नए घर की चाबी हाथ में आते ही सबसे पहला सवाल होता है — “गृह प्रवेश कब करें?” यह टूल आपके शहर के अनुसार गृह प्रवेश मुहूर्त (Griha Pravesh Muhurat) की पूरी सूची देता है — यानी नए घर में प्रवेश की शुभ तिथियाँ। आज से अगले साल के अंत तक की हर शुभ तारीख महीने के अनुसार दिखती है, उसके वार, नक्षत्र, तिथि और उस दिन के शुभ समय के साथ। जिन महीनों में गृह प्रवेश का मुहूर्त नहीं है, उनका कारण भी साफ़ लिखा मिलता है।
नवंबर 20262 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 25 नवं, बु | शाम 4:52 – सुबह 6:52 (अगले दिन) | रोहिणी · द्वितीया (कृ.) |
| 26 नवं, गु | सुबह 6:52 – शाम 5:47 | मृगशिरा · द्वितीया (कृ.) |
दिसंबर 20263 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 11 दिसं, शु | अगले दिन रात 3:04 – सुबह 7:04 | उत्तराषाढ़ा · तृतीया (शु.) |
| 14 दिसं, सो | सुबह 9:12 – रात 7:17 | धनिष्ठा · पंचमी (शु.) |
| 16 दिसं, बु | सुबह 7:06 – दोपहर 2:03 | शतभिषा · सप्तमी (शु.) |
जनवरी 20273 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 15 जन, शु | सुबह 7:15 – दोपहर 2:15 | रेवती · सप्तमी (शु.) |
| 20 जन, बु | सुबह 7:14 – शाम 4:17 | मृगशिरा · त्रयोदशी (शु.) |
| 25 जन, सो | अगले दिन सुबह 6:02 – सुबह 7:12 | उत्तरा फाल्गुनी · पंचमी (कृ.) |
फ़रवरी 20277 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 8 फ़र, सो | सुबह 7:05 – रात 1:57 (अगले दिन) | शतभिषा · द्वितीया (शु.) |
| 10 फ़र, बु | अगले दिन रात 3:06 – सुबह 7:03 | उत्तराभाद्रपद · पंचमी (शु.) |
| 11 फ़र, गु | सुबह 7:03 – रात 3:20 (अगले दिन) | रेवती · पंचमी (शु.) |
| 15 फ़र, सो | रात 10:45 – सुबह 6:59 (अगले दिन) | रोहिणी · दशमी (शु.) |
| 22 फ़र, सो | सुबह 11:55 – सुबह 6:52 (अगले दिन) | उत्तरा फाल्गुनी · द्वितीया (कृ.) |
| 24 फ़र, बु | रात 8:42 – सुबह 6:50 (अगले दिन) | चित्रा · पंचमी (कृ.) |
| 25 फ़र, गु | सुबह 6:50 – सुबह 9:33 | चित्रा · पंचमी (कृ.) |
मार्च 20273 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 10 मार्च, बु | सुबह 6:37 – सुबह 6:35 (अगले दिन) | उत्तराभाद्रपद · द्वितीया (शु.) |
| 11 मार्च, गु | सुबह 6:35 – सुबह 11:20 | रेवती · तृतीया (शु.) |
| 15 मार्च, सो | सुबह 6:31 – सुबह 10:52 | रोहिणी · सप्तमी (शु.) |
अप्रैल 20271 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 23 अप्रै, शु | सुबह 5:48 – दोपहर 3:55 | अनुराधा · तृतीया (कृ.) |
मई 20273 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 7 मई, शु | रात 11:42 – सुबह 5:35 (अगले दिन) | रोहिणी · द्वितीया (शु.) |
| 17 मई, सो | शाम 4:29 – सुबह 5:29 (अगले दिन) | चित्रा · त्रयोदशी (शु.) |
| 24 मई, सो | रात 11:01 – सुबह 5:25 (अगले दिन) | उत्तराषाढ़ा · पंचमी (कृ.) |
जून 20275 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 14 जून, सो | सुबह 5:22 – दोपहर 2:08 | चित्रा · एकादशी (शु.) |
| 16 जून, बु | रात 7:44 – रात 3:22 (अगले दिन) | अनुराधा · त्रयोदशी (शु.) |
| 21 जून, सो | सुबह 5:23 – रात 11:52 | उत्तराषाढ़ा · द्वितीया (कृ.) |
| 23 जून, बु | दोपहर 3:44 – सुबह 5:24 (अगले दिन) | धनिष्ठा · पंचमी (कृ.) |
| 24 जून, गु | सुबह 5:24 – शाम 6:12 | धनिष्ठा · पंचमी (कृ.) |
जुलाई 2027कोई मुहूर्त नहीं
कारण: चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी), शुक्र अस्त
अगस्त 2027कोई मुहूर्त नहीं
कारण: चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी)
सितंबर 2027कोई मुहूर्त नहीं
कारण: चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी)
अक्टूबर 2027कोई मुहूर्त नहीं
कारण: चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी)
नवंबर 20273 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 11 नवं, गु | सुबह 10:09 – सुबह 6:40 (अगले दिन) | रेवती · त्रयोदशी (शु.) |
| 12 नवं, शु | सुबह 6:40 – सुबह 7:56 | रेवती · त्रयोदशी (शु.) |
| 15 नवं, सो | सुबह 7:30 – सुबह 6:44 (अगले दिन) | रोहिणी · द्वितीया (कृ.) |
दिसंबर 20273 मुहूर्त
| तारीख | शुभ समय | नक्षत्र · तिथि |
|---|---|---|
| 2 दिसं, गु | दोपहर 1:45 – रात 2:30 (अगले दिन) | उत्तराषाढ़ा · पंचमी (शु.) |
| 8 दिसं, बु | सुबह 7:01 – सुबह 7:01 (अगले दिन) | उत्तराभाद्रपद · दशमी (शु.) |
| 9 दिसं, गु | सुबह 7:01 – दोपहर 3:17 | रेवती · एकादशी (शु.) |
- नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती
- तिथि (शुक्ल): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी · (कृष्ण): द्वितीया, तृतीया, पंचमी
- वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
- इन समयों में मुहूर्त नहीं: खरमास (सूर्य धनु या मीन में), चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी), गुरु अस्त, शुक्र अस्त, अधिक मास, होलाष्टक, भद्रा (विष्टि करण)
ये तिथियाँ ऊपर लिखे मानक नियमों से गणना की गई हैं। पंचांगकारों के नियमों में थोड़ा अंतर होता है, और कई लोग लग्न शुद्धि और अपनी कुंडली भी देखते हैं — अंतिम मुहूर्त अपने पुरोहित से ज़रूर पक्का करें।
गृह प्रवेश मुहूर्त क्या है?
घर केवल ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, परिवार के जीवन का केंद्र है। इसलिए हिंदू परंपरा में नए घर में पहली बार रहने जाने को एक छोटे संस्कार की तरह मनाया जाता है — कलश, गणेश पूजन, वास्तु पूजा और प्रसाद के साथ। गृह प्रवेश मुहूर्त वह समय है जब पंचांग की तिथि, वार और नक्षत्र स्थिरता और समृद्धि के अनुकूल माने जाते हैं।
गृह प्रवेश के नक्षत्रों में एक बात ध्यान देने लायक है: इनमें ज़्यादातर ध्रुव (स्थिर) और मृदु (कोमल) नक्षत्र हैं। ध्रुव नक्षत्र — रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा और उत्तरा भाद्रपद — टिकाऊ कामों के लिए माने जाते हैं, जैसे नींव रखना या घर बसाना। मृदु नक्षत्र — मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा और रेवती — सौम्य और मंगल कार्यों के लिए। भाव यही है कि घर में स्थायी सुख-शांति बनी रहे।
यह टूल गृह प्रवेश की शुभ तिथियाँ कैसे निकालता है?
आप भारत और विदेश के लगभग 215 शहरों में से अपना शहर चुनते हैं (पहले से दिल्ली चुना रहता है)। टूल उस शहर के सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक हर दिन का पंचांग गणित से निकालता है और इन नियमों से जाँचता है:
| नियम | गृह प्रवेश में क्या देखा जाता है |
|---|---|
| नक्षत्र (10) | रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती |
| शुक्ल पक्ष की तिथि | द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी |
| कृष्ण पक्ष की तिथि | केवल द्वितीया, तृतीया, पंचमी |
| वार | सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार |
| भद्रा | विष्टि करण (भद्रा) का समय शुभ समय से बाहर रखा जाता है |
| वर्जित अवधि | खरमास, चातुर्मास, गुरु या शुक्र अस्त, अधिक मास, होलाष्टक |
कृष्ण पक्ष की केवल शुरुआती तिथियाँ क्यों? परंपरा में बढ़ते चंद्रमा (शुक्ल पक्ष) को गृह प्रवेश के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। कृष्ण पक्ष के पहले कुछ दिनों में चंद्रमा अभी भी लगभग पूर्ण और उज्ज्वल रहता है, इसलिए द्वितीया, तृतीया और पंचमी स्वीकार की जाती हैं; उसके बाद की कृष्ण तिथियाँ नहीं ली जातीं।
तिथि और नक्षत्र दिन में किसी भी समय बदल सकते हैं, इसलिए हर तारीख के साथ वह शुभ समय-खंड दिखता है जिसमें सभी शर्तें एक साथ पूरी हों और भद्रा न हो। इसी खंड में घर की दहलीज़ पार करना और कलश लेकर प्रवेश करना अच्छा माना जाता है।
किन महीनों में गृह प्रवेश नहीं होता?
- खरमास: सूर्य धनु राशि (लगभग मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी) या मीन राशि (लगभग मध्य मार्च से मध्य अप्रैल) में हो।
- चातुर्मास: देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक — मान्यता है कि भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए नए घर में प्रवेश जैसे कार्य आगे बढ़ा दिए जाते हैं।
- गुरु या शुक्र अस्त: जब ये ग्रह सूर्य के बहुत पास होकर दिखाई न दें।
- अधिक मास: लगभग हर तीन साल में आने वाला अतिरिक्त मास, जिसे भक्ति के लिए रखा जाता है।
- होलाष्टक: होलिका दहन से पहले के आठ दिन।
अगर आपके घर का काम चातुर्मास में पूरा हो गया है, तो चिंता न करें। कई परिवार इस दौरान घर की सफ़ाई, रंग-रोगन और सामान की व्यवस्था कर लेते हैं और देवउठनी एकादशी के बाद पहले अच्छे मुहूर्त में विधिवत प्रवेश करते हैं। टूल इस साल और अगले साल दोनों की तारीखें दिखाता है, जिससे आगे की योजना आसानी से बन सके।
गृह प्रवेश के तीन प्रकार
वास्तु और मुहूर्त ग्रंथों में गृह प्रवेश को परिस्थिति के अनुसार तीन प्रकार का बताया गया है। मुहूर्त का विचार तीनों में किया जाता है, पर सबसे अधिक सावधानी नए घर के लिए रखी जाती है।
| प्रकार | कब | परंपरागत रूप से क्या करते हैं |
|---|---|---|
| अपूर्व गृह प्रवेश | नए बने या नए खरीदे घर में पहली बार रहने जाना | पूरा मुहूर्त, कलश, गणेश पूजन, वास्तु पूजा, हवन |
| सपूर्व गृह प्रवेश | लंबी यात्रा, विदेश प्रवास या कुछ समय बाहर रहने के बाद अपने ही घर लौटना | शुभ दिन देखकर सादा पूजन और दीप प्रज्वलन |
| द्वंद्व गृह प्रवेश | मरम्मत, पुनर्निर्माण या किसी आपदा के बाद पुराने घर में फिर से रहना | शुभ दिन, शुद्धि, वास्तु शांति और गणेश पूजन |
किराए के घर में शिफ़्ट होने पर भी कई लोग शुभ दिन देखते हैं और सादा पूजन करते हैं। इसमें कोई कठोर नियम नहीं — यह आपकी श्रद्धा और परिवार की परंपरा पर निर्भर है।
गृह प्रवेश पूजा की सरल परंपरागत विधि
विधि हर क्षेत्र और परिवार में थोड़ी अलग होती है। नीचे एक सरल और प्रचलित क्रम है, जिसे आप अपने पुरोहित और घर के बड़ों की सलाह से बदल सकते हैं:
- तैयारी: प्रवेश से पहले घर को अच्छी तरह साफ़ करें। मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण और रंगोली लगाएँ, दरवाज़े पर स्वस्तिक या शुभ-लाभ बनाएँ।
- कलश: ताँबे या पीतल के कलश में जल भरें, उसमें थोड़े अक्षत और एक सिक्का डालें, ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें। परिवार की गृहलक्ष्मी या मुखिया यह कलश लेकर आगे चलते हैं।
- प्रवेश: शुभ समय-खंड में मंगल ध्वनि (शंख या घंटी) के साथ पहले दायाँ पैर दहलीज़ के अंदर रखें। कई परिवारों में साथ में गणेश जी की मूर्ति या चित्र भी लाया जाता है।
- गणेश पूजन: किसी भी शुभ कार्य की तरह सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें — दीप, धूप, फूल, दूर्वा और मोदक या लड्डू के साथ।
- वास्तु पूजा: वास्तु पुरुष और दिशाओं के देवताओं का पूजन करके घर की सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। कई परिवार साथ में छोटा हवन और नवग्रह पूजन भी करवाते हैं।
- दूध उबालना: रसोई में पहली बार चूल्हा जलाकर दूध उबाला जाता है और उसे हल्का-सा उफनने दिया जाता है — यह घर में समृद्धि के “उफान” का प्रतीक माना जाता है। फिर उसी दूध से खीर या प्रसाद बनता है।
- प्रसाद और भोजन: भगवान को भोग लगाकर परिवार, पड़ोसियों और अतिथियों में प्रसाद बाँटें। ब्राह्मण भोजन या किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है।
प्रवेश के दिन घर में दीपक जलाना और रात को घर खाली न छोड़ना भी कई परिवारों की परंपरा है। सबसे ज़रूरी है श्रद्धा और प्रसन्न मन — विधि कितनी बड़ी या छोटी है, इससे ज़्यादा।
टूल का परिणाम कैसे उपयोग करें
- वह शहर चुनें जहाँ नया घर है — शुभ समय वहीं के सूर्योदय पर निर्भर करता है।
- अपनी सुविधा की 2–3 तारीखें चुनें और देखें कि उस दिन शुभ समय-खंड कितना लंबा है। पूजा, हवन और भोजन के लिए पर्याप्त समय वाला दिन चुनना व्यावहारिक रहता है।
- प्रवेश से पहले उस दिन का राहु काल और चौघड़िया भी देख सकते हैं — कई परिवार प्रवेश के लिए राहु काल से बचते हैं। यह टूल राहु काल अलग से नहीं हटाता।
- अंतिम तारीख और प्रवेश का सटीक समय अपने पुरोहित से पक्का करें।
स्पष्ट बात: यह सूची ऊपर बताए गए मानक नियमों से बनी है। अलग-अलग पंचांगकार कुछ और बातें भी देखते हैं — जैसे प्रवेश के समय का लग्न (स्थिर लग्न को श्रेष्ठ माना जाता है), गृहस्वामी की अपनी कुंडली, उत्तरायण-दक्षिणायन, घर का मुख्य द्वार किस दिशा में है, या क्षेत्रीय परंपराएँ। इसलिए किसी पंचांग से एक-दो तारीखों का अंतर हो सकता है। अपनी कुंडली देखनी हो तो फ्री कुंडली उपयोगी है।
गृह प्रवेश: मान्यता और तथ्य
- मान्यता: मुहूर्त के बिना घर में रहना अशुभ है। तथ्य: मुहूर्त एक शुभ शुरुआत की परंपरा है, डर का कारण नहीं। परिस्थितिवश जल्दी रहना पड़े तो कई परिवार सादा पूजन करके रहने लगते हैं और बाद में शुभ दिन पर विधिवत पूजा कर लेते हैं — इस बारे में अपने पुरोहित से पूछें।
- मान्यता: गृह प्रवेश केवल रविवार को करना चाहिए क्योंकि छुट्टी होती है। तथ्य: इस टूल के नियमों में सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार लिए गए हैं। छुट्टी का दिन सुविधाजनक हो सकता है, पर मुहूर्त का आधार पंचांग है।
- मान्यता: बड़ी और महँगी पूजा से ही घर में सुख आता है। तथ्य: परंपरा भाव को प्रधान मानती है। कलश, गणेश पूजन, दीपक और प्रसाद के साथ सरल पूजा भी पूर्ण मानी जाती है।
- मान्यता: टूल और पंचांग की तारीखें बिल्कुल एक होंगी। तथ्य: पंचांगकारों के नियमों में छोटे भेद होते हैं, इसलिए थोड़ा अंतर स्वाभाविक है।
नई गाड़ी भी साथ में लेनी हो तो वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त देखें, और किसी भी दिन के पूरे पंचांग के लिए आज का पंचांग।
Griha Pravesh Muhurat — in English
This griha pravesh muhurat tool lists auspicious dates for entering a new house from today to the end of next year, for about 215 cities in India and abroad, grouped by month with weekday, nakshatra, tithi and the auspicious time window on each day. It uses the standard rules: ten nakshatras (Rohini, Mrigashira, Uttara Phalguni, Chitra, Anuradha, Uttara Ashadha, Dhanishta, Shatabhisha, Uttara Bhadrapada, Revati), Shukla tithis 2, 3, 5, 7, 10, 11 and 13 plus Krishna 2, 3 and 5, Monday, Wednesday, Thursday or Friday, and no Kharmas, Chaturmas, Guru or Shukra asta, Adhik maas, Holashtak or Bhadra. The page also explains the three kinds of griha pravesh and a simple house-warming puja with kalash, Ganesh puja, Vastu puja and boiling milk. Confirm the final date and time with your family priest.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त कैसे देखें?
ऊपर के टूल में वह शहर चुनें जहाँ आपका नया घर है। टूल आज से अगले साल के अंत तक की सभी शुभ तिथियाँ वार, नक्षत्र, तिथि और शुभ समय के साथ महीने के अनुसार दिखा देगा।
griha pravesh muhurat kab hai?
गृह प्रवेश की शुभ तारीखें हर साल बदलती हैं और शुभ समय शहर के सूर्योदय पर निर्भर करता है। टूल में अपना शहर चुनकर इस साल और अगले साल की सूची देखें।
गृह प्रवेश के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?
रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती — ये 10 नक्षत्र परंपरागत रूप से शुभ माने जाते हैं।
गृह प्रवेश के लिए कौन सी तिथि शुभ है?
शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी, तथा कृष्ण पक्ष की केवल द्वितीया, तृतीया और पंचमी।
गृह प्रवेश किस वार को करना चाहिए?
इस टूल में सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार लिए गए हैं। वार सूर्योदय से बदलता है, आधी रात से नहीं।
क्या चातुर्मास में गृह प्रवेश कर सकते हैं?
परंपरा में देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक नए घर में प्रवेश टाला जाता है, इसलिए टूल इन दिनों मुहूर्त नहीं दिखाता। कई परिवार इस समय तैयारी कर लेते हैं और देवउठनी के बाद प्रवेश करते हैं।
खरमास में गृह प्रवेश क्यों नहीं होता?
सूर्य के धनु या मीन राशि में रहने के समय को खरमास कहते हैं और इसमें मांगलिक कार्य रोके जाते हैं। यह लगभग मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी और मध्य मार्च से मध्य अप्रैल तक रहता है।
अपूर्व, सपूर्व और द्वंद्व गृह प्रवेश में क्या अंतर है?
अपूर्व नए घर में पहली बार प्रवेश है, सपूर्व लंबे समय बाहर रहने के बाद अपने घर लौटना है, और द्वंद्व मरम्मत या आपदा के बाद पुराने घर में फिर से रहना है।
गृह प्रवेश पूजा में क्या-क्या करते हैं?
सामान्य क्रम है — घर की सफ़ाई, तोरण और रंगोली, कलश लेकर दाएँ पैर से प्रवेश, गणेश पूजन, वास्तु पूजा, रसोई में दूध उबालना और प्रसाद बाँटना। विधि परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकती है।
गृह प्रवेश में दूध क्यों उबालते हैं?
नई रसोई में पहली बार दूध उबालकर उसे हल्का उफनने देना घर में समृद्धि और भरपूरता का प्रतीक माना जाता है। उसी दूध से खीर या प्रसाद बनाया जाता है।
किराए के घर में शिफ़्ट होने पर मुहूर्त देखें या नहीं?
यह आपकी श्रद्धा पर निर्भर है; कोई कठोर नियम नहीं है। कई लोग शुभ दिन देखकर सादा कलश और गणेश पूजन करके शिफ़्ट होते हैं।
new house entry date ke liye kaunsa shahar chune?
जिस शहर में नया घर है, वही चुनें, क्योंकि शुभ समय वहीं के सूर्योदय से निकलता है। विदेश में घर हो तो वहीं का शहर चुनें।
क्या टूल राहु काल भी हटाता है?
नहीं, यह टूल तिथि, नक्षत्र, वार, भद्रा और वर्जित अवधियाँ देखता है। राहु काल से बचना हो तो उस दिन का राहु काल अलग से देख लें।
टूल की तारीख पंचांग से अलग क्यों हो सकती है?
कुछ पंचांगकार प्रवेश का लग्न, गृहस्वामी की कुंडली, उत्तरायण या घर के द्वार की दिशा भी देखते हैं। इसलिए एक-दो तारीखों का अंतर संभव है; अंतिम मुहूर्त पुरोहित से पक्का करें।
मुहूर्त न मिले और घर में रहना ज़रूरी हो तो क्या करें?
कई परिवार सादा पूजन करके रहने लगते हैं और बाद में शुभ मुहूर्त में विधिवत गृह प्रवेश पूजा करते हैं। इस बारे में अपने पुरोहित से सलाह लें; डरने की कोई बात नहीं।