Laxmi Chalisa (श्री लक्ष्मी चालीसा) धन, सुख और सौभाग्य की देवी माँ लक्ष्मी की स्तुति है, जो दोहे “मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास” से शुरू होती है। शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस और शरद पूर्णिमा पर इसका पाठ विशेष रूप से किया जाता है। इसमें समुद्र मंथन से माँ के प्रकट होने और हर अवतार में भगवान विष्णु की सेवा करने का वर्णन है। नीचे लक्ष्मी चालीसा का संपूर्ण लिखित पाठ हिंदी और English में, सरल अर्थ, पाठ विधि और लाभ दिए गए हैं।

इस लेख में
Laxmi Chalisa Lyrics in Hindi — श्री लक्ष्मी चालीसा
॥ दोहा ॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस॥
॥ सोरठा ॥
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥
॥ चौपाई ॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही।
ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी।
सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा।
सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी।
विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी।
दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी।
कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी।
सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी।
जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता।
संकट हरो हमारी माता॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो।
चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी।
सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा।
रूप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा।
लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं।
सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी।
विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी।
कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई।
मन इच्छित वांछित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई।
पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई।
जो यह पाठ करै मन लाई॥
ताको कोई कष्ट नोई।
मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि।
त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥
जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै।
ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै।
पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
पुत्रहीन अरु सम्पति हीना।
अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै।
शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा।
ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै।
कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा।
तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही।
उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई।
लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा।
होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी।
सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं।
तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै।
संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी।
दर्शन दजै दशा निहारी॥
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी।
तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में।
सब जानत हो अपने मन में॥
रूप चतुर्भुज करके धारण।
कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई।
ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई॥
॥ दोहा ॥
त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥
Laxmi Chalisa Lyrics in English
Doha
Matu Lakshmi Kari Kripa, Karo Hriday Mein Vaas.
Manokamna Siddh Kari, Paruvahu Meri Aas.
Soratha
Yahi Mor Ardaas, Haath Jod Vinati Karun.
Sab Vidhi Karau Suvaas, Jai Janani Jagdambika.
Chaupai
Sindhu Suta Main Sumirau Tohi,
Gyan Buddhi Vidya Do Mohi.
Tum Saman Nahin Koi Upkari,
Sab Vidhi Puravahu Aas Hamari.
Jai Jai Jagat Janani Jagdamba,
Sabki Tum Hi Ho Avalamba.
Tum Hi Ho Sab Ghat Ghat Vaasi,
Vinati Yahi Hamari Khaasi.
Jagjanani Jai Sindhu Kumari,
Deenan Ki Tum Ho Hitkari.
Vinvaun Nitya Tumahin Maharani,
Kripa Karau Jag Janani Bhavani.
Kehi Vidhi Stuti Karaun Tihari,
Sudhi Leejai Apradh Bisari.
Kripa Drishti Chitvavo Mam Ori,
Jagjanani Vinati Sun Mori.
Gyan Buddhi Jai Sukh Ki Data,
Sankat Haro Hamari Mata.
Ksheersindhu Jab Vishnu Mathayo,
Chaudah Ratna Sindhu Mein Payo.
Chaudah Ratna Mein Tum Sukhrasi,
Seva Kiyo Prabhu Bani Daasi.
Jab Jab Janm Jahan Prabhu Leenha,
Roop Badal Tahan Seva Keenha.
Swayam Vishnu Jab Nar Tanu Dhara,
Leenheu Avadhpuri Avtara.
Tab Tum Pragat Janakpur Mahin,
Seva Kiyo Hriday Pulkahin.
Apnaya Tohi Antaryami,
Vishwa Vidit Tribhuvan Ki Swami.
Tum Sam Prabal Shakti Nahin Aani,
Kahan Lau Mahima Kahaun Bakhani.
Man Kram Vachan Karai Sevkai,
Man Ichchhit Vanchhit Phal Pai.
Taji Chhal Kapat Aur Chaturai,
Poojahin Vividh Bhanti Manlai.
Aur Haal Main Kahaun Bujhai,
Jo Yah Paath Karai Man Lai.
Tako Koi Kasht Noi,
Man Ichchhit Pavai Phal Soi.
Trahi Trahi Jai Dukh Nivarini,
Trividh Taap Bhav Bandhan Harini.
Jo Chalisa Padhai Padhavai,
Dhyan Lagakar Sunai Sunavai.
Takau Koi Na Rog Satavai,
Putra Aadi Dhan Sampatti Pavai.
Putraheen Aru Sampati Heena,
Andh Badhir Kodhi Ati Deena.
Vipra Bolay Kai Paath Karavai,
Shanka Dil Mein Kabhi Na Lavai.
Paath Karavai Din Chalisa,
Ta Par Kripa Karain Gaurisa.
Sukh Sampatti Bahut Si Pavai,
Kami Nahin Kahu Ki Aavai.
Barah Maas Karai Jo Pooja,
Tehi Sam Dhanya Aur Nahin Dooja.
Pratidin Paath Karai Man Mahi,
Un Sam Koi Jag Mein Kahun Nahin.
Bahuvidhi Kya Main Karaun Badai,
Ley Pariksha Dhyan Lagai.
Kari Vishwas Karai Vrat Nema,
Hoy Siddh Upjai Ur Prema.
Jai Jai Jai Lakshmi Bhavani,
Sab Mein Vyapit Ho Gun Khani.
Tumharo Tej Prabal Jag Mahin,
Tum Sam Kou Dayalu Kahun Nahin.
Mohi Anath Ki Sudhi Ab Leejai,
Sankat Kaati Bhakti Mohi Deejai.
Bhool Chook Kari Kshama Hamari,
Darshan Dajai Dasha Nihari.
Bin Darshan Vyakul Adhikari,
Tumahi Achhat Dukh Sahte Bhari.
Nahin Mohin Gyan Buddhi Hai Tan Mein,
Sab Janat Ho Apne Man Mein.
Roop Chaturbhuj Karke Dharan,
Kasht Mor Ab Karahu Nivaran.
Kehi Prakar Main Karaun Badai,
Gyan Buddhi Mohi Nahin Adhikai.
Doha
Trahi Trahi Dukh Harini, Haro Vegi Sab Traas.
Jayati Jayati Jai Lakshmi, Karo Shatru Ko Naash.
Ramdas Dhari Dhyan Nit, Vinay Karat Kar Jor.
Matu Lakshmi Daas Par, Karahu Daya Ki Kor.
Laxmi Chalisa का सरल अर्थ
प्रार्थना: हे माँ लक्ष्मी, कृपा करके मेरे हृदय में वास करें और मेरी मनोकामना पूरी करें। हे सिंधु (समुद्र) की पुत्री, मैं आपका स्मरण करता हूँ — मुझे ज्ञान, बुद्धि और विद्या दीजिए। आप जगत की माता हैं, सबका सहारा हैं और हर हृदय में बसती हैं।
माँ की महिमा: जब भगवान विष्णु ने क्षीरसागर का मंथन कराया, तो उसमें से चौदह रत्न निकले, और उनमें सबसे सुख देने वाली आप थीं। आपने भगवान की दासी बनकर सेवा की। जब-जब प्रभु ने अवतार लिया, आपने रूप बदलकर उनकी सेवा की — जब विष्णु श्रीराम बनकर अयोध्या में आए, तो आप जनकपुर में सीता बनकर प्रकट हुईं।
पाठ का फल: जो छल-कपट छोड़कर मन से माँ की पूजा करता है और यह चालीसा पढ़ता-सुनता है, उसे कोई रोग नहीं सताता और धन-संपत्ति व संतान सुख मिलता है। अंत में भक्त माँ से भूल-चूक की क्षमा माँगता है और चतुर्भुज रूप में दर्शन देकर कष्ट दूर करने की विनती करता है।
Laxmi Chalisa पाठ की विधि
- शुक्रवार की शाम या सुबह स्नान करके साफ़ या लाल वस्त्र पहनें। घर और पूजा स्थान साफ़ रखें — माँ लक्ष्मी स्वच्छता में वास करती हैं।
- माँ लक्ष्मी के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएँ और कमल, गुलाब या लाल फूल अर्पित करें।
- रोली, अक्षत, सिंदूर और इत्र चढ़ाएँ, और खीर, मिश्री या सफ़ेद मिठाई का भोग लगाएँ।
- “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” का 11 बार जाप करके लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
- पाठ के बाद ॐ जय लक्ष्मी माता आरती करें और प्रसाद बाँटें।
लक्ष्मी चालीसा कब पढ़ें
- शुक्रवार — माँ लक्ष्मी का दिन।
- दीपावली की लक्ष्मी पूजा और धनतेरस पर।
- शरद पूर्णिमा (कोजागरी) और हर पूर्णिमा पर।
- नए काम, दुकान या व्यापार की शुरुआत पर।
- रोज़ शाम संध्या दीपक के समय।
Laxmi Chalisa पढ़ने के 7 नियम
- घर और पूजा स्थान को साफ़ रखें; शाम को घर में अँधेरा न रखें।
- पाठ श्रद्धा और शांत मन से करें।
- पाठ के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
- शुक्रवार को सात्विक भोजन करें।
- माँ को लाल या गुलाबी फूल और कमल प्रिय हैं।
- पाठ के बाद आरती ज़रूर करें।
- किसी का अपमान, खासकर स्त्रियों का, न करें — लक्ष्मी जी वहाँ नहीं रुकतीं, ऐसी मान्यता है।
लक्ष्मी चालीसा के लाभ
- मान्यता है कि घर में धन, सुख और समृद्धि आती है।
- आर्थिक परेशानियाँ और कर्ज़ धीरे-धीरे कम होते हैं।
- परिवार में सौभाग्य और शांति बढ़ती है।
- मन में संतोष और सकारात्मकता आती है।
लक्ष्मी पूजा में ॐ जय लक्ष्मी माता आरती, गणेश चालीसा और दीपावली लक्ष्मी पूजा विधि भी देखें। माँ लक्ष्मी के बारे में और पढ़ें Wikipedia पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
लक्ष्मी चालीसा कब पढ़नी चाहिए?
शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस, शरद पूर्णिमा और हर पूर्णिमा को लक्ष्मी चालीसा पढ़ना शुभ है। रोज़ शाम दीपक जलाकर भी पाठ किया जा सकता है।
लक्ष्मी चालीसा की पहली पंक्ति क्या है?
लक्ष्मी चालीसा का आरंभ दोहे “मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास” से होता है, और पहली चौपाई है “सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही”।
लक्ष्मी चालीसा किसने लिखी?
लक्ष्मी चालीसा के अंतिम दोहे में “रामदास” नाम आता है, इसलिए परंपरा में इसे रामदास जी की रचना माना जाता है।
लक्ष्मी चालीसा का पाठ कैसे करें?
शुक्रवार की शाम स्नान करके माँ लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएँ, कमल या लाल फूल, खीर या मिश्री अर्पित करें, फिर चालीसा पढ़ें और ॐ जय लक्ष्मी माता आरती करें।
Is Laxmi Chalisa available in English?
Yes. This page gives the full Shri Lakshmi Chalisa in Hindi (Devanagari) and in English transliteration, with a simple meaning, the reading method and benefits.