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सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती (Sukhkarta Dukhharta Aarti) — जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती, मराठी लिरिक्स, हिंदी-English अर्थ

अंतिम अपडेट: 5 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Sukhkarta Dukhharta Aarti – सुखकर्ता दुःखहर्ता गणेश आरती

Sukhkarta Dukhharta Aarti (सुखकर्ता दुःखहर्ता) भगवान गणेश की सबसे प्रसिद्ध मराठी आरती है, जिसकी रचना 17वीं सदी में संत समर्थ रामदास ने मोरगाँव के मयूरेश्वर गणपति के दर्शन के बाद की थी। गणेश चतुर्थी, गणेशोत्सव और महाराष्ट्र के हर घर-मंदिर में यह आरती “जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती” के साथ गाई जाती है। नीचे संपूर्ण आरती मराठी (देवनागरी) और English में, हर पद का हिंदी अर्थ, विधि और नियम दिए गए हैं।

Sukhkarta Dukhharta Aarti – सुखकर्ता दुःखहर्ता गणेश आरती

Sukhkarta Dukhharta Aarti Lyrics in Marathi (Hindi Devanagari) — सुखकर्ता दुःखहर्ता मराठी आरती

सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मन कामना पुरती॥ जय देव जय देव॥

रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा।
हिरेजडित मुकुट शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मन कामना पुरती॥ जय देव जय देव॥

लंबोदर पीतांबर फणिवरबंधना।
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहे सदना।
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवरवंदना॥
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मन कामना पुरती॥ जय देव जय देव॥

Sukhkarta Dukhharta Aarti Lyrics in English

Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi,
Nurvi Purvi Prem Kripa Jayachi,
Sarvangi Sundar Uti Shendurachi,
Kanthi Zhalke Mal Muktaphalanchi.
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti,
Darshan Matre Mana Kamana Purti. Jai Dev Jai Dev.

Ratnakhachit Phara Tuj Gaurikumara,
Chandanachi Uti Kumkum Keshara,
Hire Jadit Mukut Shobhato Bara,
Runjhunati Nupure Charani Ghagariya.
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti,
Darshan Matre Mana Kamana Purti. Jai Dev Jai Dev.

Lambodar Pitambar Phanivar Bandhana,
Saral Sond Vakratunda Trinayana,
Das Ramacha Vat Pahe Sadana,
Sankati Pavave Nirvani Rakshave Survar Vandana.
Jai Dev Jai Dev Jai Mangalmurti,
Darshan Matre Mana Kamana Purti. Jai Dev Jai Dev.

Sukhkarta Dukhharta Aarti का अर्थ

  1. पहला पद: गणपति सुख देने वाले और दुख हरने वाले हैं, विघ्नों की बात तक मिटा देते हैं। उनकी कृपा से प्रेम मिलता है। उनके पूरे शरीर पर सिंदूर का सुंदर लेप है और गले में मोतियों की माला चमकती है।
  2. टेक: हे मंगलमूर्ति देव, आपकी जय हो — आपके दर्शन मात्र से मन की सब कामनाएँ पूरी हो जाती हैं।
  3. दूसरा पद: हे गौरीपुत्र, आपका रत्नों से जड़ा आसन है; चंदन, कुमकुम और केसर का लेप है। हीरों से जड़ा मुकुट शोभा देता है और चरणों में घुँघरू रुनझुन बजते हैं।
  4. तीसरा पद: बड़े पेट वाले, पीले वस्त्र धारण किए, नाग की करधनी बाँधे, सीधी सूँड़ वाले वक्रतुंड, तीन नेत्रों वाले गणपति — रामदास आपके घर आने की राह देखता है; संकट में आइए और अंत समय में रक्षा कीजिए, हे देवताओं द्वारा वंदित।

Sukhkarta Dukhharta Aarti का इतिहास

मान्यता है कि समर्थ रामदास (1608–1681) जब पुणे के पास मोरगाँव में अष्टविनायक के प्रथम गणपति मयूरेश्वर के दर्शन करने गए, तब उन्होंने भाव-विभोर होकर यह आरती रची। आरती के अंतिम पद में “दास रामाचा” उनकी छाप है। लोकमान्य तिलक ने 1893 में सार्वजनिक गणेशोत्सव शुरू किया, तब से यह आरती पूरे भारत में गाई जाने लगी। आज मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर सहित हर गणेश मंदिर में यह आरती रोज़ होती है।

Sukhkarta Dukhharta Aarti की विधि

  1. गणेश जी की मूर्ति या चित्र को चौकी पर रखें, दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर और मोदक अर्पित करें।
  2. घी का दीपक और कपूर जलाकर पहले जय गणेश देवा गाएँ, फिर सुखकर्ता दुःखहर्ता।
  3. महाराष्ट्र परंपरा में इसके बाद “दुर्गे दुर्घट भारी” और “लवथवती विक्राळा” भी गाई जाती हैं।
  4. अंत में “घालीन लोटांगण” प्रार्थना बोलकर प्रसाद बाँटें।

Sukhkarta Dukhharta Aarti के 7 नियम

  • आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
  • पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
  • आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
  • आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
  • उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।

सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती के लाभ

  • मान्यता है कि विघ्न दूर होते हैं और हर काम की शुरुआत शुभ होती है।
  • घर में सुख, शांति और मंगल वातावरण रहता है।
  • विद्यार्थियों को बुद्धि और एकाग्रता का आशीर्वाद मिलता है।
  • परिवार एक साथ गाता है, जिससे प्रेम और एकता बढ़ती है।

गणेश जी की हिंदी आरती जय गणेश देवा और गणेश चालीसा भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सुखकर्ता दुःखहर्ता आरती किसने लिखी?

यह आरती 17वीं सदी के संत समर्थ रामदास ने लिखी, जो छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु माने जाते हैं। अंतिम पद में “दास रामाचा” उनकी छाप है।

सुखकर्ता दुःखहर्ता किस भाषा में है?

यह मराठी भाषा में है, देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। हिंदी भाषी भक्त भी इसे इसी रूप में गाते हैं।

“जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती” का क्या अर्थ है?

हे मंगलमूर्ति (शुभ स्वरूप वाले) देव, आपकी जय हो; आपके दर्शन मात्र से मन की सब इच्छाएँ पूरी हो जाती हैं।

सुखकर्ता दुःखहर्ता कब गाई जाती है?

गणेश चतुर्थी, गणेशोत्सव के दस दिन, संकष्टी चतुर्थी, हर बुधवार और रोज़ की पूजा में।

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