🪔 गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026 — इसी दिन विश्वकर्मा पूजा: पूजा विधि →
Vishwakarma Ji Ki Aarti (विश्वकर्मा जी की आरती) “ॐ जय श्री विश्वकर्मा” सृष्टि के पहले शिल्पी और देवताओं के वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की आरती है। विश्वकर्मा पूजा हर साल 17 सितंबर (कन्या संक्रांति) को होती है, और उत्तर भारत के कई हिस्सों — खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली — में दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा के साथ भी औज़ारों, मशीनों, वाहनों और दुकानों की पूजा होती है। पूजा के अंत में यही आरती गाई जाती है। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, अर्थ और विधि दी गई है।

इस लेख में
Vishwakarma Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi — ॐ जय श्री विश्वकर्मा
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक श्रुति धर्मा॥
॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा…॥
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया॥
॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा…॥
ऋषि अंगिरा तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥
॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा…॥
रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर, दूर दुःख कीना॥
॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा…॥
जब रथकार दंपति, तुम्हरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत हरी सगरी॥
॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा…॥
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप साजे॥
॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा…॥
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे॥
॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा…॥
श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानंद स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
॥ ॐ जय श्री विश्वकर्मा…॥
Vishwakarma Ji Ki Aarti Lyrics in English
Om Jai Shri Vishwakarma, Prabhu Jai Shri Vishwakarma,
Sakal Srishti Ke Karta, Rakshak Shruti Dharma.
॥ Om Jai Shri Vishwakarma… ॥
Aadi Srishti Mein Vidhi Ko, Shruti Updesh Diya,
Jeev Matra Ka Jag Mein, Gyan Vikas Kiya.
॥ Om Jai Shri Vishwakarma… ॥
Rishi Angira Tap Se, Shanti Nahin Payi,
Dhyan Kiya Jab Prabhu Ka, Sakal Siddhi Aayi.
॥ Om Jai Shri Vishwakarma… ॥
Rog Grast Raja Ne, Jab Aashray Leena,
Sankat Mochan Bankar, Door Dukh Keena.
॥ Om Jai Shri Vishwakarma… ॥
Jab Rathkar Dampati, Tumhri Ter Kari,
Sunkar Deen Prarthana, Vipat Hari Sagri.
॥ Om Jai Shri Vishwakarma… ॥
Ekanan Chaturanan, Panchanan Raje,
Dvibhuj Chaturbhuj Dashbhuj, Sakal Roop Saje.
॥ Om Jai Shri Vishwakarma… ॥
Dhyan Dhare Jab Pad Ka, Sakal Siddhi Aave,
Man Duvidha Mit Jave, Atal Shakti Pave.
॥ Om Jai Shri Vishwakarma… ॥
Shri Vishwakarma Ji Ki Aarti, Jo Koi Nar Gave,
Kahat Gajanand Swami, Sukh Sampatti Pave.
॥ Om Jai Shri Vishwakarma… ॥
Vishwakarma Ji Ki Aarti का अर्थ
- टेक: हे प्रभु विश्वकर्मा, आपकी जय हो — आप पूरी सृष्टि के निर्माता और वेद-धर्म के रक्षक हैं।
- सृष्टि का आरंभ: सृष्टि के आरंभ में आपने ब्रह्मा को वेद का उपदेश दिया और संसार के सब जीवों में ज्ञान का विकास किया।
- अंगिरा ऋषि: अंगिरा ऋषि को तप से भी शांति नहीं मिली, पर जब उन्होंने आपका ध्यान किया तो सब सिद्धियाँ मिल गईं।
- रोगी राजा: रोग से पीड़ित राजा ने जब आपकी शरण ली, तो आपने संकट मोचन बनकर उसका दुख दूर किया।
- रथकार दंपति: जब रथ बनाने वाले पति-पत्नी ने आपको पुकारा, तो उनकी दीन प्रार्थना सुनकर आपने उनकी सारी विपत्ति हर ली।
- रूप: आप एक मुख, चार मुख और पाँच मुख वाले रूपों में शोभित हैं; दो, चार और दस भुजाओं वाले सब रूप आपको सजते हैं।
- ध्यान का फल: जो आपके चरणों का ध्यान करता है, उसे सब सिद्धियाँ मिलती हैं, मन की दुविधा मिटती है और अटल शक्ति मिलती है।
- फलश्रुति: जो कोई विश्वकर्मा जी की यह आरती गाता है — गजानंद स्वामी कहते हैं — उसे सुख और संपत्ति मिलती है।
भगवान विश्वकर्मा ने क्या बनाया
पुराणों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा ने स्वर्गलोक, भगवान कृष्ण की द्वारका, पांडवों का इंद्रप्रस्थ, सोने की लंका, भगवान शिव का त्रिशूल, विष्णु का सुदर्शन चक्र और पुष्पक विमान बनाया। इसीलिए कारीगर, इंजीनियर, बढ़ई, लोहार, मिस्त्री, फैक्ट्री और वर्कशॉप के लोग उन्हें अपना आराध्य मानते हैं।
Vishwakarma Ji Ki Aarti की विधि
- पूजा के दिन औज़ारों, मशीनों, वाहनों और दुकान को साफ़ करें और उन पर हल्दी-रोली का तिलक लगाएँ।
- चौकी पर विश्वकर्मा जी का चित्र रखें; फूल, अक्षत, फल, मिठाई और पंचमेवा चढ़ाएँ।
- “ॐ आधार शक्तपे नमः, ॐ कूर्मयै नमः, ॐ अनंतम नमः, ॐ पृथिव्यै नमः” मंत्र बोलें और हवन करें।
- अंत में यह आरती गाएँ; उस दिन औज़ारों और मशीनों से काम न करने की परंपरा है।
- दीपावली के अगले दिन की पूजा के लिए गोवर्धन पूजा विधि भी देखें।
Vishwakarma Ji Ki Aarti के 7 नियम
- आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
- पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
- आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
- आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
- आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
- आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
- उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।
विश्वकर्मा जी की आरती के लाभ
- मान्यता है कि व्यापार, कारखाने और काम में तरक्की होती है।
- मशीनें और वाहन सुरक्षित रहते हैं, दुर्घटनाओं से रक्षा होती है।
- कारीगरी और तकनीकी कौशल में निखार आता है।
- घर-दुकान में सुख-संपत्ति बनी रहती है।
गोवर्धन पूजा विधि, जय गणेश देवा और ओम जय जगदीश हरे भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
विश्वकर्मा पूजा कब होती है?
हर साल 17 सितंबर (कन्या संक्रांति) को। उत्तर भारत के कई हिस्सों में दीपावली के अगले दिन, गोवर्धन पूजा के दिन भी विश्वकर्मा पूजा होती है — 2026 में यह 10 नवंबर को है।
विश्वकर्मा पूजा पर क्या नहीं करना चाहिए?
परंपरा के अनुसार उस दिन औज़ारों, मशीनों और वाहनों से काम नहीं किया जाता और उन्हें बेचा या उधार नहीं दिया जाता। पूजा के बाद अगले दिन से काम शुरू करें।
“रक्षक श्रुति धर्मा” का क्या अर्थ है?
श्रुति यानी वेद — विश्वकर्मा जी वेद-धर्म के रक्षक हैं। कुछ जगह “स्तुति धर्मा” छपा मिलता है, पर सही पाठ “श्रुति धर्मा” है।
विश्वकर्मा जी ने क्या-क्या बनाया?
स्वर्गलोक, द्वारका, इंद्रप्रस्थ, सोने की लंका, शिव का त्रिशूल, सुदर्शन चक्र और पुष्पक विमान।