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शनि देव की आरती (Shani Dev Ki Aarti) — जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी, लिरिक्स हिंदी और English में, अर्थ और शनिवार पूजा विधि

अंतिम अपडेट: 5 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Shani Dev Aarti – शनि देव की आरती जय जय श्री शनिदेव

Shani Dev Ki Aarti (शनि देव की आरती) “जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी” शनिवार की शाम शनि पूजा में गाई जाती है। शनि देव सूर्य देव और माता छाया के पुत्र हैं और कर्मों का फल देने वाले न्यायाधीश माने जाते हैं। इस छोटी-सी आरती में उनका रूप — श्याम वर्ण, चार भुजाएँ, नीले वस्त्र, हाथी की सवारी — और उनकी प्रिय चीज़ें — लोहा, तिल, तेल और उड़द — बताई गई हैं। साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष में श्रद्धा से यह आरती करने की परंपरा है। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, अर्थ और पूजा विधि दी गई है।

Shani Dev Ki Aarti – शनि देव की आरती जय जय श्री शनिदेव

Shani Dev Ki Aarti Lyrics in Hindi — जय जय श्री शनिदेव

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव…॥

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव…॥

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव…॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव…॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥
॥ जय जय श्री शनिदेव…॥

Shani Dev Ki Aarti Lyrics in English

Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitkari,
Suraj Ke Putra Prabhu Chhaya Mahtari.
॥ Jai Jai Shri Shanidev… ॥

Shyam Ank Vakra Drisht Chaturbhuja Dhari,
Neelambar Dhaar Naath Gaj Ki Asvari.
॥ Jai Jai Shri Shanidev… ॥

Kreet Mukut Sheesh Rajit Dipat Hai Lilari,
Muktan Ki Mala Gale Shobhit Balihari.
॥ Jai Jai Shri Shanidev… ॥

Modak Mishthan Paan Chadhat Hain Supari,
Loha Til Tel Udad Mahishi Ati Pyari.
॥ Jai Jai Shri Shanidev… ॥

Dev Danuj Rishi Muni Sumirat Nar Nari,
Vishwanath Dharat Dhyan Sharan Hain Tumhari.
॥ Jai Jai Shri Shanidev… ॥

Shani Dev Ki Aarti का अर्थ

  1. परिचय: हे भक्तों का हित करने वाले श्री शनिदेव, आपकी जय हो। आप सूर्य देव के पुत्र हैं और माता छाया आपकी माँ हैं।
  2. स्वरूप: आपका शरीर श्याम वर्ण का है, दृष्टि टेढ़ी (वक्र) है, आप चार भुजाएँ धारण करते हैं, नीले वस्त्र पहनते हैं और हाथी पर सवार हैं।
  3. श्रृंगार: आपके सिर पर किरीट मुकुट शोभा देता है, माथा चमकता है और गले में मोतियों की माला सुंदर लगती है।
  4. भोग: आपको मोदक, मिठाई, पान और सुपारी चढ़ाई जाती है; लोहा, तिल, तेल, उड़द और भैंस आपको बहुत प्रिय हैं।
  5. शरण: देवता, दानव, ऋषि, मुनि और सभी नर-नारी आपका स्मरण करते हैं; कवि विश्वनाथ आपका ध्यान करते हुए आपकी शरण में हैं।

शनिवार को Shani Dev Ki Aarti और पूजा की विधि

  1. शनिवार को सूर्यास्त के बाद स्नान करके साफ़ (काले या नीले) वस्त्र पहनें और शनि मंदिर या पीपल के पेड़ के पास जाएँ।
  2. शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाएँ और सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। काले तिल, उड़द और नीले फूल अर्पित करें।
  3. “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
  4. सिर झुकाकर, थोड़ा बगल में खड़े होकर शनि देव की आरती गाएँ।
  5. इसके बाद हनुमान चालीसा पढ़ें और ज़रूरतमंद को काले तिल, उड़द, तेल या कंबल का दान करें।

Shani Dev Ki Aarti के 7 नियम

  • शनि देव की आँखों में सीधे न देखें — सिर झुकाकर पूजा करें।
  • दीपक सरसों के तेल का ही जलाएँ।
  • शनिवार को लोहा, तेल और नमक ख़रीदने से बचने की परंपरा है।
  • शनिवार को मांस-मदिरा से दूर रहें।
  • किसी गरीब, मज़दूर या बुज़ुर्ग का अपमान न करें — शनि देव कर्म के न्यायाधीश हैं।
  • पूजा के बाद पीछे मुड़कर न देखें, सीधे घर लौटें।
  • आरती श्रद्धा से करें; डर से नहीं, भक्ति से पूजा करें।

शनि देव की आरती के लाभ

  • मान्यता है कि साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट कम होते हैं।
  • काम में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
  • धैर्य, अनुशासन और मेहनत की आदत बढ़ती है।
  • मन से डर और नकारात्मकता दूर होती है।

शनि अमावस्या की तारीख के लिए अमावस्या कब है देखें। शनिवार को हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

शनि देव की आरती कब करनी चाहिए?

शनिवार की शाम, सूर्यास्त के बाद शनि देव की आरती करना सबसे शुभ माना जाता है। शनि जयंती, शनि अमावस्या और साढ़ेसाती या ढैय्या के समय भी यह आरती की जाती है।

शनि देव को क्या चढ़ाया जाता है?

आरती में ही बताया गया है — लोहा, काले तिल, सरसों का तेल और उड़द शनि देव को प्रिय हैं। शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाकर काले तिल और उड़द का दान किया जाता है।

क्या शनि देव की मूर्ति के ठीक सामने खड़े होकर पूजा करनी चाहिए?

परंपरा में कहा जाता है कि शनि देव की आँखों में सीधे नहीं देखना चाहिए। इसलिए पूजा और आरती थोड़ा बगल में खड़े होकर, सिर झुकाकर की जाती है।

शनि के कष्ट में और क्या पढ़ें?

शनि देव की आरती के साथ हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक का पाठ करने की परंपरा है, क्योंकि मान्यता है कि हनुमान जी के भक्तों को शनि देव कष्ट नहीं देते।

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