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श्री बद्रीनाथ जी की आरती (Shri Badrinath Aarti) — पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदिर शोभितम्, लिरिक्स हिंदी और English में, अर्थ और इतिहास

अंतिम अपडेट: 6 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Badrinath Aarti – पवन मंद सुगंध शीतल बद्रीनाथ जी की आरती

Badrinath Aarti (बद्रीनाथ जी की आरती) “पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदिर शोभितम्” उत्तराखंड के चार धामों में से एक, बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री विशाल (विष्णु) की आरती है। बद्रीनाथ मंदिर में रात को शयन आरती में यही आरती गाई जाती है। इसमें अलकनंदा के किनारे स्वर्णिम मंदिर, शीतल सुगंधित हवा और देवताओं द्वारा की जाने वाली स्तुति का सुंदर वर्णन है। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, हर पद का अर्थ और इतिहास दिया गया है।

Badrinath Aarti – पवन मंद सुगंध शीतल बद्रीनाथ जी की आरती

Badrinath Aarti Lyrics in Hindi — पवन मंद सुगंध शीतल

पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदिर शोभितम्।
निकट गंगा बहत निर्मल, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

शेष सुमिरन करत निशदिन, धरत ध्यान महेश्वरम्।
वेद ब्रह्मा करत स्तुति, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

शक्ति गौरी गणेश शारद, नारद मुनि उच्चारणम्।
जोग ध्यान अपार लीला, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर, धूप दीप प्रकाशितम्।
सिद्ध मुनिजन करत जय जय, बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

यक्ष किन्नर करत कौतुक, ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम्।
श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

कैलाश में एक देव निरंजन, शैल शिखर महेश्वरम्।
राजयुधिष्ठिर करत स्तुति, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

श्री बद्रीजी के पंच रत्न, पढ़त पाप विनाशनम्।
कोटि तीर्थ भवेत पुण्य, प्राप्यते फलदायकम्॥
॥ पवन मंद सुगंध शीतल…॥

पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदिर शोभितम्।
निकट गंगा बहत निर्मल, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥

Badrinath Aarti Lyrics in English

Pavan Mand Sugandh Sheetal, Hem Mandir Shobhitam,
Nikat Ganga Bahat Nirmal, Shri Badrinath Vishvambharam.

Shesh Sumiran Karat Nishdin, Dharat Dhyan Maheshvaram,
Ved Brahma Karat Stuti, Shri Badrinath Vishvambharam.
॥ Pavan Mand Sugandh Sheetal… ॥

Shakti Gauri Ganesh Sharad, Narad Muni Uchcharanam,
Jog Dhyan Apar Leela, Shri Badrinath Vishvambharam.
॥ Pavan Mand Sugandh Sheetal… ॥

Indra Chandra Kuber Dhuni Kar, Dhoop Deep Prakashitam,
Siddh Munijan Karat Jai Jai, Badrinath Vishvambharam.
॥ Pavan Mand Sugandh Sheetal… ॥

Yaksh Kinnar Karat Kautuk, Gyan Gandharv Prakashitam,
Shri Lakshmi Kamala Chanvar Dol, Shri Badrinath Vishvambharam.
॥ Pavan Mand Sugandh Sheetal… ॥

Kailash Mein Ek Dev Niranjan, Shail Shikhar Maheshvaram,
Raj Yudhishthir Karat Stuti, Shri Badrinath Vishvambharam.
॥ Pavan Mand Sugandh Sheetal… ॥

Shri Badriji Ke Panch Ratna, Padhat Paap Vinashanam,
Koti Tirth Bhavet Punya, Prapyate Phaldayakam.
॥ Pavan Mand Sugandh Sheetal… ॥

Pavan Mand Sugandh Sheetal, Hem Mandir Shobhitam,
Nikat Ganga Bahat Nirmal, Shri Badrinath Vishvambharam.

Badrinath Aarti का अर्थ

  1. पहला पद: धीमी, सुगंधित और शीतल हवा बह रही है, स्वर्ण जैसा मंदिर शोभा दे रहा है, पास में निर्मल गंगा (अलकनंदा) बह रही है — ऐसे विश्व का भरण-पोषण करने वाले श्री बद्रीनाथ की जय।
  2. दूसरा पद: शेषनाग दिन-रात उनका स्मरण करते हैं, महेश्वर शिव उनका ध्यान धरते हैं, और वेद व ब्रह्मा उनकी स्तुति करते हैं।
  3. तीसरा पद: शक्ति, गौरी, गणेश, सरस्वती और नारद मुनि उनका नाम उच्चारते हैं; उनकी योग, ध्यान और लीला अपार है।
  4. चौथा पद: इंद्र, चंद्र और कुबेर धूनी रमाते हैं, धूप-दीप जलते हैं, और सिद्ध-मुनि जय-जयकार करते हैं।
  5. पाँचवाँ पद: यक्ष-किन्नर आनंद मनाते हैं, गंधर्व ज्ञान का गान करते हैं, और कमला लक्ष्मी जी चँवर डुलाती हैं।
  6. छठा पद: कैलाश पर्वत के शिखर पर निरंजन महेश्वर विराजते हैं, और राजा युधिष्ठिर श्री बद्रीनाथ की स्तुति करते हैं।
  7. फलश्रुति: श्री बद्री जी के इन पाँच रत्न (पदों) को पढ़ने से पाप नष्ट होते हैं और करोड़ों तीर्थों का पुण्य और फल मिलता है।

Badrinath Aarti का इतिहास

इस आरती की रचना को लेकर दो मत हैं। एक मान्यता के अनुसार 19वीं सदी में नंदप्रयाग के बदरुद्दीन (फ़खरुद्दीन) नाम के भक्त ने यह आरती लिखी, जिसे बद्रीनाथ मंदिर ने अपनाया। दूसरे मत के अनुसार रुद्रप्रयाग के धन सिंह बर्त्वाल ने इसे लिखा — उनके परिवार के पास 1881 की हस्तलिखित पांडुलिपि होने का दावा है। दोनों ही मतों से यह साफ़ है कि यह आरती 150 साल से भी पुरानी है और आज भी बद्रीनाथ धाम में शयन आरती के समय गाई जाती है।

Badrinath Aarti की विधि

  1. बद्रीनाथ धाम में रात की शयन आरती में यह आरती गाई जाती है; घर पर शाम को भगवान विष्णु की पूजा के बाद गाएँ।
  2. भगवान विष्णु या बद्री विशाल के चित्र पर तुलसी, पीले फूल और चंदन चढ़ाएँ।
  3. घी का दीपक जलाकर यह आरती और फिर ओम जय जगदीश हरे गाएँ।
  4. मिश्री, चने की दाल या मेवे का भोग लगाएँ — बद्रीनाथ में वनतुलसी और मिश्री का प्रसाद मिलता है।

Badrinath Aarti के 7 नियम

  • आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
  • पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
  • आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
  • आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
  • उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।

बद्रीनाथ जी की आरती के लाभ

  • मान्यता है कि पाप नष्ट होते हैं और करोड़ों तीर्थों का पुण्य मिलता है — जैसा फलश्रुति में कहा गया है।
  • मन को शांति और बद्रीनाथ धाम की यात्रा का भाव मिलता है।
  • भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है।
  • चार धाम यात्रा से पहले और बाद में गाने से यात्रा पूर्ण मानी जाती है।

भगवान विष्णु की ओम जय जगदीश हरे आरती भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

बद्रीनाथ जी की आरती कब गाई जाती है?

बद्रीनाथ मंदिर में रात की शयन आरती के समय। घर पर शाम की विष्णु पूजा में और चार धाम यात्रा के दौरान।

पवन मंद सुगंध शीतल आरती किसने लिखी?

दो मत हैं — नंदप्रयाग के बदरुद्दीन (फ़खरुद्दीन) या रुद्रप्रयाग के धन सिंह बर्त्वाल। बर्त्वाल परिवार 1881 की पांडुलिपि का दावा करता है।

“विश्वम्भरम्” का क्या अर्थ है?

विश्व का भरण-पोषण करने वाले — भगवान विष्णु का एक नाम।

बद्रीनाथ धाम के कपाट कब खुलते हैं?

हर साल अप्रैल-मई में (बसंत पंचमी पर तारीख तय होती है) और कपाट नवंबर में भाई दूज के आस-पास बंद होते हैं। सर्दियों में पूजा जोशीमठ में होती है।

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