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बुधवार, 4 नवंबर 2026 · कार्तिक कृष्ण दशमी · वि.सं. 2083 आज का पंचांग → हिंदीEnglish
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महादशा कैलकुलेटर — विंशोत्तरी दशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा

Mahadasha Calculator (महादशा कैलकुलेटर) में अपनी जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान डालकर तुरंत जानें कि मेरी महादशा कौन सी चल रही है। यह मुफ़्त टूल विंशोत्तरी दशा (Vimshottari Dasha) पद्धति से आपकी वर्तमान महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा — उनकी शुरुआत, समाप्ति की तारीख़ और बचा हुआ समय — दिखाता है। साथ में जन्म के समय की दशा का शेष (balance), 120 वर्षों की पूरी महादशा समय-रेखा, हर महादशा की 9 अंतर्दशाएँ और वर्तमान दशा-स्वामी ग्रह की राशि व भाव भी मिलते हैं। इसे Vimshottari Dasha Calculator या Antardasha Calculator भी कहा जाता है।

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महादशा क्या है?

वैदिक ज्योतिष में दशा का अर्थ है जीवन का वह कालखंड जिस पर किसी एक ग्रह का विशेष प्रभाव माना जाता है। कुंडली बताती है कि ग्रह कहाँ बैठे हैं, और दशा बताती है कि उनमें से किस ग्रह का फल कब सामने आएगा। इसीलिए ज्योतिषी किसी घटना का समय देखने के लिए सबसे पहले दशा देखते हैं।

दशा की कई पद्धतियाँ हैं, लेकिन सबसे प्रचलित विंशोत्तरी दशा है, जिसका वर्णन बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में मिलता है। “विंशोत्तरी” का अर्थ है — एक सौ बीस। इस पद्धति में मनुष्य की पूर्ण आयु 120 वर्ष मानी गई है और ये 120 वर्ष नौ ग्रहों में बँटे हैं। हर ग्रह का बड़ा कालखंड महादशा कहलाता है, उसके भीतर के छोटे भाग अंतर्दशा (भुक्ति) और अंतर्दशा के भीतर के और छोटे भाग प्रत्यंतर दशा कहलाते हैं।

विंशोत्तरी दशा का क्रम, वर्ष और नक्षत्र

नौ ग्रहों की महादशा हमेशा एक तय क्रम में आती है। हर ग्रह 27 में से 3 नक्षत्रों का स्वामी है। नीचे की तालिका में क्रम, वर्ष और नक्षत्र दिए गए हैं:

क्रमदशा-स्वामी ग्रहमहादशा के वर्षस्वामित्व वाले 3 नक्षत्र
1केतु7अश्विनी, मघा, मूल
2शुक्र20भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा
3सूर्य6कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा
4चंद्रमा10रोहिणी, हस्त, श्रवण
5मंगल7मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा
6राहु18आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा
7गुरु (बृहस्पति)16पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वा भाद्रपद
8शनि19पुष्य, अनुराधा, उत्तरा भाद्रपद
9बुध17आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती
कुल12027 नक्षत्र

बुध की महादशा के बाद चक्र फिर केतु से शुरू होता है। ध्यान दें कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में सभी नौ महादशाएँ आएँ, यह ज़रूरी नहीं — 120 वर्ष का चक्र पूरा जीवन नहीं, बल्कि गणना का आधार है।

यह कैलकुलेटर महादशा की गणना कैसे करता है?

विंशोत्तरी दशा पूरी तरह जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र पर टिकी है। टूल आपकी जन्म तिथि, समय और स्थान से चंद्रमा की निरयण (sidereal) स्थिति निकालता है और फिर ये चरण अपनाता है:

  1. जन्म नक्षत्र: चंद्रमा जिस नक्षत्र में है, उसका स्वामी ग्रह ही आपकी पहली महादशा का स्वामी होता है। जैसे चंद्रमा रोहिणी में हो, तो जन्म चंद्रमा की महादशा में हुआ।
  2. दशा का शेष (balance): हर नक्षत्र 13°20′ का होता है। जन्म के समय चंद्रमा उस नक्षत्र का जितना हिस्सा पार कर चुका था, पहली महादशा का उतना हिस्सा जन्म से पहले ही बीत चुका माना जाता है। उदाहरण — चंद्रमा ने रोहिणी का एक-चौथाई भाग पार किया हो, तो चंद्रमा की 10 वर्ष की महादशा में से लगभग 7½ वर्ष जन्म के बाद शेष रहेंगे।
  3. आगे की महादशाएँ: शेष के बाद बाकी महादशाएँ ऊपर की तालिका के क्रम में पूरे वर्षों के साथ जुड़ती जाती हैं। इस तरह 120 वर्षों की पूरी समय-रेखा बनती है।
  4. अंतर्दशा: हर महादशा 9 अंतर्दशाओं में बँटती है। पहली अंतर्दशा उसी ग्रह की होती है जिसकी महादशा है, फिर उसी क्रम में बाकी ग्रह आते हैं। सूत्र है — अंतर्दशा की अवधि = महादशा के वर्ष × अंतर्दशा ग्रह के वर्ष ÷ 120।
  5. प्रत्यंतर दशा: यही अनुपात एक स्तर और नीचे लगता है — अंतर्दशा की अवधि × प्रत्यंतर ग्रह के वर्ष ÷ 120।

जन्म समय क्यों ज़रूरी है: जन्म समय वैकल्पिक है, पर इसे छोड़ने पर टूल चेतावनी देता है। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार कर लेता है, इसलिए कुछ घंटों का अंतर भी दशा के शेष को कई महीने आगे-पीछे कर सकता है। बीस वर्ष वाली शुक्र महादशा में तो यह अंतर और बड़ा दिखता है। अगर जन्म के समय चंद्रमा नक्षत्र की सीमा के पास था, तो समय के बिना पहली महादशा ही बदल सकती है। भाव (house) भी लग्न से निकलता है, इसलिए दशा-स्वामी का भाव सही जानने के लिए भी जन्म समय चाहिए।

उदाहरण: शुक्र महादशा की 9 अंतर्दशाएँ

सूत्र को समझने के लिए शुक्र की 20 वर्ष की महादशा लें। हर अंतर्दशा = 20 × ग्रह के वर्ष ÷ 120:

अंतर्दशागणनाअवधि (लगभग)
शुक्र–शुक्र20 × 20 ÷ 1203 वर्ष 4 माह
शुक्र–सूर्य20 × 6 ÷ 1201 वर्ष
शुक्र–चंद्रमा20 × 10 ÷ 1201 वर्ष 8 माह
शुक्र–मंगल20 × 7 ÷ 1201 वर्ष 2 माह
शुक्र–राहु20 × 18 ÷ 1203 वर्ष
शुक्र–गुरु20 × 16 ÷ 1202 वर्ष 8 माह
शुक्र–शनि20 × 19 ÷ 1203 वर्ष 2 माह
शुक्र–बुध20 × 17 ÷ 1202 वर्ष 10 माह
शुक्र–केतु20 × 7 ÷ 1201 वर्ष 2 माह

सभी अंतर्दशाओं का जोड़ ठीक 20 वर्ष होता है। टूल में हर महादशा पर क्लिक करके उसकी 9 अंतर्दशाएँ तारीख़ों के साथ खोली जा सकती हैं।

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परिणाम कैसे पढ़ें?

  • वर्तमान दशा: सबसे ऊपर लिखा होता है जैसे “शनि महादशा – बुध अंतर्दशा – शुक्र प्रत्यंतर”। ज्योतिष में इसे छोटे रूप में शनि/बुध/शुक्र भी लिखते हैं। हर स्तर की शुरुआत, समाप्ति और बचा हुआ समय साथ में दिखता है।
  • जन्म के समय की दशा: आपका जन्म नक्षत्र, किस ग्रह की महादशा में जन्म हुआ और उसका कितना भाग शेष था।
  • महादशा समय-रेखा: जन्म से 120 वर्ष तक की सभी महादशाएँ, जिनमें से वर्तमान वाली अलग से चिह्नित होती है।
  • दशा-स्वामी की स्थिति: वर्तमान महादशा का ग्रह आपकी कुंडली में किस राशि और किस भाव में है। यही सबसे काम की जानकारी है, क्योंकि फल इसी से बदलता है।
  • सामान्य विषय: हर ग्रह की महादशा से परंपरागत रूप से जुड़े विषयों का छोटा सार।

अलग-अलग पंचांग और सॉफ़्टवेयर वर्ष की लंबाई और अयनांश थोड़ा अलग मान सकते हैं, इसलिए दशा की तारीख़ों में कुछ दिनों का फ़र्क़ सामान्य है। पूरी कुंडली देखने के लिए मुफ़्त कुंडली और अपना जन्म नक्षत्र विस्तार से जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर देखें।

हर ग्रह की महादशा के सामान्य विषय

नीचे दिए विषय परंपरा में हर ग्रह से जोड़े जाते हैं। ये केवल सामान्य संकेत हैं — एक ही ग्रह की महादशा दो लोगों के लिए बिल्कुल अलग फल दे सकती है।

महादशापरंपरागत रूप से जुड़े विषय
केतु (7 वर्ष)वैराग्य, आध्यात्मिक रुचि, अचानक बदलाव, भीतर की खोज
शुक्र (20 वर्ष)विवाह और संबंध, सुख-सुविधा, कला, वाहन, सौंदर्य
सूर्य (6 वर्ष)आत्मविश्वास, पद-प्रतिष्ठा, पिता, सरकार से जुड़े काम
चंद्रमा (10 वर्ष)मन और भावनाएँ, माता, यात्रा, जनसंपर्क
मंगल (7 वर्ष)साहस, ऊर्जा, भूमि-संपत्ति, भाई-बहन, प्रतिस्पर्धा
राहु (18 वर्ष)बड़ी महत्वाकांक्षा, विदेश, नई तकनीक, अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव
गुरु (16 वर्ष)ज्ञान, शिक्षा, संतान, धर्म, गुरु और मार्गदर्शन
शनि (19 वर्ष)परिश्रम, अनुशासन, धैर्य, सेवा, देर से पर टिकाऊ फल
बुध (17 वर्ष)बुद्धि, व्यापार, लेखन-बोलचाल, गणना, पढ़ाई

दशा का फल किस पर निर्भर करता है?

यह बात ईमानदारी से समझना ज़रूरी है: कोई भी महादशा अपने आप में “अच्छी” या “बुरी” नहीं होती। फल इस पर टिका है कि आपकी कुंडली में दशा-स्वामी ग्रह —

  • किस राशि में है (उच्च, स्वराशि, मित्र राशि, शत्रु राशि या नीच),
  • किस भाव में बैठा है और किन भावों का स्वामी है,
  • किन ग्रहों के साथ है और किनकी दृष्टि उस पर है,
  • और उस समय गोचर (transit) में ग्रह कहाँ चल रहे हैं।

इसीलिए टूल दशा-स्वामी की राशि और भाव दिखाता है, लेकिन अंतिम फल बताने का दावा नहीं करता। किसी विशेष निर्णय से पहले अनुभवी ज्योतिषी से पूरी कुंडली दिखाना बेहतर है। ज्योतिषियों में भी फलादेश को लेकर मत अलग-अलग होते हैं।

दशा के समय परंपरागत उपाय

परंपरा में माना जाता है कि जिस ग्रह की दशा चल रही हो, उससे जुड़े देवता की उपासना मन को स्थिर रखती है। इन्हें श्रद्धा से करें, डर से नहीं:

  • सूर्य: प्रातः सूर्य को जल (अर्घ्य) देना।
  • चंद्रमा: सोमवार को शिव पूजा और “ॐ नमः शिवाय” का जप।
  • मंगल और शनि: हनुमान जी की उपासना, हनुमान चालीसा का पाठ; शनि के लिए ज़रूरतमंदों और श्रमिकों की सेवा।
  • बुध और केतु: गणेश जी की पूजा।
  • गुरु: भगवान विष्णु की उपासना, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप, गुरुजनों का सम्मान।
  • शुक्र: माता लक्ष्मी की पूजा।
  • राहु: देवी दुर्गा की उपासना।

सबसे बड़ा उपाय अपना कर्म है — सही निर्णय, मेहनत और संयम। कोई भी उपाय परिश्रम का विकल्प नहीं है।

महादशा: मान्यता और तथ्य

  • मान्यता: शनि की महादशा हमेशा कष्ट देती है। तथ्य: शुभ स्थिति वाला शनि अपनी दशा में बड़ी सफलता और स्थिरता भी देता है। शनि महादशा और साढ़े साती भी अलग-अलग चीज़ें हैं — साढ़े साती गोचर से बनती है, दशा जन्म नक्षत्र से।
  • मान्यता: राहु की दशा में सब बिगड़ जाता है। तथ्य: राहु की दशा में कई लोगों को विदेश, तकनीक या नए क्षेत्रों में अचानक उन्नति भी मिलती है; फल कुंडली पर निर्भर है।
  • मान्यता: दशा बदलते ही जीवन रातों-रात बदल जाता है। तथ्य: बदलाव आमतौर पर धीरे-धीरे दिखता है, और अंतर्दशा तथा गोचर भी साथ में असर डालते हैं।
  • मान्यता: दशा देखने के लिए जन्म समय की ज़रूरत नहीं। तथ्य: बिना समय के मोटा अनुमान मिल जाता है, पर दशा का शेष महीनों तक खिसक सकता है और भाव पता नहीं चलता।

Mahadasha Calculator — in English

This free Mahadasha calculator (also searched as Vimshottari Dasha calculator or Antardasha calculator) answers “which Mahadasha am I running?” from your date, time and place of birth. It finds the Moon’s birth nakshatra, works out the dasha balance at birth and shows your current Mahadasha, Antardasha and Pratyantar dasha with start and end dates and time left, the full 120-year timeline with all 9 Antardashas of each period, and the sign and house of the current dasha lord. Vimshottari order: Ketu 7, Venus 20, Sun 6, Moon 10, Mars 7, Rahu 18, Jupiter 16, Saturn 19, Mercury 17 years. Switch to English at the top of the page for the full English version.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

मेरी महादशा कौन सी चल रही है, कैसे पता करें?

ऊपर के महादशा कैलकुलेटर में अपनी जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान डालें। टूल तुरंत आपकी वर्तमान महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा उनकी शुरुआत और समाप्ति की तारीख़ के साथ दिखा देगा।

महादशा क्या होती है?

महादशा जीवन का वह लंबा कालखंड है जिस पर ज्योतिष में किसी एक ग्रह का मुख्य प्रभाव माना जाता है। विंशोत्तरी पद्धति में नौ ग्रहों की महादशाएँ कुल 120 वर्षों में बँटी हैं।

विंशोत्तरी दशा क्या है?

विंशोत्तरी दशा सबसे प्रचलित दशा पद्धति है जिसका वर्णन बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में मिलता है। इसमें 120 वर्ष का चक्र होता है और दशा जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से शुरू होती है।

किस ग्रह की महादशा कितने साल की होती है?

केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्रमा 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 और बुध 17 वर्ष। इनका कुल योग 120 वर्ष है और यही क्रम हमेशा चलता है।

dasha kaise dekhe — पहली महादशा कैसे तय होती है?

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उस नक्षत्र का स्वामी ग्रह ही पहली महादशा का स्वामी होता है। जैसे चंद्रमा अश्विनी, मघा या मूल में हो तो जन्म केतु की महादशा में होता है।

जन्म के समय दशा का शेष (balance) क्या है?

चंद्रमा ने जन्म नक्षत्र का जितना भाग पार कर लिया था, पहली महादशा का उतना भाग जन्म से पहले बीता माना जाता है। बचा हुआ भाग ही दशा का शेष है, जिसे टूल वर्ष-माह-दिन में दिखाता है।

अंतर्दशा की अवधि कैसे निकालते हैं?

सूत्र है — महादशा के वर्ष × अंतर्दशा ग्रह के वर्ष ÷ 120। जैसे शुक्र महादशा में सूर्य की अंतर्दशा 20 × 6 ÷ 120 = 1 वर्ष की होती है।

प्रत्यंतर दशा क्या है?

हर अंतर्दशा फिर से 9 छोटे भागों में बँटती है, जिन्हें प्रत्यंतर दशा कहते हैं। इनकी अवधि भी उसी अनुपात से निकलती है — अंतर्दशा की अवधि × ग्रह के वर्ष ÷ 120।

क्या बिना जन्म समय के महादशा निकल सकती है?

हाँ, मोटा अनुमान मिल जाता है, लेकिन चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है, इसलिए दशा का शेष कई महीने आगे-पीछे हो सकता है। दशा-स्वामी का भाव जानने के लिए भी सही जन्म समय ज़रूरी है।

क्या शनि या राहु की महादशा हमेशा खराब होती है?

नहीं। कोई महादशा अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं होती। फल इस पर निर्भर करता है कि कुंडली में वह ग्रह किस राशि और भाव में है, किन भावों का स्वामी है और उस पर किन ग्रहों का प्रभाव है।

शनि महादशा और साढ़े साती में क्या अंतर है?

शनि महादशा जन्म नक्षत्र से गिनी जाने वाली 19 वर्ष की दशा है, जबकि साढ़े साती शनि के गोचर से बनती है जब शनि जन्म राशि से बारहवीं, पहली और दूसरी राशि में होता है। दोनों अलग-अलग चीज़ें हैं।

antardasha calculator में पहली अंतर्दशा किसकी होती है?

हर महादशा की पहली अंतर्दशा उसी ग्रह की होती है जिसकी महादशा चल रही है। उसके बाद बाकी ग्रह विंशोत्तरी क्रम में आते हैं।

दूसरे सॉफ़्टवेयर से दशा की तारीख़ें थोड़ी अलग क्यों आती हैं?

अलग-अलग सॉफ़्टवेयर वर्ष की लंबाई और अयनांश थोड़ा अलग मान सकते हैं, और जन्म समय में छोटा अंतर भी शेष बदल देता है। इसलिए कुछ दिनों का फ़र्क़ सामान्य है।

महादशा के दौरान कौन से उपाय किए जाते हैं?

परंपरा में दशा-स्वामी ग्रह से जुड़े देवता की उपासना की जाती है — जैसे शनि और मंगल के लिए हनुमान जी, गुरु के लिए भगवान विष्णु, चंद्रमा के लिए भगवान शिव। ये श्रद्धा के उपाय हैं, परिश्रम का विकल्प नहीं।

क्या यह महादशा कैलकुलेटर मेरी जानकारी सहेजता है?

नहीं, आपकी जन्म की जानकारी कहीं सहेजी नहीं जाती। गणना केवल परिणाम दिखाने के लिए की जाती है।