Ganga Maiya Ki Aarti (गंगा मैया की आरती) “ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता” माँ गंगा की स्तुति है, जो हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी के घाटों पर हर शाम दीपों के साथ गाई जाती है। मान्यता है कि राजा भगीरथ की तपस्या से गंगा स्वर्ग से धरती पर आईं और उनके जल से राजा सगर के पुत्रों को मुक्ति मिली। गंगा दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा और हर गंगा स्नान पर यह आरती विशेष फल देती है। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, अर्थ और पूजा विधि दी गई है।

इस लेख में
Ganga Maiya Ki Aarti Lyrics in Hindi — ॐ जय गंगे माता
नमामि गंगे! तव पाद पंकजम्, सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम्।
भक्तिम् मुक्तिं च ददासि नित्यं, भावानुसारेण सदा नराणाम्॥
हर हर गंगे, जय माँ गंगे, हर हर गंगे, जय माँ गंगे॥
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
चंद्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता।
शरण पड़ें जो तेरी, सो नर तर जाता॥
॥ ॐ जय गंगे माता…॥
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥
॥ ॐ जय गंगे माता…॥
एक ही बार जो तेरी, शरणागति आता।
यम की त्रास मिटा कर, परमगति पाता॥
॥ ॐ जय गंगे माता…॥
आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता।
दास वही सहज में, मुक्ति को पाता॥
॥ ॐ जय गंगे माता…॥
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥
Ganga Maiya Ki Aarti Lyrics in English
Namami Gange! Tava Paad Pankajam, Surasuraih Vandit Divya Roopam,
Bhaktim Muktim Cha Dadasi Nityam, Bhavanusarena Sada Naranam.
Har Har Gange, Jai Maa Gange, Har Har Gange, Jai Maa Gange.
Om Jai Gange Mata, Shri Jai Gange Mata,
Jo Nar Tumko Dhyata, Manvanchhit Phal Pata.
Chandra Si Jot Tumhari, Jal Nirmal Aata,
Sharan Padein Jo Teri, So Nar Tar Jata.
॥ Om Jai Gange Mata… ॥
Putra Sagar Ke Taare, Sab Jag Ko Gyata,
Kripa Drishti Tumhari, Tribhuvan Sukh Data.
॥ Om Jai Gange Mata… ॥
Ek Hi Baar Jo Teri, Sharanagati Aata,
Yam Ki Traas Mita Kar, Paramgati Pata.
॥ Om Jai Gange Mata… ॥
Aarti Maat Tumhari, Jo Jan Nitya Gata,
Daas Wahi Sahaj Mein, Mukti Ko Pata.
॥ Om Jai Gange Mata… ॥
Om Jai Gange Mata, Shri Jai Gange Mata,
Jo Nar Tumko Dhyata, Manvanchhit Phal Pata.
Ganga Maiya Ki Aarti का अर्थ
- श्लोक: हे गंगे, देवताओं और असुरों द्वारा वंदित आपके दिव्य चरण-कमलों को नमस्कार। आप मनुष्यों को उनके भाव के अनुसार सदा भक्ति और मुक्ति देती हैं।
- टेक: हे गंगा माता, आपकी जय हो। जो आपका ध्यान करता है, उसे मनचाहा फल मिलता है।
- निर्मल जल: आपकी ज्योति चंद्रमा जैसी है और आपका जल निर्मल है; जो आपकी शरण में आता है, वह भवसागर से तर जाता है।
- सगर के पुत्र: आपने राजा सगर के पुत्रों का उद्धार किया — यह सारा जगत जानता है। आपकी कृपा दृष्टि तीनों लोकों को सुख देती है।
- शरणागति: जो एक बार भी आपकी शरण में आता है, उसका यमराज का डर मिट जाता है और उसे परमगति मिलती है।
- फलश्रुति: हे माता, जो आपकी आरती रोज़ गाता है, वह सहज ही मुक्ति पाता है।
Ganga Maiya Ki Aarti और गंगा पूजा की विधि
- गंगा स्नान के दिन सुबह स्नान करें; घाट पर न जा सकें तो नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाएँ।
- गंगा तट पर या घर में गंगाजल के पात्र के सामने रोली, चंदन, फूल और अक्षत अर्पित करें।
- “ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
- शाम को घी का दीपक या दीपों की थाली जलाकर “नमामि गंगे” श्लोक पढ़ें और ॐ जय गंगे माता आरती गाएँ।
- घाट पर हों तो पत्ते के दोने में दीपक और फूल रखकर गंगा जी में प्रवाहित करें (दीपदान)।
Ganga Maiya Ki Aarti के 7 नियम
- गंगा में साबुन, शैम्पू या कोई गंदगी न डालें — माँ गंगा को स्वच्छ रखना ही सबसे बड़ी पूजा है।
- प्लास्टिक के दोने या थैलियाँ गंगा में न छोड़ें; पत्ते के दोने ही प्रयोग करें।
- गंगाजल को हमेशा साफ़ पात्र में, पूजा के स्थान पर रखें।
- स्नान से पहले माँ गंगा को प्रणाम करें।
- गंगा तट पर झूठ, क्रोध और निंदा से बचें।
- आरती खड़े होकर, दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाकर करें।
- आरती के बाद गंगाजल का आचमन करें और घर में छिड़कें।
गंगा मैया की आरती के लाभ
- मान्यता है कि पाप नष्ट होते हैं और मन पवित्र होता है।
- घर में शांति और सकारात्मकता आती है।
- पितरों की शांति और मोक्ष की कामना पूरी होने की मान्यता है।
- प्रकृति और नदियों के प्रति सम्मान का भाव बढ़ता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और दीपदान की विधि के लिए कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि पढ़ें। हर पूर्णिमा की तारीख के लिए पूर्णिमा कब है देखें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
गंगा मैया की आरती कब की जाती है?
हरिद्वार, ऋषिकेश और वाराणसी के घाटों पर रोज़ शाम को गंगा आरती होती है। घर पर गंगा दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और गंगा स्नान के दिन यह आरती गाई जाती है।
“पुत्र सगर के तारे” का क्या अर्थ है?
राजा सगर के 60,000 पुत्र कपिल मुनि के श्राप से भस्म हो गए थे। राजा भगीरथ की तपस्या से गंगा धरती पर आईं और उनके जल के स्पर्श से सगर के पुत्रों को मुक्ति मिली — यही इस पंक्ति का भाव है।
घर पर गंगा पूजा कैसे करें?
घर में गंगाजल का पात्र या गंगा जी का चित्र रखें, उसे रोली, फूल और अक्षत अर्पित करें, घी का दीपक जलाकर “ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः” मंत्र पढ़ें और फिर आरती करें।
गंगा आरती में कौन सा श्लोक पहले पढ़ा जाता है?
आरती से पहले “नमामि गंगे! तव पाद पंकजम्, सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम्” श्लोक पढ़ा जाता है — यानी हे गंगे, देवताओं और असुरों द्वारा वंदित आपके दिव्य चरण-कमलों को नमस्कार।