Sheetla Mata Ki Aarti (शीतला माता की आरती) “जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता” आरोग्य और शीतलता की देवी माँ शीतला की आरती है। होली के बाद चैत्र कृष्ण सप्तमी या अष्टमी को शीतला अष्टमी (बसौड़ा) मनाई जाती है, जिसमें एक दिन पहले बना ठंडा (बासी) भोजन माँ को चढ़ाया और खाया जाता है। मान्यता है कि माँ शीतला चेचक, खसरा और गर्मी से होने वाले रोगों से रक्षा करती हैं। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, हर पद का अर्थ और पूजा विधि दी गई है।

इस लेख में
Sheetla Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi — जय शीतला माता
जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता।
आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता।
ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें, जगमग छवि छाता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता।
वेद पुराण वरणत, पार नहीं पाता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
इन्द्र मृदङ्ग बजावत, चन्द्र वीणा हाथा।
सूरज ताल बजावै, नारद मुनि गाता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
घण्टा शङ्ख शहनाई, बाजै मन भाता।
करै भक्तजन आरती, लखि लखि हर्षाता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
ब्रह्म रूप वरदानी, तुही तीन काल ज्ञाता।
भक्तन को सुख देती, मातु पिता भ्राता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
जो जन ध्यान लगावे, प्रेम शक्ति पाता।
सकल मनोरथ पावे, भवनिधि तर जाता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
रोगों से जो पीड़ित कोई, शरण तेरी आता।
कोढ़ी पावे निर्मल काया, अन्ध नेत्र पाता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
बांझ पुत्र को पावे, दारिद्र कट जाता।
ताको भजै जो नाहीं, सिर धुनि पछताता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
शीतल करती जननी, तू ही है जग त्राता।
उत्पत्ति व्याधि बिनाशन, तू सब की घाता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
दास विचित्र कर जोड़े, सुन मेरी माता।
भक्ति आपनी दीजै, और न कुछ भाता॥
॥ ॐ जय शीतला माता…॥
Sheetla Mata Ki Aarti Lyrics in English
Jai Sheetla Mata, Maiya Jai Sheetla Mata,
Aadi Jyoti Maharani, Sab Phal Ki Data.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Ratan Singhasan Shobhit, Shvet Chhatra Bhata,
Riddhi-Siddhi Chanvar Dhulaven, Jagmag Chhavi Chhata.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Vishnu Sevat Thadhe, Seven Shiv Dhata,
Ved Puran Varnat, Paar Nahin Pata.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Indra Mridang Bajavat, Chandra Veena Hatha,
Suraj Taal Bajavai, Narad Muni Gata.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Ghanta Shankh Shehnai, Bajai Man Bhata,
Karai Bhaktajan Aarti, Lakhi Lakhi Harshata.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Brahm Roop Vardani, Tuhi Teen Kaal Gyata,
Bhaktan Ko Sukh Deti, Matu Pita Bhrata.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Jo Jan Dhyan Lagave, Prem Shakti Pata,
Sakal Manorath Pave, Bhavnidhi Tar Jata.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Rogon Se Jo Peedit Koi, Sharan Teri Aata,
Kodhi Pave Nirmal Kaya, Andh Netra Pata.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Baanjh Putra Ko Pave, Daridra Kat Jata,
Tako Bhajai Jo Nahin, Sir Dhuni Pachhtata.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Sheetal Karti Janani, Tu Hi Hai Jag Trata,
Utpatti Vyadhi Binashan, Tu Sab Ki Ghata.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Das Vichitra Kar Jode, Sun Meri Mata,
Bhakti Aapni Deejai, Aur Na Kuchh Bhata.
॥ Om Jai Sheetla Mata… ॥
Sheetla Mata Ki Aarti का अर्थ
- टेक: हे माँ शीतला, आपकी जय हो — आप आदि ज्योति, महारानी और सब फल देने वाली हैं।
- दरबार: रत्नों के सिंहासन पर शोभित माँ के ऊपर सफ़ेद छत्र सुंदर लगता है; ऋद्धि-सिद्धि चँवर डुलाती हैं और माँ की छवि जगमगाती है।
- देवता सेवा में: विष्णु खड़े होकर सेवा करते हैं, शिव और ब्रह्मा भी सेवा करते हैं; वेद-पुराण वर्णन करते हैं पर पार नहीं पाते।
- संगीत: इंद्र मृदंग बजाते हैं, चंद्रमा के हाथ में वीणा है, सूर्य ताल देते हैं और नारद मुनि गाते हैं।
- आरती: घंटा, शंख और शहनाई मन को भाती है; भक्त आरती करते हैं और माँ के दर्शन कर-करके हर्षित होते हैं।
- महिमा: आप ब्रह्म रूप, वर देने वाली और तीनों कालों को जानने वाली हैं; भक्तों के लिए आप ही माता, पिता और भाई हैं।
- ध्यान का फल: जो आपका ध्यान करता है, उसे प्रेम और शक्ति मिलती है; उसकी सब इच्छाएँ पूरी होती हैं और वह संसार-सागर पार कर जाता है।
- आरोग्य: रोगों से पीड़ित जो आपकी शरण आता है, कोढ़ी को निर्मल शरीर और अंधे को आँखें मिलती हैं; निःसंतान को संतान मिलती है और दरिद्रता कट जाती है; जो आपको नहीं भजता, वह सिर पीटकर पछताता है।
- फलश्रुति: हे शीतलता देने वाली माँ, आप ही जग की रक्षक हैं और रोगों का नाश करने वाली हैं। दास विचित्र हाथ जोड़कर कहता है — माँ, मुझे अपनी भक्ति दीजिए, और कुछ नहीं चाहिए।
शीतला अष्टमी (बसौड़ा) की परंपरा
शीतला सप्तमी की शाम को मीठे चावल, पूड़ी, पुए, दही, राबड़ी और गुलगुले बनाए जाते हैं। अगले दिन सुबह — शीतला अष्टमी को — यही ठंडा भोजन माँ को चढ़ाया जाता है और पूरा परिवार यही खाता है; उस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता। यह परंपरा मौसम बदलने के समय (सर्दी से गर्मी) शरीर को ठंडक देने और स्वच्छता का संदेश देती है। माँ शीतला के हाथ में झाड़ू, कलश, सूप और नीम के पत्ते होते हैं और उनका वाहन गधा है।
Sheetla Mata Ki Aarti की विधि
- सप्तमी की शाम भोग का भोजन बना लें; अष्टमी की सुबह स्नान करके ठंडे पानी से पूजा करें।
- माँ शीतला के मंदिर या घर में उनके चित्र पर जल, रोली, हल्दी, अक्षत, नीम के पत्ते और ठंडा भोग चढ़ाएँ।
- शीतला माता की कथा सुनें, फिर बिना जलाए या घी के दीपक से यह आरती गाएँ (कई घरों में उस दिन दीपक भी नहीं जलाया जाता)।
- पूजा का जल घर के कोनों में छिड़कें और परिवार के साथ ठंडा भोग ग्रहण करें।
Sheetla Mata Ki Aarti के 7 नियम
- आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
- पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
- आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
- आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
- आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
- आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
- उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।
शीतला माता की आरती के लाभ
- मान्यता है कि चेचक, खसरा, त्वचा और गर्मी के रोगों से रक्षा होती है।
- बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है — माताएँ बच्चों के लिए यह व्रत रखती हैं।
- घर में स्वच्छता और आरोग्य का वातावरण बनता है।
- संतान सुख और दरिद्रता दूर होने की मान्यता है, जैसा आरती में कहा गया है।
जय अम्बे गौरी, दुर्गा चालीसा और व्रत कैलेंडर भी देखें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
शीतला माता की आरती कब करनी चाहिए?
शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी (बसौड़ा) पर, जो होली के बाद चैत्र कृष्ण पक्ष में आती है; और हर महीने की कृष्ण अष्टमी व चैत्र नवरात्रि में भी।
बसौड़ा में बासी भोजन क्यों खाते हैं?
माँ शीतला को ठंडक प्रिय है, इसलिए एक दिन पहले बना ठंडा भोजन चढ़ाया और खाया जाता है। यह मौसम बदलने के समय शरीर को ठंडा रखने की परंपरा भी है।
शीतला माता का वाहन क्या है?
गधा। माँ के हाथों में झाड़ू, कलश, सूप और नीम के पत्ते होते हैं — ये सब स्वच्छता और आरोग्य के प्रतीक हैं।
“दास विचित्र” कौन हैं?
आरती के अंतिम पद में “दास विचित्र कर जोड़े” आता है; उन्हें इस आरती का रचयिता माना जाता है।