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दत्ताची आरती (Datta Aarti) — त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा, मराठी लिरिक्स, हिंदी-English अर्थ

अंतिम अपडेट: 5 मिनट पढ़ें लेखक: admin
Datta Aarti – त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा

Datta Aarti (दत्ताची आरती) “त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा” भगवान दत्तात्रेय की सबसे प्रसिद्ध मराठी आरती है, जिसकी रचना 16वीं सदी के संत एकनाथ ने की थी — अंतिम पंक्ति “एका जनार्दनीं” में उनकी छाप है (एकनाथ के गुरु जनार्दन स्वामी थे)। दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और महेश — तीनों का एक रूप और आदि गुरु माने जाते हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात के दत्त मंदिरों में गुरुवार और दत्त जयंती पर यह आरती गाई जाती है। नीचे संपूर्ण आरती, English transliteration और हर पद का हिंदी अर्थ दिया गया है।

Datta Aarti – त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा

Datta Aarti Lyrics in Marathi (Hindi Devanagari) — दत्ताची आरती

त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा।
त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा।
नेती नेती शब्द न ये अनुमाना।
सुरवर मुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना॥
जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता।
आरती ओवाळितां हरली भवचिंता॥ जय देव जय देव॥

सबाह्य अभ्यंतरी तू एक दत्त।
अभाग्यासी कैंची कळेल ही मात।
पराही परतली तेथें कैंचा हेत।
जन्ममरणाचाही पुरलासे अंत॥
जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता।
आरती ओवाळितां हरली भवचिंता॥ जय देव जय देव॥

दत्त येऊनियां उभा ठाकला।
भावें साष्टांगेंसी प्रणिपात केला।
प्रसन्न होऊनि आशीर्वाद दिधला।
जन्ममरणाचा फेरा चुकविला॥
जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता।
आरती ओवाळितां हरली भवचिंता॥ जय देव जय देव॥

दत्त दत्त ऐसें लागलें ध्यान।
हरपलें मन झालें उन्मन।
मी-तू-पणाची झाली बोळवण।
एका जनार्दनीं श्रीदत्तध्यान॥
जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता।
आरती ओवाळितां हरली भवचिंता॥ जय देव जय देव॥

Datta Aarti Lyrics in English

Trigunatmak Traimurti Datta Ha Jana,
Triguni Avatar Trailokya Rana,
Neti Neti Shabda Na Ye Anumana,
Survar Munijan Yogi Samadhi Na Ye Dhyana.
Jai Dev Jai Dev Jai Shri Gurudatta,
Aarti Ovalita Harli Bhavchinta. Jai Dev Jai Dev.

Sabahya Abhyantari Tu Ek Datta,
Abhagyasi Kainchi Kalel Hi Maat,
Parahi Paratli Tethe Kaincha Het,
Janma Maranachahi Puralase Ant.
Jai Dev Jai Dev Jai Shri Gurudatta,
Aarti Ovalita Harli Bhavchinta. Jai Dev Jai Dev.

Datta Yeuniya Ubha Thakla,
Bhave Sashtangesi Pranipat Kela,
Prasanna Houni Ashirvad Didhla,
Janma Maranacha Phera Chukavila.
Jai Dev Jai Dev Jai Shri Gurudatta,
Aarti Ovalita Harli Bhavchinta. Jai Dev Jai Dev.

Datta Datta Aise Lagle Dhyan,
Harple Man Jhale Unman,
Mee-Tu-Panachi Jhali Bolvan,
Eka Janardani Shri Datta Dhyan.
Jai Dev Jai Dev Jai Shri Gurudatta,
Aarti Ovalita Harli Bhavchinta. Jai Dev Jai Dev.

Datta Aarti का अर्थ

  1. पहला पद: जानो कि दत्त तीनों गुणों वाली त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) हैं — तीनों गुणों के अवतार और तीनों लोकों के राजा। वेद भी “नेति नेति” (यह नहीं, यह नहीं) कहकर रुक जाते हैं, शब्द उनका अनुमान नहीं कर पाते; देवता, मुनि और योगी समाधि में भी उनका ध्यान नहीं पकड़ पाते।
  2. टेक: हे श्री गुरुदत्त, आपकी जय हो — आपकी आरती उतारते ही संसार की चिंता मिट गई।
  3. दूसरा पद: भीतर-बाहर आप ही एक दत्त हैं; यह बात अभागे कैसे समझेंगे? जहाँ “परा” वाणी भी लौट आती है, वहाँ किसी हेतु की क्या बात — वहाँ जन्म-मरण का भी अंत हो जाता है।
  4. तीसरा पद: दत्त आकर सामने खड़े हो गए; मैंने भाव से साष्टांग प्रणाम किया; उन्होंने प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया और जन्म-मरण का चक्र छुड़ा दिया।
  5. चौथा पद: “दत्त दत्त” ऐसा ध्यान लग गया; मन खो गया और उन्मन (मन से परे) अवस्था हो गई; “मैं-तू” का भाव विदा हो गया — जनार्दन का शिष्य एका (एकनाथ) कहता है, यही श्री दत्त का ध्यान है।

भगवान दत्तात्रेय कौन हैं

दत्तात्रेय महर्षि अत्रि और माता अनसूया के पुत्र हैं। कथा के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अनसूया के पतिव्रत की परीक्षा ली और प्रसन्न होकर उनके पुत्र रूप में जन्म लिया — इसलिए दत्तात्रेय के तीन मुख और छह भुजाएँ दिखाई जाती हैं, साथ में गाय और चार कुत्ते (चार वेदों के प्रतीक)। उन्होंने पृथ्वी, जल, अग्नि जैसे 24 गुरुओं से सीख ली। श्रीपाद श्रीवल्लभ और नरसिंह सरस्वती उनके अवतार माने जाते हैं; गाणगापुर, नरसोबाची वाडी और गिरनार प्रमुख दत्त क्षेत्र हैं।

Datta Aarti की विधि

  1. गुरुवार सुबह या शाम दत्तात्रेय के चित्र पर पीले फूल, तुलसी, चंदन और अक्षत चढ़ाएँ।
  2. “श्री गुरुदेव दत्त” या “दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा” का जप करें।
  3. घी का दीपक जलाकर पहले सुखकर्ता दुःखहर्ता, फिर यह दत्त आरती गाएँ।
  4. गुरुचरित्र का पाठ करने वाले पाठ के अंत में यह आरती गाते हैं; प्रसाद में गुड़-चने या खीर बाँटें।

Datta Aarti के 7 नियम

  • आरती खड़े होकर, घी या कपूर के दीपक से करें और दीपक को घड़ी की दिशा में घुमाएँ।
  • पहले चरणों की ओर 4 बार, नाभि की ओर 2 बार, मुख की ओर 1 बार और फिर पूरे विग्रह की 7 बार आरती उतारें।
  • आरती से पहले भगवान को भोग लगाएँ, फिर आरती करें।
  • आरती के समय शंख, घंटी या ताली बजाएँ — मन एकाग्र रहता है।
  • आरती के बीच में उठें नहीं और बात न करें।
  • आरती के बाद दोनों हाथों से आरती लें और प्रसाद बाँटें।
  • उच्चारण साफ़ रखें; जल्दबाज़ी न करें, भाव से गाएँ।

दत्ताची आरती के लाभ

  • मान्यता है कि गुरु कृपा से मन की चिंता और भय दूर होते हैं।
  • आध्यात्मिक साधना और ध्यान में प्रगति होती है।
  • घर-परिवार पर आने वाले संकट टलते हैं।
  • फलश्रुति के अनुसार जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का मार्ग खुलता है।

सुखकर्ता दुःखहर्ता और जय जय त्र्यंबकराज जैसी मराठी आरतियाँ भी पढ़ें। अधिक जानकारी Wikipedia पर।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

दत्ताची आरती किसने लिखी?

16वीं सदी के संत एकनाथ ने। अंतिम पंक्ति “एका जनार्दनीं श्रीदत्तध्यान” में उनकी छाप है — “एका” एकनाथ हैं और “जनार्दन” उनके गुरु जनार्दन स्वामी।

दत्त जयंती 2026 कब है?

मार्गशीर्ष पूर्णिमा को — 2026 में बुधवार, 23 दिसंबर को।

“त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती” का क्या अर्थ है?

तीनों गुणों (सत्त्व, रज, तम) वाली त्रिमूर्ति — ब्रह्मा, विष्णु और महेश का एक संयुक्त रूप, यानी भगवान दत्तात्रेय।

दत्त आरती कब गाई जाती है?

हर गुरुवार, दत्त जयंती, गुरु पूर्णिमा और गुरुचरित्र पाठ के बाद।

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