Om Jai Gangadhar Aarti (ॐ जय गंगाधर आरती) भगवान शिव की संस्कृत आरती है, जिसकी टेक “ॐ हर हर हर महादेव” है। इसमें कैलास पर्वत के कल्पवृक्ष वन में मणियों से बने मंडप, शिव-पार्वती की क्रीड़ा, देवताओं, अप्सराओं और किन्नरों के नृत्य-गान और शिव के तांडव का बहुत सुंदर वर्णन है। उत्तर भारत में ॐ जय शिव ओंकारा अधिक गाई जाती है, जबकि यह आरती शिव मंदिरों, सावन और महाशिवरात्रि की पूजा में गाई जाती है। नीचे संपूर्ण आरती, English transliteration और हर पद का अर्थ दिया गया है।

इस लेख में
Om Jai Gangadhar Aarti Lyrics in Sanskrit (Hindi Devanagari) — ॐ जय गंगाधर
ॐ जय गंगाधर जय हर, जय गिरिजाधीशा।
त्वं मां पालय नित्यं, कृपया जगदीशा॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
कैलासे गिरिशिखरे, कल्पद्रुमविपिने।
गुंजति मधुकरपुंजे, कुंजवने गहने॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
कोकिलकूजित खेलत, हंसावन ललिता।
रचयति कलाकलापं, नृत्यति मुदसहिता॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
तस्मिंल्ललितसुदेशे, शाला मणिरचिता।
तन्मध्ये हरनिकटे, गौरी मुदसहिता॥
क्रीडा रचयति, भूषारंचित निजमीशम्।
इंद्रादिक सुर सेवत, नामयते शीशम्॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
बिबुधबधू बहु नृत्यत, हृदये मुदसहिता।
किन्नर गायन कुरुते, सप्त स्वर सहिता॥
धिनकत थै थै धिनकत, मृदंग वादयते।
क्वण क्वण ललिता वेणुं, मधुरं नाटयते॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
रुण रुण चरणे रचयति, नूपुरमुज्ज्वलिता।
चक्रावर्ते भ्रमयति, कुरुते तां धिक तां॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
तां तां लुप चुप, तां तां डमरू वादयते।
अंगुष्ठांगुलिनादं, लासकतां कुरुते॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
कर्पूरद्युतिगौरं, पञ्चाननसहितम्।
त्रिनयनशशिधरमौलिं, विषधरकण्ठयुतम्॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
सुन्दरजटाकलापं, पावकयुतभालम्।
डमरुत्रिशूलपिनाकं, करधृतनृकपालम्॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
मुण्डै रचयति माला, पन्नगमुपवीतम्।
वामविभागे गिरिजा, रूपं अतिललितम्॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
सुन्दरसकलशरीरे, कृतभस्माभरणम्।
इति वृषभध्वजरूपं, तापत्रयहरणम्॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
शंखनिनादं कृत्वा, झल्लरि नादयते।
नीराजयते ब्रह्मा, वेदऋचां पठते॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
अतिमृदुचरणसरोजं, हृत्कमले धृत्वा।
अवलोकयति महेशं, ईशं अभिनत्वा॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
ध्यानं आरति समये, हृदये अति कृत्वा।
रामस्त्रिजटानाथं, ईशं अभिनत्वा॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
संगतिमेवं प्रतिदिन, पठनं यः कुरुते।
शिवसायुज्यं गच्छति, भक्त्या यः श्रृणुते॥
॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥
Om Jai Gangadhar Aarti Lyrics in English
Om Jai Gangadhar Jai Har, Jai Girijadhisha,
Tvam Mam Palay Nityam, Kripaya Jagadisha.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Kailase Girishikhare, Kalpadrum Vipine,
Gunjati Madhukar Punje, Kunjavane Gahane.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Kokil Koojit Khelat, Hansavan Lalita,
Rachayati Kalakalapam, Nrityati Mud Sahita.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Tasmin Lalit Sudeshe, Shala Mani Rachita,
Tanmadhye Har Nikate, Gauri Mud Sahita.
Kreeda Rachayati, Bhusharanjit Nijamisham,
Indradik Sur Sevat, Namayate Shisham.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Vibudh Vadhu Bahu Nrityat, Hridaye Mud Sahita,
Kinnar Gayan Kurute, Sapt Swar Sahita.
Dhinakat Thai Thai Dhinakat, Mridang Vadayate,
Kvan Kvan Lalita Venum, Madhuram Natayate.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Run Run Charane Rachayati, Nupur Mujjvalita,
Chakravarte Bhramayati, Kurute Tam Dhik Tam.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Tam Tam Lup Chup, Tam Tam Damru Vadayate,
Angushthanguli Nadam, Lasakatam Kurute.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Karpur Dyuti Gauram, Panchanan Sahitam,
Trinayan Shashidhar Maulim, Vishadhar Kanth Yutam.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Sundar Jata Kalapam, Pavak Yut Bhalam,
Damru Trishul Pinakam, Kardhrit Nrikapalam.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Mundai Rachayati Mala, Pannagam Upavitam,
Vam Vibhage Girija, Rupam Ati Lalitam.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Sundar Sakal Sharire, Krit Bhasmabharanam,
Iti Vrishabhadhvaj Rupam, Tapatray Haranam.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Shankh Ninadam Kritva, Jhallari Nadayate,
Nirajayate Brahma, Ved Richam Pathate.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Ati Mridu Charan Sarojam, Hrit Kamale Dhritva,
Avalokayati Mahesham, Isham Abhinatva.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Dhyanam Aarti Samaye, Hridaye Ati Kritva,
Ramastrijatanatham, Isham Abhinatva.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Sangatimevam Pratidin, Pathanam Yah Kurute,
Shiv Sayujyam Gachchhati, Bhaktya Yah Shrinute.
॥ Om Har Har Har Mahadev ॥
Om Jai Gangadhar Aarti का अर्थ
- टेक: हे गंगा को धारण करने वाले, हे हर, हे गिरिजा (पार्वती) के स्वामी, आपकी जय हो। हे जगदीश, कृपा करके मेरा नित्य पालन कीजिए।
- कैलास का वन: कैलास पर्वत के शिखर पर कल्पवृक्षों का वन है, जिसके घने कुंजों में भौंरों के झुंड गुंजार करते हैं।
- पक्षी: वहाँ कोयल कूकती है, सुंदर हंस खेलते हैं, और मोर आनंद से पंख फैलाकर नाचते हैं।
- मणि मंडप: उस सुंदर स्थान पर मणियों से बना मंडप है; उसके बीच शिव के पास आनंदित गौरी क्रीड़ा करती हैं और आभूषणों से सजे अपने स्वामी को रिझाती हैं; इंद्र आदि देवता सेवा में सिर झुकाते हैं।
- नृत्य-गान: देवांगनाएँ आनंद से नाचती हैं, किन्नर सातों स्वरों में गाते हैं; “धिनकत थै थै” की ताल पर मृदंग बजता है और बाँसुरी मधुर स्वर छेड़ती है।
- शिव का नृत्य: चरणों में चमकते नूपुर रुनझुन करते हैं; शिव चक्र की तरह घूमते हुए “तां धिक तां” की ताल पर नाचते हैं, डमरू बजाते हैं और अँगूठे-उँगलियों से ताल देते हुए लास्य करते हैं।
- शिव का रूप: कपूर जैसे गौर, पाँच मुख वाले, तीन नेत्र, मस्तक पर चंद्रमा, गले में सर्प; सुंदर जटाएँ, माथे पर अग्नि, हाथों में डमरू, त्रिशूल, पिनाक धनुष और कपाल; मुंडों की माला, सर्प का जनेऊ, बाईं ओर अति सुंदर गिरिजा; पूरे शरीर पर भस्म — ऐसा वृषभध्वज रूप तीनों तापों को हरता है।
- ब्रह्मा की आरती: शंख और झालर बजाकर ब्रह्मा जी वेद की ऋचाएँ पढ़ते हुए शिव की आरती उतारते हैं।
- फलश्रुति: शिव के कोमल चरण-कमल को हृदय में रखकर, आरती के समय ध्यान करके जो प्रतिदिन यह पाठ करता है या भक्ति से सुनता है, वह शिव-सायुज्य (शिव में लीनता) पाता है।
Om Jai Gangadhar Aarti की विधि
- शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अर्पित करें।
- “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करें।
- घी या कपूर का दीपक जलाकर शंख और घंटी के साथ यह आरती गाएँ — टेक “ॐ हर हर हर महादेव” सब मिलकर बोलें।
- सोमवार, प्रदोष, सावन और महाशिवरात्रि पर इसे ॐ जय शिव ओंकारा के साथ गाएँ।
Om Jai Gangadhar Aarti के 7 नियम
- आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
- पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
- आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
- आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
- आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
- आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
- उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।
ॐ जय गंगाधर आरती के लाभ
- मान्यता है कि तीनों ताप — दैहिक, दैविक और भौतिक — शांत होते हैं।
- मन को गहरी शांति और एकाग्रता मिलती है।
- संस्कृत उच्चारण का अभ्यास होता है।
- फलश्रुति के अनुसार नित्य पाठ से शिव-सायुज्य मिलता है।
ॐ जय शिव ओंकारा और शिव तांडव स्तोत्र भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
ॐ जय गंगाधर आरती किस भाषा में है?
यह संस्कृत में है, कुछ शब्द हिंदी के भी हैं। इसकी टेक “ॐ हर हर हर महादेव” है।
ॐ जय गंगाधर और ॐ जय शिव ओंकारा में क्या अंतर है?
दोनों शिव आरती हैं। “ॐ जय शिव ओंकारा” हिंदी में है और उत्तर भारत में सबसे ज़्यादा गाई जाती है; “ॐ जय गंगाधर” संस्कृत में है और कैलास पर शिव के नृत्य का वर्णन करती है।
“गंगाधर” का क्या अर्थ है?
गंगा को धारण करने वाले — शिव ने स्वर्ग से उतरती गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था।
यह आरती कब गाई जाती है?
सोमवार, प्रदोष व्रत, सावन, महाशिवरात्रि और शिव मंदिरों की संध्या आरती में।