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देवउठनी एकादशी 2026 (Dev Uthani Ekadashi): 20 या 21 नवंबर? पूजा विधि, पारण समय, कथा और तुलसी विवाह

अंतिम अपडेट: 8 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Dev Uthani Ekadashi 2026 – देवउठनी एकादशी पूजा विधि और पारण समय

Dev Uthani Ekadashi (देवउठनी एकादशी), जिसे प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहते हैं, वह दिन है जब भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और चातुर्मास समाप्त होता है। इसी दिन से विवाह जैसे मांगलिक कार्य फिर शुरू होते हैं। 2026 में एकादशी तिथि दो दिनों में बँटी है — इसलिए स्मार्त (गृहस्थ) व्रत 20 नवंबर और वैष्णव व्रत 21 नवंबर को है। नीचे Dev Uthani Ekadashi की तारीख, पारण समय, पूजा विधि, मंत्र, व्रत कथा और तुलसी विवाह की पूरी जानकारी है।

Dev Uthani Ekadashi 2026 – देवउठनी एकादशी पूजा विधि और पारण समय

देवउठनी एकादशी 2026: तारीख और पारण समय

विवरणसमय (दिल्ली, 2026)
एकादशी तिथि आरंभ20 नवंबर, सुबह लगभग 7:15
एकादशी तिथि समाप्त21 नवंबर, सुबह लगभग 6:31
स्मार्त (गृहस्थ) व्रतशुक्रवार, 20 नवंबर
स्मार्त पारण21 नवंबर, दोपहर लगभग 1:10 से 3:17
वैष्णव / इस्कॉन व्रतशनिवार, 21 नवंबर
वैष्णव पारण22 नवंबर, सुबह लगभग 6:49 से 8:56
तुलसी विवाह (द्वादशी)शनिवार, 21 नवंबर
भीष्म पंचक20 से 24 नवंबर (कार्तिक पूर्णिमा तक)

अपने शहर की तारीख और पारण समय के लिए हमारा लाइव पेज एकादशी कब है — अगली एकादशी और पारण समय देखें; वहाँ शहर चुनते ही समय अपने-आप बदल जाता है।

Dev Uthani Ekadashi की दो तारीखें क्यों?

20 नवंबर के सूर्योदय पर अभी दशमी तिथि थी और एकादशी सुबह 7:15 के बाद शुरू हुई। 21 नवंबर के सूर्योदय (लगभग 6:49) से पहले ही एकादशी खत्म हो गई। यानी एकादशी किसी सूर्योदय को नहीं छूती। ऐसे में स्मार्त परंपरा पहले दिन और वैष्णव परंपरा — जो अरुणोदय काल में शुद्ध एकादशी चाहती है — दूसरे दिन व्रत रखती है। दोनों सही हैं; अपने परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत करें।

स्मार्त पारण दोपहर में क्यों?

पारण द्वादशी में, लेकिन हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) खत्म होने के बाद किया जाता है। 21 नवंबर को हरि वासर दोपहर लगभग 12:09 तक रहेगा, जो प्रातःकाल के बाद है। इसलिए नियम के अनुसार पारण मध्याह्न के बाद, दोपहर लगभग 1:10 से 3:17 के बीच होगा।

Dev Uthani Ekadashi का महत्व

आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी) को भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इन चार महीनों को चातुर्मास कहते हैं, जिसमें विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। देवउठनी एकादशी पर भगवान के जागते ही ये शुभ कार्य फिर शुरू हो जाते हैं। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत हज़ारों यज्ञों के बराबर पुण्य देता है।

Dev Uthani Ekadashi पूजा सामग्री

  • भगवान विष्णु या शालिग्राम जी की मूर्ति / चित्र
  • गन्ने (ईख) — मंडप बनाने के लिए
  • सिंघाड़ा, शकरकंद, बेर, आँवला, मूली और मौसमी फल
  • गेरू या खड़िया — भगवान के चरण बनाने के लिए
  • पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, रोली, अक्षत
  • घी का दीपक, धूप, शंख और घंटी
  • पंचामृत, मिठाई और गुड़

देवउठनी एकादशी पूजा विधि — स्टेप बाय स्टेप

  1. सुबह स्नान करके भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें। दिन भर अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखें।
  2. घर के आँगन या पूजा स्थान को साफ़ करें और गेरू या खड़िया से भगवान विष्णु के चरण बनाएँ।
  3. शाम को चरणों के पास गन्नों से मंडप बनाएँ और सिंघाड़ा, शकरकंद, बेर, फल और मिठाई रखें। कई घरों में इन्हें एक डलिया से ढक दिया जाता है।
  4. भगवान विष्णु की पूजा करें — पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, अक्षत और पंचामृत चढ़ाएँ और घी का दीपक जलाएँ।
  5. शंख, घंटी और थाली बजाकर भगवान को जगाएँ और नीचे दिया गया प्रबोधन मंत्र बोलें। लोक परंपरा में महिलाएँ “उठो देव, बैठो देव” गाते हुए भगवान को जगाती हैं।
  6. देवउठनी एकादशी की व्रत कथा सुनें और ॐ जय जगदीश हरे आरती करें।
  7. रात में भजन-कीर्तन और जागरण करें। अगले दिन पारण के समय में दान देकर व्रत खोलें।

Dev Uthani Ekadashi पर विष्णु जगाने का मंत्र

उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्॥

अर्थ: हे गोविंद, उठिए, निद्रा त्यागिए। हे जगन्नाथ, आपके सोने से यह सारा संसार सोया रहता है। इसके साथ “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप भी करें।

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

एक राज्य में राजा और प्रजा सभी एकादशी का व्रत रखते थे; उस दिन कोई अन्न नहीं खाता था। एक दिन दूसरे राज्य से एक व्यक्ति राजा के पास नौकरी माँगने आया। राजा ने शर्त रखी कि नौकरी मिलेगी, पर एकादशी को अन्न नहीं मिलेगा। उसने हाँ कर दी।

एकादशी आई तो उसे केवल फल दिए गए। भूख से व्याकुल होकर उसने राजा से अन्न माँगा। राजा ने उसे आटा, दाल और चावल दे दिए। वह नदी किनारे गया, भोजन बनाया और भगवान को पुकारा — “आइए भगवान, भोजन तैयार है।” उसकी सच्ची पुकार सुनकर भगवान विष्णु चतुर्भुज रूप में प्रकट हुए और उसके साथ भोजन किया।

अगली एकादशी पर वह दुगुना सामान माँगने लगा और बोला कि भगवान भी मेरे साथ खाते हैं। राजा को विश्वास नहीं हुआ और वह छिपकर देखने गया। उस व्यक्ति ने भगवान को बार-बार पुकारा, पर भगवान नहीं आए। तब उसने कहा कि अगर भगवान नहीं आए तो वह नदी में कूद जाएगा। जैसे ही वह कूदने चला, भगवान प्रकट हुए, उसे रोका और साथ भोजन किया, फिर उसे अपने धाम ले गए।

यह देखकर राजा समझ गया कि व्रत-उपवास के साथ मन की सच्ची भक्ति सबसे ज़रूरी है। तभी से राजा भी पूरे भाव से एकादशी व्रत करने लगा और अंत में उसे भी वैकुंठ प्राप्त हुआ।

Dev Uthani Ekadashi और तुलसी विवाह 2026

देवउठनी एकादशी के अगले दिन, कार्तिक शुक्ल द्वादशी — शनिवार, 21 नवंबर 2026 — को तुलसी विवाह होगा। इस दिन माता तुलसी (वृंदा) का विवाह भगवान शालिग्राम (विष्णु) के साथ कराया जाता है। तुलसी के गमले को मंडप की तरह सजाया जाता है, तुलसी जी को चुनरी और सुहाग का सामान चढ़ाया जाता है, और शालिग्राम जी के साथ सात फेरे कराए जाते हैं। कई परिवार देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक किसी भी दिन तुलसी विवाह करते हैं।

भीष्म पंचक

देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा (20 से 24 नवंबर) तक के पाँच दिन भीष्म पंचक कहलाते हैं। मान्यता है कि शर-शय्या पर लेटे भीष्म पितामह ने इन्हीं दिनों में भगवान श्रीकृष्ण की उपस्थिति में धर्म का उपदेश दिया था। कई भक्त इन पाँच दिनों में विशेष व्रत और गंगा स्नान करते हैं। 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली और गुरु नानक जयंती है।

Dev Uthani Ekadashi के नियम

  • इस दिन चावल और अन्न न खाएँ; व्रत न रखने वाले भी चावल से परहेज़ करते हैं।
  • तुलसी के पत्ते एकादशी के दिन न तोड़ें — पूजा के लिए एक दिन पहले तोड़कर रख लें।
  • घर में सात्विकता रखें, क्रोध और कटु वचन से बचें।
  • पारण द्वादशी में, हरि वासर के बाद ही करें। बीमार, गर्भवती महिलाएँ और बुज़ुर्ग फलाहार व्रत रखें।

Dev Uthani Ekadashi 2026 — in English

Dev Uthani (Prabodhini) Ekadashi marks Lord Vishnu waking from his four-month Yoga Nidra and the end of Chaturmas. In 2026 Ekadashi tithi runs from about 7:15 AM on 20 November to about 6:31 AM on 21 November (Delhi), so Smarta households fast on Friday, 20 November (Parana on 21 November, about 1:10–3:17 PM) and Vaishnavas on Saturday, 21 November (Parana on 22 November, about 6:49–8:56 AM). Tulsi Vivah is on 21 November.

For every Ekadashi date and Parana time in your city, see एकादशी कब है (When is Ekadashi). Read more on Wikipedia, and see our व्रत-त्योहार कैलेंडर.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

देवउठनी एकादशी 2026 कब है — 20 या 21 नवंबर?

दोनों। एकादशी तिथि 20 नवंबर सुबह लगभग 7:15 से 21 नवंबर सुबह लगभग 6:31 तक है। गृहस्थ (स्मार्त) शुक्रवार, 20 नवंबर को और वैष्णव व इस्कॉन परंपरा के लोग शनिवार, 21 नवंबर को व्रत रखेंगे।

देवउठनी एकादशी का पारण कब है?

स्मार्त व्रत का पारण 21 नवंबर को दोपहर लगभग 1:10 से 3:17 तक (दिल्ली) — क्योंकि सुबह हरि वासर रहेगा। वैष्णव व्रत का पारण 22 नवंबर को सूर्योदय के बाद, लगभग 6:49 से 8:56 तक।

तुलसी विवाह 2026 कब है?

तुलसी विवाह शनिवार, 21 नवंबर 2026 को कार्तिक शुक्ल द्वादशी पर है। कई परिवार देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा (24 नवंबर) के बीच किसी भी दिन तुलसी विवाह करते हैं।

देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु को कैसे जगाएँ?

शाम को आँगन में भगवान के चरण बनाकर, गन्ने का मंडप सजाकर और शंख-घंटी बजाकर “उत्तिष्ठ गोविन्द…” मंत्र या “उठो देव, बैठो देव” बोलते हुए भगवान को जगाया जाता है।

What is Dev Uthani Ekadashi in short?

Dev Uthani (Prabodhini) Ekadashi is the day Lord Vishnu wakes from his four-month rest, ending Chaturmas. In 2026 Smarta households fast on 20 November and Vaishnavas on 21 November; Tulsi Vivah is on 21 November.

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