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अहोई माता की आरती (Ahoi Mata Ki Aarti) — जय अहोई माता, लिरिक्स हिंदी और English में, अर्थ और अहोई अष्टमी पूजा विधि

अंतिम अपडेट: 6 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Ahoi Mata Ki Aarti – जय अहोई माता

🪔 अहोई अष्टमी 1 नवंबर 2026: पूजा विधि, कथा और तारों को अर्घ्य →

Ahoi Mata Ki Aarti (अहोई माता की आरती) “जय अहोई माता” अहोई अष्टमी के व्रत में गाई जाती है। कार्तिक कृष्ण अष्टमी को माताएँ संतान की लंबी आयु, सुख और रक्षा के लिए निर्जल व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। 2026 में अहोई अष्टमी रविवार, 1 नवंबर को है — उस शाम सूर्यास्त के समय अष्टमी तिथि रहेगी। नीचे संपूर्ण आरती हिंदी और English में, हर पद का अर्थ और पूजा विधि दी गई है।

Ahoi Mata Ki Aarti – जय अहोई माता

Ahoi Mata Ki Aarti Lyrics in Hindi — जय अहोई माता

जय अहोई माता, जय अहोई माता।
तुमको निसदिन ध्यावत, हर विष्णु विधाता॥
॥ ॐ जय अहोई माता…॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला, तू ही है जगमाता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
॥ ॐ जय अहोई माता…॥

माता रूप निरंजन, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, नित मंगल पाता॥
॥ ॐ जय अहोई माता…॥

तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशक, जगनिधि से त्राता॥
॥ ॐ जय अहोई माता…॥

जिस घर थारो वासा, वाहि में गुण आता।
कर न सके सोई कर ले, मन नहीं घबराता॥
॥ ॐ जय अहोई माता…॥

तुम बिन सुख न होवे, न कोई पुत्र पाता।
खान-पान का वैभव, तुम बिन नहीं आता॥
॥ ॐ जय अहोई माता…॥

शुभ गुण सुंदर युक्ता, क्षीर निधि जाता।
रतन चतुर्दश तोकू, कोई नहीं पाता॥
॥ ॐ जय अहोई माता…॥

श्री अहोई माँ की आरती, जो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजे, पाप उतर जाता॥
॥ ॐ जय अहोई माता…॥

Ahoi Mata Ki Aarti Lyrics in English

Jai Ahoi Mata, Jai Ahoi Mata,
Tumko Nisdin Dhyavat, Har Vishnu Vidhata.
॥ Om Jai Ahoi Mata… ॥

Brahmani, Rudrani, Kamala, Tu Hi Hai Jagmata,
Surya-Chandrama Dhyavat, Narad Rishi Gata.
॥ Om Jai Ahoi Mata… ॥

Mata Roop Niranjan, Sukh-Sampatti Data,
Jo Koi Tumko Dhyavat, Nit Mangal Pata.
॥ Om Jai Ahoi Mata… ॥

Tu Hi Patal Basanti, Tu Hi Hai Shubhdata,
Karm-Prabhav Prakashak, Jagnidhi Se Trata.
॥ Om Jai Ahoi Mata… ॥

Jis Ghar Tharo Vasa, Vahi Mein Gun Aata,
Kar Na Sake Soi Kar Le, Man Nahin Ghabrata.
॥ Om Jai Ahoi Mata… ॥

Tum Bin Sukh Na Hove, Na Koi Putra Pata,
Khan-Paan Ka Vaibhav, Tum Bin Nahin Aata.
॥ Om Jai Ahoi Mata… ॥

Shubh Gun Sundar Yukta, Kshir Nidhi Jata,
Ratan Chaturdash Toku, Koi Nahin Pata.
॥ Om Jai Ahoi Mata… ॥

Shri Ahoi Maa Ki Aarti, Jo Koi Gata,
Ur Umang Ati Upaje, Paap Utar Jata.
॥ Om Jai Ahoi Mata… ॥

Ahoi Mata Ki Aarti का अर्थ

  1. टेक: हे अहोई माता, आपकी जय हो — शिव, विष्णु और ब्रह्मा भी दिन-रात आपका ध्यान करते हैं।
  2. जगमाता: आप ही ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला (लक्ष्मी) हैं, आप ही जगत की माता हैं; सूर्य-चंद्रमा आपका ध्यान करते हैं और नारद ऋषि आपके गुण गाते हैं।
  3. सुख देने वाली: माता का रूप निर्मल है, आप सुख और संपत्ति देती हैं; जो आपका ध्यान करता है, उसका सदा मंगल होता है।
  4. रक्षक: आप पाताल में भी बसती हैं और शुभ फल देती हैं; कर्मों का फल प्रकट करने वाली और संसार के संकटों से बचाने वाली आप ही हैं।
  5. घर में वास: जिस घर में आपका वास होता है, वहाँ सद्गुण आते हैं; जो काम कोई न कर सके, वह भी हो जाता है और मन नहीं घबराता।
  6. संतान सुख: आपके बिना न सुख होता है, न संतान मिलती है; खाने-पीने का वैभव भी आपके बिना नहीं आता।
  7. चौदह रत्न: सुंदर शुभ गुणों से युक्त आप क्षीर सागर से प्रकट हुईं; समुद्र मंथन के चौदह रत्न भी आपके बिना कोई नहीं पाता।
  8. फलश्रुति: जो अहोई माता की यह आरती गाता है, उसके हृदय में उमंग भर जाती है और पाप उतर जाते हैं।

अहोई अष्टमी की कथा (संक्षेप में)

एक साहूकार की पत्नी दीपावली से पहले घर लीपने के लिए जंगल से मिट्टी खोदने गई। खुदाई करते हुए उसकी कुदाल से अनजाने में साही (स्याहु) का बच्चा मर गया। साही ने उसे संतान वियोग का श्राप दिया और एक-एक करके उसके सातों पुत्र नहीं रहे। दुखी होकर उसने अहोई अष्टमी पर अहोई माता और स्याहु के चित्र बनाकर व्रत किया और क्षमा माँगी। माता प्रसन्न हुईं और उसकी संतान को जीवन का आशीर्वाद मिला। इसीलिए अहोई माता के चित्र के साथ साही और उसके बच्चों का चित्र भी बनाया जाता है।

Ahoi Mata Ki Aarti की विधि

  1. सुबह स्नान करके संतान की रक्षा के लिए निर्जल व्रत का संकल्प लें।
  2. शाम को दीवार पर गेरू से या कागज़ पर अहोई माता, स्याहु (साही) और उसके बच्चों का चित्र बनाएँ; सामने जल से भरा कलश और करवा रखें।
  3. रोली, अक्षत, फूल चढ़ाएँ; आठ पूए, आठ पूड़ी या हलवा और सिंघाड़े का भोग लगाएँ; कई घरों में चाँदी की स्याहु माला (अहोई) पहनी जाती है।
  4. अहोई अष्टमी की कथा सुनें, फिर घी का दीपक जलाकर यह आरती गाएँ।
  5. तारे दिखने पर करवे के जल से तारों को अर्घ्य दें और व्रत खोलें। पूरी विधि अहोई अष्टमी पूजा विधि में पढ़ें।

Ahoi Mata Ki Aarti के 7 नियम

  • आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
  • पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
  • आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
  • आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
  • उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।

अहोई माता की आरती के लाभ

  • मान्यता है कि संतान की आयु लंबी होती है और उनकी रक्षा होती है।
  • निःसंतान दंपति को संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है।
  • घर में सुख, धन-धान्य और मंगल बना रहता है।
  • मन से भय और चिंता दूर होती है।

अहोई अष्टमी पूजा विधि, ओम जय लक्ष्मी माता और व्रत कैलेंडर भी देखें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

अहोई अष्टमी 2026 कब है?

रविवार, 1 नवंबर 2026 को। उस दिन दोपहर बाद से अष्टमी तिथि शुरू होकर 2 नवंबर दोपहर तक रहेगी, इसलिए सूर्यास्त के समय वाली अष्टमी 1 नवंबर को है और पूजा उसी शाम होगी।

अहोई अष्टमी का व्रत कैसे खोलते हैं?

शाम को अहोई माता की पूजा, कथा और आरती के बाद तारे दिखने पर करवे के जल से तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। कुछ परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है, जो देर रात निकलता है।

अहोई माता के चित्र में साही क्यों बनाई जाती है?

व्रत कथा के अनुसार साहूकार की पत्नी से अनजाने में साही (स्याहु) का बच्चा मर गया था; उसी की क्षमा के लिए अहोई माता के साथ साही और उसके बच्चों का चित्र बनाया जाता है।

अहोई माता की आरती किस धुन पर गाई जाती है?

यह “ॐ जय लक्ष्मी माता” की धुन पर गाई जाती है — टेक है “जय अहोई माता, तुमको निसदिन ध्यावत हर विष्णु विधाता”।

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