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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 · कार्तिक कृष्ण पंचमी · वि.सं. 2083 आज का पंचांग → हिंदीEnglish
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भैरव जी की आरती (Bhairav Ji Ki Aarti) — जय भैरव देवा प्रभु जय भैरव देवा, लिरिक्स हिंदी और English में, अर्थ और पूजा विधि

अंतिम अपडेट: 5 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Bhairav Ji Ki Aarti – जय भैरव देवा

Bhairav Ji Ki Aarti (भैरव जी की आरती) “जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा” भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव और बाल रूप बटुक भैरव की आरती है। भैरव जी को काशी का कोतवाल और हर शक्तिपीठ का रक्षक माना जाता है — मान्यता है कि भैरव दर्शन के बिना देवी दर्शन पूरे नहीं होते। रविवार, मंगलवार, हर महीने की कालाष्टमी और मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी (काल भैरव जयंती) पर यह आरती गाई जाती है। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, हर पद का अर्थ और पूजा विधि दी गई है।

Bhairav Ji Ki Aarti – जय भैरव देवा

Bhairav Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi — जय भैरव देवा

जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा।
जय काली और गौरा देवी कृत सेवा॥
॥ जय भैरव देवा…॥

तुम्हीं पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक।
भक्तों के सुख कारक भीषण वपु धारक॥
॥ जय भैरव देवा…॥

वाहन श्वान विराजत कर त्रिशूल धारी।
महिमा अमित तुम्हारी जय जय भयहारी॥
॥ जय भैरव देवा…॥

तुम बिन देवा सेवा सफल नहीं होवे।
चौमुख दीपक दर्शन दुःख सगरे खोवे॥
॥ जय भैरव देवा…॥

तेल चटकि दधि मिश्रित माषावलि तेरी।
कृपा करिए भैरव, करिए नहीं देरी॥
॥ जय भैरव देवा…॥

पाँव घुँघरू बाजत अरु डमरू डमकावत।
बटुकनाथ बन बालक जन मन हरषावत॥
॥ जय भैरव देवा…॥

बटुकनाथ जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहे धरणीधर नर मनवांछित फल पावे॥
॥ जय भैरव देवा…॥

Bhairav Ji Ki Aarti Lyrics in English

Jai Bhairav Deva, Prabhu Jai Bhairav Deva,
Jai Kali Aur Gaura Devi Krit Seva.
॥ Jai Bhairav Deva… ॥

Tumhin Paap Uddharak Dukh Sindhu Tarak,
Bhakton Ke Sukh Karak Bhishan Vapu Dharak.
॥ Jai Bhairav Deva… ॥

Vahan Shvan Virajat Kar Trishul Dhari,
Mahima Amit Tumhari Jai Jai Bhayhari.
॥ Jai Bhairav Deva… ॥

Tum Bin Deva Seva Saphal Nahin Hove,
Chaumukh Deepak Darshan Dukh Sagre Khove.
॥ Jai Bhairav Deva… ॥

Tel Chataki Dadhi Mishrit Mashavali Teri,
Kripa Kariye Bhairav, Kariye Nahin Deri.
॥ Jai Bhairav Deva… ॥

Paanv Ghunghru Bajat Aru Damru Damkavat,
Batuknath Ban Balak Jan Man Harshavat.
॥ Jai Bhairav Deva… ॥

Batuknath Ji Ki Aarti Jo Koi Nar Gave,
Kahe Dharanidhar Nar Manvanchhit Phal Pave.
॥ Jai Bhairav Deva… ॥

Bhairav Ji Ki Aarti का अर्थ

  1. टेक: हे भैरव देव, आपकी जय हो — माँ काली और माँ गौरी भी आपकी सेवा करती हैं।
  2. दूसरा पद: आप ही पापों से उद्धार करने वाले, दुख के सागर से पार लगाने वाले, भक्तों को सुख देने वाले और भयंकर रूप धारण करने वाले हैं।
  3. तीसरा पद: कुत्ता आपका वाहन है और हाथ में त्रिशूल है; आपकी महिमा अपार है, हे भय हरने वाले, आपकी जय हो।
  4. चौथा पद: हे देव, आपके बिना कोई पूजा सफल नहीं होती; चौमुखी दीपक के साथ आपके दर्शन से सारे दुख मिट जाते हैं।
  5. पाँचवाँ पद: तेल में तले, दही मिले उड़द के बड़ों (माषावलि) का भोग आपको प्रिय है; हे भैरव, कृपा कीजिए, देर मत कीजिए।
  6. छठा पद: पैरों में घुँघरू बजते हैं और डमरू डम-डम करता है; बालक बटुकनाथ के रूप में आप सबका मन प्रसन्न करते हैं।
  7. फलश्रुति: जो कोई बटुकनाथ जी की यह आरती गाता है — धरणीधर कहते हैं — उसे मनचाहा फल मिलता है।

भैरव जी को क्या भोग लगाएँ

  • उड़द के बड़े, इमरती या जलेबी — आरती में “माषावलि” (उड़द) का उल्लेख है।
  • सरसों के तेल का चौमुखी दीपक।
  • नारियल, काले तिल और नींबू।
  • पूजा के बाद काले कुत्ते को रोटी या दूध खिलाना शुभ माना जाता है।

Bhairav Ji Ki Aarti की विधि

  1. रविवार या कालाष्टमी की शाम भैरव जी के मंदिर जाएँ या घर में उनका चित्र दक्षिण दिशा में रखें।
  2. सिंदूर, काले तिल, नारियल और उड़द के बड़े चढ़ाएँ और सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएँ।
  3. “ॐ कालभैरवाय नमः” या “ॐ बटुक भैरवाय नमः” का 108 बार जाप करें, फिर यह आरती गाएँ।
  4. भैरव जी के साथ हनुमान चालीसा पढ़ना भी शुभ माना जाता है।

Bhairav Ji Ki Aarti के 7 नियम

  • आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
  • पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
  • आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
  • आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
  • उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।

भैरव जी की आरती के लाभ

  • मान्यता है कि भय, शत्रु और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
  • राहु-शनि के दोष और कोर्ट-कचहरी के संकट शांत होने की मान्यता है।
  • घर और परिवार की रक्षा होती है।
  • देवी पूजा पूर्ण होती है — भैरव दर्शन के बिना देवी यात्रा अधूरी मानी जाती है।

ॐ जय शिव ओंकारा, हनुमान चालीसा और व्रत कैलेंडर भी देखें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

भैरव जी की आरती कब करनी चाहिए?

रविवार और मंगलवार की शाम, हर महीने की कृष्ण अष्टमी (कालाष्टमी) और मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी को काल भैरव जयंती पर।

काल भैरव और बटुक भैरव में क्या अंतर है?

काल भैरव शिव का उग्र रूप हैं, जो काशी के कोतवाल माने जाते हैं; बटुक भैरव उनका सौम्य बाल रूप हैं। यह आरती दोनों रूपों के लिए गाई जाती है — अंतिम पद में “बटुकनाथ” नाम आता है।

“माषावलि” का क्या अर्थ है?

“माष” यानी उड़द। तेल में तले और दही मिले उड़द के बड़े भैरव जी का प्रिय भोग हैं।

भैरव जी का वाहन क्या है?

कुत्ता (श्वान) — इसीलिए भैरव पूजा के बाद कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा है।

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