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मंगलवार, 3 नवंबर 2026 · कार्तिक कृष्ण नवमी · वि.सं. 2083 आज का पंचांग → हिंदीEnglish
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जन्म तिथि कैलकुलेटर — हिंदू पंचांग से अपनी जन्म तिथि जानें

इस जन्म तिथि कैलकुलेटर (Janam Tithi Calculator / Hindu Birth Date Calculator) में अपनी अंग्रेज़ी जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान डालें और जानें कि हिंदू पंचांग के अनुसार आपकी जन्म तिथि क्या है — कौन-सी तिथि, शुक्ल या कृष्ण पक्ष, कौन-सा हिंदू महीना, विक्रम और शक संवत्, जन्म का वार, नक्षत्र और योग। साथ ही टूल अगले 3 वर्षों की वे अंग्रेज़ी तारीखें भी बताता है जब आपकी जन्म तिथि फिर आएगी, यानी आपका तिथि के अनुसार जन्मदिन। “English date to Hindu tithi” या “janam tithi kaise pata kare” का सबसे सीधा उत्तर यही है।

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जन्म तिथि क्या होती है?

अंग्रेज़ी कैलेंडर सूर्य पर आधारित है, जबकि हिंदू पंचांग में दिन की पहचान तिथि से होती है, जो चंद्रमा और सूर्य की आपसी दूरी से बनती है। अमावस्या के समय चंद्रमा और सूर्य एक ही दिशा में होते हैं। इसके बाद चंद्रमा सूर्य से आगे निकलने लगता है, और जब वह सूर्य से 12 अंश आगे हो जाता है, तो एक तिथि पूरी होती है। इस तरह 360 अंश के पूरे चक्र में 30 तिथियाँ बनती हैं — 15 शुक्ल पक्ष (बढ़ता चाँद) की और 15 कृष्ण पक्ष (घटता चाँद) की।

जिस क्षण आपका जन्म हुआ, उस क्षण जो तिथि चल रही थी, वही आपकी जन्म तिथि है। भारत के बहुत से परिवारों में जन्मदिन, विशेषकर बड़ों का जन्मदिन, आज भी इसी तिथि से मनाया जाता है।

चंद्रमा की चाल एक-सी नहीं रहती, इसलिए हर तिथि की लंबाई भी अलग होती है — कभी 20 घंटे के आसपास तो कभी 26 घंटे से भी ज़्यादा। यही कारण है कि एक ही अंग्रेज़ी दिन में दो तिथियाँ हो सकती हैं, और कोई तिथि किसी सूर्योदय को छुए बिना ही निकल भी सकती है।

तिथि और चंद्र–सूर्य की दूरी — पूरी तालिका

तिथिशुक्ल पक्ष (चंद्र–सूर्य दूरी)कृष्ण पक्ष (चंद्र–सूर्य दूरी)
प्रतिपदा0°–12°180°–192°
द्वितीया12°–24°192°–204°
तृतीया24°–36°204°–216°
चतुर्थी36°–48°216°–228°
पंचमी48°–60°228°–240°
षष्ठी60°–72°240°–252°
सप्तमी72°–84°252°–264°
अष्टमी84°–96°264°–276°
नवमी96°–108°276°–288°
दशमी108°–120°288°–300°
एकादशी120°–132°300°–312°
द्वादशी132°–144°312°–324°
त्रयोदशी144°–156°324°–336°
चतुर्दशी156°–168°336°–348°
पूर्णिमा / अमावस्या168°–180° (पूर्णिमा)348°–360° (अमावस्या)

यह कैलकुलेटर क्या-क्या बताता है?

आप जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान डालते हैं। समय पता न हो तो खाली छोड़ सकते हैं — तब टूल दोपहर 12 बजे का समय मानकर गणना करता है। स्थान से उस जगह का सूर्योदय और समय क्षेत्र तय होता है। परिणाम में ये जानकारियाँ मिलती हैं:

  • जन्म के क्षण की तिथि: तिथि का नाम और पक्ष — जैसे “शुक्ल पक्ष सप्तमी” या “कृष्ण पक्ष एकादशी”।
  • हिंदू महीना — दोनों पद्धतियों में: पूर्णिमांत (उत्तर भारत) और अमांत (दक्षिण व पश्चिम भारत) दोनों के अनुसार महीने का नाम, और यह भी कि वह अधिक मास था या नहीं।
  • संवत्: विक्रम संवत् और शक संवत् का वर्ष।
  • हिंदू वार: पंचांग में वार सूर्योदय से बदलता है, आधी रात से नहीं। इसलिए सूर्योदय से पहले जन्मे व्यक्ति का वार पिछले दिन का माना जाता है — टूल यह साफ़ दिखाता है।
  • नक्षत्र और योग: जन्म के समय चंद्रमा का नक्षत्र और उस समय का योग।
  • उस दिन का सूर्योदय: ताकि आप देख सकें कि जन्म सूर्योदय से पहले हुआ या बाद में।
  • अगले 3 हिंदू जन्मदिन: वे अंग्रेज़ी तारीखें जब उसी चंद्र मास में वही तिथि फिर आएगी।

सूर्योदय से पहले जन्म — वार कैसे बदलता है?

मान लीजिए किसी का जन्म अंग्रेज़ी कैलेंडर में मंगलवार सुबह 4:30 बजे हुआ और उस दिन सूर्योदय 6:15 पर था। घड़ी के हिसाब से यह मंगलवार है, लेकिन पंचांग के हिसाब से अभी सोमवार का ही वार चल रहा है, क्योंकि मंगलवार सूर्योदय से शुरू होगा। ऐसे में हिंदू वार सोमवार माना जाएगा। यही नियम तिथि पर भी असर डालता है: किसी “दिन” की तिथि वह मानी जाती है जो उस दिन के सूर्योदय के समय चल रही हो, जबकि जन्म तिथि वह है जो जन्म के क्षण पर चल रही थी। टूल दोनों बातें अलग-अलग दिखाता है, ताकि भ्रम न रहे।

पूर्णिमांत और अमांत — महीने के नाम में अंतर

भारत में चंद्र मास गिनने की दो पद्धतियाँ हैं। पूर्णिमांत में महीना पूर्णिमा पर समाप्त होता है — यह उत्तर भारत में प्रचलित है। अमांत में महीना अमावस्या पर समाप्त होता है — यह महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्यों में प्रचलित है।

शुक्ल पक्ष में दोनों पद्धतियों में महीने का नाम एक ही रहता है। अंतर केवल कृष्ण पक्ष में आता है: पूर्णिमांत में जो कृष्ण पक्ष अगले महीने का पहला पखवाड़ा है, वही अमांत में पिछले महीने का दूसरा पखवाड़ा है। तिथि और दिन वही रहता है, बस नाम बदल जाता है।

उदाहरणपूर्णिमांत (उत्तर भारत)अमांत (दक्षिण/पश्चिम भारत)
जन्माष्टमीभाद्रपद कृष्ण अष्टमीश्रावण कृष्ण अष्टमी
करवा चौथकार्तिक कृष्ण चतुर्थीआश्विन कृष्ण चतुर्थी
दीपावली की अमावस्याकार्तिक अमावस्याआश्विन अमावस्या
राम नवमीचैत्र शुक्ल नवमीचैत्र शुक्ल नवमी

इसलिए अगर आपकी दादी कहती हैं कि आपका जन्म “भाद्रपद कृष्ण पक्ष” में हुआ और किसी दक्षिण भारतीय पंचांग में वही दिन “श्रावण कृष्ण पक्ष” लिखा हो, तो दोनों सही हैं। टूल दोनों नाम साथ दिखाता है।

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तिथि वाला जन्मदिन हर साल अंग्रेज़ी तारीख में क्यों बदलता है?

12 चंद्र मास मिलकर लगभग 354 दिन के होते हैं, जबकि सौर वर्ष लगभग 365 दिन का। यानी चंद्र वर्ष हर साल लगभग 11 दिन छोटा पड़ता है। इस अंतर को पाटने के लिए लगभग हर ढाई-तीन साल में एक अधिक मास जोड़ा जाता है। इसका नतीजा यह है कि आपकी जन्म तिथि हर साल अंग्रेज़ी कैलेंडर में आगे-पीछे खिसकती रहती है — किसी साल लगभग 11 दिन पहले, और अधिक मास वाले साल के बाद लगभग 18–19 दिन बाद। फिर भी वह मोटे तौर पर उसी मौसम और लगभग एक महीने की सीमा के भीतर ही आती है।

इसी वजह से टूल सीधे अगले 3 हिंदू जन्मदिनों की अंग्रेज़ी तारीखें निकालकर देता है। नियम यह है: जन्मदिन उस दिन मनाया जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय वही तिथि चल रही हो। अगर वह तिथि किसी भी सूर्योदय को न छुए (जिसे क्षय तिथि कहते हैं), तो जिस दिन वह तिथि शुरू होती है, उसी दिन को जन्मदिन माना जाता है।

अधिक मास में जन्म हुआ हो तो?

जिस चंद्र मास में सूर्य की कोई संक्रांति (राशि परिवर्तन) नहीं होती, उसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह हर साल नहीं आता — लगभग हर 32–33 महीने में एक बार आता है। अगर आपका जन्म अधिक मास में हुआ है, तो वही अधिक मास अगले कई सालों तक दोबारा नहीं आएगा, और जब आएगा तब भी ज़रूरी नहीं कि उसी नाम का महीना हो।

इसलिए परंपरा में अधिक मास में जन्मे व्यक्ति का तिथि-जन्मदिन हर साल उसी नाम के नियमित (निज) मास की उसी तिथि को मनाया जाता है। जैसे अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को जन्म हुआ हो, तो हर साल निज ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी को जन्मदिन मनाया जाता है। अधिक मास को पूजा, जप और दान के लिए बहुत पुण्यकारी माना जाता है, पर मांगलिक संस्कारों के लिए सामान्यतः नियमित मास को ही चुना जाता है — यह भी एक कारण है।

संवत्, नक्षत्र और योग — परिणाम कैसे पढ़ें

  • विक्रम संवत्: उत्तर भारत में नया विक्रम संवत् चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है और यह अंग्रेज़ी वर्ष से 57 अधिक होता है (चैत्र से पहले के महीनों में 56 अधिक)। गुजरात में नया संवत् कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीपावली के अगले दिन) से माना जाता है, इसलिए वहाँ के कैलेंडर में कुछ महीनों के लिए वर्ष में एक का अंतर दिख सकता है।
  • शक संवत्: यह अंग्रेज़ी वर्ष से 78 कम होता है (वर्ष शुरू होने से पहले के महीनों में 79 कम)।
  • नक्षत्र: चंद्रमा का पथ 27 बराबर भागों (हर भाग 13°20′) में बँटा है; जन्म के समय चंद्रमा जिस भाग में था, वही जन्म नक्षत्र है। नक्षत्र के चरण और नामाक्षर जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर देखें।
  • योग: सूर्य और चंद्रमा के अंशों के योगफल से 27 योग बनते हैं — जैसे विष्कुंभ, प्रीति, सिद्धि आदि। यह पंचांग का एक अंग है।

पूरी जन्म कुंडली, लग्न और ग्रहों की स्थिति के लिए कुंडली बनाएँ, और किसी भी दिन की तिथि देखने के लिए आज का पंचांग उपयोगी है।

तिथि के अनुसार जन्मदिन मनाने की परंपरा

बहुत से परिवारों में अंग्रेज़ी तारीख के साथ-साथ तिथि वाला जन्मदिन भी मनाया जाता है। इसके तरीके घर-घर में अलग हैं, पर कुछ बातें लगभग हर जगह मिलती हैं:

  • सुबह स्नान करके इष्टदेव या कुलदेवता की पूजा, दीपक जलाना और मंदिर जाना।
  • घर के बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेना — इसे इस दिन का सबसे सुंदर हिस्सा माना जाता है।
  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या भोजन का दान, या गौ-सेवा।
  • कई परिवारों में बच्चों के जन्मदिन पर मीठा भोग और कुछ घरों में चिरंजीवी मार्कण्डेय ऋषि का स्मरण किया जाता है।

इनमें कोई कठोर नियम नहीं है। उद्देश्य बस इतना है कि जन्म के दिन ईश्वर को धन्यवाद दिया जाए और परिवार का आशीर्वाद मिले।

जन्म तिथि से जुड़ी मान्यताएँ और तथ्य

  • मान्यता: जन्म तिथि और अंग्रेज़ी जन्म तारीख का दिन हमेशा एक ही होता है। तथ्य: तिथि सूर्योदय से नहीं, चंद्र–सूर्य की दूरी से बदलती है, इसलिए आधी रात के आसपास या सूर्योदय से पहले जन्म में तिथि और वार दोनों अलग हो सकते हैं।
  • मान्यता: एक ही दिन जन्मे सभी लोगों की तिथि एक होगी। तथ्य: एक अंग्रेज़ी दिन में दो तिथियाँ हो सकती हैं, इसलिए जन्म का समय मायने रखता है।
  • मान्यता: उत्तर और दक्षिण भारत के पंचांग में जन्म तिथि अलग आती है। तथ्य: तिथि वही रहती है; कृष्ण पक्ष में केवल महीने का नाम बदलता है।
  • मान्यता: अधिक मास में जन्म अशुभ है। तथ्य: अधिक मास को पुरुषोत्तम मास कहकर बहुत पवित्र माना गया है; जन्म को लेकर डरने का कोई कारण नहीं।

Janam Tithi Calculator — in English

This janam tithi calculator (Hindu birth date calculator, English date to Hindu tithi) finds the tithi at the moment of your birth from your date, time (noon is used if unknown) and place of birth. It shows the paksha, the Hindu month in both purnimanta and amanta systems with Adhik maas, the Vikram Samvat and Shaka Samvat year, the Hindu weekday (which changes at sunrise), nakshatra, yoga and that day’s sunrise. It also lists the next three Gregorian dates of your Hindu birthday by tithi. Switch to English at the top of the page for the full English version.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

janam tithi kaise pata kare?

ऊपर के जन्म तिथि कैलकुलेटर में अपनी जन्म तारीख, जन्म समय और जन्म स्थान डालें। टूल जन्म के क्षण की तिथि, पक्ष, हिंदू महीना, संवत्, वार, नक्षत्र और योग तुरंत बता देता है।

अंग्रेज़ी तारीख से हिंदू तिथि कैसे निकालें?

तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच की दूरी से बनती है — हर 12 अंश पर एक तिथि। यह कैलकुलेटर आपकी अंग्रेज़ी तारीख और समय पर दोनों की स्थिति निकालकर सही तिथि बता देता है।

जन्म का समय पता न हो तो क्या करें?

समय खाली छोड़ दें; टूल दोपहर 12 बजे का समय मानकर गणना करेगा। ध्यान रखें कि उस दिन तिथि बदली हो तो परिणाम दूसरी तिथि भी हो सकता है, इसलिए समय पता हो तो ज़रूर डालें।

तिथि के अनुसार जन्मदिन हर साल अलग तारीख पर क्यों आता है?

12 चंद्र मास लगभग 354 दिन के होते हैं, जो सौर वर्ष से लगभग 11 दिन कम है। इसलिए तिथि वाला जन्मदिन अंग्रेज़ी कैलेंडर में हर साल आगे-पीछे होता है; टूल अगले 3 जन्मदिनों की तारीखें बता देता है।

hindu birthday by tithi kis din manaye?

जिस दिन सूर्योदय के समय आपकी जन्म तिथि चल रही हो, उसी दिन तिथि वाला जन्मदिन मनाया जाता है। अगर तिथि किसी सूर्योदय को न छुए (क्षय तिथि), तो जिस दिन वह शुरू होती है, उस दिन मनाया जाता है।

सूर्योदय से पहले जन्म हो तो वार कौन-सा माना जाएगा?

पंचांग में वार सूर्योदय से बदलता है, इसलिए सूर्योदय से पहले जन्मे व्यक्ति का वार पिछले दिन का माना जाता है। जैसे मंगलवार सुबह 4 बजे का जन्म, सूर्योदय से पहले होने पर, सोमवार का माना जाएगा।

पूर्णिमांत और अमांत महीने में क्या अंतर है?

पूर्णिमांत में महीना पूर्णिमा पर और अमांत में अमावस्या पर समाप्त होता है। शुक्ल पक्ष में नाम एक ही रहता है, कृष्ण पक्ष में पूर्णिमांत का नाम एक महीना आगे होता है; टूल दोनों नाम दिखाता है।

अधिक मास में जन्म हुआ हो तो जन्मदिन कब मनाएँ?

परंपरा में अधिक मास में जन्मे व्यक्ति का तिथि-जन्मदिन हर साल उसी नाम के नियमित (निज) मास की उसी तिथि को मनाया जाता है, क्योंकि अधिक मास हर साल नहीं आता।

विक्रम संवत् कैसे निकालते हैं?

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से अंग्रेज़ी वर्ष में 57 जोड़ने पर विक्रम संवत् मिलता है; उससे पहले के महीनों में 56 जोड़ते हैं। टूल जन्म का विक्रम संवत् और शक संवत् दोनों दिखाता है।

एक दिन में दो तिथियाँ कैसे हो सकती हैं?

तिथि की लंबाई लगभग 20 से 26 घंटे से अधिक तक बदलती रहती है और यह किसी भी समय बदल सकती है। इसलिए एक अंग्रेज़ी दिन में दो तिथियाँ आ सकती हैं, और जन्म का समय मायने रखता है।

क्षय तिथि क्या होती है?

जो तिथि किसी भी सूर्योदय को छुए बिना शुरू होकर समाप्त हो जाए, उसे क्षय तिथि कहते हैं। ऐसी तिथि में जन्मदिन उस दिन मनाया जाता है जिस दिन तिथि शुरू होती है।

जन्म तिथि और जन्म नक्षत्र में क्या अंतर है?

तिथि चंद्रमा और सूर्य की दूरी से बनती है, जबकि नक्षत्र चंद्रमा की आकाश में स्थिति से — 27 भागों में से जिसमें चंद्रमा हो। टूल दोनों बताता है।

तिथि वाला जन्मदिन कैसे मनाया जाता है?

परंपरा में स्नान के बाद इष्टदेव की पूजा, मंदिर दर्शन, बड़ों का आशीर्वाद और अपनी सामर्थ्य से अन्न या वस्त्र का दान किया जाता है। तरीके परिवार के अनुसार अलग हो सकते हैं।

क्या उत्तर और दक्षिण भारत में जन्म तिथि अलग होती है?

नहीं, तिथि और दिन वही रहता है। केवल कृष्ण पक्ष में महीने का नाम पूर्णिमांत और अमांत पद्धति के कारण अलग लिखा जाता है।

विदेश में जन्म हुआ हो तो क्या टूल काम करेगा?

हाँ, जन्म स्थान चुनने पर उसी जगह का समय क्षेत्र और सूर्योदय लिया जाता है, इसलिए विदेश में जन्म के लिए भी तिथि और वार सही निकलते हैं।