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हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti) — आरती कीजै हनुमान लला की, लिरिक्स, अर्थ और विधि

अंतिम अपडेट: 6 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Hanuman Ji Ki Aarti – आरती कीजै हनुमान लला की

Hanuman Ji Ki Aarti (हनुमान जी की आरती) — “आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की” — संकटमोचन हनुमान जी की सबसे प्रसिद्ध आरती है। मंगलवार और शनिवार को, हनुमान जयंती पर और हनुमान चालीसा के पाठ के बाद यह आरती गाई जाती है। इसमें लंका दहन, संजीवनी बूटी लाने और अहिरावण वध जैसे हनुमान जी के पराक्रम का वर्णन है। नीचे पूरे बोल, सरल अर्थ, आरती की विधि और नियम दिए गए हैं।

Hanuman Ji Ki Aarti – आरती कीजै हनुमान लला की

Hanuman Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi — आरती कीजै हनुमान लला की

॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥
मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,
श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

॥ आरती ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

लंका जारि असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

पैठि पताल तोरि जमकारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥
॥ इति संपूर्णंम् ॥

यह भी पढ़ें: हनुमान चालीसा — संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ

Hanuman Ji Ki Aarti का अर्थ

पहला भाग: दुष्टों का नाश करने वाले, श्रीराम की शक्ति के अंश हनुमान लला की आरती करो। जिनके बल से पर्वत भी काँपते हैं, जिनके पास रोग और दोष नहीं आते — ऐसे महाबली हनुमान श्रीराम के परम भक्त हैं।

दूसरा भाग: अंजनी पुत्र हनुमान महाबलवान हैं और संतों के सदा सहायक हैं। श्रीराम ने उन्हें सीता जी की खोज के लिए भेजा, वे समुद्र लाँघकर लंका पहुँचे और सोने की लंका को जला दिया। राक्षसों का संहार करके उन्होंने श्रीराम का काम पूरा किया।

तीसरा भाग: जब लक्ष्मण जी मूर्छित हुए, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राण बचाए। पाताल में जाकर उन्होंने अहिरावण का वध किया और श्रीराम-लक्ष्मण को मुक्त कराया। देवता और ऋषि उनकी जय-जयकार करते हैं।

चौथा भाग: जो भक्त सच्चे मन से हनुमान जी की आरती गाता है, उसके सारे संकट दूर होते हैं और अंत में वह प्रभु के धाम को जाता है।

Hanuman Ji Ki Aarti करने की विधि

  1. स्नान के बाद साफ़ कपड़े पहनें और हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. थाली में चमेली के तेल या घी के दीपक, कपूर, फूल, अक्षत, रोली और प्रसाद रखें। दीपक में एक या पाँच बत्तियाँ रखी जा सकती हैं।
  3. आरती से पहले भगवान को फूल, धूप और भोग अर्पित करें; बिना पूजा के सीधे आरती नहीं की जाती।
  4. आरती की थाली को घड़ी की दिशा में घुमाएँ — परंपरा में चरणों के सामने चार बार, नाभि के सामने दो बार, मुख के सामने एक बार और फिर पूरे स्वरूप के सामने सात बार।
  5. आरती के साथ घंटी और शंख बजाएँ, और परिवार के सभी लोग ताली बजाते हुए साथ में गाएँ।
  6. आरती के बाद दोनों हाथों से दीपक की लौ की ओर हथेलियाँ घुमाकर आँखों और सिर से लगाएँ, और जल छिड़ककर आरती शांत करें।
  7. अंत में प्रसाद बाँटें और भूल-चूक के लिए क्षमा माँगें।

हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़-चना और बूंदी के लड्डू चढ़ाए जाते हैं। आरती से पहले श्री हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।

हनुमान जी की आरती कब गाएँ

  • मंगलवार और शनिवार को — हनुमान जी के विशेष दिन।
  • हनुमान जयंती और राम नवमी पर।
  • सुंदरकांड या हनुमान चालीसा के पाठ के बाद।
  • किसी संकट, भय या बीमारी के समय — हनुमान जी संकटमोचन हैं।
  • शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या में शनिवार को हनुमान पूजा के बाद।

Hanuman Ji Ki Aarti के लाभ और नियम

  • भय, नकारात्मक विचार और बुरे सपनों से मुक्ति मिलती है।
  • आत्मबल, साहस और एकाग्रता बढ़ती है।
  • मान्यता है कि हनुमान पूजा से शनि के कष्ट कम होते हैं।
  • हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं — पूजा के दिन सात्विक रहें, मांस-मदिरा से दूर रहें।
  • महिलाएँ हनुमान जी की पूजा और आरती कर सकती हैं; परंपरा में केवल मूर्ति को स्पर्श करने और चोला चढ़ाने से परहेज़ किया जाता है।

संबंधित पाठ

हनुमान जी की पूजा में हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और श्री राम स्तुति का पाठ करें। हनुमान जी के बारे में और पढ़ें Wikipedia पर।

यह भी पढ़ें: संकटमोचन हनुमान अष्टक

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

हनुमान जी की आरती कब करनी चाहिए?

मंगलवार और शनिवार को, हनुमान जयंती पर और हनुमान चालीसा या सुंदरकांड के पाठ के बाद हनुमान जी की आरती करनी चाहिए। रोज़ सुबह-शाम भी की जा सकती है।

हनुमान जी की आरती में कौन सा दीपक जलाएँ?

चमेली के तेल या घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मंगलवार को कई लोग चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर दीपक जलाते हैं।

क्या महिलाएँ हनुमान जी की आरती कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ हनुमान जी की पूजा, आरती और चालीसा पाठ कर सकती हैं। परंपरा में केवल मूर्ति को छूने और चोला चढ़ाने से परहेज़ किया जाता है।

हनुमान जी की आरती से पहले क्या पढ़ें?

आरती से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ है। समय हो तो बजरंग बाण या सुंदरकांड भी पढ़ सकते हैं।

What is Hanuman Ji Ki Aarti?

Hanuman Ji Ki Aarti — “Aarti Kije Hanuman Lala Ki” — is the most popular aarti of Lord Hanuman, sung on Tuesdays and Saturdays and after the Hanuman Chalisa. It praises his strength and deeds like burning Lanka and bringing the Sanjeevani herb.

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