Govardhan Puja Vidhi (गोवर्धन पूजा विधि) के अनुसार दीपावली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है। वर्ष 2026 में गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर को है। इसे अन्नकूट भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन भगवान को अनेक प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है। नीचे Govardhan Puja Vidhi, सामग्री, मुहूर्त, परिक्रमा, गौ पूजा और कथा विस्तार से दी गई है।

इस लेख में
गोवर्धन पूजा 2026: तारीख और मुहूर्त
| विवरण | समय (2026) |
|---|---|
| गोवर्धन पूजा · अन्नकूट | मंगलवार, 10 नवंबर 2026 |
| प्रतिपदा तिथि आरंभ | 9 नवंबर, दोपहर 12:33 |
| प्रतिपदा तिथि समाप्त | 10 नवंबर, दोपहर 2:01 |
| प्रातःकाल पूजा (दिल्ली) | सुबह 6:39 से 8:49 तक |
| प्रातःकाल पूजा (मुंबई) | सुबह 6:43 से 8:58 तक |
इस वर्ष दीपावली (8 नवंबर) के अगले दिन, 9 नवंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या रहेगी, इसलिए गोवर्धन पूजा उदया तिथि के अनुसार 10 नवंबर को होगी। बहुत से परिवार प्रातःकाल में और कई जगह शाम को भी पूजा करते हैं। अपने शहर का समय आज के पंचांग में देखें।
Govardhan Puja Vidhi: पूजा सामग्री
- गाय का गोबर (गोवर्धन बनाने के लिए) — न मिले तो मिट्टी या आटे से भी बना सकते हैं
- रोली, अक्षत, हल्दी, कलावा, फूल, माला और तुलसी दल
- घी का दीपक, धूप, कपूर
- दूध, दही, शहद, बताशे, खील और गन्ना
- अन्नकूट के लिए कढ़ी-चावल, बाजरा, पूरी, सब्ज़ियों की मिली-जुली सब्ज़ी, मिठाइयाँ और फल
- गायों के लिए गुड़, हरा चारा और पूजा के लिए तिलक-माला
गोवर्धन पूजा विधि — स्टेप बाय स्टेप
- सुबह स्नान करके घर के आँगन या पूजा स्थान को साफ़ करें।
- गोबर से लेटे हुए पुरुष के आकार में गोवर्धन पर्वत बनाएँ। इसके आसपास गाय, बछड़े, ग्वाले और पेड़ भी बनाए जाते हैं। नाभि के स्थान पर एक कटोरी या दीया रखें।
- गोवर्धन को फूलों, खील और रंगोली से सजाएँ। पास में श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र रखें।
- रोली, अक्षत, फूल और कलावा चढ़ाएँ। नाभि वाली कटोरी में दूध, दही, शहद और बताशे डालें और दीपक जलाएँ।
- यह प्रार्थना बोलें: “गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक। विष्णुबाहु कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रदो भव॥”
- अन्नकूट का भोग लगाएँ — जितने हो सकें उतने पकवान; मंदिरों में छप्पन भोग लगाया जाता है।
- परिवार के साथ गोवर्धन की 7 परिक्रमा करें। परिक्रमा में हाथ में जल का लोटा लेकर धार गिराते हुए और जौ बोते हुए चलने की भी परंपरा है।
- गायों और बछड़ों को स्नान कराकर तिलक लगाएँ, माला पहनाएँ और गुड़-चारा खिलाएँ।
- अंत में श्रीकृष्ण की आरती — आरती कुंजबिहारी की — गाएँ और अन्नकूट का प्रसाद सबमें बाँटें।
अन्नकूट क्या है?
“अन्नकूट” का अर्थ है अन्न का पहाड़। इस दिन घर और मंदिरों में अनेक प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान के सामने पर्वत के आकार में सजाए जाते हैं। ब्रज, मथुरा, वृंदावन और नाथद्वारा के मंदिरों में अन्नकूट का भव्य उत्सव होता है। कई जगह इस दिन गुजराती नववर्ष (बेस्तु वरस) भी मनाया जाता है।
गोवर्धन पूजा की कथा
ब्रज के लोग हर साल अच्छी वर्षा के लिए देवराज इंद्र की पूजा करते थे। बालक श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि हमारी गायों को चारा, पानी और हमें जीवन गोवर्धन पर्वत से मिलता है, इसलिए पूजा गोवर्धन की होनी चाहिए। ब्रजवासियों ने उस वर्ष गोवर्धन की पूजा की। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी।
तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उँगली (कनिष्ठा) पर पूरा गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सारे ब्रजवासी, गायें और बछड़े उसके नीचे सुरक्षित रहे। सात दिन तक वर्षा होती रही, पर कोई हानि नहीं हुई। अंत में इंद्र को अपनी भूल समझ आई और उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा माँगी। तभी से श्रीकृष्ण को गिरिधारी या गोवर्धनधारी कहा जाता है और यह पूजा प्रकृति, गौ और अन्न के प्रति कृतज्ञता का पर्व बन गई।
Govardhan Puja Vidhi 2026 — in English
Govardhan Puja (also called Annakut) falls on Tuesday, 10 November 2026, on Kartik Shukla Pratipada, the day after Diwali by the sunrise rule. The Govardhan Puja Vidhi is to make a small Govardhan hill from cow dung (or clay), decorate it, offer roli, rice, flowers, milk, curd, honey and sweets, offer a large spread of food (annakut, or 56 dishes in temples), walk around it seven times, worship cows and sing Lord Krishna’s aarti.
The festival remembers how Lord Krishna lifted Govardhan hill on his little finger to protect the people of Braj from Indra’s storm for seven days. Read more on Wikipedia, and see the full five days of Diwali in our Vrat Calendar.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को। प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर दोपहर 12:33 से 10 नवंबर दोपहर 2:01 तक है और उदया तिथि 10 नवंबर को है।
इस बार दीपावली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर क्यों है?
9 नवंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या रहेगी। गोवर्धन पूजा प्रतिपदा की उदया तिथि में होती है, इसलिए यह 10 नवंबर को है।
गोवर्धन की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?
परंपरा में घर पर बने गोवर्धन की 7 परिक्रमा की जाती है। मथुरा के गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर की होती है।
अन्नकूट में क्या बनता है?
कढ़ी-चावल, बाजरा, पूरी, मिली-जुली सब्ज़ी, खीर, मिठाइयाँ और फल — जितने हो सकें उतने व्यंजन। मंदिरों में छप्पन भोग लगता है।
What is the Govardhan Puja Vidhi in short?
Make a Govardhan hill from cow dung or clay, worship it with roli, rice, flowers, milk and sweets, offer annakut, circle it seven times, feed and worship cows, and sing Krishna’s aarti.