास्त से पहले सात्विक भोजन करें और अगले दिन व्रत का मन बना लें।
- एकादशी की सुबह: स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
- पूजा: विष्णु जी को पीले फूल, तुलसी दल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ, दीपक जलाएँ और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- कथा और आरती: उस एकादशी की कथा सुनें और ॐ जय जगदीश हरे आरती करें।
- दिन भर: अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला, फलाहार या एक समय फलाहार करें। संभव हो तो रात में भजन-कीर्तन और जागरण करें।
- द्वादशी: अगले दिन पारण के समय में किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन या दान देकर व्रत खोलें।
अगली एकादशी का पारण: नियम
- पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में ही करें; द्वादशी खत्म होने के बाद पारण करना दोष माना जाता है।
- हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) में पारण न करें — हरि वासर खत्म होने का इंतज़ार करें।
- पारण का सबसे अच्छा समय प्रातःकाल है। अगर प्रातःकाल में हरि वासर चल रहा हो, तो मध्याह्न (दोपहर) के बाद पारण करें।
- पारण तुलसी दल डालकर जल, फल या सात्विक भोजन से करें। ऊपर की सूची में हर एकादशी का पारण समय आपके शहर के अनुसार दिया है।
एकादशी व्रत में क्या खाएँ, क्या न खाएँ
| खा सकते हैं | न खाएँ |
|---|---|
| फल, दूध, दही, मेवे | चावल और चावल से बनी चीज़ें |
| साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा और राजगिरा का आटा | गेहूँ, दालें और अन्य अनाज |
| आलू, शकरकंद, अरबी | प्याज़, लहसुन, मांस, अंडा |
| सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा | साधारण नमक, मसालेदार और तला-भुना भोजन |
व्रत के प्रकार
- निर्जला: पूरे दिन बिना जल के — सबसे कठिन व्रत।
- जलाहार: केवल जल लेकर।
- फलाहार: फल, दूध और व्रत की चीज़ें लेकर।
- एक समय: दिन में एक बार फलाहार।
- बीमार, गर्भवती महिलाएँ, बच्चे और बुज़ुर्ग अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार व्रत रखें और ज़रूरत हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
विदेश में Ekadashi Kab Hai? (USA, UK, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया)
विदेश में रहने वाले भक्त भारत की तारीख देखकर व्रत न रखें। तिथि पूरी दुनिया में एक ही क्षण पर शुरू होती है, लेकिन सूर्योदय हर देश में अलग समय पर होता है। इसलिए अमेरिका या कनाडा में एकादशी अक्सर भारत से एक दिन पहले पड़ती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में उसी दिन या एक दिन बाद। ऊपर के बॉक्स में अपना शहर — जैसे न्यूयॉर्क, लंदन, टोरंटो या सिडनी — चुनें; तारीख और पारण समय उसी शहर के सूर्योदय के अनुसार अपने-आप बदल जाएगा।
एकादशी का महत्व
एकादशी भगवान विष्णु को सबसे प्रिय तिथि मानी जाती है। पद्म पुराण के अनुसार मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी को भगवान विष्णु के शरीर से एक देवी प्रकट हुईं, जिन्होंने राक्षस मुर का वध किया; भगवान ने उन्हें “एकादशी” नाम दिया और वरदान दिया कि इस दिन व्रत करने वालों के पाप नष्ट होंगे। इसीलिए एकादशी व्रत शुरू करने के लिए उत्पन्ना एकादशी को शुभ माना जाता है।
आने वाले सभी व्रत और त्योहार व्रत-त्योहार कैलेंडर में और आज की तिथि आज के पंचांग में देखें।
Ekadashi Kab Hai — in English
When is Ekadashi? The box at the top of this page shows the next Ekadashi for your city — its date, tithi timings and Parana time — and below it the full Ekadashi list for this year and next. The fast is kept on the day Ekadashi tithi prevails at sunrise. When the tithi is split across two days, Smarta householders fast on the first day and Vaishnava/ISKCON followers on the second; both dates are shown. Read more on Wikipedia.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Ekadashi Kab Hai? अगली एकादशी कब है?
अगली एकादशी की तारीख, तिथि का समय और पारण समय इस पेज के सबसे ऊपर वाले बॉक्स में आपके शहर के अनुसार अपने-आप दिखता है। हर महीने दो एकादशी आती हैं — एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में।
आज एकादशी है क्या?
अगर आज एकादशी है, तो ऊपर के बॉक्स में “आज एकादशी है” लिखा दिखेगा। तारीख सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) से तय होती है, इसलिए अपना शहर चुनकर देखें।
एकादशी का पारण कब करें?
अगले दिन द्वादशी को सूर्योदय के बाद, हरि वासर समाप्त होने पर और द्वादशी तिथि खत्म होने से पहले पारण करें। सबसे अच्छा समय प्रातःकाल है; ऊपर दी गई सूची में हर एकादशी का पारण समय दिया है।
स्मार्त और वैष्णव एकादशी में क्या अंतर है?
जब एकादशी तिथि दो दिनों में बँट जाती है, तब गृहस्थ (स्मार्त) पहले दिन और वैष्णव व इस्कॉन परंपरा के लोग दूसरे दिन व्रत रखते हैं। बाकी समय दोनों की तारीख एक ही होती है।
एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाते?
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार एकादशी पर अन्न, विशेषकर चावल, खाना वर्जित है। व्रत न रखने वाले भी इस दिन चावल नहीं खाते। फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े का आटा लिया जा सकता है।
When is the next Ekadashi?
The next Ekadashi date, tithi timings and Parana time for your city are shown in the box at the top of this page and update automatically. There are two Ekadashis every month — one in Shukla paksha and one in Krishna paksha.