Sun Meri Devi Parvat Vasani (सुन मेरी देवी पर्वतवासनी) माँ दुर्गा के पहाड़ों पर बसे रूपों की लोकप्रिय आरती है। भक्त इसे विन्ध्येश्वरी आरती के रूप में विन्ध्याचल (मिर्ज़ापुर) की माँ विन्ध्यवासिनी के लिए गाते हैं, और हिमाचल की ज्वाला जी व हिंगलाज माता की आरती में भी। आरती में ध्यानू भगत और अकबर के सोने के छत्र की प्रसिद्ध कथा का उल्लेख है। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, अर्थ और कथा दी गई है।

इस लेख में
Sun Meri Devi Parvat Vasani Lyrics in Hindi — विन्ध्येश्वरी आरती
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी, कोई तेरा पार न पाया माँ॥
पान सुपारी ध्वजा नारियल,
ले तेरी भेंट चढ़ायो माँ॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी, कोई तेरा पार न पाया माँ॥
सुवा चोली तेरी अंग विराजे,
केसर तिलक लगाया॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी, कोई तेरा पार न पाया माँ॥
नंगे पग माँ अकबर आया,
सोने का छत्र चढ़ाया॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी, कोई तेरा पार न पाया माँ॥
ऊँचे पर्वत बनायो देवालय,
नीचे शहर बसाया॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी, कोई तेरा पार न पाया माँ॥
सतयुग, द्वापर, त्रेता मध्ये,
कलियुग राज सवाया॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी, कोई तेरा पार न पाया माँ॥
धूप दीप नैवेद्य आरती,
मोहन भोग लगाया॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी, कोई तेरा पार न पाया माँ॥
ध्यानू भगत मैया तेरे गुन गाया,
मनवांछित फल पाया॥
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी, कोई तेरा पार न पाया माँ॥
Sun Meri Devi Parvat Vasani Lyrics in English
Sun Meri Devi Parvatvasani, Koi Tera Paar Na Paya Maa.
Paan Supari Dhvaja Nariyal,
Le Teri Bhent Chadhayo Maa.
Sun Meri Devi Parvatvasani, Koi Tera Paar Na Paya Maa.
Suva Choli Teri Ang Viraje,
Kesar Tilak Lagaya.
Sun Meri Devi Parvatvasani, Koi Tera Paar Na Paya Maa.
Nange Pag Maa Akbar Aaya,
Sone Ka Chhatra Chadhaya.
Sun Meri Devi Parvatvasani, Koi Tera Paar Na Paya Maa.
Unche Parvat Banayo Devalay,
Neeche Shahar Basaya.
Sun Meri Devi Parvatvasani, Koi Tera Paar Na Paya Maa.
Satyug, Dvapar, Treta Madhye,
Kaliyug Raj Savaya.
Sun Meri Devi Parvatvasani, Koi Tera Paar Na Paya Maa.
Dhoop Deep Naivedya Aarti,
Mohan Bhog Lagaya.
Sun Meri Devi Parvatvasani, Koi Tera Paar Na Paya Maa.
Dhyanu Bhagat Maiya Tere Gun Gaya,
Manvanchhit Phal Paya.
Sun Meri Devi Parvatvasani, Koi Tera Paar Na Paya Maa.
Sun Meri Devi Parvat Vasani का अर्थ
- टेक: हे पर्वतों पर निवास करने वाली मेरी देवी, मेरी सुनो — तुम्हारी महिमा का पार आज तक कोई नहीं पा सका।
- भेंट: पान, सुपारी, ध्वजा और नारियल — यह भेंट लेकर मैं तुम्हें चढ़ाता हूँ, माँ।
- श्रृंगार: तुम्हारे अंगों पर हरे रंग की चोली शोभा देती है और माथे पर केसर का तिलक लगा है।
- अकबर का छत्र: माँ, अकबर बादशाह भी नंगे पैर तुम्हारे दरबार में आया और सोने का छत्र चढ़ाया।
- मंदिर और नगर: ऊँचे पर्वत पर तुम्हारा देवालय बना है और नीचे नगर बसा है।
- चारों युग: सतयुग, त्रेता, द्वापर — हर युग में तुम्हारी महिमा रही, और कलियुग में तुम्हारा राज सवाया (और बढ़कर) है।
- पूजा: धूप, दीप, नैवेद्य और आरती के साथ तुम्हें मोहन भोग लगाया गया है।
- फलश्रुति: माँ, ध्यानू भगत ने तुम्हारे गुण गाए और उसे मनचाहा फल मिला।
ध्यानू भगत और अकबर की कथा
लोककथा के अनुसार मुग़ल काल में ध्यानू भगत भक्तों का जत्था लेकर ज्वाला जी (हिमाचल) जा रहे थे। अकबर ने उनकी भक्ति की परीक्षा लेने के लिए उनके घोड़े का सिर कटवा दिया और कहा कि तुम्हारी देवी सच्ची है तो इसे जोड़ दे। ध्यानू ने माँ से प्रार्थना की और घोड़ा जीवित हो गया। माँ की ज्वाला बुझाने के अकबर के प्रयास भी विफल हुए। तब अकबर नंगे पैर दरबार में आया और सोने का छत्र चढ़ाया — इसी घटना का वर्णन आरती में है।
Sun Meri Devi Parvat Vasani की विधि
- चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माता का चित्र रखें, लाल चुनरी, सिंदूर और लाल फूल चढ़ाएँ।
- पान, सुपारी, नारियल और ध्वजा की भेंट रखें — जैसा आरती में कहा गया है।
- घी का दीपक जलाकर जय अम्बे गौरी के बाद यह आरती गाएँ।
- नवरात्रि में रोज़ सुबह-शाम आरती करें और अष्टमी-नवमी को कन्या पूजन करें।
Sun Meri Devi Parvat Vasani के 7 नियम
- आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
- पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
- आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
- आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
- आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
- आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
- उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।
विन्ध्येश्वरी आरती के लाभ
- मान्यता है कि माँ की कृपा से भय और संकट दूर होते हैं।
- मनोकामना पूरी होती है — जैसे ध्यानू भगत की हुई।
- घर में सुख-शांति और शक्ति का वास होता है।
- नवरात्रि की पूजा पूर्ण होती है।
माता की जय अम्बे गौरी आरती और दुर्गा चालीसा भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सुन मेरी देवी पर्वतवासनी किस देवी की आरती है?
यह माँ दुर्गा के पर्वत पर बसे रूपों की आरती है — विन्ध्याचल की माँ विन्ध्यवासिनी (विन्ध्येश्वरी), ज्वाला जी और हिंगलाज माता की आरती के रूप में इसे गाया जाता है।
आरती में अकबर का ज़िक्र क्यों है?
लोककथा के अनुसार ध्यानू भगत की भक्ति और माँ के चमत्कार से प्रभावित होकर अकबर नंगे पैर ज्वाला जी आया और सोने का छत्र चढ़ाया।
यह आरती कब गाई जाती है?
नवरात्रि, अष्टमी, माता के जागरण, विन्ध्याचल यात्रा और रोज़ की देवी पूजा में।
“सुवा चोली” का क्या अर्थ है?
“सुवा” यानी तोते जैसा हरा रंग — माँ हरे रंग की चोली धारण किए हुए हैं।