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बुधवार, 4 नवंबर 2026 · कार्तिक कृष्ण दशमी · वि.सं. 2083 आज का पंचांग → हिंदीEnglish
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आज सूर्योदय और सूर्यास्त का समय — आपके शहर में

इस टूल से जानें कि आज सूर्योदय का समय और सूर्यास्त का समय आपके शहर में क्या है। शहर और तारीख चुनते ही सूर्योदय और सूर्यास्त का समय (Sunrise and Sunset Time Today), दिन की लंबाई, मध्याह्न यानी सूर्य के आकाश में सबसे ऊँचा होने का समय, पिछले दिन की तुलना में दिन कितना बड़ा या छोटा हुआ, और अगले 15 दिनों की तालिका दिख जाती है। सूर्य अर्घ्य, संध्या-वंदन, व्रत या रोज़ की दिनचर्या के लिए “सूर्योदय कितने बजे है” जानने का यह सरल तरीका है।

दिल्ली · 4 नवंबर 2026, बुधवार

सूर्योदय सुबह 6:35 · सूर्यास्त शाम 5:33दिन की लंबाई 10 घंटे 59 मिनट
सूर्योदयसुबह 6:35
सूर्यास्तशाम 5:33
मध्याह्न (सूर्य सबसे ऊपर)दोपहर 12:04
दिन की लंबाई10 घंटे 59 मिनटकल से 1 मिनट कम
रात की लंबाई13 घंटे 1 मिनट

अगले 15 दिन — दिल्ली

तारीखसूर्योदयसूर्यास्तदिन
4 नवं, बुसुबह 6:35शाम 5:3310 घंटे 59 मिनट
5 नवं, गुसुबह 6:35शाम 5:3310 घंटे 57 मिनट
6 नवं, शुसुबह 6:36शाम 5:3210 घंटे 56 मिनट
7 नवं, शनसुबह 6:37शाम 5:3110 घंटे 55 मिनट
8 नवं, रवसुबह 6:38शाम 5:3110 घंटे 53 मिनट
9 नवं, सोसुबह 6:38शाम 5:3010 घंटे 52 मिनट
10 नवं, मंसुबह 6:39शाम 5:3010 घंटे 51 मिनट
11 नवं, बुसुबह 6:40शाम 5:2910 घंटे 49 मिनट
12 नवं, गुसुबह 6:41शाम 5:2910 घंटे 48 मिनट
13 नवं, शुसुबह 6:41शाम 5:2810 घंटे 47 मिनट
14 नवं, शनसुबह 6:42शाम 5:2810 घंटे 45 मिनट
15 नवं, रवसुबह 6:43शाम 5:2710 घंटे 44 मिनट
16 नवं, सोसुबह 6:44शाम 5:2710 घंटे 43 मिनट
17 नवं, मंसुबह 6:45शाम 5:2610 घंटे 42 मिनट
18 नवं, बुसुबह 6:45शाम 5:2610 घंटे 41 मिनट

समय सूर्य के ऊपरी किनारे के समतल क्षितिज पर दिखने के अनुसार है (वायुमंडलीय अपवर्तन सहित), लगभग 1 मिनट की सटीकता। पहाड़ या ऊँची इमारतें हों तो सूर्य कुछ मिनट बाद दिखता है।

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सूर्योदय और सूर्यास्त किसे कहते हैं?

जिस क्षण सूर्य का ऊपरी किनारा पूर्व दिशा में क्षितिज पर दिखाई देता है, उसे सूर्योदय कहते हैं, और जिस क्षण सूर्य का ऊपरी किनारा पश्चिम में क्षितिज के नीचे जाता है, उसे सूर्यास्त। यानी सूर्योदय की गणना सूर्य के केंद्र से नहीं, बल्कि उसके सबसे ऊपरी हिस्से से होती है।

एक और रोचक बात — पृथ्वी का वायुमंडल प्रकाश को थोड़ा मोड़ देता है (इसे वायुमंडलीय अपवर्तन कहते हैं)। इसके कारण सूर्य वास्तव में क्षितिज के नीचे होते हुए भी हमें क्षितिज पर दिखने लगता है। इसी वजह से सूर्योदय कुछ मिनट पहले और सूर्यास्त कुछ मिनट बाद होता है, और विषुव के दिन भी दिन ठीक 12 घंटे का न होकर थोड़ा लंबा होता है।

यह टूल सूर्योदय-सूर्यास्त का समय कैसे निकालता है?

आप भारत और विदेश के लगभग 215 शहरों में से अपना शहर चुनते हैं और तारीख, जो पहले से आज की होती है। टूल उस शहर के अक्षांश, देशांतर और समय क्षेत्र के आधार पर खगोलीय गणित से सूर्य की स्थिति निकालता है। समय सूर्य के ऊपरी किनारे, समतल क्षितिज और सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन को मानकर निकाला जाता है और लगभग एक मिनट तक सही रहता है।

परिणाम में आपको मिलता है:

  • सूर्योदय और सूर्यास्त: उस शहर के स्थानीय समय में।
  • दिन की लंबाई: सूर्योदय से सूर्यास्त तक कितने घंटे और मिनट।
  • मध्याह्न (Solar Noon): वह क्षण जब सूर्य आकाश में सबसे ऊँचा होता है — यह सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच का समय है। ध्यान दें कि यह घड़ी के 12 बजे के बराबर नहीं होता; भारत में शहर और तारीख के अनुसार यह लगभग 11 बजे से 1 बजे के बीच कहीं पड़ता है।
  • दिन की लंबाई में बदलाव: पिछले दिन की तुलना में आज का दिन कितने मिनट-सेकंड बड़ा या छोटा है।
  • 15 दिन की तालिका: आगे के 15 दिनों का सूर्योदय, सूर्यास्त और दिन की लंबाई।

पहाड़ों, ऊँची इमारतों या समुद्र-तट पर वास्तविक दृश्य थोड़ा अलग हो सकता है। अगर पूर्व में पहाड़ हो, तो सूर्य बताए गए समय से कुछ मिनट बाद दिखेगा।

हर शहर और हर मौसम में सूर्योदय अलग क्यों होता है?

शहर के अनुसार अंतर

  1. देशांतर: पृथ्वी पश्चिम से पूर्व घूमती है, इसलिए पूर्व के शहरों में सूर्य पहले उगता है — देशांतर के हर 1 अंश पर लगभग 4 मिनट। पूरे भारत में एक ही घड़ी (IST) चलती है, इसलिए गुवाहाटी में सूर्योदय मुंबई से लगभग डेढ़ घंटा पहले तक हो जाता है।
  2. अक्षांश: उत्तर के शहरों में मौसम का असर ज़्यादा होता है — गर्मी में दिन बहुत लंबे और सर्दी में बहुत छोटे। भूमध्य रेखा के पास के शहरों में दिन-रात साल भर लगभग बराबर रहते हैं।
  3. समय क्षेत्र: विदेश में रहते हों तो अपना शहर चुनें — समय वहीं की स्थानीय घड़ी (ग्रीष्मकालीन समय सहित, जहाँ लागू हो) में दिखेगा।

मौसम के अनुसार अंतर — उत्तरायण और दक्षिणायन

पृथ्वी की धुरी लगभग 23.4 अंश झुकी हुई है। इसी झुकाव के कारण साल भर सूर्य कभी उत्तर की ओर तो कभी दक्षिण की ओर खिसकता दिखता है।

  • उत्तरायण: जब सूर्य दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ता है, दिन धीरे-धीरे बड़े होते जाते हैं। खगोलीय रूप से यह लगभग 21–22 दिसंबर (सबसे छोटे दिन) से शुरू होता है। हिंदू परंपरा में उत्तरायण का आरंभ मकर संक्रांति से माना जाता है, जब सूर्य निरयण मकर राशि में प्रवेश करता है — यह आजकल 14–15 जनवरी के आसपास होता है। दोनों में लगभग तीन सप्ताह का अंतर अयनांश के कारण है।
  • दक्षिणायन: लगभग 21 जून (सबसे बड़े दिन) के बाद सूर्य दक्षिण की ओर लौटने लगता है और दिन छोटे होने लगते हैं। परंपरा में दक्षिणायन का आरंभ कर्क संक्रांति (जुलाई के मध्य) से माना जाता है।

विषुव (लगभग 20 मार्च और 22–23 सितंबर) के आसपास दिन की लंबाई सबसे तेज़ी से बदलती है — उत्तर भारत में रोज़ लगभग 1.5–2 मिनट। संक्रांति (जून और दिसंबर) के आसपास यह बदलाव कुछ सेकंड ही रह जाता है। टूल का “पिछले दिन से बदलाव” यही दिखाता है।

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भारत में सबसे बड़ा और सबसे छोटा दिन

भारत में सबसे बड़ा दिन लगभग 21 जून और सबसे छोटा दिन लगभग 21–22 दिसंबर को होता है। पर दिन की लंबाई शहर के अक्षांश पर बहुत निर्भर करती है:

शहर (उदाहरण)सबसे बड़ा दिन (जून) लगभगसबसे छोटा दिन (दिसंबर) लगभग
श्रीनगर (उत्तर)14 घंटे 25 मिनट9 घंटे 50 मिनट
दिल्ली14 घंटे10 घंटे 20 मिनट
मुंबई13 घंटे 15 मिनट11 घंटे
चेन्नई (दक्षिण)12 घंटे 50 मिनट11 घंटे 20 मिनट

एक दिलचस्प तथ्य: सबसे जल्दी सूर्योदय सबसे बड़े दिन पर नहीं होता। उत्तर भारत में सबसे जल्दी सूर्योदय जून के पहले-दूसरे सप्ताह में, सबसे देर से सूर्यास्त जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में, सबसे देर से सूर्योदय जनवरी में और सबसे जल्दी सूर्यास्त नवंबर के अंत–दिसंबर की शुरुआत में होता है। इसका कारण पृथ्वी की अंडाकार कक्षा और धुरी का झुकाव है, जिससे सौर मध्याह्न साल भर थोड़ा आगे-पीछे होता रहता है।

हिंदू परंपरा में सूर्योदय का महत्व

उदया तिथि

पंचांग में दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक गिना जाता है, आधी रात से नहीं। सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही होती है, वही उस पूरे दिन की तिथि मानी जाती है — इसे उदया तिथि कहते हैं। इसी तरह वार भी सूर्योदय से बदलता है। इसलिए किसी व्रत या पर्व की तारीख तय करने में सूर्योदय का समय बहुत महत्वपूर्ण है, और अलग शहरों में सूर्योदय अलग होने से कभी-कभी व्रत की तारीख में भी अंतर आ जाता है। आज की तिथि जानने के लिए आज का पंचांग देखें, और व्रतों की सूची के लिए व्रत कैलेंडर।

संध्या-वंदन

परंपरा में दिन की तीन संध्याएँ मानी जाती हैं — प्रातः (सूर्योदय), मध्याह्न और सायं (सूर्यास्त)। संध्या-वंदन करने वाले इन्हीं समयों के आसपास उपासना करते हैं। सुबह की उपासना सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त से शुरू करने की परंपरा भी है — अपने शहर का समय आज का ब्रह्म मुहूर्त पेज पर देखें।

मुहूर्तों का आधार

राहु काल, चौघड़िया, होरा और अभिजीत मुहूर्त — सब सूर्योदय और सूर्यास्त से ही गिने जाते हैं। उदाहरण के लिए, अभिजीत मुहूर्त दिन के 15 मुहूर्तों में से 8वाँ है, जो सौर मध्याह्न के आसपास पड़ता है। ग्रहों की होरा के लिए होरा कैलकुलेटर उपयोगी है।

सूर्य को अर्घ्य कैसे दें — सरल विधि

सूर्य अर्घ्य की विधि परिवारों में थोड़ी अलग होती है। नीचे एक सरल और प्रचलित तरीका है:

  1. सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें। चाहें तो इसमें थोड़ा रोली या लाल चंदन, अक्षत और लाल फूल डाल सकते हैं।
  3. सूर्योदय के समय या उसके कुछ देर बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों।
  4. लोटे को दोनों हाथों से छाती के आसपास की ऊँचाई तक उठाएँ और धीरे-धीरे जल की धार गिराएँ। कई लोग जल की धार के बीच से सूर्य के दर्शन करते हैं — सीधे सूर्य को देर तक न देखें, इससे आँखों को नुकसान हो सकता है।
  5. अर्घ्य देते समय “ॐ सूर्याय नमः” बोलें और सूर्य देव से स्वास्थ्य और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
  6. अर्घ्य का जल पैरों में न आए, इसके लिए नीचे कोई पात्र या गमला रख सकते हैं। अंत में हाथ जोड़कर प्रणाम करें।

रविवार और मकर संक्रांति, छठ जैसे पर्वों पर सूर्य अर्घ्य का विशेष महत्व माना जाता है। छठ पर्व में डूबते और उगते सूर्य दोनों को अर्घ्य दिया जाता है — इसलिए उस समय सूर्यास्त और सूर्योदय का सही समय जानना ज़रूरी होता है।

सूर्योदय से जुड़ी मान्यताएँ और तथ्य

  • मान्यता: पूरे भारत में सूर्योदय लगभग एक समय पर होता है। तथ्य: एक ही घड़ी होने के बावजूद पूर्वोत्तर और पश्चिम भारत में सूर्योदय में लगभग डेढ़ घंटे तक का अंतर होता है।
  • मान्यता: विषुव के दिन दिन और रात ठीक 12-12 घंटे के होते हैं। तथ्य: अपवर्तन और सूर्य के ऊपरी किनारे से गिनती के कारण उस दिन भी दिन कुछ मिनट लंबा होता है।
  • मान्यता: सबसे बड़े दिन पर सबसे जल्दी सूर्योदय होता है। तथ्य: सबसे जल्दी सूर्योदय कुछ दिन पहले और सबसे देर से सूर्यास्त कुछ दिन बाद होता है।
  • मान्यता: मध्याह्न यानी दोपहर 12 बजे। तथ्य: सौर मध्याह्न शहर और तारीख के अनुसार बदलता है; भारत में यह अक्सर 12 बजे से पहले या बाद में होता है।

Sunrise and Sunset Today — in English

This sunrise time today tool (also searched as suryoday kitne baje) gives the sunrise and sunset time for about 215 cities in India and abroad, for today or any date. It also shows day length, solar noon (madhyahna), how much longer or shorter the day is than yesterday, and a 15-day table. Times are for the upper edge of the Sun on a flat horizon with standard atmospheric refraction, and are accurate to about a minute. In the panchang the tithi running at sunrise decides the day’s tithi, which is why sunrise matters for vrats and festivals. Switch to English at the top of the page for the full English version.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

आज सूर्योदय का समय क्या है?

ऊपर के टूल में अपना शहर चुनें; तारीख पहले से आज की होती है। उस शहर का सूर्योदय, सूर्यास्त, दिन की लंबाई, मध्याह्न और अगले 15 दिनों की तालिका तुरंत दिख जाएगी।

suryoday kitne baje hoga aaj?

सूर्योदय हर शहर में अलग समय पर होता है, इसलिए टूल में अपना शहर चुनें। वहाँ का स्थानीय सूर्योदय समय लगभग एक मिनट की सटीकता से दिखेगा।

आज सूर्यास्त कितने बजे होगा?

टूल में शहर चुनते ही सूर्योदय के साथ सूर्यास्त का समय भी दिखता है। 15 दिन की तालिका में आगे के दिनों का सूर्यास्त भी देख सकते हैं।

सूर्योदय का समय किस आधार पर निकाला जाता है?

समय उस क्षण का है जब सूर्य का ऊपरी किनारा समतल क्षितिज पर दिखता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन को मानकर। यह लगभग एक मिनट तक सही रहता है।

अलग-अलग शहरों में सूर्योदय अलग क्यों होता है?

पूर्व के शहरों में सूर्य पहले उगता है — देशांतर के हर 1 अंश पर लगभग 4 मिनट। पूरे भारत में एक ही घड़ी होने से गुवाहाटी और मुंबई के सूर्योदय में डेढ़ घंटे तक का अंतर हो सकता है।

भारत में सबसे बड़ा दिन कब होता है?

सबसे बड़ा दिन लगभग 21 जून को होता है। दिल्ली में उस दिन दिन की लंबाई लगभग 14 घंटे और चेन्नई में लगभग 12 घंटे 50 मिनट होती है।

सबसे छोटा दिन कब होता है?

सबसे छोटा दिन लगभग 21–22 दिसंबर को होता है। दिल्ली में उस दिन दिन की लंबाई लगभग 10 घंटे 20 मिनट होती है।

मध्याह्न या solar noon क्या है?

यह वह क्षण है जब सूर्य आकाश में सबसे ऊँचा होता है, यानी सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच का समय। यह घड़ी के 12 बजे के बराबर नहीं होता और शहर व तारीख के साथ बदलता है।

उदया तिथि क्या होती है?

सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही होती है, वही पूरे दिन की तिथि मानी जाती है — इसे उदया तिथि कहते हैं। इसलिए व्रत-पर्व की तारीख तय करने में सूर्योदय का समय महत्वपूर्ण है।

उत्तरायण और दक्षिणायन क्या है?

उत्तरायण में सूर्य उत्तर की ओर बढ़ता है और दिन बड़े होते हैं; दक्षिणायन में सूर्य दक्षिण की ओर लौटता है। परंपरा में उत्तरायण मकर संक्रांति से और दक्षिणायन कर्क संक्रांति से माना जाता है।

सूर्य को अर्घ्य कब और कैसे दें?

सूर्योदय के समय या कुछ देर बाद पूर्व की ओर मुख करके तांबे के लोटे से धीरे-धीरे जल अर्पित करें और “ॐ सूर्याय नमः” बोलें। सूर्य को सीधे देर तक न देखें।

दिन की लंबाई रोज़ कितनी बदलती है?

विषुव के आसपास उत्तर भारत में दिन रोज़ लगभग 1.5–2 मिनट बदलता है, जबकि जून और दिसंबर की संक्रांति के आसपास केवल कुछ सेकंड। टूल पिछले दिन से यह बदलाव दिखाता है।

क्या सबसे बड़े दिन पर सबसे जल्दी सूर्योदय होता है?

नहीं। उत्तर भारत में सबसे जल्दी सूर्योदय जून के पहले-दूसरे सप्ताह में और सबसे देर से सूर्यास्त जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में होता है।

विदेश में सूर्योदय का समय कैसे देखें?

टूल में भारत के साथ विदेश के शहर भी हैं। अपना शहर चुनें — समय वहीं की स्थानीय घड़ी में दिखेगा।

टूल के समय पर सूर्य क्यों नहीं दिखा?

टूल का समय समतल क्षितिज के लिए है। पूर्व दिशा में पहाड़, इमारतें या धुंध हो तो सूर्य कुछ मिनट बाद दिखता है।