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मंगलवार, 3 नवंबर 2026 · कार्तिक कृष्ण नवमी · वि.सं. 2083 आज का पंचांग → हिंदीEnglish
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विवाह मुहूर्त — शादी की शुभ तिथियाँ

शादी की तारीख तय करने से पहले ज़्यादातर परिवार सबसे पहले यही पूछते हैं — “इस साल शुभ मुहूर्त कब-कब है?” यह टूल आपके शहर के अनुसार विवाह मुहूर्त (Vivah Muhurat), यानी शादी का शुभ मुहूर्त, की पूरी सूची देता है। आज से लेकर अगले साल के अंत तक की सभी शुभ तिथियाँ महीने के अनुसार दिखती हैं — हर तारीख के साथ वार, नक्षत्र, तिथि और उस दिन का शुभ समय। साथ ही यह भी बताया जाता है कि किन महीनों में विवाह मुहूर्त नहीं है और क्यों — जैसे खरमास, चातुर्मास या गुरु-शुक्र का अस्त होना।

विवाह मुहूर्त — 81 शुभ तिथियाँआज से 2027 के अंत तक · दिल्ली के समय अनुसार
नवंबर 20264 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
21 नवं, शनअगले दिन सुबह 4:58 – सुबह 5:55रेवती · त्रयोदशी (शु.)
25 नवं, बुशाम 4:52 – सुबह 6:52 (अगले दिन)रोहिणी · द्वितीया (कृ.)
26 नवं, गुसुबह 6:52 – शाम 5:47मृगशिरा · द्वितीया (कृ.)
30 नवं, सोदोपहर 12:56 – रात 12:13 (अगले दिन)मघा · सप्तमी (कृ.)
दिसंबर 20268 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
2 दिसं, बुरात 10:54 – सुबह 6:57 (अगले दिन)उत्तरा फाल्गुनी · दशमी (कृ.)
3 दिसं, गुसुबह 6:57 – सुबह 10:55
रात 11:05 – सुबह 6:58 (अगले दिन)
उत्तरा फाल्गुनी · दशमी (कृ.)
हस्त · एकादशी (कृ.)
4 दिसं, शुसुबह 6:58 – सुबह 10:23हस्त · एकादशी (कृ.)
5 दिसं, शनअगले दिन रात 12:54 – सुबह 6:59स्वाति · त्रयोदशी (कृ.)
6 दिसं, रवसुबह 6:59 – दोपहर 1:38स्वाति · त्रयोदशी (कृ.)
10 दिसं, गुसुबह 8:47 – रात 11:58मूल · द्वितीया (शु.)
11 दिसं, शुअगले दिन रात 3:04 – सुबह 7:04उत्तराषाढ़ा · तृतीया (शु.)
12 दिसं, शनसुबह 7:04 – दोपहर 2:07उत्तराषाढ़ा · तृतीया (शु.)
जनवरी 20279 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
15 जन, शुसुबह 7:15 – दोपहर 2:15रेवती · सप्तमी (शु.)
19 जन, मंअगले दिन सुबह 4:43 – सुबह 7:14मृगशिरा · त्रयोदशी (शु.)
20 जन, बुसुबह 7:14 – शाम 4:17मृगशिरा · त्रयोदशी (शु.)
23 जन, शनअगले दिन सुबह 4:54 – सुबह 7:13मघा · द्वितीया (कृ.)
24 जन, रवसुबह 7:13 – रात 9:31मघा · द्वितीया (कृ.)
25 जन, सोअगले दिन सुबह 6:02 – सुबह 7:12उत्तरा फाल्गुनी · पंचमी (कृ.)
26 जन, मंसुबह 7:12 – सुबह 4:35 (अगले दिन)उत्तरा फाल्गुनी · पंचमी (कृ.)
28 जन, गुअगले दिन रात 12:33 – सुबह 4:05स्वाति · सप्तमी (कृ.)
31 जन, रवसुबह 7:10 – रात 7:36अनुराधा · दशमी (कृ.)
फ़रवरी 202710 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
2 फ़र, मंसुबह 9:22 – सुबह 11:12मूल · एकादशी (कृ.)
4 फ़र, गुदोपहर 3:32 – शाम 4:33उत्तराषाढ़ा · त्रयोदशी (कृ.)
10 फ़र, बुअगले दिन रात 3:06 – सुबह 7:03उत्तराभाद्रपद · पंचमी (शु.)
11 फ़र, गुसुबह 7:03 – रात 3:20 (अगले दिन)रेवती · पंचमी (शु.)
15 फ़र, सोरात 10:45 – सुबह 6:59 (अगले दिन)रोहिणी · दशमी (शु.)
16 फ़र, मंसुबह 6:59 – रात 1:38 (अगले दिन)मृगशिरा · दशमी (शु.)
22 फ़र, सोसुबह 11:55 – सुबह 6:52 (अगले दिन)उत्तरा फाल्गुनी · द्वितीया (कृ.)
23 फ़र, मंसुबह 6:52 – सुबह 10:41उत्तरा फाल्गुनी · तृतीया (कृ.)
25 फ़र, गुसुबह 9:33 – रात 8:19स्वाति · पंचमी (कृ.)
27 फ़र, शनसुबह 11:40 – रात 9:56अनुराधा · सप्तमी (कृ.)
मार्च 20278 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
1 मार्च, सोअगले दिन रात 2:09 – सुबह 6:45मूल · दशमी (कृ.)
2 मार्च, मंसुबह 6:45 – दोपहर 3:26मूल · दशमी (कृ.)
3 मार्च, बुरात 10:34 – सुबह 6:43 (अगले दिन)उत्तराषाढ़ा · एकादशी (कृ.)
9 मार्च, मंदोपहर 3:42 – सुबह 6:37 (अगले दिन)उत्तराभाद्रपद · द्वितीया (शु.)
10 मार्च, बुसुबह 6:37 – सुबह 6:35 (अगले दिन)उत्तराभाद्रपद · द्वितीया (शु.)
11 मार्च, गुसुबह 6:35 – सुबह 11:20रेवती · तृतीया (शु.)
14 मार्च, रवदोपहर 12:33 – सुबह 6:31 (अगले दिन)रोहिणी · सप्तमी (शु.)
15 मार्च, सोसुबह 6:31 – सुबह 10:52रोहिणी · सप्तमी (शु.)
अप्रैल 20278 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
16 अप्रै, शुसुबह 8:18 – रात 10:25मघा · दशमी (शु.)
18 अप्रै, रवसुबह 7:43 – सुबह 5:52 (अगले दिन)उत्तरा फाल्गुनी · त्रयोदशी (शु.)
21 अप्रै, बुअगले दिन रात 3:31 – सुबह 4:44स्वाति · द्वितीया (कृ.)
23 अप्रै, शुसुबह 5:48 – दोपहर 3:55अनुराधा · तृतीया (कृ.)
25 अप्रै, रवसुबह 8:57 – सुबह 5:45 (अगले दिन)मूल · पंचमी (कृ.)
26 अप्रै, सोसुबह 5:45 – सुबह 7:38मूल · पंचमी (कृ.)
27 अप्रै, मंरात 11:15 – सुबह 5:43 (अगले दिन)उत्तराषाढ़ा · सप्तमी (कृ.)
28 अप्रै, बुसुबह 5:43 – दोपहर 12:32उत्तराषाढ़ा · सप्तमी (कृ.)
मई 202713 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
3 मई, सोरात 8:06 – सुबह 5:38 (अगले दिन)उत्तराभाद्रपद · त्रयोदशी (कृ.)
4 मई, मंसुबह 5:38 – रात 7:32रेवती · त्रयोदशी (कृ.)
7 मई, शुरात 11:42 – सुबह 5:35 (अगले दिन)रोहिणी · द्वितीया (शु.)
8 मई, शनसुबह 5:35 – सुबह 5:34 (अगले दिन)रोहिणी · द्वितीया (शु.)
9 मई, रवसुबह 5:34 – सुबह 9:04मृगशिरा · तृतीया (शु.)
15 मई, शनदोपहर 12:00 – सुबह 5:30 (अगले दिन)उत्तरा फाल्गुनी · दशमी (शु.)
18 मई, मंसुबह 11:43 – शाम 4:05स्वाति · त्रयोदशी (शु.)
22 मई, शनशाम 4:50 – सुबह 5:26 (अगले दिन)मूल · द्वितीया (कृ.)
23 मई, रवसुबह 5:26 – सुबह 7:43मूल · तृतीया (कृ.)
24 मई, सोरात 11:01 – सुबह 5:25 (अगले दिन)उत्तराषाढ़ा · पंचमी (कृ.)
25 मई, मंसुबह 5:25 – रात 1:13 (अगले दिन)उत्तराषाढ़ा · पंचमी (कृ.)
30 मई, रवसुबह 11:32 – रात 9:57उत्तराभाद्रपद · दशमी (कृ.)
31 मई, सोसुबह 10:04 – सुबह 5:23 (अगले दिन)उत्तराभाद्रपद · एकादशी (कृ.)
जून 20278 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
1 जून, मंसुबह 5:23 – सुबह 9:41रेवती · एकादशी (कृ.)
5 जून, शनरात 10:00 – सुबह 4:37 (अगले दिन)मृगशिरा · द्वितीया (शु.)
10 जून, गुसुबह 7:13 – शाम 6:24मघा · सप्तमी (शु.)
12 जून, शनअगले दिन रात 2:45 – सुबह 5:22हस्त · दशमी (शु.)
13 जून, रवसुबह 5:22 – शाम 5:00हस्त · दशमी (शु.)
16 जून, बुरात 7:44 – रात 3:22 (अगले दिन)अनुराधा · त्रयोदशी (शु.)
21 जून, सोसुबह 5:23 – रात 11:52उत्तराषाढ़ा · द्वितीया (कृ.)
26 जून, शनरात 7:23 – रात 9:53उत्तराभाद्रपद · सप्तमी (कृ.)
जुलाई 20272 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
1 जुला, गुरात 7:31 – सुबह 5:27 (अगले दिन)रोहिणी · त्रयोदशी (कृ.)
2 जुला, शुसुबह 5:27 – दोपहर 3:25रोहिणी · त्रयोदशी (कृ.)
अगस्त 2027कोई मुहूर्त नहीं

कारण: चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी)

सितंबर 2027कोई मुहूर्त नहीं

कारण: चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी)

अक्टूबर 2027कोई मुहूर्त नहीं

कारण: चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी)

नवंबर 20277 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
22 नवं, सोरात 8:44 – रात 2:37 (अगले दिन)उत्तरा फाल्गुनी · दशमी (कृ.)
23 नवं, मंदोपहर 1:46 – सुबह 6:50 (अगले दिन)उत्तरा फाल्गुनी · एकादशी (कृ.)
24 नवं, बुसुबह 6:50 – दोपहर 12:13हस्त · एकादशी (कृ.)
25 नवं, गुशाम 6:17 – सुबह 6:52 (अगले दिन)स्वाति · त्रयोदशी (कृ.)
26 नवं, शुसुबह 6:52 – सुबह 9:49स्वाति · त्रयोदशी (कृ.)
29 नवं, सोरात 7:47 – सुबह 6:55 (अगले दिन)मूल · द्वितीया (शु.)
30 नवं, मंसुबह 6:55 – रात 9:30मूल · द्वितीया (शु.)
दिसंबर 20274 मुहूर्त
तारीखशुभ समयनक्षत्र · तिथि
2 दिसं, गुदोपहर 1:45 – रात 2:30 (अगले दिन)उत्तराषाढ़ा · पंचमी (शु.)
7 दिसं, मंअगले दिन रात 1:52 – सुबह 7:01उत्तराभाद्रपद · दशमी (शु.)
8 दिसं, बुसुबह 7:01 – सुबह 7:01 (अगले दिन)उत्तराभाद्रपद · दशमी (शु.)
9 दिसं, गुसुबह 7:01 – दोपहर 3:17रेवती · एकादशी (शु.)
किन नियमों से गणना हुई
  • नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, रेवती
  • तिथि (शुक्ल): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी · (कृष्ण): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी
  • वार: सभी वार
  • इन समयों में मुहूर्त नहीं: खरमास (सूर्य धनु या मीन में), चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी), गुरु अस्त, शुक्र अस्त, अधिक मास, होलाष्टक, भद्रा (विष्टि करण)

ये तिथियाँ ऊपर लिखे मानक नियमों से गणना की गई हैं। पंचांगकारों के नियमों में थोड़ा अंतर होता है, और कई लोग लग्न शुद्धि और अपनी कुंडली भी देखते हैं — अंतिम मुहूर्त अपने पुरोहित से ज़रूर पक्का करें।

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विवाह मुहूर्त क्या है और यह क्यों देखा जाता है?

हिंदू परंपरा में विवाह सोलह संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है। इसे केवल दो व्यक्तियों का नहीं, दो परिवारों का मिलन माना जाता है, इसलिए इसकी शुरुआत ऐसे समय में करने की परंपरा है जब पंचांग के सभी अंग अनुकूल हों। मुहूर्त का अर्थ है वह समय-खंड जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण शुभ हों और कोई बड़ा दोष न हो।

मुहूर्त चिंतामणि जैसे मुहूर्त-ग्रंथों में विवाह के लिए उपयुक्त नक्षत्र और तिथियाँ बताए गए हैं। इन्हीं के साथ यह भी देखा जाता है कि सूर्य किस राशि में है, गुरु और शुक्र उदित हैं या नहीं, और कहीं चातुर्मास या अधिक मास तो नहीं चल रहा। मुहूर्त देखने का उद्देश्य डर नहीं, बल्कि एक शुभ और सोच-समझकर चुनी गई शुरुआत है — जिससे परिवार को मन की शांति और आत्मविश्वास मिलता है।

यह टूल शादी की शुभ तिथियाँ कैसे निकालता है?

आप भारत और विदेश के लगभग 215 शहरों में से अपना शहर चुनते हैं (पहले से दिल्ली चुना होता है)। टूल उस शहर के सूर्योदय के अनुसार हर दिन का पंचांग गणित से निकालता है और नीचे दिए गए नियमों से हर दिन को जाँचता है। हिंदू पंचांग में दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है, इसलिए वार भी सूर्योदय से गिना जाता है — यानी रात 2 बजे का समय भी पिछले दिन के वार में ही आता है।

नियमविवाह मुहूर्त में क्या देखा जाता है
नक्षत्र (11)रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
तिथिद्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी — शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्ष (पूर्णिमा शामिल नहीं)
वारवार का कोई अलग प्रतिबंध नहीं रखा गया — सातों दिन शामिल (कुछ परिवार मंगलवार से बचते हैं)
सूर्य की राशिमेष, वृषभ, मिथुन, वृश्चिक, मकर या कुंभ — यही विवाह का “सीज़न” है
भद्राविष्टि करण (भद्रा) का समय शुभ समय से हटा दिया जाता है
वर्जित अवधिखरमास, चातुर्मास, गुरु या शुक्र अस्त, अधिक मास, होलाष्टक — इन दिनों कोई मुहूर्त नहीं दिखाया जाता

जिस दिन ये सभी शर्तें एक साथ पूरी होती हैं, वही दिन सूची में आता है। तिथि और नक्षत्र दिन के बीच में बदल जाते हैं, इसलिए हर दिन के साथ वह समय-खंड दिखाया जाता है जिसमें शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र और बाकी शर्तें एक साथ चल रही हों और भद्रा न हो। कई बार यह खंड सुबह से रात तक लंबा होता है, तो कभी केवल कुछ घंटों का।

जो तिथियाँ सूची में नहीं हैं, वे विवाह के लिए नहीं ली जातीं — जैसे रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या। वार का कोई अलग प्रतिबंध इस टूल में नहीं रखा गया, क्योंकि प्रचलित विवाह मुहूर्त सूचियों में सातों वार की तारीखें मिलती हैं। फिर भी कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार मंगलवार या किसी और दिन से बचते हैं — ऐसा हो तो सूची में से वे तारीखें छोड़ दें।

किन समयों में विवाह मुहूर्त नहीं होता — और क्यों

टूल केवल शुभ तारीखें ही नहीं, बल्कि वे अवधियाँ भी दिखाता है जिनमें कोई मुहूर्त नहीं है, ताकि आप समझ सकें कि किसी महीने में शादी की तारीख क्यों नहीं मिल रही।

अवधिकब होती हैविवाह क्यों नहीं
खरमास (मलमास)जब सूर्य धनु राशि में हो (लगभग मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी) या मीन राशि में हो (लगभग मध्य मार्च से मध्य अप्रैल)परंपरा में इस समय मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं; मकर संक्रांति या मेष संक्रांति के बाद फिर शुरू होते हैं
चातुर्मासदेवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) तकमान्यता है कि इस समय भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं
गुरु अस्त / शुक्र अस्तजब गुरु या शुक्र सूर्य के बहुत पास आकर दिखाई देना बंद कर दें — इसे “तारा डूबना” भी कहते हैंगुरु और शुक्र को विवाह के प्रमुख कारक ग्रह माना जाता है
अधिक मासलगभग हर तीन साल में आने वाला अतिरिक्त चांद्र मास (पुरुषोत्तम मास)यह मास जप-तप और भक्ति के लिए है, नए मांगलिक कार्यों के लिए नहीं
होलाष्टकहोलिका दहन से पहले के आठ दिन (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा)परंपरागत रूप से इन दिनों शुभ कार्य टाले जाते हैं

इसके अलावा जब सूर्य कर्क, सिंह, कन्या या तुला राशि में होता है, तब भी इस टूल में विवाह मुहूर्त नहीं दिखाया जाता। इसका बड़ा भाग वैसे भी चातुर्मास में आ जाता है। ध्यान दें कि देवउठनी एकादशी के बाद भी अगर सूर्य तुला राशि में हो, तो सूर्य के वृश्चिक में जाने तक (लगभग मध्य नवंबर) प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

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टूल का परिणाम कैसे पढ़ें

  1. शहर चुनें: विवाह जिस शहर में होना है, वही चुनें — लड़के या लड़की के घर का शहर नहीं, बल्कि जहाँ फेरे होंगे। सूर्योदय और शुभ समय हर शहर में अलग होते हैं।
  2. महीने देखें: तारीखें महीनों में बँटी होती हैं। किसी महीने में कोई तारीख नहीं है तो वहाँ कारण लिखा मिलेगा।
  3. शुभ समय पर ध्यान दें: हर तारीख के साथ दिया गया समय-खंड ही उस दिन का शुभ समय है। अगर समय आधी रात के बाद तक जाता है, तो वह अगली सुबह के सूर्योदय तक उसी तारीख का हिस्सा माना जाता है।
  4. नक्षत्र और तिथि नोट करें: पुरोहित से बात करते समय यही जानकारी काम आती है।
  5. पुरोहित से पुष्टि करें: 3–4 पसंद की तारीखें चुनकर अपने कुल-पुरोहित या पंडित जी को दिखाएँ।

ईमानदारी से एक बात: यह सूची ऊपर बताए गए मानक नियमों से गणित द्वारा बनाई गई है। अलग-अलग पंचांग बनाने वाले कुछ और बातें भी देखते हैं — जैसे लग्न शुद्धि (फेरों के समय का लग्न), वर-वधू की अपनी कुंडली में चंद्रमा और गुरु की स्थिति, गोधूलि बेला, या क्षेत्रीय परंपराएँ। इसलिए किसी पंचांग में एक-दो तारीखें कम या ज़्यादा मिलना स्वाभाविक है। अंतिम मुहूर्त और फेरों का सटीक समय परिवार के पुरोहित से ज़रूर तय करवाएँ।

मुहूर्त से पहले: कुंडली मिलान और मांगलिक विचार

विवाह मुहूर्त तारीख तय करता है, पर रिश्ता तय करने से पहले कई परिवार कुंडली मिलान करवाते हैं। इसमें अष्टकूट पद्धति से वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी — इन आठ कूटों के कुल 36 गुण देखे जाते हैं। सामान्यतः 18 या उससे अधिक गुण मिलना स्वीकार्य माना जाता है, हालांकि ज्योतिषी केवल अंकों पर नहीं, पूरी कुंडली पर विचार करते हैं। आप हमारे कुंडली मिलान टूल से गुण मिलान देख सकते हैं।

इसी तरह मांगलिक दोष को लेकर भी बहुत चिंता की जाती है। मंगल कुंडली के कुछ विशेष भावों में हो तो व्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है, पर कई स्थितियों में यह दोष स्वयं शांत (परिहार) माना जाता है, और दोनों पक्ष मांगलिक हों तो इसे संतुलित माना जाता है। इसे डर की बात न बनाएँ — मांगलिक दोष कैलकुलेटर से स्थिति देखें और अनुभवी ज्योतिषी से शांत मन से सलाह लें। अपनी जन्म कुंडली के लिए फ्री कुंडली भी उपलब्ध है।

देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह और शादी का सीज़न

उत्तर भारत में शादियों का मौसम परंपरागत रूप से देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) से शुरू माना जाता है। मान्यता है कि आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा में रहते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इसी समय, एकादशी या द्वादशी को, कई घरों में तुलसी विवाह होता है — तुलसी जी का विवाह भगवान शालिग्राम (विष्णु) से कराया जाता है। लोक-परंपरा में इसके बाद ही घर में शादी-ब्याह की बातें आगे बढ़ती हैं।

मोटे तौर पर साल में विवाह के दो बड़े दौर बनते हैं:

  • सर्दियों का दौर: देवउठनी के बाद सूर्य के वृश्चिक में आने से धनु संक्रांति (खरमास) तक, और फिर मकर संक्रांति के बाद मकर व कुंभ के सूर्य में — होलाष्टक और मीन के खरमास से पहले तक।
  • गर्मियों का दौर: मीन का खरमास समाप्त होने पर मेष, वृषभ और मिथुन के सूर्य में — देवशयनी एकादशी से पहले तक।

किसी साल गुरु या शुक्र अस्त हो जाएँ या अधिक मास पड़ जाए, तो इन दौरों में भी लंबा अंतराल आ जाता है। इसीलिए हर साल शुभ तारीखों की संख्या अलग होती है, और टूल इस साल और अगले साल दोनों की तारीखें एक साथ दिखाता है ताकि आप पहले से योजना बना सकें।

विवाह मुहूर्त: मान्यता और तथ्य

  • मान्यता: हर पंचांग में बिल्कुल एक जैसी तारीखें होंगी। तथ्य: पंचांगकार कुछ नियमों में अलग मत रखते हैं, इसलिए एक-दो तारीखों का अंतर आम है। यह किसी की गलती नहीं, परंपराओं का भेद है।
  • मान्यता: मुहूर्त अच्छा हो तो वैवाहिक जीवन की हर समस्या टल जाएगी। तथ्य: मुहूर्त एक शुभ शुरुआत का प्रतीक है। सुखी जीवन आपसी समझ, सम्मान और धैर्य से बनता है — कोई मुहूर्त इसकी गारंटी नहीं देता।
  • मान्यता: मुहूर्त का दिन ही काफ़ी है, समय से फ़र्क़ नहीं पड़ता। तथ्य: परंपरा में फेरों या कन्यादान का समय अलग से देखा जाता है। टूल का समय-खंड बताता है कि उस दिन किन घंटों में मुहूर्त है; सटीक लग्न पुरोहित तय करते हैं।
  • मान्यता: मांगलिक होने पर विवाह में बाधा तय है। तथ्य: शास्त्रों में इसके कई परिहार बताए गए हैं और ज्योतिषियों में भी इस पर अलग-अलग मत हैं। डरकर निर्णय न लें।

अगर आप किसी खास दिन का पूरा पंचांग देखना चाहते हैं, तो आज का पंचांग देखें। नए घर की तैयारी हो तो गृह प्रवेश मुहूर्त भी उपयोगी रहेगा।

Vivah Muhurat — in English

This vivah muhurat tool (also searched as shadi ka shubh muhurat or marriage muhurat) lists auspicious wedding dates from today to the end of next year for about 215 cities in India and abroad, grouped by month, with the weekday, nakshatra, tithi and the auspicious time window on each day. Dates follow the standard rules: 11 nakshatras (Rohini, Mrigashira, Magha, Uttara Phalguni, Hasta, Swati, Anuradha, Mula, Uttara Ashadha, Uttara Bhadrapada, Revati), tithis 2, 3, 5, 7, 10, 11 and 13 of either paksha on any weekday, and the Sun in Aries, Taurus, Gemini, Scorpio, Capricorn or Aquarius. Kharmas, Chaturmas, Guru or Shukra asta, Adhik maas, Holashtak and Bhadra are excluded, and the tool explains each gap. Panchang makers may also check lagna shuddhi or the couple’s charts, so confirm the final muhurat with your family priest.

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

विवाह मुहूर्त कैसे देखें?

ऊपर के टूल में वह शहर चुनें जहाँ विवाह होना है। टूल आज से अगले साल के अंत तक की सभी शुभ तिथियाँ महीने के अनुसार वार, नक्षत्र, तिथि और शुभ समय के साथ दिखा देगा।

shadi ka shubh muhurat kab hai?

शादी की शुभ तारीखें हर साल अलग होती हैं और शहर के सूर्योदय के अनुसार समय भी बदलता है। टूल में अपना शहर चुनकर इस साल और अगले साल की पूरी सूची देखें।

विवाह के लिए कौन से नक्षत्र शुभ हैं?

परंपरागत रूप से 11 नक्षत्र शुभ माने जाते हैं — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती।

शादी के लिए कौन सी तिथि शुभ होती है?

द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी — शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की। रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या नहीं ली जातीं।

खरमास में शादी क्यों नहीं होती?

जब सूर्य धनु या मीन राशि में होता है, उसे खरमास कहते हैं और परंपरा में इस समय मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं। यह लगभग मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी और मध्य मार्च से मध्य अप्रैल तक रहता है।

चातुर्मास में विवाह क्यों वर्जित है?

देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक के चार महीनों में भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने की मान्यता है। इसलिए इस समय विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

गुरु अस्त या शुक्र अस्त का विवाह पर क्या असर है?

जब गुरु या शुक्र सूर्य के बहुत पास होकर दिखाई नहीं देते, उसे तारा अस्त या तारा डूबना कहते हैं। ये दोनों विवाह के कारक ग्रह माने जाते हैं, इसलिए इन दिनों विवाह मुहूर्त नहीं होता।

शादियों का सीज़न कब शुरू होता है?

उत्तर भारत में परंपरागत रूप से देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह के बाद शादियों का मौसम शुरू होता है। पर सूर्य के वृश्चिक राशि में आने (लगभग मध्य नवंबर) तक मुहूर्त कम ही मिलते हैं।

क्या टूल की तारीखें पंचांग से अलग हो सकती हैं?

हाँ, एक-दो तारीखों का अंतर संभव है। कुछ पंचांगकार लग्न शुद्धि, वर-वधू की कुंडली, गोधूलि बेला या क्षेत्रीय नियम भी देखते हैं, इसलिए अंतिम मुहूर्त पुरोहित से पक्का करें।

मुहूर्त के साथ दिया गया समय क्या है?

यह उस दिन का वह समय-खंड है जिसमें शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र और बाकी शर्तें एक साथ हों और भद्रा न हो। फेरों का सटीक लग्न इसी खंड के भीतर पुरोहित तय करते हैं।

रात 2 बजे का मुहूर्त किस तारीख का माना जाएगा?

पंचांग में दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक माना जाता है। इसलिए रात 2 बजे का समय पिछली तारीख और उसी के वार का हिस्सा होता है।

vivah muhurat ke liye kaun sa shahar chune?

वह शहर चुनें जहाँ विवाह और फेरे होंगे, क्योंकि शुभ समय वहीं के सूर्योदय पर निर्भर करता है। विदेश में शादी हो तो वहीं का शहर चुनें।

क्या मुहूर्त से पहले कुंडली मिलान ज़रूरी है?

यह परिवार की परंपरा पर निर्भर है। कई परिवार अष्टकूट मिलान से 36 में से गुण देखते हैं; सामान्यतः 18 या अधिक गुण स्वीकार्य माने जाते हैं, पर ज्योतिषी पूरी कुंडली भी देखते हैं।

मांगलिक हो तो शादी का मुहूर्त कैसे निकालें?

मुहूर्त निकालने का तरीका वही रहता है। मांगलिक दोष के कई परिहार माने गए हैं, इसलिए डरने के बजाय किसी अनुभवी ज्योतिषी से शांत मन से सलाह लें।

होलाष्टक में शादी हो सकती है क्या?

परंपरा में होलिका दहन से पहले के आठ दिनों को होलाष्टक माना जाता है और इनमें शुभ कार्य टाले जाते हैं। इसलिए टूल इन दिनों कोई विवाह मुहूर्त नहीं दिखाता।