नई कार, बाइक या स्कूटी घर लाना खुशी का मौका है, और बहुत से लोग चाहते हैं कि गाड़ी शुभ दिन पर ही घर आए। यह टूल आपके शहर के अनुसार वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त (Vehicle Purchase Muhurat) बताता है — यानी गाड़ी खरीदने का शुभ दिन और समय। आज से अगले साल के अंत तक की सभी शुभ तिथियाँ महीने के अनुसार दिखती हैं, हर तारीख के साथ वार, नक्षत्र, तिथि और उस दिन का शुभ समय-खंड। कार हो, बाइक हो, ट्रैक्टर हो या कोई व्यावसायिक वाहन — सबके लिए यही मुहूर्त देखा जाता है।
नवंबर 20269 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 5 नवं, गु | अगले दिन रात 3:56 – सुबह 6:36 | हस्त · द्वादशी (कृ.) |
| 6 नवं, शु | सुबह 6:36 – सुबह 6:37 (अगले दिन) | हस्त · द्वादशी (कृ.) |
| 11 नवं, बु | सुबह 6:40 – सुबह 11:38 | अनुराधा · द्वितीया (शु.) |
| 15 नवं, रव | रात 11:29 – सुबह 6:44 (अगले दिन) | श्रवण · षष्ठी (शु.) |
| 16 नवं, सो | सुबह 6:44 – सुबह 4:21 (अगले दिन) | श्रवण · सप्तमी (शु.) |
| 22 नवं, रव | सुबह 6:49 – रात 2:38 (अगले दिन) | अश्विनी · त्रयोदशी (शु.) |
| 25 नवं, बु | शाम 4:52 – सुबह 6:52 (अगले दिन) | रोहिणी · द्वितीया (कृ.) |
| 26 नवं, गु | सुबह 6:52 – शाम 5:47 | मृगशिरा · द्वितीया (कृ.) |
| 29 नवं, रव | सुबह 6:54 – सुबह 11:00 | पुष्य · षष्ठी (कृ.) |
दिसंबर 202611 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 3 दिसं, गु | सुबह 9:24 – सुबह 10:55 रात 11:05 – सुबह 6:58 (अगले दिन) | हस्त · दशमी (कृ.) हस्त · एकादशी (कृ.) |
| 4 दिसं, शु | सुबह 6:58 – सुबह 6:59 (अगले दिन) | हस्त · एकादशी (कृ.) |
| 6 दिसं, रव | सुबह 6:59 – दोपहर 1:38 | स्वाति · त्रयोदशी (कृ.) |
| 13 दिसं, रव | शाम 4:49 – सुबह 7:05 (अगले दिन) | श्रवण · पंचमी (शु.) |
| 14 दिसं, सो | सुबह 7:05 – सुबह 7:06 (अगले दिन) | श्रवण · पंचमी (शु.) |
| 16 दिसं, बु | सुबह 7:06 – दोपहर 2:03 | शतभिषा · सप्तमी (शु.) |
| 18 दिसं, शु | रात 11:15 – सुबह 7:08 (अगले दिन) | रेवती · दशमी (शु.) |
| 20 दिसं, रव | सुबह 7:08 – सुबह 9:19 | अश्विनी · एकादशी (शु.) |
| 23 दिसं, बु | रात 8:55 – सुबह 4:53 (अगले दिन) | मृगशिरा · पूर्णिमा (शु.) |
| 24 दिसं, गु | अगले दिन रात 3:09 – सुबह 7:11 | पुनर्वसु · द्वितीया (कृ.) |
| 25 दिसं, शु | सुबह 7:11 – सुबह 7:11 (अगले दिन) | पुनर्वसु · द्वितीया (कृ.) |
जनवरी 202712 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 1 जन, शु | दोपहर 1:12 – रात 1:45 (अगले दिन) | चित्रा · दशमी (कृ.) |
| 3 जन, रव | रात 9:37 – सुबह 7:14 (अगले दिन) | अनुराधा · द्वादशी (कृ.) |
| 4 जन, सो | सुबह 7:14 – रात 12:15 (अगले दिन) | अनुराधा · द्वादशी (कृ.) |
| 10 जन, रव | सुबह 7:15 – सुबह 7:15 (अगले दिन) | श्रवण · तृतीया (शु.) |
| 11 जन, सो | सुबह 7:15 – सुबह 9:30 | धनिष्ठा · तृतीया (शु.) |
| 14 जन, गु | रात 11:19 – सुबह 7:15 (अगले दिन) | रेवती · सप्तमी (शु.) |
| 15 जन, शु | सुबह 7:15 – दोपहर 2:15 | रेवती · सप्तमी (शु.) |
| 20 जन, बु | सुबह 7:14 – शाम 4:17 | मृगशिरा · त्रयोदशी (शु.) |
| 22 जन, शु | सुबह 7:39 – शाम 5:48 | पुनर्वसु · पूर्णिमा (शु.) |
| 27 जन, बु | सुबह 7:11 – रात 3:55 (अगले दिन) | हस्त · षष्ठी (कृ.) |
| 28 जन, गु | दोपहर 3:54 – सुबह 4:05 (अगले दिन) | चित्रा · सप्तमी (कृ.) |
| 31 जन, रव | सुबह 7:10 – रात 7:36 | अनुराधा · दशमी (कृ.) |
फ़रवरी 202712 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 7 फ़र, रव | रात 11:29 – सुबह 7:05 (अगले दिन) | धनिष्ठा · द्वितीया (शु.) |
| 8 फ़र, सो | सुबह 7:05 – रात 1:57 (अगले दिन) | शतभिषा · द्वितीया (शु.) |
| 10 फ़र, बु | अगले दिन सुबह 4:56 – सुबह 7:03 | रेवती · पंचमी (शु.) |
| 11 फ़र, गु | सुबह 7:03 – सुबह 7:02 (अगले दिन) | रेवती · पंचमी (शु.) |
| 12 फ़र, शु | सुबह 7:02 – सुबह 5:56 (अगले दिन) | अश्विनी · षष्ठी (शु.) |
| 15 फ़र, सो | रात 10:45 – सुबह 6:59 (अगले दिन) | रोहिणी · दशमी (शु.) |
| 17 फ़र, बु | रात 11:29 – सुबह 6:57 (अगले दिन) | पुनर्वसु · द्वादशी (शु.) |
| 18 फ़र, गु | सुबह 6:57 – सुबह 6:56 (अगले दिन) | पुनर्वसु · द्वादशी (शु.) |
| 19 फ़र, शु | सुबह 6:56 – सुबह 11:16 | पुष्य · त्रयोदशी (शु.) |
| 24 फ़र, बु | रात 8:42 – सुबह 6:50 (अगले दिन) | चित्रा · पंचमी (कृ.) |
| 25 फ़र, गु | सुबह 6:50 – सुबह 6:49 (अगले दिन) | चित्रा · पंचमी (कृ.) |
| 26 फ़र, शु | सुबह 6:49 – सुबह 10:13 | स्वाति · षष्ठी (कृ.) |
मार्च 202710 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 4 मार्च, गु | अगले दिन रात 1:36 – सुबह 6:42 | श्रवण · द्वादशी (कृ.) |
| 5 मार्च, शु | सुबह 6:42 – सुबह 6:41 (अगले दिन) | श्रवण · द्वादशी (कृ.) |
| 10 मार्च, बु | सुबह 10:53 – सुबह 6:35 (अगले दिन) | रेवती · द्वितीया (शु.) |
| 11 मार्च, गु | सुबह 6:35 – दोपहर 3:39 | रेवती · तृतीया (शु.) |
| 14 मार्च, रव | सुबह 10:24 – सुबह 6:31 (अगले दिन) | रोहिणी · षष्ठी (शु.) |
| 15 मार्च, सो | सुबह 6:31 – सुबह 10:52 | रोहिणी · सप्तमी (शु.) |
| 17 मार्च, बु | सुबह 6:46 – सुबह 6:28 (अगले दिन) | पुनर्वसु · दशमी (शु.) |
| 18 मार्च, गु | सुबह 6:28 – दोपहर 3:08 अगले दिन रात 1:52 – रात 3:21 | पुष्य · एकादशी (शु.) पुष्य · द्वादशी (शु.) |
| 24 मार्च, बु | सुबह 6:21 – रात 12:52 (अगले दिन) | चित्रा · द्वितीया (कृ.) |
| 26 मार्च, शु | रात 8:36 – सुबह 6:17 (अगले दिन) | अनुराधा · पंचमी (कृ.) |
अप्रैल 202710 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 1 अप्रै, गु | सुबह 9:25 – सुबह 11:34 अगले दिन रात 12:47 – सुबह 6:10 | श्रवण · दशमी (कृ.) श्रवण · एकादशी (कृ.) |
| 2 अप्रै, शु | सुबह 6:10 – सुबह 6:09 (अगले दिन) | श्रवण · एकादशी (कृ.) |
| 4 अप्रै, रव | सुबह 6:08 – शाम 4:33 | शतभिषा · त्रयोदशी (कृ.) |
| 7 अप्रै, बु | अगले दिन सुबह 4:30 – सुबह 6:03 | अश्विनी · द्वितीया (शु.) |
| 8 अप्रै, गु | सुबह 6:03 – शाम 6:00 | अश्विनी · द्वितीया (शु.) |
| 11 अप्रै, रव | सुबह 6:00 – सुबह 5:59 (अगले दिन) | रोहिणी · पंचमी (शु.) |
| 12 अप्रै, सो | सुबह 5:59 – दोपहर 1:34 | मृगशिरा · षष्ठी (शु.) |
| 21 अप्रै, बु | अगले दिन रात 3:31 – सुबह 4:44 | स्वाति · द्वितीया (कृ.) |
| 23 अप्रै, शु | सुबह 5:48 – दोपहर 3:55 | अनुराधा · तृतीया (कृ.) |
| 30 अप्रै, शु | शाम 5:15 – सुबह 5:40 (अगले दिन) | धनिष्ठा · दशमी (कृ.) |
मई 202712 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 3 मई, सो | अगले दिन रात 3:19 – सुबह 5:38 | रेवती · त्रयोदशी (कृ.) |
| 7 मई, शु | रात 11:42 – सुबह 5:35 (अगले दिन) | रोहिणी · द्वितीया (शु.) |
| 9 मई, रव | सुबह 5:34 – सुबह 9:04 | मृगशिरा · तृतीया (शु.) |
| 10 मई, सो | शाम 6:08 – सुबह 5:33 (अगले दिन) | पुनर्वसु · पंचमी (शु.) |
| 12 मई, बु | सुबह 5:32 – दोपहर 2:56 | पुष्य · सप्तमी (शु.) |
| 16 मई, रव | शाम 5:15 – सुबह 5:29 (अगले दिन) | हस्त · द्वादशी (शु.) |
| 17 मई, सो | सुबह 5:29 – सुबह 5:29 (अगले दिन) | हस्त · द्वादशी (शु.) |
| 20 मई, गु | दोपहर 1:21 – शाम 4:30 | अनुराधा · पूर्णिमा (शु.) |
| 26 मई, बु | सुबह 5:25 – सुबह 4:07 (अगले दिन) | श्रवण · षष्ठी (कृ.) |
| 27 मई, गु | शाम 5:20 – सुबह 5:24 (अगले दिन) | धनिष्ठा · सप्तमी (कृ.) |
| 28 मई, शु | सुबह 5:24 – सुबह 6:28 | धनिष्ठा · सप्तमी (कृ.) |
| 31 मई, सो | दोपहर 12:36 – सुबह 5:23 (अगले दिन) | रेवती · एकादशी (कृ.) |
जून 202710 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 2 जून, बु | सुबह 5:23 – दोपहर 12:17 | अश्विनी · द्वादशी (कृ.) |
| 6 जून, रव | अगले दिन रात 2:08 – सुबह 5:22 | पुनर्वसु · तृतीया (शु.) |
| 7 जून, सो | सुबह 5:22 – दोपहर 3:27 | पुनर्वसु · तृतीया (शु.) |
| 13 जून, रव | सुबह 5:22 – सुबह 5:22 (अगले दिन) | हस्त · दशमी (शु.) |
| 14 जून, सो | सुबह 5:22 – दोपहर 2:08 अगले दिन रात 2:09 – सुबह 5:22 | चित्रा · एकादशी (शु.) स्वाति · द्वादशी (शु.) |
| 16 जून, बु | रात 7:44 – रात 3:22 (अगले दिन) | अनुराधा · त्रयोदशी (शु.) |
| 23 जून, बु | दोपहर 3:44 – सुबह 5:24 (अगले दिन) | धनिष्ठा · पंचमी (कृ.) |
| 24 जून, गु | सुबह 5:24 – सुबह 5:24 (अगले दिन) | धनिष्ठा · पंचमी (कृ.) |
| 25 जून, शु | सुबह 5:24 – शाम 5:07 | शतभिषा · षष्ठी (कृ.) |
| 28 जून, सो | रात 10:51 – सुबह 5:26 (अगले दिन) | अश्विनी · दशमी (कृ.) |
जुलाई 202712 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 1 जुला, गु | रात 7:31 – सुबह 5:27 (अगले दिन) | रोहिणी · त्रयोदशी (कृ.) |
| 2 जुला, शु | सुबह 5:27 – दोपहर 3:25 | रोहिणी · त्रयोदशी (कृ.) |
| 5 जुला, सो | सुबह 5:28 – सुबह 5:28 (अगले दिन) | पुनर्वसु · द्वितीया (शु.) |
| 9 जुला, शु | रात 11:16 – सुबह 5:30 (अगले दिन) | हस्त · सप्तमी (शु.) |
| 12 जुला, सो | सुबह 11:42 – रात 11:56 | स्वाति · दशमी (शु.) |
| 14 जुला, बु | दोपहर 1:12 – रात 3:18 (अगले दिन) | अनुराधा · द्वादशी (शु.) |
| 19 जुला, सो | रात 11:49 – सुबह 5:35 (अगले दिन) | श्रवण · द्वितीया (कृ.) |
| 21 जुला, बु | सुबह 5:36 – दोपहर 3:37 | धनिष्ठा · तृतीया (कृ.) |
| 25 जुला, रव | सुबह 5:38 – सुबह 9:54 रात 10:16 – सुबह 5:39 (अगले दिन) | रेवती · षष्ठी (कृ.) रेवती · सप्तमी (कृ.) |
| 26 जुला, सो | सुबह 5:39 – सुबह 10:27 | अश्विनी · सप्तमी (कृ.) |
| 29 जुला, गु | सुबह 7:36 – सुबह 5:41 (अगले दिन) | रोहिणी · एकादशी (कृ.) |
| 30 जुला, शु | सुबह 5:41 – रात 1:24 (अगले दिन) | मृगशिरा · द्वादशी (कृ.) |
अगस्त 20279 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 6 अग, शु | सुबह 7:33 – सुबह 5:45 (अगले दिन) | हस्त · पंचमी (शु.) |
| 8 अग, रव | सुबह 5:46 – रात 10:26 | चित्रा · सप्तमी (शु.) |
| 11 अग, बु | सुबह 5:47 – सुबह 9:14 | अनुराधा · दशमी (शु.) |
| 16 अग, सो | रात 11:46 – सुबह 5:51 (अगले दिन) | धनिष्ठा · पूर्णिमा (शु.) |
| 18 अग, बु | दोपहर 3:17 – सुबह 5:15 (अगले दिन) | शतभिषा · द्वितीया (कृ.) |
| 22 अग, रव | सुबह 5:53 – सुबह 5:54 (अगले दिन) | रेवती · पंचमी (कृ.) |
| 23 अग, सो | सुबह 5:54 – दोपहर 12:12 | अश्विनी · षष्ठी (कृ.) |
| 26 अग, गु | शाम 5:41 – सुबह 4:38 (अगले दिन) | मृगशिरा · दशमी (कृ.) |
| 29 अग, रव | सुबह 5:57 – रात 3:45 (अगले दिन) | पुनर्वसु · द्वादशी (कृ.) |
सितंबर 202710 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 2 सितं, गु | शाम 5:36 – सुबह 6:00 (अगले दिन) | हस्त · तृतीया (शु.) |
| 3 सितं, शु | सुबह 6:00 – दोपहर 2:20 | हस्त · तृतीया (शु.) |
| 5 सितं, रव | सुबह 6:01 – दोपहर 2:30 | स्वाति · पंचमी (शु.) |
| 6 सितं, सो | दोपहर 2:59 – सुबह 6:01 (अगले दिन) | अनुराधा · सप्तमी (शु.) |
| 12 सितं, रव | सुबह 6:04 – सुबह 6:04 (अगले दिन) | श्रवण · द्वादशी (शु.) |
| 13 सितं, सो | सुबह 6:04 – रात 12:41 (अगले दिन) | धनिष्ठा · त्रयोदशी (शु.) |
| 17 सितं, शु | दोपहर 3:29 – सुबह 6:07 (अगले दिन) | रेवती · द्वितीया (कृ.) |
| 22 सितं, बु | शाम 5:19 – सुबह 4:38 (अगले दिन) | रोहिणी · सप्तमी (कृ.) |
| 24 सितं, शु | अगले दिन रात 12:56 – सुबह 6:10 | पुनर्वसु · दशमी (कृ.) |
| 26 सितं, रव | सुबह 6:11 – दोपहर 12:38 | पुष्य · एकादशी (कृ.) |
अक्टूबर 202711 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 1 अक्टू, शु | सुबह 6:13 – सुबह 6:14 (अगले दिन) | चित्रा · द्वितीया (शु.) |
| 3 अक्टू, रव | अगले दिन रात 1:29 – सुबह 6:15 | अनुराधा · पंचमी (शु.) |
| 4 अक्टू, सो | सुबह 6:15 – रात 12:44 (अगले दिन) | अनुराधा · पंचमी (शु.) |
| 10 अक्टू, रव | सुबह 6:18 – रात 12:58 (अगले दिन) | श्रवण · दशमी (शु.) |
| 11 अक्टू, सो | दोपहर 2:10 – सुबह 6:19 (अगले दिन) | धनिष्ठा · द्वादशी (शु.) |
| 15 अक्टू, शु | सुबह 7:08 – रात 7:18 | रेवती · पूर्णिमा (शु.) |
| 20 अक्टू, बु | सुबह 6:24 – रात 10:30 | मृगशिरा · पंचमी (कृ.) |
| 21 अक्टू, गु | अगले दिन रात 12:52 – सुबह 6:25 | पुनर्वसु · सप्तमी (कृ.) |
| 22 अक्टू, शु | सुबह 6:25 – सुबह 11:57 | पुनर्वसु · सप्तमी (कृ.) |
| 27 अक्टू, बु | दोपहर 1:01 – रात 10:51 | हस्त · त्रयोदशी (कृ.) |
| 31 अक्टू, रव | सुबह 9:31 – सुबह 6:32 (अगले दिन) | अनुराधा · द्वितीया (शु.) |
नवंबर 202713 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 1 नवं, सो | सुबह 6:32 – सुबह 9:58 | अनुराधा · तृतीया (शु.) |
| 5 नवं, शु | शाम 6:20 – रात 12:10 (अगले दिन) | श्रवण · सप्तमी (शु.) |
| 7 नवं, रव | अगले दिन सुबह 5:25 – सुबह 6:37 | शतभिषा · दशमी (शु.) |
| 8 नवं, सो | सुबह 6:37 – रात 3:14 (अगले दिन) | शतभिषा · दशमी (शु.) |
| 11 नवं, गु | सुबह 7:02 – सुबह 6:40 (अगले दिन) | रेवती · द्वादशी (शु.) |
| 12 नवं, शु | सुबह 6:40 – सुबह 10:22 | रेवती · त्रयोदशी (शु.) |
| 15 नवं, सो | सुबह 7:30 – सुबह 6:44 (अगले दिन) | रोहिणी · द्वितीया (कृ.) |
| 17 नवं, बु | अगले दिन रात 3:18 – सुबह 6:45 | पुनर्वसु · पंचमी (कृ.) |
| 18 नवं, गु | सुबह 6:45 – सुबह 6:46 (अगले दिन) | पुनर्वसु · पंचमी (कृ.) |
| 19 नवं, शु | सुबह 6:46 – रात 9:22 | पुष्य · षष्ठी (कृ.) |
| 24 नवं, बु | सुबह 6:50 – सुबह 6:51 (अगले दिन) | हस्त · एकादशी (कृ.) |
| 25 नवं, गु | सुबह 6:51 – सुबह 6:52 (अगले दिन) | चित्रा · द्वादशी (कृ.) |
| 26 नवं, शु | सुबह 6:52 – सुबह 9:49 | स्वाति · त्रयोदशी (कृ.) |
दिसंबर 202713 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 2 दिसं, गु | अगले दिन रात 2:30 – सुबह 6:57 | श्रवण · पंचमी (शु.) |
| 3 दिसं, शु | सुबह 6:57 – सुबह 6:58 (अगले दिन) | श्रवण · पंचमी (शु.) |
| 5 दिसं, रव | सुबह 6:59 – रात 9:38 | धनिष्ठा · सप्तमी (शु.) |
| 8 दिसं, बु | शाम 4:13 – सुबह 7:01 (अगले दिन) | रेवती · दशमी (शु.) |
| 9 दिसं, गु | सुबह 7:01 – दोपहर 3:17 अगले दिन रात 3:21 – सुबह 7:02 | रेवती · एकादशी (शु.) अश्विनी · द्वादशी (शु.) |
| 10 दिसं, शु | सुबह 7:02 – शाम 5:55 | अश्विनी · द्वादशी (शु.) |
| 13 दिसं, सो | सुबह 10:51 – रात 9:40 | रोहिणी · पूर्णिमा (शु.) |
| 15 दिसं, बु | सुबह 11:22 – रात 2:49 (अगले दिन) | पुनर्वसु · द्वितीया (कृ.) |
| 22 दिसं, बु | सुबह 7:09 – दोपहर 12:06 रात 11:42 – सुबह 7:10 (अगले दिन) | चित्रा · दशमी (कृ.) चित्रा · एकादशी (कृ.) |
| 23 दिसं, गु | सुबह 7:10 – रात 12:17 (अगले दिन) | स्वाति · एकादशी (कृ.) |
| 24 दिसं, शु | अगले दिन रात 12:50 – सुबह 7:11 | अनुराधा · त्रयोदशी (कृ.) |
| 30 दिसं, गु | सुबह 10:07 – सुबह 7:13 (अगले दिन) | श्रवण · तृतीया (शु.) |
| 31 दिसं, शु | सुबह 7:13 – सुबह 8:13 | श्रवण · तृतीया (शु.) |
- नक्षत्र: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती
- तिथि (शुक्ल): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, पूर्णिमा · (कृष्ण): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी
- वार: रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
- इन समयों में मुहूर्त नहीं: अधिक मास, भद्रा (विष्टि करण)
ये तिथियाँ ऊपर लिखे मानक नियमों से गणना की गई हैं। पंचांगकारों के नियमों में थोड़ा अंतर होता है, और कई लोग लग्न शुद्धि और अपनी कुंडली भी देखते हैं — अंतिम मुहूर्त अपने पुरोहित से ज़रूर पक्का करें।
वाहन क्रय मुहूर्त क्या है?
पुराने समय में घोड़ा, बैलगाड़ी या रथ जैसे वाहन लेने के लिए भी शुभ दिन देखा जाता था। आज वही परंपरा कार और बाइक के साथ चल रही है। वाहन क्रय मुहूर्त वह समय है जब पंचांग की तिथि, वार और नक्षत्र यात्रा, गति और सुरक्षित आवागमन के अनुकूल माने जाते हैं।
इस मुहूर्त के नक्षत्रों में एक दिलचस्प बात है। विवाह या गृह प्रवेश में जहाँ स्थिर नक्षत्रों को महत्व दिया जाता है, वहीं वाहन के लिए चर (चलने वाले) और क्षिप्र (शीघ्र) नक्षत्र प्रमुख हैं — क्योंकि वाहन का काम ही चलना है। चर नक्षत्र हैं पुनर्वसु, स्वाती, श्रवण, धनिष्ठा और शतभिषा; क्षिप्र नक्षत्र हैं अश्विनी, पुष्य और हस्त। साथ में मृदु नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती) और रोहिणी भी शुभ माने गए हैं।
यह टूल गाड़ी खरीदने का शुभ मुहूर्त कैसे निकालता है?
आप भारत और विदेश के लगभग 215 शहरों में से अपना शहर चुनते हैं (पहले से दिल्ली चुना रहता है)। टूल उस शहर के सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक हर दिन का पंचांग गणित से निकालता है और इन नियमों से जाँचता है:
| नियम | वाहन खरीदने में क्या देखा जाता है |
|---|---|
| नक्षत्र (13) | अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती |
| तिथि | द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, पूर्णिमा |
| वार | रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार |
| भद्रा | विष्टि करण (भद्रा) का समय शुभ समय से हटा दिया जाता है |
| वर्जित अवधि | केवल अधिक मास |
विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन से अलग, वाहन खरीदने पर कोई मौसमी रोक नहीं है — खरमास, चातुर्मास, होलाष्टक या गुरु-शुक्र अस्त में भी इस टूल में वाहन के मुहूर्त दिखते हैं। इसलिए लगभग हर महीने कई शुभ तारीखें मिल जाती हैं। केवल अधिक मास में कोई तारीख नहीं दिखाई जाती, और हर दिन भद्रा का समय शुभ समय-खंड से बाहर रखा जाता है।
मंगलवार और शनिवार इस सूची में नहीं हैं, और न ही रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी), अष्टमी या अमावस्या। हिंदू पंचांग में वार सूर्योदय से बदलता है, इसलिए सोमवार की रात 1 बजे का समय भी सोमवार का ही माना जाता है।
शुभ समय-खंड: बुकिंग, डिलीवरी या पहली ड्राइव?
लोग अक्सर पूछते हैं कि मुहूर्त किस काम का देखें — पैसे देने का, गाड़ी बुक करने का या घर लाने का? परंपरा में सबसे अधिक महत्व वाहन को अपने नाम पर लेकर घर लाने — यानी डिलीवरी लेने और पहली बार चलाने — को दिया जाता है। बहुत से लोग बुकिंग कभी भी कर लेते हैं और डिलीवरी शुभ मुहूर्त में लेते हैं।
- शहर चुनें: वह शहर जहाँ से गाड़ी की डिलीवरी लेंगे।
- 2–3 तारीखें चुनें: अपनी सुविधा और डीलर की उपलब्धता देखकर।
- समय-खंड देखें: हर तारीख के साथ दिया गया समय ही उस दिन का शुभ समय है। डिलीवरी, पूजा और पहली ड्राइव इसी खंड में रखने की कोशिश करें।
- राहु काल: यह टूल राहु काल अलग से नहीं हटाता। बहुत से लोग वाहन लेते समय राहु काल से बचते हैं — उस दिन का आज का राहु काल और चौघड़िया भी देख लें।
- व्यावसायिक वाहन: ट्रक, टैक्सी, ट्रैक्टर या दुकान के लिए लिया गया वाहन भी इसी मुहूर्त से देखा जाता है। कुछ लोग इसके साथ उस समय की शुभ होरा भी देखते हैं, पर यह टूल होरा अलग से नहीं जाँचता।
साफ़ बात: यह सूची ऊपर बताए गए मानक नियमों से गणित द्वारा बनी है। कुछ पंचांगकार इसके अलावा लग्न, खरीदने वाले की अपनी कुंडली, चंद्र बल या क्षेत्रीय नियम भी देखते हैं, इसलिए किसी पंचांग से एक-दो तारीखों का अंतर संभव है। बड़ी या व्यावसायिक खरीद हो तो अंतिम मुहूर्त अपने पुरोहित से पक्का करें।
वाहन खरीदने के लोकप्रिय शुभ दिन
कुछ दिन ऐसे हैं जिन पर परंपरा से वाहन और नई चीज़ें खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। इन दिनों शोरूम में भी सबसे ज़्यादा भीड़ होती है।
| दिन | कब आता है | क्यों प्रसिद्ध है |
|---|---|---|
| धनतेरस | कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, दीपावली से दो दिन पहले | धन्वंतरि जयंती; इस दिन बर्तन, सोना-चाँदी और वाहन खरीदने की परंपरा |
| अक्षय तृतीया | वैशाख शुक्ल तृतीया | “अक्षय” यानी जिसका क्षय न हो; अबूझ मुहूर्त माना जाता है |
| पुष्य नक्षत्र | हर महीने लगभग एक बार | नक्षत्रों में श्रेष्ठ माना जाता है; गुरुवार को हो तो गुरु पुष्य, रविवार को हो तो रवि पुष्य योग |
| विजयदशमी (दशहरा) | आश्विन शुक्ल दशमी | विजय का पर्व; कई क्षेत्रों में वाहन और शस्त्र पूजन की परंपरा |
| नवरात्रि | चैत्र और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी | देवी आराधना के दिन, नई शुरुआत के लिए लोकप्रिय |
एक बात समझ लें: टूल इन दिनों को अलग से “शुभ” नहीं मानता, बल्कि हर दिन को अपने नियमों से जाँचता है। उदाहरण के लिए, अगर धनतेरस मंगलवार या शनिवार को पड़े, या उस दिन नक्षत्र सूची में न हो, तो वह तारीख टूल में नहीं दिखेगी — या केवल कुछ घंटों के लिए दिखेगी। फिर भी अक्षय तृतीया जैसे दिनों को परंपरा में अबूझ मुहूर्त माना जाता है, यानी बहुत से लोग बिना अलग मुहूर्त देखे इन दिनों खरीदारी करते हैं। दोनों तरीके अपनी आस्था के अनुसार अपनाए जा सकते हैं।
नए वाहन की पूजा — सरल परंपरागत विधि
वाहन पूजा की विधि घर-घर में अलग होती है। नीचे एक सरल और प्रचलित तरीका है:
- गाड़ी को धोकर या साफ़ करके घर के सामने या किसी मंदिर के पास खड़ा करें।
- रोली या कुमकुम से गाड़ी के आगे (बोनट या हेडलाइट के पास) स्वस्तिक बनाएँ और चावल (अक्षत) लगाएँ।
- स्टीयरिंग, हैंडल या शीशे पर कलावा (मौली) बाँधें; कई लोग फूलों की माला भी चढ़ाते हैं।
- गणेश जी का स्मरण करें। बहुत से परिवार हनुमान जी की पूजा भी करते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं।
- दीपक या कपूर से गाड़ी की आरती करें।
- नारियल को गाड़ी के सामने रखकर या फोड़कर प्रसाद के रूप में बाँटें। कुछ लोग पहियों के नीचे नींबू रखकर गाड़ी आगे बढ़ाते हैं — यह लोक-परंपरा है, ज़रूरी नियम नहीं।
- मिठाई बाँटें और पहली ड्राइव किसी मंदिर तक या घर तक शांति से करें।
पूजा श्रद्धा का भाव है। सबसे बड़ी सुरक्षा तो सावधानी से चलाना ही है — बाइक पर हेलमेट, कार में सीट बेल्ट, गति पर नियंत्रण और वाहन की नियमित सर्विस।
वाहन मुहूर्त: मान्यता और तथ्य
- मान्यता: शुभ मुहूर्त में ली गई गाड़ी से कभी दुर्घटना नहीं होगी। तथ्य: मुहूर्त एक शुभ शुरुआत की परंपरा है, सुरक्षा की गारंटी नहीं। सुरक्षित ड्राइविंग, अच्छा रखरखाव और यातायात नियमों का पालन ही असली सुरक्षा है।
- मान्यता: खरमास या चातुर्मास में गाड़ी नहीं खरीदनी चाहिए। तथ्य: वाहन क्रय के मानक नियमों में यह रोक नहीं है, इसलिए यह टूल इन महीनों में भी मुहूर्त दिखाता है। फिर भी कोई परिवार इन्हें मानता हो तो वह अपनी परंपरा के अनुसार चल सकता है।
- मान्यता: केवल धनतेरस पर ली गई गाड़ी ही शुभ है। तथ्य: धनतेरस लोकप्रिय दिन है, पर हर महीने कई शुभ तारीखें आती हैं। भीड़ और लंबी प्रतीक्षा से बचना हो तो इनमें से कोई दिन चुन सकते हैं।
- मान्यता: पुरानी (सेकंड-हैंड) गाड़ी के लिए मुहूर्त ज़रूरी नहीं। तथ्य: परंपरा में नई या पुरानी, अपने नाम पर ली जाने वाली हर गाड़ी के लिए यही मुहूर्त देखा जाता है — यह आपकी आस्था पर निर्भर है।
नए घर की तैयारी हो तो गृह प्रवेश मुहूर्त देखें, और किसी दिन के पूरे पंचांग के लिए आज का पंचांग।
Vehicle Purchase Muhurat — in English
This vehicle purchase muhurat tool (also searched as gadi kharidne ka shubh muhurat, car kharidne ka muhurat or bike kharidne ka shubh din) lists auspicious dates to buy a car, bike or any vehicle from today to the end of next year, for about 215 cities in India and abroad, with weekday, nakshatra, tithi and the auspicious time window. It uses 13 nakshatras (Ashwini, Rohini, Mrigashira, Punarvasu, Pushya, Hasta, Chitra, Swati, Anuradha, Shravana, Dhanishta, Shatabhisha, Revati), tithis 2, 3, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 13 and Purnima, and Sunday, Monday, Wednesday, Thursday or Friday. There is no seasonal ban — only Adhik maas and Bhadra are excluded — so most months have several dates. Dhanteras, Akshaya Tritiya and Pushya nakshatra are popular days. The tool does not remove Rahu Kaal, so check it separately, and remember that safe driving is the real protection.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
गाड़ी खरीदने का शुभ मुहूर्त कैसे देखें?
ऊपर के टूल में वह शहर चुनें जहाँ से गाड़ी की डिलीवरी लेंगे। टूल आज से अगले साल के अंत तक की शुभ तारीखें वार, नक्षत्र, तिथि और शुभ समय के साथ दिखा देगा।
gadi kharidne ka shubh muhurat kab hai?
वाहन खरीदने पर कोई मौसमी रोक नहीं है, इसलिए लगभग हर महीने कई शुभ तारीखें मिलती हैं। टूल में अपना शहर चुनकर इस साल और अगले साल की सूची देखें।
car kharidne ka shubh din kaun sa hai?
इस टूल में रविवार, सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार लिए गए हैं, जब नक्षत्र और तिथि भी शुभ हों। मंगलवार और शनिवार सूची में नहीं हैं।
bike kharidne ka shubh din kaise jane?
बाइक, स्कूटी और कार — सबके लिए एक ही वाहन मुहूर्त देखा जाता है। टूल में शहर चुनें और अपनी सुविधा की तारीख व समय-खंड देखें।
वाहन खरीदने के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?
अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और रेवती — ये 13 नक्षत्र।
वाहन खरीदने के लिए कौन सी तिथि शुभ है?
द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी और पूर्णिमा। रिक्ता तिथियाँ, अष्टमी और अमावस्या नहीं ली जातीं।
क्या खरमास में गाड़ी खरीद सकते हैं?
वाहन क्रय के मानक नियमों में खरमास या चातुर्मास की रोक नहीं है, इसलिए टूल इन महीनों में भी मुहूर्त दिखाता है। केवल अधिक मास और भद्रा का समय हटाया जाता है।
धनतेरस पर गाड़ी खरीदना शुभ क्यों है?
धनतेरस पर धातु, सोना-चाँदी और वाहन जैसी नई चीज़ें खरीदने की परंपरा है। ध्यान दें कि टूल इस दिन को भी अपने नियमों से जाँचता है, इसलिए हर साल यह सूची में न आए ऐसा हो सकता है।
पुष्य नक्षत्र में वाहन खरीदना कैसा है?
पुष्य नक्षत्र को बहुत शुभ माना जाता है, और गुरुवार को हो तो गुरु पुष्य, रविवार को हो तो रवि पुष्य योग कहलाता है। ये दिन वाहन खरीद के लिए लोकप्रिय हैं।
मुहूर्त बुकिंग का देखें या डिलीवरी का?
परंपरा में गाड़ी को घर लाने, यानी डिलीवरी और पहली ड्राइव, को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। बुकिंग सुविधा अनुसार की जा सकती है।
नई गाड़ी की पूजा कैसे करें?
गाड़ी पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ, स्टीयरिंग या हैंडल पर कलावा बाँधें, गणेश जी का स्मरण करके आरती करें और नारियल का प्रसाद बाँटें। विधि परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती है।
क्या टूल राहु काल हटाता है?
नहीं, यह टूल तिथि, नक्षत्र, वार, भद्रा और अधिक मास देखता है। राहु काल से बचना हो तो उस दिन का राहु काल अलग से देख लें।
सेकंड-हैंड गाड़ी के लिए भी मुहूर्त देखें?
परंपरा में अपने नाम पर ली जाने वाली हर गाड़ी, नई या पुरानी, के लिए यही मुहूर्त देखा जाता है। यह आपकी आस्था पर निर्भर है।
क्या शुभ मुहूर्त से दुर्घटना नहीं होगी?
मुहूर्त एक शुभ शुरुआत की परंपरा है, सुरक्षा की गारंटी नहीं। हेलमेट, सीट बेल्ट, नियंत्रित गति और नियमित सर्विस ही असली सुरक्षा है।
टूल की तारीख पंचांग से अलग क्यों हो सकती है?
कुछ पंचांगकार लग्न, खरीदने वाले की कुंडली या चंद्र बल भी देखते हैं, इसलिए थोड़ा अंतर संभव है। बड़ी खरीद हो तो पुरोहित से पुष्टि कर लें।