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ॐ जय जगदीश हरे आरती (Om Jai Jagdish Hare Aarti) — लिरिक्स हिंदी और English में, अर्थ और इतिहास

अंतिम अपडेट: 6 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Om Jai Jagdish Hare Aarti – ॐ जय जगदीश हरे आरती लिरिक्स

Om Jai Jagdish Hare Aarti (ॐ जय जगदीश हरे) भगवान विष्णु की वह आरती है जो लगभग हर हिंदू घर और मंदिर में गाई जाती है — किसी भी पूजा, कथा, व्रत या त्योहार का समापन अक्सर इसी आरती से होता है। “जगदीश” का अर्थ है जगत के ईश्वर। इस आरती की रचना 19वीं सदी में पंजाब के पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ने की थी। नीचे पूरे बोल हिंदी और English में, हर पंक्ति का सरल अर्थ, आरती की विधि और इसके लाभ दिए गए हैं।

Om Jai Jagdish Hare Aarti – ॐ जय जगदीश हरे आरती लिरिक्स

Om Jai Jagdish Hare Aarti

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

जो ध्यावे फल पावे,
दुःख बिनसे मन का,
स्वामी दुःख बिनसे मन का ।
सुख सम्पति घर आवे,
सुख सम्पति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं किसकी,
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी ।
तुम बिन और न दूजा,
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अन्तर्यामी,
स्वामी तुम अन्तर्यामी ।
पारब्रह्म परमेश्वर,
पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सब के स्वामी ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता,
स्वामी तुम पालनकर्ता ।
मैं मूरख फलकामी,
मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति,
स्वामी सबके प्राणपति ।
किस विधि मिलूं दयामय,
किस विधि मिलूं दयामय,
तुमको मैं कुमति ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

दीन-बन्धु दुःख-हर्ता,
ठाकुर तुम मेरे,
स्वामी रक्षक तुम मेरे ।
अपने हाथ उठाओ,
अपने शरण लगाओ,
द्वार पड़ा तेरे ॥
॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥

विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा,
स्वमी पाप(कष्ट) हरो देवा ।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
सन्तन की सेवा ॥

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे ।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे ॥

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Om Jai Jagdish Hare Aarti का अर्थ

पहला भाग: हे जगत के स्वामी हरि, आपकी जय हो। आप भक्तों के संकट पल भर में दूर कर देते हैं। जो आपका ध्यान करता है, उसे फल मिलता है और उसके मन का दुख मिट जाता है; घर में सुख-संपत्ति आती है और शरीर के कष्ट दूर होते हैं।

दूसरा भाग: आप ही मेरे माता-पिता हैं, मैं किसकी शरण में जाऊँ? आपके बिना कोई और नहीं, जिसकी मैं आशा करूँ। आप पूर्ण परमात्मा हैं, अंतर्यामी हैं, परब्रह्म और सबके स्वामी हैं।

तीसरा भाग: आप करुणा के सागर और सबके पालनकर्ता हैं। मैं मूर्ख और अज्ञानी हूँ, मुझ पर कृपा कीजिए। आप एक हैं, पर सबके प्राणों के स्वामी हैं — मैं अज्ञानी आपको कैसे पहचानूँ?

चौथा भाग: आप दीनों के बंधु और दुख हरने वाले हैं, मेरे रक्षक हैं — अपना हाथ बढ़ाइए, मैं आपकी शरण में हूँ। मेरे विषय-विकार और पाप दूर कीजिए, श्रद्धा और भक्ति बढ़ाइए, और संतों की सेवा का भाव दीजिए। तन, मन, धन सब आपका है, आपको ही अर्पित है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती का इतिहास

यह आरती पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी (1837–1881) ने लिखी थी, जो पंजाब के फिल्लौर के रहने वाले विद्वान, कथावाचक और लेखक थे। उन्होंने लगभग 1870 के आसपास यह आरती रची। इसकी भाषा इतनी सरल और भाव इतना गहरा है कि कुछ ही दशकों में यह पूरे भारत में फैल गई और आज लगभग हर पूजा में गाई जाती है।

Om Jai Jagdish Hare Aarti करने की विधि

  1. स्नान के बाद साफ़ कपड़े पहनें और भगवान विष्णु के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. थाली में घी के दीपक, कपूर, फूल, अक्षत, रोली और प्रसाद रखें। दीपक में एक या पाँच बत्तियाँ रखी जा सकती हैं।
  3. आरती से पहले भगवान को फूल, धूप और भोग अर्पित करें; बिना पूजा के सीधे आरती नहीं की जाती।
  4. आरती की थाली को घड़ी की दिशा में घुमाएँ — परंपरा में चरणों के सामने चार बार, नाभि के सामने दो बार, मुख के सामने एक बार और फिर पूरे स्वरूप के सामने सात बार।
  5. आरती के साथ घंटी और शंख बजाएँ, और परिवार के सभी लोग ताली बजाते हुए साथ में गाएँ।
  6. आरती के बाद दोनों हाथों से दीपक की लौ की ओर हथेलियाँ घुमाकर आँखों और सिर से लगाएँ, और जल छिड़ककर आरती शांत करें।
  7. अंत में प्रसाद बाँटें और भूल-चूक के लिए क्षमा माँगें।

ॐ जय जगदीश हरे आरती कब गाएँ

  • हर एकादशी पर विष्णु पूजा के बाद।
  • पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा के बाद।
  • दीपावली, जन्माष्टमी, राम नवमी और हर बड़ी पूजा के अंत में।
  • गृह प्रवेश, विवाह और किसी शुभ काम की शुरुआत पर।
  • रोज़ सुबह-शाम घर की संध्या आरती में।

Om Jai Jagdish Hare Aarti के लाभ

  • मन को शांति और समर्पण का भाव मिलता है।
  • मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा से घर में सुख-संपत्ति आती है।
  • पूरे परिवार के साथ गाने से घर में प्रेम और एकता बढ़ती है।
  • इसके सरल शब्द बच्चों को भी भक्ति से जोड़ते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

ॐ जय जगदीश हरे आरती किसने लिखी?

यह आरती पंजाब के फिल्लौर के पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी (1837–1881) ने लगभग 1870 के आसपास लिखी थी।

ॐ जय जगदीश हरे आरती किस भगवान की है?

यह भगवान विष्णु (जगदीश — जगत के ईश्वर) की आरती है। इसे सत्यनारायण कथा, एकादशी और लगभग हर पूजा के अंत में गाया जाता है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती कब गानी चाहिए?

हर एकादशी, पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा के बाद, बड़े त्योहारों और किसी भी पूजा के अंत में, और रोज़ सुबह-शाम संध्या आरती में।

आरती के बाद क्या करना चाहिए?

आरती के बाद दीपक की लौ पर हथेलियाँ घुमाकर आँखों और सिर से लगाएँ, जल छिड़ककर आरती शांत करें, प्रसाद बाँटें और भूल-चूक के लिए क्षमा माँगें।

Who wrote Om Jai Jagdish Hare?

Om Jai Jagdish Hare was written around 1870 by Pandit Shardha Ram Phillauri (1837–1881) of Phillaur, Punjab. It is an aarti of Lord Vishnu sung at the end of almost every Hindu puja.

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