सीधे सामग्री पर जाएँ
गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 · कार्तिक कृष्ण चतुर्थी · आज करवा चौथ, संकष्टी चतुर्थी · वि.सं. 2083 आज का पंचांग → हिंदीEnglish
पसंदीदा
Festival

नरक चतुर्दशी 2026 (Narak Chaturdashi Puja Vidhi): छोटी दीपावली, अभ्यंग स्नान मुहूर्त, यम दीपक और कथा

अंतिम अपडेट: 8 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Narak Chaturdashi Puja Vidhi 2026 – नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान और यम दीपक

Narak Chaturdashi Puja Vidhi (नरक चतुर्दशी पूजा विधि) दीपावली के पाँच दिनों का दूसरा पर्व है, जिसे छोटी दीपावली, रूप चौदस और काली चौदस भी कहते हैं। वर्ष 2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर सुबह से 8 नवंबर सुबह तक है — इसलिए छोटी दीपावली के दीपक 7 नवंबर (शनिवार) की शाम और अभ्यंग स्नान 8 नवंबर (रविवार) को सूर्योदय से पहले होगा। उसी शाम दीपावली का लक्ष्मी पूजन है। नीचे Narak Chaturdashi Puja Vidhi, मुहूर्त, यम दीपक, कथा और नियम दिए गए हैं।

Narak Chaturdashi Puja Vidhi 2026 – नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान और यम दीपक

नरक चतुर्दशी 2026: तारीख और मुहूर्त

विवरणसमय (दिल्ली, 2026)
चतुर्दशी तिथि आरंभ7 नवंबर, सुबह लगभग 10:49
छोटी दीपावली (दीपदान, हनुमान पूजा)7 नवंबर, शनिवार की शाम
काली चौदस (रात्रि पूजा)7 नवंबर की मध्यरात्रि
अभ्यंग स्नान मुहूर्त8 नवंबर, सुबह लगभग 5:36 से सूर्योदय 6:38 तक
चतुर्दशी तिथि समाप्त8 नवंबर, सुबह लगभग 11:29
दीपावली लक्ष्मी पूजन8 नवंबर, शाम 5:54 से 7:50

अपने शहर में अभ्यंग स्नान: सूर्योदय का समय (8 नवंबर)

शहरसूर्योदय — इससे पहले स्नान करें
दिल्लीसुबह 6:38
लखनऊसुबह 6:20
जयपुरसुबह 6:41
देहरादूनसुबह 6:37
चंडीगढ़सुबह 6:43
पटनासुबह 6:01
कोलकातासुबह 5:44
मुंबईसुबह 6:42
अहमदाबादसुबह 6:48
हैदराबादसुबह 6:17

अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले, अरुणोदय काल में किया जाता है — यानी सूर्योदय से लगभग एक घंटा पहले से सूर्योदय तक। दूसरे शहरों का सूर्योदय आज के पंचांग में देखें।

नरक चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है?

मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया और उसकी कैद से सोलह हज़ार कन्याओं को मुक्त कराया। बुराई पर अच्छाई की इस जीत की खुशी में दीपक जलाए गए। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है, ताकि परिवार अकाल मृत्यु और नरक के भय से मुक्त रहे — इसीलिए इसका नाम नरक चतुर्दशी पड़ा।

Narak Chaturdashi Puja Vidhi: अभ्यंग स्नान सामग्री

  • तिल का तेल या सरसों का तेल — शरीर पर मालिश के लिए
  • उबटन: बेसन, हल्दी, चंदन और थोड़ा दूध या दही
  • अपामार्ग (चिरचिटा) की टहनी या पत्ते
  • स्नान के बाद पहनने के लिए साफ़ या नए कपड़े
  • यमराज के तर्पण के लिए जल, तिल और लोटा
  • शाम के लिए दीपक, सरसों का तेल, रुई की बत्ती और आटे का चौमुखा दीपक

नरक चतुर्दशी पूजा विधि — स्टेप बाय स्टेप

  1. 8 नवंबर को सूर्योदय से पहले उठें और पूरे शरीर पर तिल के तेल की मालिश करें। इसे अभ्यंग कहते हैं।
  2. तेल के बाद उबटन लगाएँ — इसी कारण इस दिन को रूप चौदस भी कहते हैं, क्योंकि यह स्नान रूप और सौंदर्य बढ़ाने वाला माना जाता है।
  3. स्नान करते समय अपामार्ग की टहनी को सिर के ऊपर से तीन बार घुमाने की परंपरा है। इसके बाद सामान्य जल से स्नान करें।
  4. स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिल मिले जल से यमराज को तर्पण दें और परिवार की लंबी आयु की प्रार्थना करें।
  5. साफ़ कपड़े पहनकर भगवान श्रीकृष्ण और हनुमान जी की पूजा करें। हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल और लड्डू चढ़ाएँ और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  6. शाम को घर के मुख्य द्वार के बाहर आटे का चौमुखा यम दीपक दक्षिण दिशा की ओर जलाएँ।
  7. घर में और आँगन में दीपक जलाकर छोटी दीपावली मनाएँ। कई परिवारों में इस दिन चौदह दीपक जलाने की परंपरा है।

छोटी दीपावली: 7 नवंबर की शाम

2026 में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की शाम को रहेगी, इसलिए छोटी दीपावली के दीपक, हनुमान पूजा और यम दीपदान उसी शाम किए जाएँगे। अयोध्या सहित कई परंपराओं में इसी दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। पूजा के बाद हनुमान जी की आरती करें।

काली चौदस

गुजरात और पश्चिम भारत में चतुर्दशी की रात काली चौदस के रूप में माँ काली की पूजा की जाती है। 2026 में यह पूजा 7 नवंबर की मध्यरात्रि को होगी, क्योंकि उसी रात चतुर्दशी तिथि रहेगी।

यम दीपक कैसे जलाएँ

  • गूंथे हुए आटे से चार मुख वाला दीपक बनाएँ और उसमें सरसों का तेल व चार बत्तियाँ लगाएँ।
  • शाम को इसे घर के मुख्य द्वार के बाहर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें — दक्षिण यमराज की दिशा मानी जाती है।
  • दीपक जलाकर यमराज से परिवार की रक्षा और अकाल मृत्यु से बचाव की प्रार्थना करें।
  • कई परिवार यम दीपक धनतेरस की शाम और कई नरक चतुर्दशी की शाम जलाते हैं — अपने परिवार की परंपरा के अनुसार करें।

नरक चतुर्दशी की कथा

प्राग्ज्योतिषपुर का राजा नरकासुर बहुत शक्तिशाली और अत्याचारी था। उसने देवताओं और ऋषियों को सताया, देवमाता अदिति के कुंडल छीन लिए और सोलह हज़ार कन्याओं को बंदी बना लिया। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान श्रीकृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ गरुड़ पर सवार होकर युद्ध के लिए गए।

भयंकर युद्ध के बाद कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरकासुर का वध हुआ। मरते समय नरकासुर ने वर माँगा कि इस दिन जो लोग सूर्योदय से पहले स्नान करें और दीपक जलाएँ, उन्हें नरक का भय न रहे। तभी से इस दिन अभ्यंग स्नान और दीपदान की परंपरा चली आ रही है।

नरक चतुर्दशी के नियम

  • अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले ही करें; सूर्योदय के बाद का स्नान इस पर्व का स्नान नहीं माना जाता।
  • इस दिन घर की अच्छी तरह सफ़ाई करें और टूटा-फूटा, बेकार सामान बाहर करें।
  • यम दीपक घर के अंदर नहीं, मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में रखें।
  • शाम को कलह से बचें और घर के हर कोने में रोशनी करें।

रूप चौदस: सौंदर्य स्नान का महत्व

नरक चतुर्दशी को रूप चौदस या रूप चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय से पहले तेल और उबटन से किया गया स्नान शरीर को निर्मल और रूप को सुंदर बनाने वाला माना जाता है। राजस्थान और उत्तर भारत में महिलाएँ इस दिन विशेष रूप से उबटन लगाकर स्नान करती हैं और शाम को सोलह श्रृंगार करके दीपक जलाती हैं।

कार्तिक मास में मौसम बदलता है और ठंड शुरू होती है। तिल के तेल की मालिश और उबटन त्वचा को सर्दी के लिए तैयार करते हैं — इसलिए यह परंपरा स्वास्थ्य से भी जुड़ी मानी जाती है।

दक्षिण भारत में नरक चतुर्दशी

तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में नरक चतुर्दशी की सुबह ही दीपावली मनाई जाती है। लोग सूर्योदय से पहले तेल स्नान (गंगा स्नान) करते हैं, नए कपड़े पहनते हैं, मिठाई बाँटते हैं और पटाखे चलाते हैं। गोवा में इस दिन नरकासुर के पुतले जलाए जाते हैं।

छोटी दीपावली पर कहाँ-कहाँ दीपक जलाएँ

  • घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर
  • मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में — यम दीपक
  • रसोई और पानी रखने के स्थान पर
  • तुलसी के पौधे के पास
  • घर के पूजा स्थान पर
  • छत, बालकनी और आँगन के कोनों में
  • घर के पास किसी मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे

छोटी दीपावली के दीपक सरसों के तेल के रखे जाते हैं, जबकि अगले दिन लक्ष्मी पूजन का मुख्य दीपक घी का होता है।

Narak Chaturdashi 2026 — in English

Narak Chaturdashi (Choti Diwali, Roop Chaudas) is the second day of the five days of Diwali. In 2026 Chaturdashi tithi runs from about 10:49 AM on 7 November to about 11:29 AM on 8 November, so the Choti Diwali lamps are lit on the evening of Saturday, 7 November and the Abhyang Snan is taken before sunrise on Sunday, 8 November — in Delhi from about 5:36 AM to sunrise at 6:38 AM. Lakshmi Puja follows that same evening.

The Narak Chaturdashi Puja Vidhi and katha are given above. Read more on Wikipedia, and see the full दीपावली लक्ष्मी पूजा विधि और व्रत-त्योहार कैलेंडर.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

नरक चतुर्दशी 2026 कब है?

चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर सुबह लगभग 10:49 से 8 नवंबर सुबह लगभग 11:29 तक है। छोटी दीपावली के दीपक 7 नवंबर की शाम जलाए जाएँगे और नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर, रविवार को सूर्योदय से पहले होगा।

अभ्यंग स्नान का मुहूर्त क्या है?

दिल्ली में 8 नवंबर को सुबह लगभग 5:36 से सूर्योदय (6:38) तक। अपने शहर में सूर्योदय से पहले स्नान कर लें।

छोटी दीपावली और नरक चतुर्दशी में क्या अंतर है?

दोनों एक ही चतुर्दशी तिथि के पर्व हैं। 2026 में तिथि दो दिनों में फैली है, इसलिए शाम के दीपक 7 नवंबर को और सुबह का अभ्यंग स्नान 8 नवंबर को है। 8 नवंबर की शाम दीपावली का लक्ष्मी पूजन भी है।

यम दीपक कब और कैसे जलाएँ?

आटे का चौमुखा दीपक सरसों के तेल से भरकर शाम को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है। कई परिवार इसे धनतेरस की शाम और कई नरक चतुर्दशी की शाम जलाते हैं — अपने कुल की परंपरा मानें।

What is Narak Chaturdashi Puja Vidhi in short?

Light lamps on the evening of 7 November (Choti Diwali), then on 8 November take an oil-and-ubtan bath (Abhyang Snan) before sunrise, offer water to Yamraj, worship Krishna and Hanuman, and light a four-faced lamp for Yama facing south.

अपनी टिप्पणी लिखें