Dhanteras Puja Vidhi (धनतेरस पूजा विधि) जानने से पहले तारीख जान लें — वर्ष 2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को है। धनतेरस से ही पाँच दिन का दीपोत्सव शुरू होता है। इस दिन शाम को प्रदोष काल में माँ लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा होती है, और घर के बाहर यमराज के लिए दीपक जलाया जाता है। नीचे Dhanteras Puja Vidhi की पूरी जानकारी — सामग्री, आसान विधि, मुहूर्त, यम दीपदान, क्या खरीदें और कथा — एक जगह दी गई है।

इस लेख में
धनतेरस 2026: तारीख और मुहूर्त
| विवरण | समय (2026) |
|---|---|
| धनतेरस | शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 |
| त्रयोदशी तिथि आरंभ | 6 नवंबर, सुबह 10:32 |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 7 नवंबर, सुबह 10:49 |
| प्रदोष काल (दिल्ली) | शाम 5:32 से 7:56 तक |
| प्रदोष काल (मुंबई) | शाम 6:02 से 8:26 तक |
| प्रदोष काल (पटना) | शाम 5:05 से 7:29 तक |
धनतेरस की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में की जाती है। कई परिवार इसी समय में स्थिर लग्न (वृषभ) देखकर पूजा करते हैं। अपने शहर का सूर्यास्त और आज का पूरा पंचांग आज का पंचांग पेज पर देखें। ऊपर का समय हमारे पंचांग इंजन से निकाला गया है; स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट का अंतर संभव है।
Dhanteras Puja Vidhi: पूजा सामग्री
- लक्ष्मी जी, गणेश जी, कुबेर जी और भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र
- चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, आम के पत्ते और नारियल
- रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत (साबुत चावल), कलावा, फूल और माला
- घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती, कपूर
- नैवेद्य — खील-बताशे, मिठाई, फल; धन्वंतरि जी के लिए तुलसी दल
- नए बर्तन, सिक्के या आभूषण (जो इस दिन ख़रीदे हों), धनिया के बीज
- यम दीपदान के लिए आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक और सरसों का तेल
धनतेरस पूजा विधि — स्टेप बाय स्टेप
- सुबह घर की अच्छी तरह सफ़ाई करें, मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएँ और तोरण लगाएँ।
- शाम को स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में चौकी रखकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ।
- चौकी पर गणेश जी, लक्ष्मी जी, कुबेर जी और धन्वंतरि जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और जल से भरा कलश रखें।
- सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें — “ॐ गं गणपतये नमः”।
- सभी देवताओं को रोली, अक्षत, फूल और कलावा अर्पित करें। घी का दीपक और धूप जलाएँ।
- भगवान धन्वंतरि को तुलसी दल और पीली मिठाई चढ़ाएँ और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें — “ॐ धन्वंतरये नमः”।
- कुबेर जी और लक्ष्मी जी के सामने नए बर्तन, सिक्के या आभूषण रखें और “ॐ कुबेराय नमः” व “ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः” का 11 या 108 बार जप करें।
- खील-बताशे, मिठाई और फल का भोग लगाएँ। फिर गणेश जी की आरती और ॐ जय लक्ष्मी माता आरती करें।
- पूजा के बाद यम दीपदान करें (नीचे विधि देखें) और प्रसाद सबमें बाँटें।
यम दीपदान कैसे करें
धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार के बाहर यमराज के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। मान्यता है कि इससे परिवार में अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
- आटे या मिट्टी का चौमुखा (चार बत्ती वाला) दीपक लें और उसमें सरसों का तेल डालें।
- प्रदोष काल में दीपक जलाकर घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें — दक्षिण यम की दिशा मानी जाती है।
- हाथ जोड़कर यमराज से परिवार की रक्षा की प्रार्थना करें। दीपक रखने के बाद उसे पीछे मुड़कर नहीं देखा जाता।
धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या नहीं
- शुभ: पीतल, तांबे या स्टील के बर्तन, सोना-चाँदी, चाँदी के सिक्के, झाड़ू, धनिया के बीज, गोमती चक्र और नई बही-खाता।
- धनिया के बीज पूजा में रखकर बाद में गमले या खेत में बोए जाते हैं — इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
- नया बर्तन ख़ाली घर न लाएँ — उसमें थोड़ा अनाज, मिठाई या पानी भरकर लाने की परंपरा है।
- टालें: परंपरा में इस दिन लोहे और काँच की वस्तुएँ, नुकीली चीज़ें और काला सामान ख़रीदना शुभ नहीं माना जाता।
धनतेरस की कथा
भगवान धन्वंतरि का प्रकट होना
पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे आयुर्वेद के देवता और भगवान विष्णु के अंश माने जाते हैं। इसीलिए इस दिन को धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से उनकी पूजा की जाती है। कलश के कारण ही इस दिन बर्तन ख़रीदने की परंपरा जुड़ी।
राजा हिम के पुत्र की कथा (यम दीपदान)
एक प्रचलित कथा के अनुसार राजा हिम के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह के चौथे दिन साँप के डसने से उसकी मृत्यु होगी। उस रात उसकी पत्नी ने पति को सोने नहीं दिया, कमरे के द्वार पर सोने-चाँदी के आभूषणों का ढेर लगाया और चारों ओर दीपक जला दिए। फिर वह रात भर कथाएँ और गीत सुनाती रही। जब यमराज साँप के रूप में आए, तो दीपकों और आभूषणों की चमक से उनकी आँखें चौंधिया गईं; वे वहीं बैठकर गीत सुनते रहे और सुबह होने पर लौट गए। तभी से धनतेरस की रात यम के नाम का दीपक जलाने की परंपरा मानी जाती है।
Dhanteras Puja Vidhi 2026 — in English
Dhanteras falls on Friday, 6 November 2026, on Kartik Krishna Trayodashi, and opens the five days of Diwali. The Dhanteras Puja Vidhi is simple: in the evening Pradosh Kaal (after sunset — 5:32 to 7:56 PM in Delhi), worship Lord Ganesha, Goddess Lakshmi, Lord Kuber and Lord Dhanvantari, offer roli, rice, flowers, a ghee lamp and sweets, chant their names, and sing the Ganesh and Lakshmi aartis.
After the puja, families light a four-wick lamp for Yamraj outside the main door, facing south (Yam Deepdaan). Buying new utensils, gold, silver, a broom or coriander seeds on Dhanteras is considered auspicious. Read more about the festival on Wikipedia, and see all Diwali dates in our Vrat Calendar.
दीपोत्सव 2026 के पाँच दिन
| दिन | त्योहार |
|---|---|
| शुक्रवार, 6 नवंबर | धनतेरस |
| शनिवार, 7 नवंबर | चतुर्दशी आरंभ (सुबह 10:49) · शाम को छोटी दीपावली |
| रविवार, 8 नवंबर | सुबह नरक चतुर्दशी स्नान · शाम को दीपावली — लक्ष्मी पूजन |
| सोमवार, 9 नवंबर | कार्तिक अमावस्या — स्नान-दान |
| मंगलवार, 10 नवंबर | गोवर्धन पूजा · अन्नकूट |
| बुधवार, 11 नवंबर | भाई दूज |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
धनतेरस 2026 कब है?
वर्ष 2026 में धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर को है। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:32 से 7 नवंबर सुबह 10:49 तक रहेगी।
धनतेरस की पूजा किस समय करें?
सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में। दिल्ली में यह शाम 5:32 से 7:56 तक है; अपने शहर का समय आज के पंचांग में देखें।
धनतेरस पर किसकी पूजा होती है?
माँ लक्ष्मी, कुबेर जी और भगवान धन्वंतरि की। पूजा की शुरुआत गणेश जी से होती है और शाम को यमराज के लिए दीपदान किया जाता है।
यम दीपदान किस दिशा में करें?
आटे या मिट्टी का चौमुखा दीपक सरसों के तेल से जलाकर घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें।
What is the Dhanteras Puja Vidhi in short?
In the evening Pradosh Kaal, worship Ganesha, Lakshmi, Kuber and Dhanvantari with roli, rice, flowers, a ghee lamp and sweets, sing the aartis, and light a south-facing lamp for Yamraj outside the main door.