Yugal Kishore Aarti (आरती युगलकिशोर की कीजै) राधा और कृष्ण — “युगल किशोर” यानी किशोर जोड़ी — की आरती है। वृंदावन, बरसाना और पुष्टिमार्गी मंदिरों में यह आरती बहुत प्रिय है। अंतिम पंक्ति में “परमानंद स्वामी” की छाप है — परमानंद दास 16वीं सदी के अष्टछाप कवि थे, जो वल्लभाचार्य के शिष्य थे। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, हर पंक्ति का अर्थ और विधि दी गई है।

इस लेख में
Yugal Kishore Aarti Lyrics in Hindi — आरती युगलकिशोर की कीजै
आरती युगलकिशोर की कीजै।
तन मन धन न्योछावर कीजै॥
गौरश्याम मुख निरखन लीजै।
हरि का रूप नयन भरि पीजै॥
॥ आरती युगलकिशोर की कीजै…॥
रवि शशि कोटि बदन की शोभा।
ताहि निरखि मेरो मन लोभा॥
॥ आरती युगलकिशोर की कीजै…॥
ओढ़े नील पीत पट सारी।
कुंजबिहारी गिरिवरधारी॥
॥ आरती युगलकिशोर की कीजै…॥
फूलन सेज फूल की माला।
रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला॥
॥ आरती युगलकिशोर की कीजै…॥
कंचन थार कपूर की बाती।
हरि आए निर्मल भई छाती॥
॥ आरती युगलकिशोर की कीजै…॥
श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी।
आरती करें सकल नर नारी॥
॥ आरती युगलकिशोर की कीजै…॥
नंदनंदन बृजभान किशोरी।
परमानंद स्वामी अविचल जोरी॥
॥ आरती युगलकिशोर की कीजै…॥
Yugal Kishore Aarti Lyrics in English
Aarti Yugal Kishore Ki Keejai,
Tan Man Dhan Nyochhavar Keejai.
Gaurshyam Mukh Nirkhan Leejai,
Hari Ka Roop Nayan Bhari Peejai.
॥ Aarti Yugal Kishore Ki Keejai… ॥
Ravi Shashi Koti Badan Ki Shobha,
Tahi Nirakhi Mero Man Lobha.
॥ Aarti Yugal Kishore Ki Keejai… ॥
Odhe Neel Peet Pat Saari,
Kunjbihari Girivardhari.
॥ Aarti Yugal Kishore Ki Keejai… ॥
Phoolan Sej Phool Ki Mala,
Ratna Singhasan Baithe Nandlala.
॥ Aarti Yugal Kishore Ki Keejai… ॥
Kanchan Thaar Kapur Ki Baati,
Hari Aaye Nirmal Bhai Chhati.
॥ Aarti Yugal Kishore Ki Keejai… ॥
Shri Purushottam Girivardhari,
Aarti Karen Sakal Nar Nari.
॥ Aarti Yugal Kishore Ki Keejai… ॥
Nandnandan Brijbhan Kishori,
Paramanand Swami Avichal Jori.
॥ Aarti Yugal Kishore Ki Keejai… ॥
Yugal Kishore Aarti का अर्थ
- टेक: युगल किशोर — राधा और कृष्ण — की आरती कीजिए और उन पर तन, मन, धन न्योछावर कर दीजिए।
- दर्शन: गोरी राधा और श्याम कृष्ण के मुख के दर्शन कीजिए; हरि के रूप को आँखें भरकर पी लीजिए।
- शोभा: उनके मुख की शोभा करोड़ों सूर्य और चंद्रमा जैसी है; उसे देखकर मेरा मन लुभा गया।
- वस्त्र: राधा नीली साड़ी और कृष्ण पीला पीतांबर ओढ़े हैं — कुंजों में विहार करने वाले, गोवर्धन पर्वत उठाने वाले।
- श्रृंगार: फूलों की सेज और फूलों की माला है; नंदलाल रत्नों के सिंहासन पर बैठे हैं।
- आरती: सोने की थाली में कपूर की बाती जल रही है; हरि के आते ही हृदय निर्मल हो गया।
- सब मिलकर: गोवर्धनधारी श्री पुरुषोत्तम की आरती सब नर-नारी मिलकर करते हैं।
- फलश्रुति: नंद के लाल और वृषभानु की किशोरी — परमानंद स्वामी कहते हैं, यह जोड़ी अविचल (सदा अटल) है।
Yugal Kishore Aarti की विधि
- राधा-कृष्ण के चित्र या युगल विग्रह को पीले वस्त्र, तुलसी, फूलों की माला और चंदन से सजाएँ।
- माखन-मिश्री, पंचामृत या खीर का भोग लगाएँ — तुलसी दल ज़रूर रखें।
- कपूर या घी का दीपक जलाकर यह आरती गाएँ, फिर आरती कुंजबिहारी की भी गा सकते हैं।
- जन्माष्टमी, राधाष्टमी, एकादशी और रोज़ की संध्या पूजा में यह आरती गाई जाती है।
Yugal Kishore Aarti के 7 नियम
- आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
- पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
- आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
- आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
- आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
- आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
- उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।
आरती युगलकिशोर की कीजै के लाभ
- मान्यता है कि दांपत्य जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है।
- मन में भक्ति और शांति का भाव जागता है।
- घर में राधा-कृष्ण की कृपा से सुख बना रहता है।
- परिवार एक साथ गाता है, जिससे प्रेम बढ़ता है।
आरती कुंजबिहारी की और ओम जय जगदीश हरे भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
आरती युगलकिशोर की कीजै किसने लिखी?
अंतिम पंक्ति “परमानंद स्वामी अविचल जोरी” में परमानंद दास की छाप है — वे 16वीं सदी के अष्टछाप कवि और वल्लभाचार्य के शिष्य थे।
“युगल किशोर” का क्या अर्थ है?
युगल यानी जोड़ी और किशोर यानी तरुण — राधा और कृष्ण की किशोर जोड़ी। वृंदावन के युगलकिशोर मंदिर का नाम भी इसी से है।
यह आरती कब गाई जाती है?
जन्माष्टमी, राधाष्टमी, एकादशी, कार्तिक मास और रोज़ की संध्या आरती में।
“नील पीत पट” का क्या अर्थ है?
नीला और पीला वस्त्र — राधा जी नीली साड़ी और श्रीकृष्ण पीला पीतांबर धारण करते हैं।