इस टूल से जानें कि आज ब्रह्म मुहूर्त का समय आपके शहर में कितने बजे से कितने बजे तक है। शहर और तारीख चुनते ही ब्रह्म मुहूर्त का समय (Brahma Muhurat Time Today) — शुरुआत और समाप्ति — उस दिन का सूर्योदय, और अगले 7 दिनों की तालिका दिख जाती है। जो लोग सुबह जल्दी उठकर जप, ध्यान, पूजा या पढ़ाई करना चाहते हैं, उनके लिए यह जानना उपयोगी है कि “ब्रह्म मुहूर्त कितने बजे होता है” — क्योंकि यह समय हर शहर और हर मौसम में अलग होता है।
दिल्ली · 4 नवंबर 2026, बुधवार
अगले 7 दिन का ब्रह्म मुहूर्त — दिल्ली
| तारीख | ब्रह्म मुहूर्त | सूर्योदय |
|---|---|---|
| 4 नवं, बु | सुबह 4:51 – सुबह 5:43 | सुबह 6:35 |
| 5 नवं, गु | सुबह 4:51 – सुबह 5:43 | सुबह 6:35 |
| 6 नवं, शु | सुबह 4:52 – सुबह 5:44 | सुबह 6:36 |
| 7 नवं, शन | सुबह 4:52 – सुबह 5:44 | सुबह 6:37 |
| 8 नवं, रव | सुबह 4:53 – सुबह 5:45 | सुबह 6:38 |
| 9 नवं, सो | सुबह 4:53 – सुबह 5:46 | सुबह 6:38 |
| 10 नवं, मं | सुबह 4:54 – सुबह 5:46 | सुबह 6:39 |
गणना: पिछले सूर्यास्त से सूर्योदय तक की रात को 15 मुहूर्तों में बाँटा गया है; ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का दूसरा मुहूर्त (14वाँ) है। कई जगह इसे सीधे "सूर्योदय से 96 से 48 मिनट पहले" भी लिखा जाता है — दोनों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
ब्रह्म मुहूर्त क्या है?
हिंदू परंपरा में समय को मुहूर्त में बाँटा जाता है। एक पूरा दिन-रात (अहोरात्र) 30 मुहूर्तों का माना जाता है — 15 मुहूर्त दिन के और 15 रात के। सूर्योदय से ठीक पहले का एक विशेष मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त (ब्राह्म मुहूर्त) कहलाता है। “ब्रह्म” शब्द सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी से भी जुड़ा है और “ब्रह्म” यानी ज्ञान व परम सत्य से भी। इसलिए इस समय को ज्ञान, साधना और नई शुरुआत का समय माना गया है।
रात का अंधेरा ढल रहा होता है, वातावरण शांत होता है, शोर कम होता है और मन अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। यही कारण है कि ऋषि-मुनियों से लेकर आज के विद्यार्थियों तक, बहुत से लोग इस समय को जागने और भीतर की ओर ध्यान देने के लिए सबसे अच्छा मानते हैं।
शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त में जागने की बात कई प्राचीन ग्रंथों में मिलती है। मनुस्मृति (अध्याय 4) में कहा गया है कि ब्राह्म मुहूर्त में जागकर धर्म और अर्थ का चिंतन करना चाहिए। आयुर्वेद के ग्रंथ अष्टांग हृदय के दिनचर्या प्रसंग में स्वस्थ व्यक्ति को आयु की रक्षा के लिए ब्राह्म मुहूर्त में उठने की सलाह दी गई है। इसके अलावा लोक-परंपरा, संत-वाणी और विभिन्न संप्रदायों की दिनचर्या में भी प्रातःकाल जल्दी उठने पर बहुत ज़ोर है। ब्रह्म मुहूर्त की ठीक-ठीक गणना को लेकर अलग-अलग परंपराओं में थोड़ा अंतर भी मिलता है, जिसकी चर्चा नीचे की गई है।
यह टूल ब्रह्म मुहूर्त का समय कैसे निकालता है?
आप भारत और विदेश के लगभग 215 शहरों में से अपना शहर चुनते हैं और तारीख — जो पहले से आज की होती है। इसके बाद टूल यह गणना करता है:
- रात की लंबाई: पिछले दिन के सूर्यास्त से उस दिन के सूर्योदय तक का पूरा समय निकाला जाता है। यह समय उस शहर के अक्षांश, देशांतर और तारीख पर निर्भर करता है।
- रात के 15 मुहूर्त: इस रात को 15 बराबर भागों में बाँटा जाता है। हर भाग रात का एक मुहूर्त है।
- 14वाँ मुहूर्त = ब्रह्म मुहूर्त: रात का 14वाँ मुहूर्त, यानी सूर्योदय से पहले का अंतिम से दूसरा मुहूर्त, ब्रह्म मुहूर्त है। यह सूर्योदय − 2 मुहूर्त से शुरू होकर सूर्योदय − 1 मुहूर्त पर समाप्त होता है। इसके बाद का 15वाँ मुहूर्त सूर्योदय तक चलता है।
- 7 दिन की तालिका: चुनी हुई तारीख से आगे के 7 दिनों का ब्रह्म मुहूर्त और सूर्योदय एक साथ दिखते हैं, ताकि आप पूरे सप्ताह की दिनचर्या तय कर सकें।
समय उस शहर के स्थानीय समय में दिखता है। विदेश का शहर चुनेंगे तो वहीं की घड़ी का समय मिलेगा।
मुहूर्त हमेशा 48 मिनट का क्यों नहीं होता?
अक्सर पढ़ने को मिलता है कि एक मुहूर्त 48 मिनट का होता है। यह बात तब सही है जब दिन और रात दोनों 12-12 घंटे के हों, यानी विषुव (मार्च और सितंबर के आसपास) के समय। बाकी दिनों में रात की लंबाई बदलती रहती है:
- सर्दियों में रात लंबी होती है, इसलिए रात का एक मुहूर्त 48 मिनट से लंबा हो जाता है — उत्तर भारत में दिसंबर के आसपास लगभग 54–55 मिनट।
- गर्मियों में रात छोटी होती है, इसलिए रात का मुहूर्त छोटा हो जाता है — उत्तर भारत में जून के आसपास लगभग 40 मिनट।
इसलिए ब्रह्म मुहूर्त सामान्यतः सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले शुरू होता है और लगभग 48 मिनट चलता है — पर मौसम के अनुसार यह अवधि 40 मिनट से लेकर लगभग एक घंटे तक हो सकती है।
प्रचलित नियम: सूर्योदय से 96 से 48 मिनट पहले
बहुत से लोग एक सरल, स्थिर नियम मानते हैं — सूर्योदय से 96 मिनट पहले से 48 मिनट पहले तक ब्रह्म मुहूर्त। यह नियम मुहूर्त को हमेशा 48 मिनट मानकर बना है। विषुव के आसपास यह टूल की गणना के लगभग बराबर आता है, लेकिन सर्दियों और गर्मियों में दोनों में कुछ मिनट का अंतर आ जाता है। टूल यह बात परिणाम के साथ बताता भी है। दोनों में से कोई “गलत” नहीं है — यह परंपरा का अंतर है। जो रात को 15 भागों में बाँटने वाली पद्धति मानते हैं, वे टूल का समय देखें; जो स्थिर नियम मानते हैं, वे सूर्योदय से 96 और 48 मिनट घटाकर समय निकाल सकते हैं।
मौसम के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त — एक अनुमान
नीचे की तालिका उत्तर भारत (दिल्ली के आसपास) का मोटा अनुमान है, ताकि समझ आए कि साल भर में समय कितना बदलता है। अपने शहर का सही समय ऊपर के टूल में देखें।
| मौसम / समय | रात का एक मुहूर्त लगभग | सूर्योदय लगभग | ब्रह्म मुहूर्त लगभग |
|---|---|---|---|
| गर्मी (जून के आसपास) | 40 मिनट | 5:25 बजे | 4:05 से 4:45 बजे |
| विषुव (मार्च / सितंबर के आसपास) | 48 मिनट | 6:10 बजे | 4:34 से 5:22 बजे |
| सर्दी (दिसंबर के आसपास) | 55 मिनट | 7:10 बजे | 5:20 से 6:15 बजे |
दक्षिण भारत में, जो भूमध्य रेखा के ज़्यादा पास है, दिन-रात की लंबाई साल भर में कम बदलती है, इसलिए वहाँ ब्रह्म मुहूर्त का समय भी कम घटता-बढ़ता है। पूर्वोत्तर भारत में सूर्योदय जल्दी होता है, इसलिए वहाँ ब्रह्म मुहूर्त पश्चिम भारत की तुलना में काफ़ी पहले आता है — पूरे देश में एक ही घड़ी (IST) होने के कारण यह अंतर एक घंटे के आसपास तक हो सकता है।
ब्रह्म मुहूर्त में क्या करें?
परंपरा में इस समय को सात्त्विक कामों के लिए सबसे अच्छा माना गया है। अपनी सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार इनमें से कुछ भी चुन सकते हैं:
- जागना और भगवान का स्मरण: आँख खुलते ही कुछ क्षण शांत बैठकर इष्टदेव को याद करें। कई लोग हथेलियों के दर्शन करके दिन की शुरुआत करते हैं।
- जप: “ॐ नमः शिवाय”, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “श्री राम जय राम जय जय राम” जैसे सरल नाम-मंत्र का जप। गिनती के लिए जप माला काउंटर उपयोगी है।
- ध्यान और प्राणायाम: शांत वातावरण में 10–20 मिनट का ध्यान या सरल श्वास-अभ्यास। प्राणायाम किसी जानकार से सीखकर ही करें।
- पाठ और प्रार्थना: गीता, रामायण या चालीसा का पाठ — जैसे हनुमान चालीसा। रोज़ के पाठ गिनने के लिए पाठ काउंटर भी देख सकते हैं।
- पढ़ाई और याद करना: विद्यार्थियों के लिए यह शांत समय कठिन विषय दोहराने या याद करने के लिए अच्छा माना जाता है।
- स्नान और संध्या की तैयारी: कई परिवारों में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान और सूर्योदय के समय संध्या-वंदन या सूर्य अर्घ्य की परंपरा है।
- दिन की योजना: शांत मन से दिन के मुख्य काम तय करना भी इस समय का अच्छा उपयोग है।
ब्रह्म मुहूर्त में किन बातों से बचें?
- परंपरा में इस समय दोबारा सो जाना अच्छा नहीं माना गया — हालाँकि बीमार, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और देर रात काम करने वाले अपनी नींद पूरी करने को प्राथमिकता दें।
- भारी भोजन, क्रोध, बहस और नकारात्मक बातचीत से बचें।
- उठते ही मोबाइल, समाचार और सोशल मीडिया में खो जाना इस शांत समय को व्यर्थ कर देता है।
- तामसिक कामों और व्यसन से इस समय दूर रहना परंपरा में बताया गया है।
ब्रह्म मुहूर्त में उठने के लाभ — संयमित दृष्टि से
ब्रह्म मुहूर्त के लाभों के बारे में बहुत-सी बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें भी मिलती हैं। ईमानदारी से कहें तो कुछ बातें अनुभव और सामान्य समझ से जुड़ी हैं:
- सुबह के समय शोर और व्यवधान कम होता है, इसलिए ध्यान, पढ़ाई और पूजा में मन लगाना आसान होता है।
- रोज़ एक तय समय पर सोने और उठने की आदत से नींद की नियमितता बनती है, जिसे स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।
- सुबह जल्दी उठने से दिन की शुरुआत बिना हड़बड़ी के होती है।
लेकिन जल्दी उठने का अर्थ नींद कम करना नहीं है। अगर आप 4–5 बजे उठना चाहते हैं तो रात को उसी हिसाब से जल्दी सोएँ। किसी स्वास्थ्य समस्या में दिनचर्या बदलने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। ब्रह्म मुहूर्त कोई चमत्कारी उपाय नहीं, बल्कि एक अच्छी दिनचर्या का आधार है।
ब्रह्म मुहूर्त से जुड़ी मान्यताएँ और तथ्य
- मान्यता: ब्रह्म मुहूर्त हमेशा सुबह 4 बजे होता है। तथ्य: यह सूर्योदय पर निर्भर है। उत्तर भारत में भरी गर्मी में यह 4 बजे के आसपास शुरू हो सकता है, पर सर्दियों में 5 बजे के बाद शुरू होता है।
- मान्यता: ब्रह्म मुहूर्त ठीक 48 मिनट का होता है। तथ्य: रात के 15 भाग वाली गणना में इसकी अवधि मौसम के साथ बदलती है; 48 मिनट केवल विषुव के आसपास होता है।
- मान्यता: पूरे भारत में एक ही समय पर ब्रह्म मुहूर्त होता है। तथ्य: हर शहर का सूर्योदय अलग है, इसलिए ब्रह्म मुहूर्त भी अलग है।
- मान्यता: ब्रह्म मुहूर्त में न उठ पाए तो पूजा का फल नहीं मिलता। तथ्य: भक्ति में भाव प्रधान है। जिस समय आप शांत मन से भगवान को याद करें, वह समय भी उतना ही पवित्र है।
आज की तिथि, नक्षत्र और शुभ समय के लिए आज का पंचांग देखें, और सूर्योदय-सूर्यास्त का पूरा विवरण आज का सूर्योदय और सूर्यास्त पेज पर मिलेगा।
Brahma Muhurat Today — in English
This Brahma Muhurat time today tool gives the start and end of Brahma Muhurta for about 215 cities in India and abroad, along with sunrise and a 7-day table. The night (previous sunset to sunrise) is divided into 15 muhurtas, and Brahma Muhurat is the 14th — the second-last muhurta before sunrise. It usually begins about an hour and a half before sunrise and lasts around 48 minutes, longer in winter and shorter in summer. The popular fixed rule of 96 to 48 minutes before sunrise can differ by a few minutes. Switch to English at the top of the page for the full English version.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
आज ब्रह्म मुहूर्त का समय क्या है?
ऊपर के टूल में अपना शहर चुनें; तारीख पहले से आज की होती है। टूल उस शहर में ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत और समाप्ति, सूर्योदय और अगले 7 दिनों की तालिका दिखा देता है।
ब्रह्म मुहूर्त कब होता है?
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का अंतिम से दूसरा मुहूर्त है। सामान्यतः यह सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटे पहले शुरू होकर लगभग 48 मिनट चलता है, पर मौसम के अनुसार यह बदलता है।
brahma muhurta kitne baje hota hai?
यह आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर है। उत्तर भारत में गर्मियों में लगभग 4 से 4:45 बजे के आसपास और सर्दियों में लगभग 5:20 से 6:15 बजे के आसपास होता है; सही समय टूल में देखें।
क्या सुबह 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त होता है?
हमेशा नहीं। उत्तर भारत में भरी गर्मी में ब्रह्म मुहूर्त 4 बजे के आसपास शुरू हो सकता है, लेकिन सर्दियों में 4 बजे का समय ब्रह्म मुहूर्त से पहले पड़ता है और ब्रह्म मुहूर्त 5 बजे के बाद शुरू होता है।
ब्रह्म मुहूर्त की गणना कैसे होती है?
पिछले सूर्यास्त से सूर्योदय तक की रात को 15 बराबर मुहूर्तों में बाँटा जाता है। इनमें 14वाँ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त है, यानी सूर्योदय − 2 मुहूर्त से सूर्योदय − 1 मुहूर्त तक।
क्या ब्रह्म मुहूर्त हमेशा 48 मिनट का होता है?
नहीं। 48 मिनट तभी होता है जब रात 12 घंटे की हो। सर्दियों में रात का मुहूर्त लगभग 55 मिनट तक लंबा और गर्मियों में लगभग 40 मिनट तक छोटा हो जाता है।
96 मिनट और 48 मिनट वाला नियम क्या है?
प्रचलित नियम में सूर्योदय से 96 मिनट पहले से 48 मिनट पहले तक ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है। यह मुहूर्त को स्थिर 48 मिनट मानता है, इसलिए सर्दी-गर्मी में टूल की गणना से कुछ मिनट का अंतर आ सकता है।
ब्रह्म मुहूर्त में क्या करें?
जागकर भगवान का स्मरण, नाम-जप, ध्यान, प्रार्थना, पाठ और पढ़ाई — ये इस समय के लिए परंपरा में सबसे अच्छे माने गए हैं। कई लोग स्नान करके सूर्योदय पर सूर्य अर्घ्य भी देते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त में क्या नहीं करना चाहिए?
परंपरा में इस समय दोबारा सोना, भारी भोजन, क्रोध, बहस और तामसिक कामों से बचने की सलाह है। उठते ही मोबाइल में खो जाना भी इस शांत समय को व्यर्थ करता है।
ब्रह्म मुहूर्त में उठने के क्या फायदे हैं?
सुबह शांति और कम व्यवधान के कारण ध्यान और पढ़ाई में मन आसानी से लगता है, और नियमित सोने-उठने से दिनचर्या बनती है। यह कोई चमत्कारी उपाय नहीं; जल्दी उठने के लिए जल्दी सोना भी ज़रूरी है।
क्या शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त का उल्लेख है?
हाँ। मनुस्मृति में ब्राह्म मुहूर्त में जागकर धर्म और अर्थ के चिंतन की बात कही गई है, और आयुर्वेद के ग्रंथ अष्टांग हृदय में स्वस्थ व्यक्ति को इस समय उठने की सलाह दी गई है।
अलग-अलग शहरों में ब्रह्म मुहूर्त अलग क्यों होता है?
ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय और रात की लंबाई से निकलता है, और ये दोनों शहर के अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं। पूरे भारत में एक ही घड़ी होने से पूर्वोत्तर और पश्चिम भारत में लगभग एक घंटे तक का अंतर हो सकता है।
विदेश में ब्रह्म मुहूर्त का समय कैसे जानें?
टूल में भारत के साथ विदेश के शहर भी हैं। अपना शहर चुनें, समय वहीं की स्थानीय घड़ी में दिखेगा।
ब्रह्म मुहूर्त में पढ़ाई करना अच्छा है क्या?
बहुत से विद्यार्थी पाते हैं कि सुबह के शांत समय में दोहराना और याद करना आसान होता है। बस नींद पूरी रखें, ताकि जल्दी उठना थकान न बने।
ब्रह्म मुहूर्त में न उठ पाएँ तो क्या पूजा व्यर्थ है?
नहीं। भक्ति में भाव प्रधान है; जिस समय भी आप शांत मन से भगवान को याद करें, वह पूजा स्वीकार्य है। ब्रह्म मुहूर्त एक अच्छी दिनचर्या का सहारा है, नियम का बोझ नहीं।