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श्री कुबेर जी की आरती (Shri Kuber Ji Ki Aarti) — ॐ जय यक्ष कुबेर हरे, लिरिक्स हिंदी और English में, अर्थ और धनतेरस पूजा विधि

अंतिम अपडेट: 6 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Kuber Ji Ki Aarti – ॐ जय यक्ष कुबेर हरे

Kuber Ji Ki Aarti (कुबेर जी की आरती) “ॐ जय यक्ष कुबेर हरे” धन के देवता और यक्षों के राजा कुबेर की आरती है। धनतेरस और दीपावली पर माँ लक्ष्मी और गणेश जी के साथ कुबेर जी की पूजा होती है, और पूजा के अंत में यही आरती गाई जाती है। आरती की टेक “शरण पड़े भगतों के, भण्डार कुबेर भरे” बताती है कि शरण में आए भक्तों के भंडार कुबेर भरते हैं। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, हर पद का अर्थ और पूजा विधि दी गई है।

Kuber Ji Ki Aarti – ॐ जय यक्ष कुबेर हरे

Kuber Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi — ॐ जय यक्ष कुबेर हरे

ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के,
भण्डार कुबेर भरे॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार करैं॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करें॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

बल बुद्धि विद्या दाता,
हम तेरी शरण पड़े,
स्वामी हम तेरी शरण पड़े।
अपने भक्त जनों के,
सारे काम संवारे॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

मुकुट मणी की शोभा,
मोतियन हार गले,
स्वामी मोतियन हार गले।
अगर कपूर की बाती,
घी की जोत जले॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥

Kuber Ji Ki Aarti Lyrics in English

Om Jai Yaksh Kuber Hare,
Swami Jai Yaksh Jai Yaksh Kuber Hare,
Sharan Pade Bhagton Ke,
Bhandar Kuber Bhare.
॥ Om Jai Yaksh Kuber Hare… ॥

Shiv Bhakton Mein Bhakt Kuber Bade,
Swami Bhakt Kuber Bade,
Daitya Danav Manav Se,
Kai-Kai Yuddh Lade.
॥ Om Jai Yaksh Kuber Hare… ॥

Swarn Singhasan Baithe,
Sir Par Chhatra Phire,
Swami Sir Par Chhatra Phire,
Yogini Mangal Gavain,
Sab Jai Jai Kar Karain.
॥ Om Jai Yaksh Kuber Hare… ॥

Gada Trishul Hath Mein,
Shastra Bahut Dhare,
Swami Shastra Bahut Dhare,
Dukh Bhay Sankat Mochan,
Dhanush Tankar Karen.
॥ Om Jai Yaksh Kuber Hare… ॥

Bhanti Bhanti Ke Vyanjan Bahut Bane,
Swami Vyanjan Bahut Bane,
Mohan Bhog Lagavain,
Sath Mein Udad Chane.
॥ Om Jai Yaksh Kuber Hare… ॥

Bal Buddhi Vidya Data,
Hum Teri Sharan Pade,
Swami Hum Teri Sharan Pade,
Apne Bhakt Janon Ke,
Sare Kaam Sanvare.
॥ Om Jai Yaksh Kuber Hare… ॥

Mukut Mani Ki Shobha,
Motiyan Haar Gale,
Swami Motiyan Haar Gale,
Agar Kapur Ki Bati,
Ghee Ki Jot Jale.
॥ Om Jai Yaksh Kuber Hare… ॥

Yaksh Kuber Ji Ki Aarti,
Jo Koi Nar Gave,
Swami Jo Koi Nar Gave,
Kahat Prempal Swami,
Manvanchhit Phal Pave.
॥ Om Jai Yaksh Kuber Hare… ॥

Kuber Ji Ki Aarti का अर्थ

  1. टेक: हे यक्षराज कुबेर, आपकी जय हो; जो भक्त आपकी शरण में आते हैं, उनके भंडार आप भर देते हैं।
  2. शिव भक्त: शिव भक्तों में कुबेर सबसे बड़े भक्त हैं; उन्होंने दैत्यों, दानवों और मनुष्यों से कई युद्ध लड़े।
  3. वैभव: वे सोने के सिंहासन पर बैठे हैं, सिर पर छत्र डुल रहा है; योगिनियाँ मंगल गीत गाती हैं और सब जयकार करते हैं।
  4. शस्त्र: हाथ में गदा और त्रिशूल सहित कई शस्त्र हैं; दुख, भय और संकट दूर करने वाले कुबेर धनुष की टंकार करते हैं।
  5. भोग: तरह-तरह के व्यंजन बने हैं; मोहन भोग के साथ उड़द और चने का भोग लगाया जाता है।
  6. शरण: हे बल, बुद्धि और विद्या देने वाले, हम आपकी शरण में हैं; आप अपने भक्तों के सब काम सँवारते हैं।
  7. श्रृंगार: मुकुट में मणि शोभा देती है, गले में मोतियों का हार है; अगर-कपूर की बाती और घी की ज्योत जल रही है।
  8. फलश्रुति: जो कोई कुबेर जी की यह आरती गाता है — प्रेमपाल स्वामी कहते हैं — उसे मनचाहा फल मिलता है।

कुबेर कौन हैं

पुराणों के अनुसार कुबेर ऋषि विश्रवा के पुत्र और रावण के सौतेले भाई हैं। कठोर तप से उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न किया और ब्रह्मा जी ने उन्हें धन का स्वामी और उत्तर दिशा का दिक्पाल बनाया। उनकी नगरी अलकापुरी कैलाश के पास मानी जाती है। लक्ष्मी जी धन देती हैं और कुबेर उस धन की रक्षा करते हैं — इसलिए दीपावली पर दोनों की पूजा साथ होती है। कुबेर मंत्र: ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥

Kuber Ji Ki Aarti की विधि

  1. धनतेरस की शाम प्रदोष काल में उत्तर दिशा में चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी, गणेश और कुबेर जी (या तिजोरी/धन की पोटली) रखें।
  2. रोली, अक्षत, फूल, धनिया के बीज, खील-बताशे और मिठाई चढ़ाएँ; 13 दीपक जलाने की परंपरा है।
  3. कुबेर मंत्र 108 बार जपें, फिर जय गणेश देवा, ओम जय लक्ष्मी माता और अंत में कुबेर जी की आरती गाएँ।
  4. पूरी धनतेरस पूजा विधि यहाँ और लक्ष्मी पूजन विधि यहाँ पढ़ें।

Kuber Ji Ki Aarti के 7 नियम

  • आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
  • पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
  • आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
  • आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
  • उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।

कुबेर जी की आरती के लाभ

  • मान्यता है कि घर में धन-धान्य और स्थिर लक्ष्मी का वास होता है।
  • व्यापार में वृद्धि और कर्ज़ से मुक्ति की मान्यता है।
  • धन की रक्षा होती है और फिज़ूलखर्ची कम होती है।
  • दीपावली की पूजा पूर्ण मानी जाती है।

धनतेरस पूजा विधि, दीपावली लक्ष्मी पूजा विधि और लक्ष्मी जी की आरती भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

कुबेर जी की आरती कब करनी चाहिए?

धनतेरस और दीपावली की लक्ष्मी पूजा के बाद, और हर शुक्रवार या गुरुवार को कुबेर पूजा के बाद। 2026 में धनतेरस 6 नवंबर को है।

कुबेर जी की पूजा किस दिशा में करें?

कुबेर उत्तर दिशा के स्वामी हैं, इसलिए पूजा उत्तर दिशा की ओर मुख करके या घर के उत्तर भाग में करें। तिजोरी भी उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है।

कुबेर जी को क्या भोग लगाएँ?

आरती में ही कहा गया है — मोहन भोग के साथ उड़द और चने। धनतेरस पर धनिया, खील-बताशे और सफेद मिठाई भी चढ़ाई जाती है।

“प्रेमपाल स्वामी” कौन हैं?

आरती के अंतिम पद में “कहत प्रेमपाल स्वामी” आता है; उन्हें इस आरती का रचयिता माना जाता है।

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